मासूमों से दरिंदगी पर कोर्ट का सख्त फैसला: प्यारे मियां को 10 बार उम्रकैद, सहयोगी राबिया को 20 साल की सजा
भोपाल की एक स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने नाबालिग बच्चियों के साथ यौन शोषण के मामले में प्यारे मियां नाम के शख्स को 10 बार उम्रकैद की सजा सुनाई है. इनमें आठ सजाएं ऐसी हैं, जिनके तहत उसे अपनी बाकी जिंदगी जेल में बितानी होगी.
नाबालिग बच्चियों के यौन उत्पीड़न के मामले में दोषी पाए गए अब्दुल अय्यूब उर्फ प्यारे मियां को 10 उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। उसकी सहयोगी राबिया बी को 20 साल की सजा सुनाई गई है।
भोपाल। राजधानी भोपाल में नाबालिग बच्चियों के यौन शोषण के चर्चित मामले में अदालत ने बेहद सख्त फैसला सुनाया है। पॉक्सो विशेष न्यायाधीश कुमुदिनी पटेल की अदालत ने 78 वर्षीय प्यारे मियां को पांच बच्चियों के साथ दुष्कर्म का दोषी ठहराते हुए 10 बार आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही आरोपी पर 77 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। मामले में उसकी सहयोगी राबिया बी को भी दोषी करार देते हुए 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है।
अदालत ने अपने फैसले में अपराध को क्रूर और असहनीय बताते हुए कहा कि जिस उम्र में किसी बुजुर्ग से बच्चों की रक्षा और देखभाल की उम्मीद की जाती है, उसी उम्र में आरोपी मासूमों के लिए डर और असुरक्षा का कारण बन गया। कोर्ट ने माना कि उसके कृत्य ने पीड़ित बच्चियों के भविष्य के साथ-साथ समाज के भरोसे को भी गहरी चोट पहुंचाई है।
नौकरी और पार्टी का लालच देकर बनाता था निशाना
अभियोजन के अनुसार प्यारे मियां नाबालिग बच्चियों को पैसों और पार्टी का लालच देकर अपने जाल में फंसाता था। बच्चियों को करीब 10 हजार रुपये महीने की नौकरी दिलाने का झांसा दिया जाता था। इसके बाद उन्हें जन्मदिन या अन्य पार्टियों के बहाने बुलाया जाता था।
आरोप है कि इन पार्टियों में बच्चियों को शराब पिलाई जाती थी और फिर उनके साथ दुष्कर्म किया जाता था। यह सिलसिला अलग-अलग स्थानों पर भी जारी रहा। मामले की जांच में यह भी सामने आया कि शाहपुरा स्थित फ्लैट में लगाए गए हिडन कैमरों से यौन शोषण की रिकॉर्डिंग की जाती थी। बाद में इन वीडियो के जरिए पीड़िताओं को ब्लैकमेल किए जाने का आरोप है।
2020 में संदिग्ध हालत में मिली थीं पांच बच्चियां
मामला 11 जुलाई 2020 की रात सामने आया, जब पुलिस को पांच बच्चियां संदिग्ध हालत में मिली थीं। पुलिस की काउंसलिंग के दौरान बच्चियों ने प्यारे मियां से जुड़े गंभीर आरोप बताए। उन्होंने बताया कि उन्हें शाहपुरा स्थित फ्लैट में जन्मदिन मनाने के बहाने बुलाया गया था।
अभियोजन के मुताबिक वहां उन्हें शराब पिलाई गई और उनके साथ यौन अपराध किया गया। इसके बाद भी अलग-अलग जगहों पर उनका शोषण किए जाने की बात सामने आई। जांच आगे बढ़ने पर मामले की गंभीरता और बढ़ती गई।
2014 से शोषण करने का आरोप
अभियोजन ने अदालत को बताया कि प्यारे मियां वर्ष 2014 से ही बच्चियों का यौन शोषण कर रहा था। इस मामले से पहले भी उसे एक अन्य प्रकरण में आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है।
मामले में राबिया बी की भूमिका भी सामने आई। अभियोजन के अनुसार वह बच्चियों को प्यारे मियां के पास लेकर जाती थी। कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उसे भी दोषी माना और 20 वर्ष की जेल की सजा सुनाई।
एक पीड़िता ने डर के कारण जान दे दी
इस मामले की सबसे दर्दनाक घटनाओं में से एक यह रही कि एक पीड़िता ने डर के कारण कथित तौर पर जहर खाकर अपनी जान दे दी थी। अदालत ने इस घटना को भी गंभीरता से लिया। कोर्ट ने उसके माता-पिता को 10 लाख रुपये मुआवजा दिए जाने का आदेश दिया है।
इसके अलावा पीड़िताओं के पुनर्वास और उनके भविष्य को ध्यान में रखते हुए तीन पीड़िताओं को चार-चार लाख रुपये देने के निर्देश दिए गए हैं। अदालत ने पीड़ितों के हित और उनके पुनर्वास को भी फैसले का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया।
अभियोजन ने बताया ऐतिहासिक फैसला
लोक अभियोजक पीएन सिंह राजपूत के मुताबिक, देश में पहली बार किसी मामले में इस तरह 10 बार उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। अभियोजन ने अदालत के फैसले को महत्वपूर्ण और कड़ा संदेश देने वाला बताया है।
अदालत ने कहा कि बच्चों के साथ इस तरह का अपराध केवल एक व्यक्ति के खिलाफ अपराध नहीं है, बल्कि यह उनके भविष्य, मानसिक सुरक्षा और समाज के विश्वास पर गंभीर हमला है। अदालत की टिप्पणी से स्पष्ट है कि बच्चों के यौन शोषण जैसे मामलों में अपराध की गंभीरता को देखते हुए कठोर दंड की आवश्यकता है।
ठिकानों पर हुई थी बुलडोजर कार्रवाई
मामला सामने आने के बाद प्यारे मियां के ठिकानों पर प्रशासन की ओर से बुलडोजर कार्रवाई भी की गई थी। इस कार्रवाई के बाद यह मामला प्रदेशभर में चर्चा में आया था। पुलिस जांच में सामने आए आरोपों और पीड़ित बच्चियों के बयानों ने मामले को बेहद गंभीर बना दिया था।
अब विशेष पॉक्सो अदालत के फैसले के बाद आरोपी प्यारे मियां को 10 बार उम्रकैद और 77 लाख रुपये के जुर्माने का सामना करना होगा, जबकि उसकी सहयोगी राबिया बी को 20 साल जेल की सजा दी गई है।
कोर्ट के फैसले से पीड़ित परिवारों को न्याय की उम्मीद
मामले में अदालत का फैसला उन पीड़ित परिवारों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिन्होंने लंबे समय तक कानूनी प्रक्रिया का सामना किया। अदालत ने सजा के साथ पीड़िताओं के पुनर्वास और आर्थिक सहायता पर भी जोर दिया है।
प्यारे मियां पर लगे आरोपों में बच्चियों को लालच देकर बुलाना, शराब पिलाना, यौन शोषण करना और कथित तौर पर वीडियो रिकॉर्ड कर ब्लैकमेल करना शामिल रहा। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन ने इन आरोपों से जुड़े साक्ष्यों को अदालत के सामने रखा।
इस फैसले के साथ अदालत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि नाबालिगों के साथ यौन अपराध को किसी भी स्थिति में हल्के में नहीं लिया जा सकता। खासतौर पर ऐसे मामलों में, जहां आरोपी बच्चों के भरोसे का फायदा उठाकर अपराध करता है, अदालत ने कठोर दंड को जरूरी माना है।
भोपाल का यह मामला वर्ष 2020 में सामने आने के बाद से ही गंभीर चर्चा में रहा है। अब अदालत द्वारा सुनाई गई सजा ने इसे एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। प्यारे मियां को 10 बार उम्रकैद और 77 लाख रुपये का जुर्माना, जबकि राबिया बी को 20 साल की सजा सुनाई गई है। पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजे और पुनर्वास के निर्देश भी फैसले का अहम हिस्सा हैं।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस