मुख्यमंत्री निवास में जन्माष्टमी की धूम, नन्हें गोपाल को गोद में उठाकर CM ने फोड़ी मटकी
मुख्यमंत्री निवास में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव भक्ति और उल्लास से भर गया। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने नन्हे बाल गोपाल को गोद में लेकर मटकी फोड़ी और बच्चों को अपने हाथों से माखन-मिश्री खिलाई।
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निवास में धूमधाम से जन्माष्टमी का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि और आम नागरिक भी शामिल हुए.
भोपाल। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर मुख्यमंत्री निवास में गुरुवार रात भक्ति, आस्था और उल्लास का अनूठा संगम देखने को मिला। मुख्यमंत्री निवास में आयोजित जन्माष्टमी समारोह में कृष्ण भजनों की गूंज के बीच श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में सराबोर नजर आए। कार्यक्रम में महारास का आयोजन हुआ, वहीं राधा-कृष्ण की वेशभूषा में पहुंचे बच्चों ने अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से सभी का ध्यान आकर्षित किया।
जन्माष्टमी के अवसर पर आयोजित मटकी फोड़ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी उत्साह के साथ शामिल हुए। उन्होंने एक नन्हे बाल गोपाल को अपनी गोद में उठाया और उसके साथ मटकी फोड़ने की रस्म पूरी की। इस दौरान कार्यक्रम स्थल पर मौजूद लोगों ने जय श्रीकृष्ण के जयघोष के साथ मुख्यमंत्री और बाल गोपाल का उत्साह बढ़ाया। मटकी फोड़ने के बाद मुख्यमंत्री ने बच्चों को अपने हाथों से माखन-मिश्री खिलाई। मुख्यमंत्री का बच्चों के साथ यह आत्मीय अंदाज समारोह का खास आकर्षण रहा।
कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों के अलावा संत समाज, धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में आम लोग शामिल हुए। पूरे मुख्यमंत्री निवास परिसर में भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति से जुड़े गीतों और भजनों का वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं ने भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव को उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया।
जन्माष्टमी केवल त्योहार नहीं, कृष्ण के संदेश को समझने का अवसर
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जन्माष्टमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी केवल त्योहार मनाने का अवसर नहीं है, बल्कि भगवान कृष्ण के जीवन, उनके संघर्ष और उनके संदेश को समझने का भी महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण का जीवन मानव समाज को विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य और साहस के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान कृष्ण का जन्म कारागार में हुआ था। उनका बचपन भी अनेक कठिन परिस्थितियों के बीच बीता, लेकिन उन्होंने कभी परिस्थितियों के सामने हार नहीं मानी। उन्होंने हर चुनौती का सामना किया और कठिनाइयों के बीच भी समाधान का रास्ता निकाला।
उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण के जीवन से यह संदेश मिलता है कि मुश्किल समय से घबराने के बजाय धैर्य बनाए रखना चाहिए। परिस्थितियां चाहे कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों, व्यक्ति को रास्ता खोजते हुए आगे बढ़ते रहना चाहिए। कृष्ण का जीवन संघर्ष के बीच सकारात्मक सोच और कर्म का संदेश देता है।
कालिया मर्दन से गोवर्धन तक, हर प्रसंग में छिपा संदेश
मुख्यमंत्री ने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े विभिन्न प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके जीवन की प्रत्येक घटना अपने आप में एक संदेश देती है। कालिया मर्दन, गोवर्धन पर्वत उठाना और कंस का वध जैसे प्रसंग केवल धार्मिक कथाएं नहीं हैं, बल्कि इनमें समाज और मानव जीवन के लिए महत्वपूर्ण सीख भी छिपी हुई है।
उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण ने अन्याय और अत्याचार के खिलाफ खड़े होने का साहस दिखाया। उन्होंने समाज को यह संदेश दिया कि जब परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण हों, तब भी सत्य और न्याय के रास्ते पर आगे बढ़ना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने भगवान कृष्ण के जीवन में शिक्षा के महत्व का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण ने उज्जैन स्थित सांदीपनि आश्रम में शिक्षा प्राप्त की। इसी दौरान उनकी सुदामा से मित्रता हुई, जो आज भी मित्रता, समानता और आत्मीयता का उदाहरण मानी जाती है।
मध्यप्रदेश में कृष्ण से जुड़े स्थलों को विकसित करने की तैयारी
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े स्थानों को धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। राज्य में कृष्ण परंपरा से जुड़े कई ऐसे स्थल हैं, जिनका धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है। इन स्थानों को विकसित कर श्रद्धालुओं और पर्यटकों को प्रदेश की समृद्ध धार्मिक विरासत से परिचित कराया जाएगा।
उन्होंने उज्जैन के सांदीपनि आश्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान कृष्ण की शिक्षा से जुड़े स्थलों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके साथ ही जानापाव को भी प्रमुख तीर्थस्थल के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने जानापाव में महर्षि परशुराम से सुदर्शन चक्र प्राप्त किया था। इसके अलावा धार के पास अमझेरा और महिदपुर के पास नारायण जैसे स्थानों का भी भगवान कृष्ण के जीवन से संबंध बताया जाता है। सरकार इन सभी स्थलों के विकास के माध्यम से कृष्ण से जुड़ी परंपराओं और स्मृतियों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास कर रही है।
धार्मिक पर्यटन से बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
मुख्यमंत्री ने कहा कि धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों का विकास केवल श्रद्धालुओं की सुविधा तक सीमित नहीं है। इससे प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की धार्मिक विरासत बेहद समृद्ध है और देश-दुनिया के लोगों को इससे परिचित कराने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण से जुड़े स्थलों को एक धार्मिक पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित करने से प्रदेश की पहचान और मजबूत होगी। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी तथा युवाओं के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे।
नई पीढ़ी को त्योहारों और संस्कृति से जोड़ना जरूरी
मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल त्योहार के दिन अवकाश घोषित कर देना पर्याप्त नहीं है। जरूरी यह है कि नई पीढ़ी को अपने त्योहारों, परंपराओं और उनके पीछे छिपे जीवन मूल्यों की जानकारी हो। बच्चों को यह समझना चाहिए कि जन्माष्टमी क्यों मनाई जाती है और भगवान कृष्ण के जीवन से उन्हें क्या सीख मिलती है।
उन्होंने कहा कि इसी सोच के साथ सरकार बड़े स्तर पर धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों को बढ़ावा दे रही है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से बच्चों और युवाओं को भारतीय संस्कृति से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान कृष्ण के जीवन और उनके विभिन्न पक्षों पर अभी और शोध किए जाने की आवश्यकता है। उनके विचार, शिक्षा, राजनीति, कूटनीति और सामाजिक जीवन से जुड़ी घटनाएं आज भी प्रासंगिक हैं। कृष्ण के जीवन का अध्ययन वर्तमान पीढ़ी को अनेक चुनौतियों का सामना करने की प्रेरणा दे सकता है।
भारत अपनी संस्कृति और ताकत के साथ आगे बढ़ रहा
जन्माष्टमी समारोह के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने देश की वर्तमान स्थिति और भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका का भी उल्लेख किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की आर्थिक प्रगति का जिक्र करते हुए कहा कि देश तेजी से आगे बढ़ रहा है और दुनिया के सामने अपनी अलग पहचान बना रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति मानवता, शांति और विश्व बंधुत्व का संदेश देती है। आज दुनिया युद्ध और तनाव के दौर से गुजर रही है, ऐसे समय में भारत अपनी आर्थिक और सांस्कृतिक शक्ति के साथ आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत अपने हितों को ध्यान में रखते हुए वैश्विक मंच पर मजबूती से अपनी बात रख रहा है। यह ऐसा दौर है, जब देश अपनी संस्कृति, परंपराओं और विरासत को नए तरीके से दुनिया के सामने प्रस्तुत कर रहा है।
अयोध्या के बाद कृष्ण परंपरा को नए रूप में सामने लाने की जरूरत
मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर के निर्माण के बाद अब मथुरा से जुड़ी भगवान श्रीकृष्ण की परंपरा को भी नए स्वरूप में दुनिया के सामने लाने की दिशा में काम होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत केवल देश के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन कर्म, ज्ञान, नीति, मित्रता, साहस और धर्म का संदेश देता है। उनके विचारों को आज के समय में नई पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता है।
भक्ति और उत्साह से सराबोर रहा मुख्यमंत्री निवास
मुख्यमंत्री निवास में आयोजित जन्माष्टमी समारोह में पूरे समय भक्ति और उल्लास का माहौल बना रहा। कृष्ण भजनों, महारास और बच्चों की राधा-कृष्ण वेशभूषा ने समारोह को खास बना दिया। नन्हे बाल गोपाल को गोद में लेकर मुख्यमंत्री द्वारा मटकी फोड़ने और बच्चों को माखन-मिश्री खिलाने के दृश्य ने समारोह में मौजूद लोगों का मन मोह लिया।
कार्यक्रम के समापन तक मुख्यमंत्री निवास में भगवान श्रीकृष्ण के जयकारे गूंजते रहे। जन्माष्टमी का यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ भारतीय संस्कृति, परंपरा और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का संदेश भी देता नजर आया।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस