महिला कर्मचारी को घर बुलाने और आपत्तिजनक मांग के आरोपों से घिरे CMO पर गिरी गाज, रीवा में चाकघाट नगर परिषद अधिकारी निलंबित; जांच में शिकायत सही पाए जाने का दावा
महिला कर्मचारी से फोन पर अमर्यादित और अशोभनीय बातचीत करने वाले CMO पर गिरी गाज। कमिश्नर ने कलेक्टर की जांच के बाद चाकघाट के प्रभारी सीएमओ को सस्पेंड कर दिया है। महिला कर्मचारी ने CMO पर कई आरोप लगाए थे।
रीवा जिले के चाकघाट नगर परिषद के CMO शंखधर पांडेय पर महिला कंप्यूटर ऑपरेटर ने आपत्तिजनक डिमांड और नौकरी से हटाने का गंभीर आरोप लगाया है। कलेक्टर के निर्देश पर हुई जांच में शिकायत सही पाई गई, जिसके बाद निलंबन का प्रस्ताव कमिश्नर को भेज दिया गया है।
रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा जिले की चाकघाट नगर परिषद से एक महिला कर्मचारी की शिकायत के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। नगर परिषद के मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) शंखधर पांडेय पर एक महिला कंप्यूटर ऑपरेटर ने गंभीर और आपत्तिजनक मांग करने, मांग पूरी नहीं करने पर नौकरी से हटाने तथा उसके साथ अभद्र व्यवहार किए जाने के आरोप लगाए हैं। मामले में कलेक्टर के निर्देश पर हुई प्रारंभिक जांच में महिला की शिकायत को सही पाए जाने की बात सामने आई है। इसके बाद CMO के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई के लिए प्रस्ताव कमिश्नर कार्यालय भेजा गया है।
मामले में महिला कर्मचारी मंगलवार को रीवा कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी के पास पहुंची और अपनी शिकायत तथा कथित उत्पीड़न की पूरी जानकारी अधिकारियों के सामने रखी। शिकायत की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने तत्काल संबंधित एसडीएम को मामले की जांच के निर्देश दिए। प्रारंभिक जांच के बाद महिला द्वारा लगाए गए आरोपों को सही पाए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि CMO स्तर के अधिकारी के निलंबन का अधिकार कमिश्नर के पास होने के कारण अंतिम प्रशासनिक कार्रवाई कमिश्नर स्तर से की जानी है।
घर बुलाने और आपत्तिजनक मांग का आरोप
महिला कर्मचारी का आरोप है कि नगर परिषद में काम करने के दौरान CMO शंखधर पांडेय की ओर से उसे घर बुलाया गया और उसके सामने आपत्तिजनक मांग रखी गई। महिला का कहना है कि उसने इस मांग को स्वीकार नहीं किया। इसके बाद उसके साथ व्यवहार में बदलाव आया और उसे नौकरी से हटाने की धमकी दिए जाने लगी।
शिकायत में महिला ने आरोप लगाया है कि कथित मांग को अस्वीकार करने के बाद उसके खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई। महिला के अनुसार, उसे लगता है कि नौकरी से हटाने की कार्रवाई इसी विवाद से जुड़ी हुई थी। मामले में एक कथित ऑडियो का भी उल्लेख किया गया है, जिसे शिकायत के समर्थन में सामने रखा गया है। हालांकि ऑडियो में आवाज किसकी है और बातचीत किस संदर्भ में हुई थी, इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।
कंप्यूटर हटाने को लेकर विवाद का भी आरोप
महिला ने अपने आवेदन में 18 जून 2026 की एक घटना का भी उल्लेख किया है। उसका कहना है कि उस दिन कार्यालय में उसकी टेबल पर रखा कंप्यूटर नगर परिषद अध्यक्ष और CMO द्वारा उठाया जाने लगा। महिला ने इसका विरोध किया तो उसके साथ कथित तौर पर अभद्र व्यवहार और गाली-गलौज की गई तथा नौकरी से निकालने की धमकी दी गई।
महिला ने इस घटना की पुष्टि के लिए नगर परिषद कार्यालय में लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग की जांच कराने की मांग की है। उसका दावा है कि यदि उस दिन की सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित है तो पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
बैकडेट में पत्र जारी कर नौकरी से हटाने का आरोप
महिला के मुताबिक वह 15 मार्च 2018 से चाकघाट नगर परिषद में दैनिक वेतन भोगी कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में काम कर रही थी। उसने आरोप लगाया कि आपत्तिजनक मांग को ठुकराने के बाद उसके खिलाफ प्रतिशोधात्मक कार्रवाई की गई और बैकडेट में पत्र जारी कर उसे नौकरी से हटा दिया गया।
महिला का यह भी आरोप है कि 24 जून 2026 से उसकी ऑनलाइन अटेंडेंस आईडी बंद कर दी गई। इसके चलते वह नियमित रूप से अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं करा सकी। महिला ने पूरे मामले की जांच कराकर यह स्पष्ट करने की मांग की है कि उसे किस आधार पर हटाया गया और नौकरी समाप्त करने से संबंधित आदेश कब और किन परिस्थितियों में जारी किया गया।
छह महीने से वेतन नहीं मिलने का दावा
शिकायत केवल नौकरी से हटाने तक सीमित नहीं है। महिला ने अपने आवेदन में वेतन और भविष्य निधि से संबंधित गंभीर आरोप भी लगाए हैं। उसका दावा है कि उसे लगभग छह महीने से वेतन नहीं मिला है। इसके अलावा करीब ढाई साल से उसके हिस्से की EPF राशि भी खाते में जमा नहीं किए जाने का आरोप लगाया गया है।
महिला ने अधिकारियों से मांग की है कि उसके वेतन और EPF से संबंधित रिकॉर्ड की जांच कराई जाए। साथ ही यदि किसी स्तर पर राशि जमा करने में अनियमितता हुई है तो संबंधित अधिकारी और जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच की जाए।
2023 की नियुक्तियों को लेकर भी विवाद
शिकायत में वर्ष 2023 में हुई दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की नियुक्तियों का मामला भी उठाया गया है। महिला का आरोप है कि तत्कालीन CMO केएन सिंह के कार्यकाल में हुई नियुक्तियों से संबंधित जांच के दौरान उस पर दबाव बनाया गया।
महिला के मुताबिक उस पर तत्कालीन CMO के खिलाफ व्यक्तिगत और चरित्र संबंधी आरोप लगाकर अधिकारियों को शिकायत देने के लिए दबाव बनाया गया था। उसका कहना है कि जब उसने ऐसे आरोप लगाने से इनकार किया तो उसके और अधिकारियों के बीच विवाद बढ़ता चला गया।
हालांकि इन आरोपों की भी स्वतंत्र जांच होना बाकी है। संबंधित नियुक्तियों से जुड़े दस्तावेज, आदेश और उस समय की प्रशासनिक प्रक्रिया की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
पहले भी अधिकारियों से कर चुकी थी शिकायत
महिला का कहना है कि उसने मामले को लेकर पहले भी कई स्तरों पर शिकायत की थी। उसके अनुसार चाकघाट थाना प्रभारी, श्रम पदाधिकारी रीवा, कलेक्टर, नगरीय प्रशासन विभाग के संयुक्त संचालक और पुलिस अधीक्षक को लिखित आवेदन दिए जा चुके हैं।
इसके बावजूद जब उसे अपेक्षित राहत नहीं मिली तो उसने दोबारा कलेक्टर के सामने अपनी बात रखी। अब महिला ने नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के आयुक्त से पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
महिला ने अपनी नौकरी बहाल करने, रुका हुआ वेतन दिलाने, EPF की राशि जमा कराने तथा शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच कर दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
CMO के खिलाफ निलंबन प्रस्ताव भेजा गया
प्रशासनिक स्तर पर प्रारंभिक जांच के बाद CMO शंखधर पांडेय के खिलाफ निलंबन का प्रस्ताव कमिश्नर कार्यालय भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। चूंकि CMO रैंक के अधिकारी के निलंबन की कार्रवाई निर्धारित प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र के तहत कमिश्नर स्तर से होती है, इसलिए अब आगे की प्रक्रिया वहीं से तय होगी।
मामले में यह भी महत्वपूर्ण है कि प्रारंभिक जांच में शिकायत सही पाए जाने की बात सामने आई है, लेकिन इससे शिकायत में लगाए गए प्रत्येक आरोप का अंतिम रूप से प्रमाणित होना स्वतः स्थापित नहीं होता। कथित ऑडियो की आवाज की पुष्टि, सीसीटीवी फुटेज, नौकरी समाप्त करने संबंधी दस्तावेज, वेतन और EPF रिकॉर्ड तथा अन्य आरोपों की विस्तृत जांच के बाद ही पूरे मामले की अंतिम तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
फिलहाल चाकघाट नगर परिषद का यह मामला प्रशासनिक कार्रवाई के साथ-साथ महिला कर्मचारी की नौकरी, वेतन, EPF और कार्यस्थल पर उसके साथ हुए कथित व्यवहार से जुड़े कई सवाल खड़े कर रहा है। अब निगाह कमिश्नर स्तर की कार्रवाई और आगे होने वाली विस्तृत जांच पर है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस