राजधानी में जयस के प्रदर्शन के दौरान हंगामा: महिला कार्यकर्ता पर कांस्टेबल को थप्पड़ मारने का आरोप, टीआई के खिलाफ FIR की मांग को लेकर जुटे कार्यकर्ता

भोपाल में टीआई रतन सिंह परिहार के खिलाफ एट्रोसिटी एक्ट में एफआईआर की मांग को लेकर जयस का प्रदर्शन उग्र हो गया। सीएम हाउस की ओर बढ़ रहे कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रोका तो झूमाझटकी हुई। एक महिला कार्यकर्ता पर कांस्टेबल को थप्पड़ मारने का वीडियो सामने आया है।

राजधानी में जयस के प्रदर्शन के दौरान हंगामा: महिला कार्यकर्ता पर कांस्टेबल को थप्पड़ मारने का आरोप, टीआई के खिलाफ FIR की मांग को लेकर जुटे कार्यकर्ता

जोहार’ अभिवादन पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के विरोध में भोपाल में प्रदर्शन हुआ। इसी दौरान इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित वीडियो में एक महिला कार्यकर्ता ड्यूटी पर तैनात पुलिस आरक्षक को थप्पड़ मारती दिखी।

भोपाल। राजधानी भोपाल में थाना प्रभारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग को लेकर जय आदिवासी युवा शक्ति (जयस) का प्रदर्शन गुरुवार को उग्र हो गया। अंबेडकर मैदान में एकत्रित हुए जयस कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री निवास की ओर बढ़ने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने प्रकाश तरुण पुष्कर के सामने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोक दिया। इसके बाद प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों के बीच विवाद बढ़ गया। स्थिति उस समय और तनावपूर्ण हो गई, जब एक महिला कार्यकर्ता पर ड्यूटी पर तैनात कांस्टेबल को थप्पड़ मारने का आरोप लगा। प्रदर्शन के दौरान महिला पुलिस अधिकारियों और अन्य जवानों के साथ भी धक्का-मुक्की और झूमाझटकी की स्थिति बनी रही।

जयस कार्यकर्ता भोपाल के मिसरोद थाना प्रभारी रतन सिंह परिहार के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम यानी एट्रोसिटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज करने की मांग कर रहे थे। संगठन का कहना है कि आदिवासी छात्रों के साथ कथित अभद्रता और गाली-गलौज के मामले में संबंधित अधिकारी को निलंबित करना पर्याप्त कार्रवाई नहीं है। संगठन की मांग है कि मामले में कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाए और दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई हो।

मुख्यमंत्री निवास की ओर बढ़ने की कोशिश, बैरिकेडिंग पर टकराव

जयस के आह्वान पर बड़ी संख्या में कार्यकर्ता अंबेडकर मैदान में एकत्रित हुए। प्रदर्शनकारियों का उद्देश्य मुख्यमंत्री निवास तक पहुंचकर अपनी मांगों को सरकार के सामने रखना था। हालांकि, पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए रास्ते में बैरिकेडिंग कर दी और प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोक दिया।

पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद प्रदर्शनकारी और जवान आमने-सामने आ गए। पहले दोनों पक्षों के बीच बहस हुई, लेकिन कुछ देर बाद स्थिति धक्का-मुक्की तक पहुंच गई। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों को बैरिकेडिंग पार करने से रोकने का प्रयास किया। इसी दौरान एक महिला कार्यकर्ता पर कांस्टेबल को थप्पड़ मारने का आरोप लगा।

घटनाक्रम के बीच महिला पुलिस अधिकारियों और अन्य पुलिसकर्मियों के साथ भी झूमाझटकी होने की बात सामने आई। प्रदर्शन स्थल पर काफी देर तक तनाव का माहौल बना रहा। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने और प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने का प्रयास किया।

निलंबन से संतुष्ट नहीं जयस, एफआईआर दर्ज करने की मांग

जयस कार्यकर्ताओं का कहना है कि मिसरोद थाना प्रभारी के खिलाफ की गई निलंबन की कार्रवाई उनकी मांगों के अनुरूप नहीं है। संगठन चाहता है कि आदिवासी छात्रों के साथ कथित अभद्रता के मामले में एट्रोसिटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की जाए, ताकि मामले की विधिवत जांच हो सके और कानूनी कार्रवाई आगे बढ़े।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि विभागीय जांच और निलंबन की प्रक्रिया अपनी जगह है, लेकिन यदि किसी अधिकारी पर कानून के उल्लंघन का आरोप है, तो उसकी जांच कानूनी प्रक्रिया के तहत भी होनी चाहिए। संगठन के एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि निलंबन स्थायी कार्रवाई नहीं है। अधिकारी को कुछ समय बाद बहाल किया जा सकता है, इसलिए मामले में एफआईआर दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जानी चाहिए।

कार्यकर्ताओं ने सरकार से यह भी सवाल किया कि जब गृह विभाग मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पास है, तो संबंधित मामले में निलंबन के बाद आगे की कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है। जयस का कहना है कि आदिवासी छात्रों के सम्मान और अधिकारों से जुड़े मामलों में सरकार को गंभीरता दिखानी चाहिए।

13 अक्टूबर को ‘जय जोहार’ बोलने को लेकर शुरू हुआ विवाद

इस पूरे मामले की शुरुआत 13 अक्टूबर को हुई घटना से हुई थी। आरोप है कि भोपाल के मिसरोद थाना प्रभारी रतन सिंह परिहार ने आदिवासी छात्रों के प्रदर्शन के दौरान ‘जय जोहार’ बोलने को लेकर अमर्यादित टिप्पणी की और गाली-गलौज की। घटना का वीडियो सामने आने के बाद आदिवासी संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई थी।

आदिवासी संगठनों का कहना है कि ‘जय जोहार’ आदिवासी समाज की अभिवादन परंपरा और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा अभिवादन है। ऐसे में इसे लेकर कथित अपमानजनक टिप्पणी किए जाने से समाज में नाराजगी पैदा हुई। मामला सामने आने के बाद विभिन्न संगठनों ने प्रशासन से शिकायत की और संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

घटना के बाद मामला लगातार चर्चा में रहा। आदिवासी संगठनों ने इसे केवल एक अधिकारी के व्यवहार का मामला नहीं, बल्कि समाज के सम्मान और अधिकारों से जुड़ा विषय बताया। संगठनों की मांग थी कि शिकायत की निष्पक्ष जांच हो और आरोपों की पुष्टि होने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाए।

14 अक्टूबर को टीआई निलंबित, विभागीय जांच के आदेश

मामले के तूल पकड़ने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों से चर्चा की थी। इसके बाद 14 अक्टूबर को थाना प्रभारी रतन सिंह परिहार को निलंबित कर दिया गया और उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए गए।

निलंबन की कार्रवाई के बावजूद जयस कार्यकर्ताओं की नाराजगी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई। संगठन का कहना है कि विभागीय जांच से अलग आपराधिक शिकायत पर भी कानून के अनुसार निर्णय लिया जाना चाहिए। इसी मांग को लेकर कार्यकर्ता राजधानी में प्रदर्शन करने पहुंचे।

जयस का तर्क है कि केवल विभागीय कार्रवाई से उनकी मुख्य मांग पूरी नहीं होती। संगठन चाहता है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की विधिवत जांच हो और कानून के तहत एफआईआर दर्ज करने की मांग पर निर्णय लिया जाए। इसी मुद्दे को लेकर संगठन ने सरकार और पुलिस प्रशासन पर दबाव बनाने के लिए प्रदर्शन किया।

एसीपी बोले—जांच के निष्कर्ष के आधार पर होगी आगे की कार्रवाई

प्रदर्शन और विवाद के संबंध में एसीपी शैलेन्द्र सिंह चौहान ने बताया कि आदिवासी छात्रों के प्रदर्शन के दौरान एक पुलिस अधिकारी की ओर से अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किए जाने का मामला सामने आया था। शिकायत संज्ञान में आने के बाद संबंधित अधिकारी को निलंबित किया गया और प्राथमिक जांच के आदेश दिए गए थे।

एसीपी के अनुसार, मामले को लेकर अलग-अलग संगठनों के प्रतिनिधियों ने पुलिस अधिकारियों से मुलाकात की थी। उन्हें आश्वासन दिया गया था कि जांच पूरी होने के बाद सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा प्रदर्शन के दौरान हुई झड़प से संबंधित तथ्यों को भी संज्ञान में लिया जाएगा। पुलिस की प्राथमिकता फिलहाल प्रदर्शन को समाप्त कराना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना है। प्रदर्शन के दौरान किसकी क्या भूमिका रही, इस संबंध में उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

आदिवासी संगठनों और पुलिस के बीच बढ़ा तनाव

इस घटनाक्रम ने एक बार फिर आदिवासी संगठनों और पुलिस प्रशासन के बीच संवाद तथा जवाबदेही के मुद्दे को सामने ला दिया है। जयस कार्यकर्ताओं का कहना है कि आदिवासी छात्रों के साथ कथित अभद्रता के मामले में निष्पक्ष जांच और कानूनी कार्रवाई जरूरी है। वहीं, पुलिस प्रशासन ने जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे कदम उठाने की बात कही है।

प्रदर्शन के दौरान महिला कार्यकर्ता पर कांस्टेबल को थप्पड़ मारने का आरोप भी अब घटनाक्रम का अहम हिस्सा बन गया है। हालांकि, इस आरोप और झड़प से जुड़े तथ्यों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। ऐसे में पूरे मामले में निष्पक्ष जांच के साथ दोनों घटनाक्रमों—आदिवासी छात्रों के साथ कथित अभद्रता और प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों के साथ हुई झड़प—को अलग-अलग तथ्यों के आधार पर देखना महत्वपूर्ण होगा।

अब आगे क्या?

फिलहाल जयस की प्रमुख मांग थाना प्रभारी के खिलाफ एट्रोसिटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज करने की है। संगठन निलंबन और विभागीय जांच को पर्याप्त नहीं मान रहा है। दूसरी ओर, पुलिस अधिकारियों ने प्राथमिक जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई का भरोसा दिया है।

अब निगाहें जांच की प्रगति और पुलिस प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच के बाद एफआईआर दर्ज करने की मांग पर क्या निर्णय लिया जाता है और प्रदर्शन के दौरान हुई झड़प के संबंध में क्या कार्रवाई होती है। फिलहाल, मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच के तथ्यों और संबंधित अधिकारियों के निर्णय के बाद ही सामने आएगा।