UPI पर ₹10,000 तक के लेन-देन को MDR से मिले छूट, छोटे व्यापारियों की मासिक सीमा ₹10 लाख हो- CAIT राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं टेक्सटाइल-गारमेंट समिति के राष्ट्रीय चेयरमैन चम्पालाल बोथरा

CAIT टेक्सटाइल एवं गारमेंट समिति के राष्ट्रीय चेयरमैन चम्पालाल बोथरा ने सरकार, RBI और NPCI से व्यापारी हित में MDR व्यवस्था में सुधार की मांग की; बोले- अतिरिक्त लागत से डिजिटल भुगतान से नकदी की ओर बदलाव का खतरा

UPI पर ₹10,000 तक के लेन-देन को MDR से मिले छूट, छोटे व्यापारियों की मासिक सीमा ₹10 लाख हो- CAIT राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं टेक्सटाइल-गारमेंट समिति के राष्ट्रीय चेयरमैन चम्पालाल बोथरा

UPI पर 0.4% MDR से छोटे व्यापारियों पर बढ़ सकता है लागत दबाव

CAIT ने ₹10,000 तक के लेन-देन को MDR से मुक्त करने की मांग*

छोटे व्यापारियों की मासिक MDR-मुक्त सीमा ₹1 लाख से बढ़ाकर ₹10 लाख करने का आग्रह; डिजिटल भुगतान से नकदी की ओर संभावित बदलाव पर CAIT टेक्सटाइल एवं गारमेंट कमेटी ने सरकार का ध्यान आकर्षित किया

सूरत, कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं CAIT टेक्सटाइल एवं गारमेंट समिति के राष्ट्रीय चेयरमैन श्री चम्पालाल बोथरा ने 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाली नई UPI Merchant Discount Rate (MDR) व्यवस्था के संबंध में केंद्र सरकार, RBI एवं NPCI से छोटे व्यापारियों, MSMEs तथा कम-मार्जिन वाले व्यवसायों के हित में व्यावहारिक सुधार करने का आग्रह किया है।

श्री बोथरा ने स्पष्ट किया कि CAIT टेक्सटाइल एवं गारमेंट समिति डिजिटल इंडिया और UPI व्यवस्था का विरोध नहीं करती, बल्कि इसे अधिक मजबूत, टिकाऊ, व्यापारी-अनुकूल और व्यापक बनाने के पक्ष में है। चिंता इस बात को लेकर है कि नई MDR व्यवस्था का अतिरिक्त लागत प्रभाव छोटे व्यापारियों और कम-मार्जिन वाले व्यवसायों के डिजिटल भुगतान व्यवहार को प्रभावित न करे।
*डिजिटल भुगतान से नकदी की ओर संभावित बदलाव पर CAIT की गंभीर चिंता*
चम्पालाल बोथरा ने कहा—
“MDR स्वयं सरकार का राजस्व या कर नहीं है। लेकिन यदि अतिरिक्त भुगतान लागत के कारण कुछ व्यापारी डिजिटल भुगतान के स्थान पर नकद लेन-देन को प्राथमिकता देने लगते हैं और बिना लेखे-जोखे वाले कारोबार की प्रवृत्ति बढ़ती है, तो इसका प्रभाव आर्थिक पारदर्शिता और GST अनुपालन पर अप्रत्यक्ष रूप से पड़ सकता है। इसलिए नीति बनाते समय केवल MDR की लागत को नहीं, बल्कि डिजिटल भुगतान से मिलने वाली पारदर्शिता और औपचारिक अर्थव्यवस्था पर उसके व्यापक प्रभाव को भी ध्यान में रखना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में UPI ने छोटे व्यापारियों को डिजिटल भुगतान व्यवस्था से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। डिजिटल भुगतान से लेन-देन का रिकॉर्ड उपलब्ध होता है, जिससे कारोबार की बैंकिंग हिस्ट्री, औपचारिक वित्तीय पहुंच और कर अनुपालन को बढ़ावा मिल सकता है।
उनके अनुसार, यदि किसी कारण से डिजिटल भुगतान की जगह नकद और अनरिकॉर्डेड (बिना लेखे-जोखे वाले) लेन-देन बढ़ते हैं, तो इसका दीर्घकालीन असर औपचारिक अर्थव्यवस्था की पारदर्शिता पर पड़ सकता है और GST अनुपालन तथा कर-संग्रह पर अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

*कम-मार्जिन वाले व्यापारियों के लिए MDR अतिरिक्त लागत का विषय*
श्री बोथरा ने कहा कि टेक्सटाइल, गारमेंट, किराना, फुटवियर और अनेक छोटे विनिर्माण व्यवसायों में प्रतिस्पर्धा के कारण मार्जिन सीमित रहता है। ऐसे में डिजिटल भुगतान पर लगने वाली अतिरिक्त लागत को भी व्यापारिक लागत के रूप में देखना होगा।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देना, व्यापार को औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ना और छोटे व्यवसायों को बैंकिंग एवं वित्तीय व्यवस्था से जोड़ना है। इसलिए MDR व्यवस्था में भी ऐसा संतुलन होना चाहिए जिससे डिजिटल भुगतान और व्यापारी हित दोनों सुरक्षित रहें।
*CAIT टेक्सटाइल एवं गारमेंट कमेटी की छह प्रमुख मांगें*
1. ₹10,000 तक के UPI व्यापारी लेन-देन को MDR से मुक्त किया जाए
वर्तमान ₹2,000 तक के MDR-मुक्त लेन-देन की सीमा को बढ़ाकर ₹10,000 प्रति P2M लेन-देन किया जाए।
1. छोटे व्यापारियों की मासिक MDR-मुक्त सीमा ₹10 लाख की जाए
छोटे व्यापारियों के लिए वर्तमान ₹1 लाख मासिक सीमा को बढ़ाकर ₹10 लाख किया जाए, ताकि अधिक संख्या में छोटे व्यापारी डिजिटल भुगतान व्यवस्था में बिना अतिरिक्त MDR बोझ के जुड़े रह सकें।
1. कम-मार्जिन वाले क्षेत्रों के लिए विशेष समीक्षा की जाए टेक्सटाइल, गारमेंट, किराना, फुटवियर तथा छोटे विनिर्माण क्षेत्रों पर MDR के वास्तविक लागत प्रभाव का अलग से अध्ययन किया जाए और आवश्यकता होने पर उपयुक्त राहत व्यवस्था बनाई जाए।
1. नई व्यवस्था के प्रभाव का छह माह तक स्वतंत्र अध्ययन कराया जाए
नई व्यवस्था लागू होने के बाद कम से कम छह माह तक डिजिटल भुगतान, नकद निकासी, बैंक जमा, व्यापारी व्यवहार तथा डिजिटल से नकद भुगतान की संभावित शिफ्ट का स्वतंत्र एवं तथ्याधारित अध्ययन कराया जाए।
1. MDR व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए
MDR से प्राप्त शुल्क का भुगतान प्रणाली के विभिन्न प्रतिभागियों—बैंकों, PSPs तथा अन्य संबंधित संस्थाओं—के बीच किस प्रकार वितरित होता है, इसकी पर्याप्त पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
1. MDR का प्रत्यक्ष बोझ उपभोक्ताओं पर न डाला जाए
MDR का भार ग्राहक से अलग से वसूलने की अनुमति नहीं होनी चाहिए। डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करने के लिए उपभोक्ता का विश्वास बनाए रखना आवश्यक है।
CAIT टेक्सटाइल एवं गारमेंट कमेटी का आग्रह: डिजिटल अर्थव्यवस्था को नकदी की ओर लौटने से रोका जाए
श्री बोथरा ने कहा 
“UPI भारत की Digital Public Infrastructure का महत्वपूर्ण स्तंभ है। हमारा उद्देश्य UPI व्यवस्था का विरोध करना नहीं, बल्कि इसे लंबे समय तक टिकाऊ और व्यापारी-अनुकूल बनाना है। देश ने पिछले वर्षों में नकद से डिजिटल भुगतान की दिशा में जो महत्वपूर्ण बदलाव किया है, उसे किसी भी स्थिति में फिर से डिजिटल से नकद की ओर नहीं जाना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि ₹10,000 तक के छोटे UPI व्यापारी लेन-देन को MDR से मुक्त करने तथा छोटे व्यापारियों की मासिक सीमा ₹10 लाख करने पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए। इससे छोटे व्यापारियों की लागत कम रखने, डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करने और आर्थिक लेन-देन में पारदर्शिता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
श्री बोथरा ने सरकार, RBI एवं NPCI से आग्रह किया कि व्यापारिक संगठनों के साथ व्यापक संवाद कर नई MDR व्यवस्था के वास्तविक धरातलीय प्रभाव की समीक्षा की जाए तथा आवश्यकता के अनुसार समयबद्ध सुधार किए जाएं।