साइबर थाना पुलिस का बड़ा खुलासा: फर्जी बैंक खाते और सिम के जरिए देशभर में ऑनलाइन ठगी करने वाला गिरोह बेनकाब, बिहार पुलिस बनकर लोगों से ऐंठते थे लाखों रुपये
जालौन साइबर थाना पुलिस ने फर्जी बैंक खाते और सिम कार्ड के जरिए ऑनलाइन ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। जांच में 12 सिम नंबरों पर 24 साइबर शिकायतें मिली हैं। आरोपी बिहार पुलिस बनकर लोगों को डराकर ऑनलाइन रुपये जमा कराते थे। पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है।
इकलाशपुरा चौराहे से आरोपी गिरफ्तार
दो मोबाइल और सिम कार्ड बरामद
भोले-भाले लोगों के नाम पर खुलवाते थे बैंक खाते
12 सिम नंबरों पर मिलीं 24 साइबर शिकायतें
उरई। जनपद जालौन की साइबर क्राइम थाना पुलिस ने ऑनलाइन ठगी करने वाले एक सक्रिय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए उसके एक सदस्य को गिरफ्तार कर बड़ी सफलता हासिल की है। यह गिरोह भोले-भाले लोगों को झांसे में लेकर उनके नाम पर बैंक खाते और मोबाइल सिम कार्ड खुलवाता था तथा उन्हीं खातों और सिम का इस्तेमाल देश के विभिन्न राज्यों में साइबर ठगी की वारदातों को अंजाम देने के लिए करता था। पुलिस की जांच में सामने आया कि आरोपी बिहार पुलिस के मुकदमों की कॉपी डाउनलोड कर खुद को पुलिस अधिकारी बताकर लोगों को फोन करते थे और केस में कार्रवाई या समझौते का डर दिखाकर ऑनलाइन रुपये जमा करा लेते थे।
साइबर थाना पुलिस की इस कार्रवाई से ऐसे संगठित साइबर अपराधियों के नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जो लंबे समय से अलग-अलग राज्यों में लोगों को निशाना बना रहे थे। पुलिस अब इस गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुट गई है और उनके आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है।
इकलाशपुरा चौराहे से हुई गिरफ्तारी
साइबर क्राइम थाना जालौन की टीम ने गुप्त सूचना और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई करते हुए गिरोह के सदस्य दीपेन्द्र कुमार, निवासी मानपुर, थाना सिरसाकलार को उरई के इकलाशपुरा चौराहे के पास से गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के दौरान उसके पास से दो मोबाइल फोन तथा घटना में प्रयुक्त सिम कार्ड बरामद किए गए। पुलिस ने बरामद मोबाइल और सिम कार्ड को जब्त कर उनकी फॉरेंसिक और डिजिटल जांच शुरू कर दी है।
भोले-भाले लोगों के नाम पर खुलवाते थे खाते और सिम
पूछताछ में पुलिस को पता चला कि गिरोह का तरीका बेहद शातिर था। आरोपी पहले ग्रामीण और कम पढ़े-लिखे लोगों को किसी न किसी बहाने अपने विश्वास में लेते थे। इसके बाद उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाए जाते थे और मोबाइल सिम कार्ड भी जारी कराए जाते थे। कई बार खाताधारकों को यह तक नहीं पता होता था कि उनके नाम पर खुला बैंक खाता और सिम साइबर अपराध में इस्तेमाल किया जा रहा है।
गिरोह इन्हीं खातों के जरिए ठगी की रकम मंगवाता था और बाद में पैसे निकालकर विभिन्न माध्यमों से अपने नेटवर्क तक पहुंचा देता था। इससे असली अपराधियों तक पहुंचना कठिन हो जाता था।
NCRP पोर्टल की जांच में मिले कई राज्यों के मामले
पुलिस ने जब बरामद मोबाइल और सिम नंबरों की जांच नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर की तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जांच में गिरोह से जुड़े 12 मोबाइल सिम नंबरों पर 24 ऑनलाइन शिकायतें दर्ज मिलीं। इनमें बिहार सहित कई अन्य राज्यों के पीड़ित शामिल हैं।
इससे स्पष्ट हुआ कि यह कोई स्थानीय गिरोह नहीं बल्कि अंतरराज्यीय स्तर पर सक्रिय साइबर अपराधियों का नेटवर्क है, जो अलग-अलग राज्यों के लोगों को निशाना बनाकर ऑनलाइन ठगी करता था।
बिहार पुलिस बनकर लोगों को करते थे कॉल
पूछताछ के दौरान आरोपी ने पुलिस को बताया कि गिरोह बिहार पुलिस से संबंधित मुकदमों की प्रतियां इंटरनेट से डाउनलोड करता था। इसके बाद उन्हीं दस्तावेजों का हवाला देकर लोगों को फोन किया जाता था। आरोपी खुद को पुलिस अधिकारी बताकर कहते थे कि उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज है या किसी केस में उनका नाम आया है।
इसके बाद डर और भ्रम का माहौल बनाकर लोगों से कहा जाता था कि यदि वे मामला निपटाना चाहते हैं तो निर्धारित बैंक खाते में तुरंत ऑनलाइन रकम जमा करें। कई लोग पुलिस कार्रवाई के भय से बिना सत्यापन किए पैसे भेज देते थे और ठगी का शिकार हो जाते थे।
तकनीकी जांच से खुली परतें
साइबर थाना पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, बैंक खातों के लेनदेन और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर गिरोह तक पहुंच बनाई। मोबाइल फोन और सिम कार्ड की जांच से कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि ठगी की रकम किन-किन खातों में ट्रांसफर की गई और गिरोह का मास्टरमाइंड कौन है।
बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की डिजिटल फॉरेंसिक जांच के बाद और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
अन्य आरोपियों की तलाश जारी
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ के आधार पर गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान की जा रही है। संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। सीमावर्ती जिलों और अन्य राज्यों की पुलिस से भी संपर्क कर आरोपियों के आपराधिक इतिहास की जानकारी जुटाई जा रही है।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि गिरोह अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बना चुका है और ठगी की कुल रकम कितनी है।
लोगों से सतर्क रहने की अपील
साइबर थाना पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि यदि कोई व्यक्ति खुद को पुलिस अधिकारी, सीबीआई, ईडी, कोर्ट या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर फोन पर पैसे जमा करने का दबाव बनाए तो उसकी बातों में न आएं। किसी भी प्रकार का भुगतान करने से पहले संबंधित विभाग से सत्यापन अवश्य करें।
यदि कोई संदिग्ध कॉल या ऑनलाइन ठगी का प्रयास होता है तो तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत करें या राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराएं। समय रहते शिकायत करने से ठगी गई राशि को वापस दिलाने की संभावना बढ़ जाती है।
साइबर अपराध के खिलाफ लगातार अभियान
जालौन साइबर थाना लगातार साइबर अपराधियों के खिलाफ अभियान चला रहा है। डिजिटल तकनीक और आधुनिक जांच के जरिए ऐसे गिरोहों की पहचान कर उन्हें कानून के शिकंजे में लाने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि साइबर अपराधियों के खिलाफ भविष्य में भी इसी तरह सख्त कार्रवाई जारी रहेगी, ताकि आम नागरिक सुरक्षित रह सकें और ऑनलाइन ठगी जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस