दतिया उप चुनाव रोमांचक मोड पर, कांग्रेस भाजपा की सीधी टक्कर,दोनों ही पार्टियां को भितरघात से नुकसान की है आशंका, दो ब्राह्मण नेताओं की नाराजगी से सावधान
दतिया विधानसभा उपचुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला माना जा रहा है। दोनों दलों में टिकट वितरण के बाद असंतोष और संभावित भितरघात की चर्चाएं चुनावी माहौल को और दिलचस्प बना रही हैं। भाजपा ने आशुतोष तिवारी और कांग्रेस ने घनश्याम सिंह को मैदान में उतारा है। राजनीतिक विश्लेषण में ब्राह्मण, कुशवाहा, अनुसूचित जाति और अन्य सामाजिक समीकरणों को चुनाव का निर्णायक कारक माना जा रहा है। साथ ही, नाराज नेताओं की भूमिका और उनके समर्थकों का रुख भी परिणामों को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, इन सभी दावों और राजनीतिक आकलनों की पुष्टि चुनाव परिणाम आने के बाद ही हो सकेगी।
दतिया उपचुनाव रोमांचक मोड़ पर: भाजपा-कांग्रेस में सीधी टक्कर, भितरघात और नाराज नेताओं पर टिकी निगाहें
भोपाल । दतिया की सीट से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती थे जिन्होंने 2023 में गृहमंत्री रहे नरोत्तम मिश्रा लगभग 7500 मतो से शिकस्त दी थी लेकिन एक मामले में उनकी तीन वर्ष की सजा होने के कारण उनकी विधायकी चली गई जिससे यह सीट रिक्त हुई । दतिया उप चुनाव में सभी दलों ने अपने अपने उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है। भारी भरकम जुलूस के साथ नामांकन दाखिल भी कर दिए गए कांग्रेस और भाजपा हाईकमान ने नामांकन के एक दिन पूर्व नाराज नेताओं से मुलाकात कर उनको मनाने की कोशिश की अब वो कितना हाईकमान का कहना या आदेश मानते है वह उनके स्वभाव पर निर्भर है । हालांकि जो चुनाव की आस लगाए बैठे थे उनको हाईकमान ने चुनाव का प्रबंधन का जिम्मा देकर सक्रियता बढ़ाने की कोशिश की मंच से जिस तरह अपने आप को लाचार महसूस कर रहे नरोत्तम मिश्रा रो रो कर भाजपा प्रत्यासी आशुतोष तिवारी के लिए वोट मांगने की बात कह रहे है उससे यह आभास होता है कि अंतरात्मा से तो वोट नहीं मांगेगे यदि जोर जबरदस्ती से उनकी वोट मांगने के लिये घर से निकलना पड़ा तो दुखी आत्मा कितना असर करेगी यह तो मतगणना के बाद ही मालूम होगा यही कुछ स्थिति कांग्रेस की है भाजपा से कांग्रेस में आए महीनों से चुनाव की तैयारी में जुटे अवधेश नायक को भी हाईकमान ने मौका नहीं दिया यहां से पूर्व विधायक घनश्याम सिंह को मैदान में उतार दिया । इससे नाराज अवधेश नायक फिरसे भाजपा में जाने की फिराक में है सूत्र बताते है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव ने उनसे फोन पर बात भी की है । हालांकि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी भी अवधेश नायक से मिलने गए थे फिलहाल अवधेश नायक समाचार लिखे जाने तक कांग्रेस में ही है । वहीं लोगों में चर्चा है कि नरोत्तम मिश्रा ने ही दामोदर यादव को चुनाव में उतारने का तानाबाना बुना था क्योंकि उनको उम्मीद थी कि टिकिट भाजपा उन्हीं को देगी और दामोदर अनुसूचित जाति और मुस्लिम का कुछ वोट काटने में मददगार साबित होंगे । लेकिन ऐन वक्त पर आशुतोष तिवारी को उतारकर भाजपा ने नरोत्तम मिश्रा के सपने को चकनाचूर कर दिया इसके बाद दतिया में भारी उपद्रव भी देखने को मिला उनके समर्थकों में हाईवे जाम कर पुलिस पर पथराव किया कई पदाधिकारियों ने सामूहिक इस्तीफे भी दिये लेकिन पार्टी हाईकमान ने कड़ाई से उनकी सारी मांगे खारिज करते हुए आदेशित किया कि जो प्रत्याशी भाजपा हाईकमान ने दतिया उप चुनाव में दिया है उसको जिताने की जिम्मेदारी आपकी है । अब दतिया उप चुनाव में भाजपा और कांग्रेस का सीधा मुकाबला हो गया है इस सीट पर सबसे अधिक ब्राह्मण मतदाता है इसके बाद कुशवाहा है जो निर्णायक भूमिका में होते है । ब्राह्मण नरोत्तम के साथ तो एकजुट दिख रहा था उनको टिकट न मिलने के कारण बिखराव साफ दिख रहा है कुशवाहा समाज पूरी ताकत के साथ घनश्याम सिंह का चुनाव प्रचार कर रहा है वैश्य,सिंधी,कायस्थ,भाजपा के साथ अडिग है वहीं क्षत्रिय,लोधी,मुस्लिम कांग्रेस की तरफ दिख रहा है । भाजपा में अंतर्कलह नुकसान पहुंचा सकती है वहीं कांग्रेस में अवधेश नायक यदि मान जाते है तो ब्राह्मणों का वोट प्रतिशत कांग्रेस का अधिकवों जाएगा नहीं मानते है तो यह भाजपा को अधिक अभी भी मिलेगा अवधेश नायक स्थानीय ब्राह्मणों के बड़े नेता है बाकी नरोत्तम से लेकर आशुतोष तिवारी कोई भी स्थानीय नहीं है । हालांकि घनश्याम सिंह की भी छवि अच्छी नहीं है वो दो बार विधायक दतिया से रहे विकास के नाम पर वहां कुछ भी नहीं किया लेकिन राजेंद्र भारती जो पिछड़ी जाति के वोटरों में अच्छी खासी पकड़ रखते है वो उनके कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे है इसके अलावा फूल सिंह बरैया जो अनुसूचित जाति के बड़े नेता माने जाते है उनकी पकड़ अहिरवार,जाटव वोट में मजबूत पकड़ है । इसके बावजूद नाराजगी मतदाताओं की है लेकिन विकल्प वह किसको चुनते है ये समय बताएगा । आजाद समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी दामोदर यादव इससे पूर्व सेवढ़ा सीट से चुनाव मैदान में थे उनकी लगभग चालीस हजार मत प्राप्त हुए थे अब वह इसी पार्टी से दतिया से है 2023 में आजाद समाजवादी पार्टी को 456 मत प्राप्त हुए थे उस लिहाज से कोई ज्यादा खास करने में सक्षम नहीं है हां यदि समाजवादी पार्टी कांग्रेस का समर्थन न करती तो यादव वोट काटने में वह सफल हो सकते थे यह समाजवादी पार्टी का वोट बैंक है क्योंकि 1998 में यह सीट समाजवादी पार्टी के खाते में गई थी उस समय भी राजेंद्र भारती सपा से विधायक चुने गए थे । अब चुनावी अखाड़ा शुरू हो गया है कौन किसको शिकस्त देता है यह मतगणना के बाद ही मालूम पड़ेगा ।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस