बरेली में खाद की किल्लत पर किसानों का आक्रोश, डीएपी के लिए 100-150 किमी भटकने को मजबूर :ऑनलाइन स्टॉक आते ही कुछ मिनटों में खत्म होने का आरोप, खाद से ज्यादा महंगा पड़ रहा आने-जाने का खर्च

तहसील बरेली क्षेत्र में यूरिया और डीएपी खाद की किल्लत ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। किसानों का कहना है कि रबी सीजन की तैयारी के बीच पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध नहीं होने से उन्हें स्थानीय स्तर पर खाद नहीं मिल पा रही है। मजबूरी में किसान एक-दो बोरी डीएपी या यूरिया के लिए 100 से 150 किलोमीटर तक की दौड़ लगाने को मजबूर हैं।

बरेली में खाद की किल्लत पर किसानों का आक्रोश, डीएपी के लिए 100-150 किमी भटकने को मजबूर :ऑनलाइन स्टॉक आते ही कुछ मिनटों में खत्म होने का आरोप, खाद से ज्यादा महंगा पड़ रहा आने-जाने का खर्च

राजेंद्र सिंह राजपूत, तहसील बरेली, जिला रायसेन

बरेली में खाद की किल्लत से किसान परेशान

डीएपी के लिए 100-150 किलोमीटर तक भटकने की मजबूरी

ऑनलाइन स्टॉक आते ही कुछ मिनटों में खत्म होने का किसानों का आरोप

एक-दो बोरी खाद के लिए हजारों रुपये अतिरिक्त खर्च

₹2700 की डीएपी लेने में ₹2000-2500 तक आने-जाने का खर्च

बरेली, जिला रायसेन। तहसील बरेली क्षेत्र में यूरिया और डीएपी खाद की किल्लत ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। किसानों का कहना है कि रबी सीजन की तैयारी के बीच पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध नहीं होने से उन्हें स्थानीय स्तर पर खाद नहीं मिल पा रही है। मजबूरी में किसान एक-दो बोरी डीएपी या यूरिया के लिए 100 से 150 किलोमीटर तक की दौड़ लगाने को मजबूर हैं।

किसानों के अनुसार खाद की ऑनलाइन व्यवस्था भी उनकी परेशानी कम करने के बजाय समस्या बढ़ा रही है। कभी ऑनलाइन साइट खुलती नहीं है और कभी स्टॉक उपलब्ध नहीं होने का संदेश दिखाई देता है। किसानों का आरोप है कि जब साइट पर खाद का स्टॉक उपलब्ध दिखाई देता है तो कुछ ही मिनटों में वह समाप्त हो जाता है। ऐसे में दूर-दराज से किसान खाद लेने के लिए पहुंचने से पहले ही खाली हाथ रह जाते हैं।

किसानों का कहना है कि यह स्थिति समझ से परे है कि खेती के लिए आवश्यक खाद का स्टॉक आखिर इतनी तेजी से कैसे समाप्त हो जाता है। किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया में लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है, लेकिन खाद की ऑनलाइन साइट पर स्टॉक दिखाई देने के कुछ ही समय बाद खत्म हो जाता है। इससे वितरण व्यवस्था को लेकर किसानों के मन में कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

सबसे बड़ी परेशानी उन किसानों की है जिनके खेत बरेली तहसील क्षेत्र में हैं और जिन्हें स्थानीय स्तर पर खाद उपलब्ध नहीं हो रही। किसानों को जानकारी मिलने पर दूसरे क्षेत्रों की ओर रवाना होना पड़ता है। कई बार लंबा सफर तय करने के बाद भी खाद नहीं मिलती। इससे किसान का समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहे हैं।

किसानों के मुताबिक डीएपी की कीमत करीब 2700 रुपये के आसपास है, लेकिन खाद लेने के लिए 100 से 150 किलोमीटर तक आने-जाने में वाहन या ऑटो का करीब 2000 से 2500 रुपये तक अतिरिक्त खर्च हो जाता है। यानी एक-दो बोरी खाद किसान को वास्तविक कीमत से कहीं अधिक महंगी पड़ रही है। गरीब और छोटे किसानों के लिए यह अतिरिक्त खर्च भारी पड़ रहा है।

किसानों का कहना है कि खेती पहले ही महंगी हो चुकी है। बीज, डीजल, मजदूरी, सिंचाई और कृषि सामग्री की बढ़ती लागत ने किसानों का बजट बिगाड़ रखा है। ऐसे में समय पर खाद नहीं मिलने के कारण यदि किसान को दूर-दराज तक जाना पड़े और आने-जाने में हजारों रुपये खर्च करने पड़ें, तो खेती की लागत और बढ़ जाती है।

किसानों का यह भी कहना है कि क्षेत्र में जितने हेक्टेयर में खेती होती है, उसके अनुसार पहले से खाद की आवश्यकता का आकलन किया जाना चाहिए। यदि बरेली तहसील क्षेत्र में मांग के अनुपात में पर्याप्त यूरिया और डीएपी का स्टॉक पहले से उपलब्ध कराया जाए तो किसानों को दूसरे जिलों या दूर के केंद्रों तक जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

खाद की कमी का असर फसल की तैयारी पर भी पड़ने की आशंका है। किसान समय पर खेत तैयार करने और बुवाई की प्रक्रिया पूरी करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन खाद की उपलब्धता को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। किसानों का कहना है कि खेती में समय का विशेष महत्व होता है। खाद की जरूरत के समय यदि वह उपलब्ध नहीं होगी तो इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ सकता है।

किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि बरेली तहसील क्षेत्र की वास्तविक कृषि भूमि और किसानों की संख्या के आधार पर डीएपी एवं यूरिया की पर्याप्त मात्रा में आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। खाद वितरण केंद्रों पर स्टॉक की नियमित जानकारी सार्वजनिक की जाए और ऑनलाइन व्यवस्था को तकनीकी रूप से सुचारु बनाया जाए, ताकि किसानों को बार-बार साइट खुलने का इंतजार न करना पड़े।

किसानों ने यह भी मांग की है कि स्टॉक समाप्त होने पर तत्काल अगली खेप उपलब्ध कराई जाए और वितरण व्यवस्था में पूरी पारदर्शिता रखी जाए। किसानों का कहना है कि यदि स्थानीय स्तर पर पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध रहेगा तो न केवल उनका समय बचेगा, बल्कि वाहन और अतिरिक्त परिवहन खर्च भी कम होगा।

फिलहाल खाद की समस्या को लेकर किसानों में नाराजगी लगातार बढ़ रही है। किसानों का कहना है कि सरकार खेती को मजबूत बनाने और किसानों की आय बढ़ाने की बात करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर यदि एक-दो बोरी खाद के लिए किसान को सैकड़ों किलोमीटर भटकना पड़े तो व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

अब किसानों की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है। किसानों को उम्मीद है कि बरेली तहसील क्षेत्र की खाद समस्या को गंभीरता से लेते हुए स्थानीय स्तर पर पर्याप्त डीएपी और यूरिया उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि उन्हें खाद के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों में भटकने और हजारों रुपये अतिरिक्त खर्च करने से राहत मिल सके।

तहसील बरेली, जिला रायसेन से राजेंद्र सिंह राजपूत की रिपोर्ट।