जितेंद्र मिश्रा बने अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO, 38 साल के सैन्य अनुभव वाले पूर्व एयर मार्शल को मिली बड़ी जिम्मेदारी; कारगिल युद्ध और ऑपरेशन सिंदूर से भी रहा है नाता
कारगिल युद्ध के दौरान ऑपरेशन सफेद सागर औऱ पहलगाम हमले के बाद हुए ऑपरेशन सिंदूर में अहम भूमिका निभाने वाले एयर मार्शल जितेन्द्र मिश्रा को मिली राम मंदिर के पहले CEO की कमान.
एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा बने अयोध्या के राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO, ऑपरेशन सिंदूर से भी रहा है नाता,
लखनऊ। अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। भारतीय वायुसेना के पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का पहला पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया गया है। करीब 38 वर्षों के सैन्य अनुभव, 3000 घंटे से अधिक की उड़ान और देश की सुरक्षा से जुड़े कई अहम अभियानों का अनुभव रखने वाले जितेंद्र मिश्रा अब अयोध्या में राम मंदिर से जुड़े प्रशासनिक और संचालन संबंधी कार्यों की जिम्मेदारी संभालेंगे।
जितेंद्र मिश्रा भारतीय वायुसेना की पश्चिमी वायु कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ भी रह चुके हैं। उनकी नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब राम मंदिर के निर्माण के साथ-साथ अयोध्या में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या, मंदिर व्यवस्था, सुरक्षा, सुविधाओं और भविष्य की व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासनिक जिम्मेदारियां लगातार बढ़ रही हैं।
5585 आवेदनों में से हुआ चयन
राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO के चयन के लिए उच्चस्तरीय प्रक्रिया अपनाई गई। सूत्रों के अनुसार, CEO पद के लिए करीब 5585 आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें से योग्य उम्मीदवारों की स्क्रीनिंग के बाद 16 नामों को इंटरव्यू के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया।
इसके बाद पूर्व आईएएस अधिकारी दिनेश चंद्र और योगेश्वर मिश्रा समेत छह प्रमुख नामों का पैनल तैयार कर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भेजा गया। ट्रस्ट की ओर से सभी उम्मीदवारों के अनुभव, प्रशासनिक क्षमता और जिम्मेदारी संभालने की योग्यता पर विचार किया गया। अंततः पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा के नाम पर सहमति बनी।
CEO के चयन के लिए एक उच्चस्तरीय चयन समिति भी गठित की गई थी। इसमें रिटायर्ड जस्टिस प्रमोद कोहली, रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी और विशेषज्ञ सदस्य सुरेश हावरे शामिल थे।
कारगिल युद्ध में निभाई थी अहम भूमिका
जितेंद्र मिश्रा का सैन्य करियर बेहद महत्वपूर्ण अभियानों से जुड़ा रहा है। वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान उन्होंने भारतीय वायुसेना के ऑपरेशन सफेद सागर में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
कारगिल युद्ध के दौरान वह उस विशेष तकनीकी टीम के प्रमुख सदस्यों में शामिल थे, जिसने मिराज-2000 लड़ाकू विमानों में लेजर-गाइडेड बमों को सफलतापूर्वक इंटीग्रेट करने का काम किया था। इन सटीक हथियारों की मदद से भारतीय वायुसेना ने दुश्मन के महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाया था।
टाइगर हिल और मुंथो ढालो जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में की गई कार्रवाई ने कारगिल युद्ध में भारतीय सेना के अभियान को महत्वपूर्ण बढ़त दिलाई थी। मिराज-2000 की सटीक बमबारी को कारगिल युद्ध के निर्णायक अभियानों में गिना जाता है।
38 साल से ज्यादा का सैन्य अनुभव
जितेंद्र मिश्रा 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में शामिल हुए थे। 38 वर्षों से अधिक लंबे सैन्य करियर के दौरान उन्होंने 3000 घंटे से ज्यादा उड़ान भरी।
उन्होंने 18 से अधिक प्रकार के लड़ाकू विमान, परिवहन विमान और हेलीकॉप्टर उड़ाए हैं। वह फाइटर कॉम्बैट लीडर के साथ-साथ एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट के रूप में भी काम कर चुके हैं।
उनकी सेवाओं के लिए उन्हें सर्वोत्तम युद्ध सेवा पदक (SYSM), अति विशिष्ट सेवा पदक (AVSM) और विशिष्ट सेवा पदक (VSM) से सम्मानित किया जा चुका है।
पश्चिमी वायु कमान की संभाल चुके हैं कमान
पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा के पास सैन्य प्रशासन और रणनीतिक नेतृत्व का भी व्यापक अनुभव है। वह भारतीय वायुसेना की महत्वपूर्ण पश्चिमी वायु कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ रह चुके हैं।
इसके अलावा उन्होंने इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ में ऑपरेशंस और ट्रेनिंग के डिप्टी चीफ की जिम्मेदारी संभाली। वह एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टेब्लिशमेंट के कमांडेंट भी रहे हैं।
उन्होंने बरेली स्थित 15 विंग और पठानकोट स्थित 18 विंग जैसे महत्वपूर्ण एयरबेस की कमान भी बतौर एयर ऑफिसर कमांडिंग संभाली है। इन जिम्मेदारियों के दौरान उन्हें बड़े स्तर पर प्रशासन, ऑपरेशन, मानव संसाधन और रणनीतिक प्रबंधन का अनुभव मिला।
भारत के साथ विदेशों में भी हासिल की उच्च शिक्षा
जितेंद्र मिश्रा ने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, खड़कवासला और वायुसेना अकादमी, डुंडीगल से प्रशिक्षण हासिल किया। इसके अलावा उन्होंने अमेरिका के एयर कमांड एंड स्टाफ कॉलेज और ब्रिटेन के प्रतिष्ठित रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज से आधुनिक रणनीति और सुरक्षा से जुड़ी उच्च शिक्षा एवं प्रशिक्षण प्राप्त किया।
उनकी सैन्य पृष्ठभूमि के साथ-साथ प्रशासनिक और रणनीतिक अनुभव को देखते हुए माना जा रहा है कि राम मंदिर ट्रस्ट को उनके अनुभव से मंदिर की बढ़ती व्यवस्थाओं को बेहतर तरीके से संचालित करने में मदद मिलेगी।
ऑपरेशन सिंदूर से भी जुड़ा नाम
जितेंद्र मिश्रा का नाम हाल के समय में भारतीय सुरक्षा अभियानों के संदर्भ में भी सामने आया है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सैन्य कार्रवाई और उससे जुड़ी रणनीतिक व्यवस्थाओं में उनकी विशेषज्ञता को महत्वपूर्ण माना गया। सैन्य अभियानों, सुरक्षा प्रबंधन और बड़े स्तर के प्रशासनिक संचालन का उनका अनुभव अब राम मंदिर ट्रस्ट के कामकाज में उपयोगी साबित हो सकता है।
अब राम मंदिर ट्रस्ट में संभालेंगे बड़ी जिम्मेदारी
राम मंदिर के भव्य निर्माण के बाद अयोध्या में हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। ऐसे में मंदिर परिसर की व्यवस्थाओं, श्रद्धालुओं की सुविधा, प्रशासनिक समन्वय, सुरक्षा, भविष्य की योजनाओं और ट्रस्ट से जुड़े विभिन्न कार्यों को व्यवस्थित तरीके से संचालित करना बड़ी चुनौती है।
पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को पहला पूर्णकालिक CEO बनाए जाने को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सैन्य क्षेत्र में लंबे समय तक बड़े संस्थानों और संवेदनशील क्षेत्रों की कमान संभाल चुके जितेंद्र मिश्रा अब अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के प्रशासनिक संचालन की जिम्मेदारी संभालेंगे।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस