CM मोहन यादव के जाते ही GRMC डीन को जड़ा थप्पड़, ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल में मचा बवाल; डॉक्टरों ने आरोपी को पकड़कर पीटा, पुलिस ने छुड़ाया
ग्वालियर के जीआरएमसी ट्रॉमा सेंटर के बाहर डीन डॉ. आरकेएस धाकड़ को एडवोकेट मनोज शर्मा ने थप्पड़ मार दिया. यह घटना मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के रवाना होते ही हुई. पुलिस ने आरोपी को हिरासत में ले लिया है. आरोपी साल 2014 में सहारा प्रमुख पर भी स्याही फेंक चुका है.
ग्वालियर में शीतला माता मंदिर हादसे के घायलों का हाल जानने पहुंचे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के जाते ही जयारोग्य अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में हंगामा हो गया। आरोप है कि एक शख्स ने गजरा राजा मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. आरकेएस धाकड़ को थप्पड़ मार दिया। इसके बाद वहां मौजूद डॉक्टरों ने आरोपी की पिटाई कर दी। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने बीच-बचाव कर उसे अपने कब्जे में लिया और थाने ले गए।
ग्वालियर, मध्यप्रदेश। ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल परिसर में सोमवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब गजरा राजा मेडिकल कॉलेज (GRMC) के डीन डॉ. आरकेएस धाकड़ पर एक व्यक्ति ने कथित तौर पर हमला कर दिया। बताया जा रहा है कि यह घटना मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के अस्पताल से रवाना होने के कुछ ही देर बाद हुई। मुख्यमंत्री यहां शीतला माता मंदिर हादसे में घायल लोगों का हाल जानने पहुंचे थे। घटना के बाद अस्पताल परिसर में हंगामे की स्थिति बन गई। मौके पर मौजूद डॉक्टरों और पुलिसकर्मियों के बीच आरोपी को लेकर खींचतान भी हुई।
घायलों का हाल जानने पहुंचे थे मुख्यमंत्री
जानकारी के अनुसार, शीतला माता मंदिर में हुए हादसे में घायल कई लोगों का इलाज ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल में चल रहा है। घायलों की स्थिति और उपचार की व्यवस्थाओं की जानकारी लेने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने चिकित्सकों से घायलों के स्वास्थ्य के संबंध में जानकारी ली।
मुख्यमंत्री के दौरे को देखते हुए अस्पताल परिसर में सुरक्षा के इंतजाम किए गए थे। अधिकारियों और चिकित्सा कर्मचारियों की मौजूदगी के बीच घायलों का उपचार जारी था। बताया गया कि मुख्यमंत्री के अस्पताल से निकलने के बाद ट्रॉमा सेंटर में अचानक विवाद की स्थिति पैदा हो गई। कुछ ही देर में यह मामला हाथापाई तक पहुंच गया।
डीन डॉ. आरकेएस धाकड़ को थप्पड़ मारने का आरोप
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, मनोज कुमार नाम के एक व्यक्ति ने GRMC के डीन डॉ. आरकेएस धाकड़ को कथित तौर पर थप्पड़ मार दिया। घटना अचानक होने के कारण वहां मौजूद लोग कुछ समय के लिए हैरान रह गए। अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी के साथ इस तरह की घटना सामने आने से परिसर में तनाव की स्थिति बन गई।
हालांकि, डीन पर कथित हमले के पीछे क्या कारण था, इस बारे में फिलहाल स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। घटना से पहले आरोपी और डीन के बीच किसी तरह का विवाद हुआ था या नहीं, इसकी पुष्टि भी जांच के बाद ही हो सकेगी। मामले में सभी परिस्थितियों और संबंधित लोगों के बयान सामने आना महत्वपूर्ण होगा।
घटना के बाद डॉक्टरों ने आरोपी को पकड़ा
डॉ. धाकड़ पर हमले की खबर फैलते ही वहां मौजूद कुछ डॉक्टरों ने आरोपी को पकड़ लिया। इसके बाद आरोपी के साथ मारपीट होने की बात सामने आई है। घटनाक्रम के विवरण के अनुसार, डॉक्टरों ने उसे पकड़कर जमीन पर गिरा दिया और उसकी पिटाई शुरू कर दी।
मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने हस्तक्षेप करते हुए बीच-बचाव किया। पुलिस ने किसी तरह आरोपी को डॉक्टरों के चंगुल से छुड़ाया और अपने साथ थाने ले गई। इस दौरान ट्रॉमा सेंटर में काफी देर तक हंगामे जैसी स्थिति बनी रही।
घटना के दौरान आरोपी के साथ हुई मारपीट को लेकर भी सवाल उठ सकते हैं। किसी व्यक्ति पर हमला करने का आरोप होने के बावजूद उसके खिलाफ कार्रवाई कानून के दायरे में ही होनी चाहिए। पूरे घटनाक्रम में किसने क्या भूमिका निभाई, इसका निर्धारण जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किया जाना आवश्यक है।
पुलिस के सामने खुद को पागल बताने लगा आरोपी
बताया गया कि पुलिस के साथ जाते समय मनोज कुमार खुद को पागल बताते हुए चिल्ला रहा था। हालांकि, किसी व्यक्ति के ऐसा कहने भर से उसकी मानसिक स्थिति के बारे में कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। इस संबंध में किसी चिकित्सकीय परीक्षण या आधिकारिक आकलन की जानकारी सामने आए बिना उसकी मानसिक स्थिति को लेकर दावा करना उचित नहीं होगा।
पुलिस के लिए अब घटना की परिस्थितियों का पता लगाना महत्वपूर्ण होगा। आरोपी अस्पताल क्यों पहुंचा था, डीन के साथ उसकी कहासुनी हुई थी या नहीं और कथित हमले के पीछे क्या वजह थी, जैसे सवालों के जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएंगे।
डीन ने सुरक्षा व्यवस्था पर जताई हैरानी
घटना के बाद GRMC के डीन डॉ. आरकेएस धाकड़ ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर हैरानी जताई। उनके मुताबिक, अस्पताल में मरीजों का उपचार चल रहा था और सुरक्षा के इंतजाम भी मौजूद थे। इसके बावजूद इस तरह की घटना होना चिंताजनक है।
अस्पतालों में डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को मरीजों के उपचार के दौरान सुरक्षित वातावरण मिलना जरूरी है। डॉक्टरों पर हमले की घटनाएं न केवल संबंधित चिकित्सा कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा करती हैं, बल्कि अस्पताल के कामकाज और मरीजों की देखभाल पर भी असर डाल सकती हैं।
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था को किस तरह प्रभावी बनाया जाए, ताकि चिकित्सक बिना किसी भय या दबाव के अपना काम कर सकें। खासकर ट्रॉमा सेंटर जैसे स्थानों पर, जहां गंभीर मरीजों का उपचार होता है, वहां सुरक्षा और आपातकालीन सेवाओं के बीच बेहतर तालमेल आवश्यक है।
आरोपी के पुराने घटनाक्रमों को लेकर भी चर्चा
उपलब्ध विवरणों में मनोज कुमार के पुराने घटनाक्रमों का भी उल्लेख किया गया है। दावा किया जाता है कि वह इससे पहले सहारा समूह के प्रमुख सुब्रत राय और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर स्याही फेंकने जैसी घटनाओं में शामिल रहा था। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित मामलों का आधिकारिक रिकॉर्ड देखना जरूरी है। पुराने आरोपों के आधार पर मौजूदा घटना के पीछे की वजह तय नहीं की जा सकती।
फिलहाल ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल में GRMC डीन पर हुए कथित हमले का मामला चर्चा में है। घटना के बाद आरोपी को पुलिस अपने साथ ले गई। मामले में आगे की कार्रवाई, हमले के कारण और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े पहलुओं पर स्थिति जांच के निष्कर्षों के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
अस्पतालों में सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
ग्वालियर की यह घटना चिकित्सा संस्थानों में सुरक्षा को लेकर गंभीर चर्चा का विषय बन गई है। अस्पतालों में मरीजों, उनके परिजनों, डॉक्टरों और कर्मचारियों की आवाजाही लगातार बनी रहती है। ऐसे में किसी भी विवाद को समय रहते नियंत्रित करना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना जरूरी होता है।
एक ओर डीन पर कथित हमले की निष्पक्ष जांच जरूरी है, वहीं दूसरी ओर आरोपी के साथ हुई मारपीट के पहलू की भी जांच होनी चाहिए। पुलिस को घटना से जुड़े प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, उपलब्ध वीडियो फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की पड़ताल करनी होगी।
मुख्यमंत्री के दौरे के तुरंत बाद हुई इस घटना ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल जरूर खड़े किए हैं, लेकिन सुरक्षा में चूक किस स्तर पर हुई और घटना को रोका जा सकता था या नहीं, इसका निष्कर्ष जांच के बाद ही निकाला जा सकेगा। फिलहाल इस मामले में सभी पक्षों के तथ्यों और आधिकारिक जानकारी का सामने आना जरूरी है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस