जालौन में अतिवृष्टि से किसानों की फसलें तबाह, बीमा राहत के लिए जनसंघर्ष मोर्चा का हल्ला-बोल; तत्काल सर्वे और मुआवजे की मांग, प्रशासन ने दिए शीघ्र आंकलन के निर्देश

जालौन में लगातार बारिश और जलभराव से खरीफ फसलों को भारी नुकसान हुआ है। फसल क्षति का समय पर आंकलन नहीं होने से किसान फसल बीमा राहत को लेकर परेशान हैं। जनसंघर्ष मोर्चा ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर तत्काल सर्वे, बीमा राहत और मुआवजे की मांग की। जिलाधिकारी ने बीमा कंपनी व कृषि विभाग को शीघ्र सर्वे कराने के निर्देश दिए हैं।

जालौन में अतिवृष्टि से किसानों की फसलें तबाह, बीमा राहत के लिए जनसंघर्ष मोर्चा का हल्ला-बोल; तत्काल सर्वे और मुआवजे की मांग, प्रशासन ने दिए शीघ्र आंकलन के निर्देश

अतिवृष्टि से तिल, उड़द और मूंग की फसलें तबाह, बीमा राहत के लिए किसानों की आवाज तेज; जनसंघर्ष मोर्चा ने तत्काल सर्वे और मुआवजे की मांग उठाई

उरई (जालौन)। जालौन जिले में अगस्त-सितंबर के दौरान हुई लगातार और मूसलाधार बारिश ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अतिवृष्टि के कारण खेतों में पानी भरने से तिल, उड़द और मूंग सहित खरीफ की फसलों को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा है। कई क्षेत्रों में खेतों में खड़ी फसलें पानी में डूबने के बाद सड़ने लगी हैं, जबकि कुछ स्थानों पर फसल पूरी तरह नष्ट होने की बात सामने आई है। फसल नुकसान के बीच किसान अब बीमा और राहत राशि की मांग कर रहे हैं।

इसी मुद्दे को लेकर जनसंघर्ष मोर्चा ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर किसानों की समस्याओं के समाधान की मांग की। संगठन के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने सिटी मजिस्ट्रेट सुनील कुमार को ज्ञापन सौंपकर जिले में तत्काल फसल क्षति का सर्वे कराने और प्रभावित किसानों को फसल बीमा योजना के तहत राहत दिलाने की मांग की।

अतिवृष्टि से खेतों में भरा पानी, फसलें हुईं प्रभावित

जालौन जिले में लगातार हुई बारिश के कारण बड़ी संख्या में खेत जलमग्न हो गए। खासकर तिल, उड़द और मूंग जैसी खरीफ फसलों को बारिश और जलभराव से भारी नुकसान हुआ है। किसानों के मुताबिक कई खेतों में पानी लंबे समय तक जमा रहने के कारण फसलें गलने और सड़ने लगी हैं। जिन किसानों ने बड़ी उम्मीद के साथ खरीफ फसल तैयार की थी, उनके सामने अब आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

किसानों का कहना है कि फसल बर्बाद होने के बावजूद कई क्षेत्रों में अभी तक व्यवस्थित तरीके से क्षति का आंकलन नहीं हुआ है। उनका आरोप है कि समय पर सर्वे नहीं होने के कारण फसल बीमा योजना के तहत मिलने वाली राहत की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।

मध्यवर्ती क्षति का आंकलन नहीं होने पर उठे सवाल

जनसंघर्ष मोर्चा का कहना है कि अतिवृष्टि से प्रभावित किसानों को तत्काल राहत दिलाने के लिए मध्यवर्ती क्षति का आंकलन जरूरी है। संगठन के अनुसार बुंदेलखंड के अन्य जिलों में फसल क्षति के सर्वे की प्रक्रिया शुरू की गई है, लेकिन जालौन में अपेक्षित स्तर पर आंकलन नहीं हुआ है।

संगठन ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे जिले को अतिवृष्टि प्रभावित क्षेत्र मानते हुए प्रभावित गांवों में तत्काल सर्वे दल भेजे जाएं। सर्वे के आधार पर किसानों को हुए वास्तविक नुकसान का आंकलन किया जाए, ताकि बीमा और सरकारी राहत की प्रक्रिया आगे बढ़ सके।

बीमा कंपनी और कृषि विभाग पर लगाए आरोप

ज्ञापन सौंपने पहुंचे जनसंघर्ष मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने एसबीआई इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड और कृषि विभाग के उप निदेशक पर भी सवाल उठाए। संगठन ने आरोप लगाया कि किसानों को फसल बीमा का लाभ दिलाने की प्रक्रिया में लापरवाही बरती जा रही है और इसी वजह से प्रभावित किसानों को समय पर राहत नहीं मिल पा रही है।

मोर्चा ने प्रशासन से मांग की कि बीमा कंपनी को स्पष्ट निर्देश जारी कर फसल नुकसान का शीघ्र आंकलन कराया जाए। साथ ही किसानों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए बीमा दावों के निपटारे की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए।

50 प्रतिशत से अधिक नुकसान वाले किसानों को तत्काल राहत की मांग

ज्ञापन में जनसंघर्ष मोर्चा ने मांग की है कि जिन किसानों की फसल में 50 प्रतिशत से अधिक नुकसान हुआ है, उन्हें तत्काल राहत उपलब्ध कराई जाए। संगठन का कहना है कि जिन किसानों की पूरी या बड़ी मात्रा में फसल बर्बाद हो चुकी है, उन्हें मुआवजे के लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं करना चाहिए।

मोर्चा ने एक माह पूर्व पॉलिसी कराने वाले किसानों को भी बीमा कवर में शामिल किए जाने की मांग रखी है। इसके अलावा बुंदेलखंड के अन्य जिलों की तर्ज पर जालौन में भी फसल सर्वे की प्रभावी व्यवस्था लागू करने की मांग की गई है।

सैकड़ों कार्यकर्ता पहुंचे जिलाधिकारी कार्यालय

जनसंघर्ष मोर्चा के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने किसानों की समस्याओं को लेकर प्रशासन के सामने अपनी मांगें रखीं और सिटी मजिस्ट्रेट सुनील कुमार को ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन सौंपने वालों में चौधरी जय करन सिंह, खरुसा ग्रंथ सिंह कुशवाह, अशोक गुप्ता महावली, रोहित त्रिपाठी, रविन्द्र यादव, दीपशिखा, विनय पाठक, देवेश चौरसिया, अनुज मिश्रा, आदित्य मिश्रा, रवि कुमार, अमित त्रिपाठी, अरविंद कुमार राजपूत, राजीव कुशवाहा, सुदामा बरहा और हरी सिंह राजपूत सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे।

मांग पूरी नहीं हुई तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी

जनसंघर्ष मोर्चा ने चेतावनी दी है कि यदि किसानों की समस्याओं का तत्काल समाधान नहीं किया गया और फसल क्षति का सर्वे नहीं कराया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। संगठन का कहना है कि किसानों को उनकी बर्बाद हुई फसल का उचित मुआवजा और बीमा राहत मिलना जरूरी है।

मोर्चा ने प्रशासन से अपील की कि प्रभावित क्षेत्रों में जल्द से जल्द सर्वे दल भेजे जाएं और खेतों में जाकर वास्तविक नुकसान का आंकलन किया जाए। संगठन का कहना है कि कागजी प्रक्रिया में देरी के कारण किसानों की परेशानी और बढ़ सकती है।

प्रशासन ने दिया शीघ्र सर्वे कराने का भरोसा

वहीं मामले में जिलाधिकारी समीर ने कहा कि किसानों की जो भी मुमकिन मदद होगी, वह कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि बीमा कंपनी और उप निदेशक कृषि को पूरे क्षेत्र में शीघ्र फसल क्षति का आंकलन करने के निर्देश दिए गए हैं।

जिलाधिकारी के अनुसार फसल नुकसान का सर्वे बीमा कंपनी अपने सर्वेयर के माध्यम से कराएगी। प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान की स्थिति की जानकारी जुटाने और किसानों को नियमानुसार राहत दिलाने का प्रयास किया जाएगा।

प्रशासन के इस आश्वासन के बाद अब किसानों की नजर सर्वे की प्रक्रिया पर है। किसानों की मुख्य मांग है कि सर्वे में वास्तविक नुकसान को दर्ज किया जाए और पात्र किसानों को फसल बीमा तथा सरकारी राहत का लाभ जल्द से जल्द मिले। अतिवृष्टि से प्रभावित किसानों के लिए आने वाले दिनों में होने वाला फसल क्षति आंकलन राहत की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।