बीच भाषण में भड़के ज्योतिरादित्य सिंधिया, बोले- ‘नेतागिरी मत करो, करनी है तो नेता के पास जाओ’
शिवपुरी के राजपुर गांव में कार्यक्रम के दौरान राशन नहीं मिलने की शिकायत पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भड़क गए। उन्होंने लोगों से कहा, “नेतागिरी मत करो, करनी है तो नेता के पास जाओ।” बाद में सिंधिया ने खुद को क्षेत्र का मुखिया बताते हुए समस्याएं सीधे उनके पास रखने की बात कही। वहीं भाजपा नेता प्रीतम सिंह लोधी के “असली फिल्म एक साल बाद रिलीज होगी” वाले बयान ने सियासी चर्चाओं को और हवा दे दी।
राशन नहीं मिलने की शिकायत पर बढ़ा सिंधिया का पारा, बोले- ‘कोई समस्या है तो मेरे पास आओ’
शिवपुरी। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया इन दिनों मध्य प्रदेश के दौरे पर हैं। अपने प्रवास के दौरान वे लगातार क्षेत्र में विकास कार्यों का शिलान्यास और लोकार्पण कर रहे हैं। इसी क्रम में शिवपुरी जिले की पिछोर तहसील के राजपुर गांव में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उस समय माहौल अचानक बदल गया, जब सभा में मौजूद कुछ लोगों ने राशन नहीं मिलने की शिकायत सार्वजनिक रूप से उठाई। लोगों की लगातार आवाज के बाद सिंधिया ने अपना भाषण रोक दिया और तल्ख अंदाज में कहा- “ए शांति-शांति... नेतागिरी मत करो, नेतागिरी करनी है तो नेता के पास जाओ।”
सिंधिया के इस तेवर से कुछ क्षण के लिए सभा में सन्नाटा छा गया। हालांकि, इसके बाद केंद्रीय मंत्री ने अपने अंदाज को नरम करते हुए लोगों से कहा कि वे खुद को इस क्षेत्र का मुखिया मानते हैं और किसी भी समस्या के समाधान के लिए सीधे उनके पास आ सकते हैं।
विकास कार्यों की सौगात देने पहुंचे थे सिंधिया
राजपुर गांव में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया विभिन्न विकास कार्यों का शिलान्यास और लोकार्पण करने पहुंचे थे। कार्यक्रम को लेकर स्थानीय लोगों और भाजपा कार्यकर्ताओं में उत्साह दिखाई दे रहा था। सिंधिया ने क्षेत्र में विकास योजनाओं और सरकार की उपलब्धियों को लेकर लोगों को संबोधित किया।
कार्यक्रम के दौरान सिंधिया क्षेत्र के विकास, जनता की समस्याओं और सरकार की योजनाओं का जिक्र कर रहे थे। इसी बीच भीड़ में मौजूद कुछ लोगों ने अपनी स्थानीय समस्या उनके सामने रखने की कोशिश की।
भीड़ से आवाज आई कि “महाराज, राशन नहीं मिल रहा है।” लोगों की शिकायत सुनकर सिंधिया ने तत्काल प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि चिंता करने की जरूरत नहीं है और वह खुद लोगों से मिलने आएंगे।
बार-बार शिकायत की आवाज आने पर बढ़ा पारा
बताया गया कि राशन को लेकर शिकायत सामने आने के बाद सिंधिया ने मामले को देखने का आश्वासन दिया था। इसके बावजूद सभा में कुछ देर बाद फिर लोगों की ओर से आवाज आने लगी। लगातार हस्तक्षेप से सिंधिया नाराज हो गए और उन्होंने अपना भाषण बीच में ही रोक दिया।
केंद्रीय मंत्री ने मंच से कहा- “ए शांति-शांति... नेतागिरी नहीं, नेतागिरी करनी है तो नेता के पास जाओ।”
उनके इस बयान के बाद कार्यक्रम स्थल पर मौजूद लोग कुछ देर के लिए शांत हो गए। सिंधिया का यह अंदाज देखकर मंच पर मौजूद नेताओं और सभा में बैठे लोगों का ध्यान भी उनकी ओर चला गया।
‘मैं नेता नहीं, इस अंचल का मुखिया हूं’
हालांकि, नाराजगी जाहिर करने के कुछ ही देर बाद सिंधिया ने अपने संबोधन का रुख भावनात्मक कर दिया। उन्होंने कहा कि वे खुद को केवल नेता के तौर पर नहीं देखते, बल्कि इस क्षेत्र के लोगों का मुखिया मानते हैं।
सिंधिया ने कहा कि अगर किसी व्यक्ति को कोई परेशानी है या किसी तरह की समस्या है तो वह सीधे उनके पास आए। उन्होंने लोगों को भरोसा दिलाया कि उनकी समस्याओं को सुना जाएगा और उनके समाधान की कोशिश की जाएगी।
सिंधिया के इस बयान से कार्यक्रम का माहौल फिर सामान्य हो गया। उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि जनता की समस्याएं उनके लिए महत्वपूर्ण हैं, लेकिन सार्वजनिक कार्यक्रम में बार-बार हस्तक्षेप करने के बजाय समस्या को उचित माध्यम से उनके सामने रखा जाना चाहिए।
राशन की शिकायत ने खींचा ध्यान
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा राशन की शिकायत को लेकर हुई। सरकारी राशन व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों की ओर से शिकायत किए जाने का मुद्दा सीधे केंद्रीय मंत्री के सामने उठाया गया। सिंधिया ने पहले समस्या सुनने और लोगों से मिलने का भरोसा दिया, लेकिन बाद में लगातार आवाज लगाए जाने पर वे नाराज हो गए।
राजनीतिक और प्रशासनिक कार्यक्रमों में अक्सर जनप्रतिनिधियों के सामने स्थानीय लोग अपनी समस्याएं रखते हैं। राजपुर में भी ऐसा ही देखने को मिला। हालांकि, इस बार शिकायत के दौरान केंद्रीय मंत्री की प्रतिक्रिया चर्चा का विषय बन गई।
सिंधिया के बयान का वीडियो भी सोशल मीडिया पर चर्चा में आने की संभावना है। उनके समर्थक जहां इसे कार्यक्रम में अनुशासन बनाए रखने की कोशिश के तौर पर देख सकते हैं, वहीं विपक्षी दल इसे जनता की शिकायत पर केंद्रीय मंत्री की नाराजगी से जोड़कर राजनीतिक मुद्दा बना सकते हैं।
मंच से प्रीतम सिंह लोधी का रहस्यमयी बयान
कार्यक्रम में सिंधिया के तेवर के बाद एक और दिलचस्प राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला। भाजपा नेता प्रीतम सिंह लोधी जब मंच पर संबोधन करने पहुंचे तो उन्होंने सिंधिया को लेकर ऐसा बयान दिया, जिसने कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच उत्सुकता पैदा कर दी।
लोधी ने कहा- “महाराज साहब की यह तो सिर्फ शुरुआत है, असली फिल्म तो एक साल बाद रिलीज होगी।”
प्रीतम सिंह लोधी के इस बयान के बाद वहां मौजूद लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। आखिर उन्होंने ‘एक साल बाद असली फिल्म’ से क्या संकेत दिया, इसे लेकर सवाल उठने लगे।
लोधी ने अपने बयान में यह स्पष्ट नहीं किया कि वे किस घटनाक्रम की ओर इशारा कर रहे हैं। यही वजह है कि उनका बयान राजनीतिक चर्चाओं का हिस्सा बन गया है।
‘एक साल बाद’ वाले बयान के मायने तलाशे जा रहे
राजनीति में मंच से नेताओं की ओर से दिए गए संकेत अक्सर चर्चा का विषय बन जाते हैं। प्रीतम सिंह लोधी का यह बयान भी इसी वजह से सुर्खियों में है। उन्होंने बिना किसी विस्तृत जानकारी के कहा कि सिंधिया की अभी केवल शुरुआत हुई है और असली फिल्म एक साल बाद रिलीज होगी।
अब इस बयान को लेकर राजनीतिक गलियारों में अलग-अलग कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि, लोधी के बयान का वास्तविक आशय क्या था, यह उन्होंने स्पष्ट नहीं किया है। इसलिए फिलहाल इसे लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
सिंधिया का मध्य प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से महत्वपूर्ण प्रभाव रहा है। केंद्रीय मंत्री बनने के बाद भी वे अपने क्षेत्र और समर्थकों के बीच लगातार सक्रिय नजर आते हैं। ऐसे में उनके कार्यक्रम में दिया गया कोई भी बयान या मंच से किसी नेता की टिप्पणी राजनीतिक चर्चा का विषय बन जाती है।
जनता की शिकायत और नेताओं के तेवर चर्चा में
राजपुर का यह कार्यक्रम इसलिए खास हो गया क्योंकि यहां एक ही मंच पर जनता की समस्या, केंद्रीय मंत्री की नाराजगी और भाजपा नेता का रहस्यमयी राजनीतिक बयान—तीनों देखने को मिले।
एक तरफ ग्रामीणों ने राशन नहीं मिलने की शिकायत उठाई, वहीं सिंधिया ने पहले समस्या सुनने का आश्वासन दिया और फिर बार-बार आवाज आने पर नाराजगी जताई। इसके बाद उन्होंने खुद को ‘अंचल का मुखिया’ बताते हुए लोगों को अपनी समस्याएं सीधे उनके सामने रखने का भरोसा दिलाया।
दूसरी ओर प्रीतम सिंह लोधी के ‘एक साल बाद असली फिल्म’ वाले बयान ने पूरे घटनाक्रम को और ज्यादा राजनीतिक रंग दे दिया।
फिलहाल कार्यक्रम में सिंधिया की नाराजगी और लोधी के बयान दोनों ही चर्चा का विषय बने हुए हैं। राशन जैसी बुनियादी जरूरत को लेकर ग्रामीणों की शिकायत ने यह भी दिखाया कि विकास योजनाओं के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर लोगों की रोजमर्रा की समस्याओं का समाधान भी राजनीतिक प्रतिनिधियों के लिए अहम मुद्दा है।
अब देखना होगा कि सिंधिया द्वारा लोगों की राशन संबंधी शिकायत पर आगे क्या कार्रवाई होती है और प्रीतम सिंह लोधी के ‘एक साल बाद’ वाले बयान का वास्तविक संकेत क्या था। फिलहाल राजपुर की सभा का यह घटनाक्रम क्षेत्र की राजनीति में चर्चा का नया विषय जरूर बन गया है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस