'कीड़ा' टिप्पणी पर मचा सियासी घमासान, कैलाश विजयवर्गीय ने आरोपों को बताया झूठ; सिंघार पर करेंगे मानहानि का मुकदमा

छात्रों को कीड़ा बताने के कांग्रेस के आरोपों को मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बेबुनियाद बताया है. उन्होंने नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार पर मानहानी केस दर्ज कराने की बात कही है.

'कीड़ा' टिप्पणी पर मचा सियासी घमासान, कैलाश विजयवर्गीय ने आरोपों को बताया झूठ; सिंघार पर करेंगे मानहानि का मुकदमा

'छात्रों को कीड़ा नहीं कहा', कैलाश विजयवर्गीय का उमंग सिंघार पर पलटवार; मानहानि का मुकदमा करेंगे, माफी की मांग पर बढ़ा सियासी विवाद

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में छात्रों और युवाओं को लेकर कथित टिप्पणी का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। राज्य सरकार के मंत्री एवं संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार आमने-सामने आ गए हैं। एक ओर सिंघार ने आरोप लगाया कि विजयवर्गीय ने छात्रों के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया और उन्हें सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए, वहीं विजयवर्गीय ने इन आरोपों को पूरी तरह झूठा और निराधार बताते हुए सिंघार के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करने की घोषणा कर दी है।

कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि उनके बयान को जानबूझकर तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने किसी भी छात्र, युवा या आंदोलनकारी के लिए "कीड़ा" या "कॉकरोच" जैसे शब्दों का प्रयोग नहीं किया। उनके मुताबिक विपक्ष ने राजनीतिक लाभ लेने के उद्देश्य से उनके वक्तव्य को गलत तरीके से प्रचारित किया है।

उन्होंने कहा, "उमंग सिंघार ने जो भी आरोप लगाए हैं, वे पूरी तरह बेबुनियाद हैं। उन्होंने छात्रों के बीच मेरी छवि खराब करने की कोशिश की है। मैंने ऐसा कोई शब्द नहीं कहा। मैं उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करूंगा। झूठे आरोप लगाकर मेरी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया है।"

विजयवर्गीय ने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन किसी के बयान को गलत तरीके से पेश कर उसकी छवि खराब करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले का रिकॉर्ड उपलब्ध है और उससे सच्चाई सामने आ जाएगी।

सिंघार ने मांगी सार्वजनिक माफी

दूसरी ओर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि यदि छात्रों और युवाओं के संदर्भ में इस प्रकार की भाषा का इस्तेमाल किया गया है तो यह पूरे युवा वर्ग का अपमान है।

मीडिया से बातचीत में सिंघार ने कहा, "छात्रों को 'कॉकरोच' कहना केवल एक टिप्पणी नहीं बल्कि युवाओं के सम्मान पर चोट है। देश और प्रदेश के युवा अपने भविष्य, शिक्षा और अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्हें अपमानित करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। लोकतंत्र में सवाल पूछने वाले युवाओं का सम्मान होना चाहिए, उनका अपमान नहीं।"

उन्होंने मांग की कि यदि ऐसा बयान दिया गया है तो कैलाश विजयवर्गीय को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। सिंघार ने कहा कि सत्ता में बैठे लोगों को अपने शब्दों के चयन में संयम बरतना चाहिए क्योंकि उनके बयान समाज पर व्यापक प्रभाव डालते हैं।

विधानसभा में गरमाया मामला

यह पूरा विवाद बुधवार को मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान सामने आया। प्रश्नकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि कैलाश विजयवर्गीय ने मंगलवार को सदन में छात्रों और युवाओं के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया था।

आरोप लगते ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। दोनों पक्षों के विधायकों ने एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाए, जिससे सदन का माहौल कुछ समय के लिए गरमा गया।

स्थिति को देखते हुए संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर से इस मामले पर स्पष्ट व्यवस्था देने की मांग की। उन्होंने कहा कि सदन की कार्यवाही का रिकॉर्ड देखा जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके।

अध्यक्ष ने रिकॉर्ड देखने के बाद दी व्यवस्था

विवाद बढ़ने के बाद विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने सदन की वीडियो रिकॉर्डिंग और आधिकारिक कार्यवाही का परीक्षण कराया। रिकॉर्ड देखने के बाद अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि कैलाश विजयवर्गीय के वक्तव्य में "कीड़ा" शब्द का इस्तेमाल नहीं किया गया था।

अध्यक्ष की इस व्यवस्था के बाद सत्ता पक्ष ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि बिना तथ्य के आरोप लगाकर सदन को गुमराह करने की कोशिश की गई। वहीं विपक्ष अपने आरोपों पर कायम रहा और पूरे मामले को युवाओं के सम्मान से जुड़ा मुद्दा बताया।

राजनीतिक बयानबाजी तेज

विधानसभा की कार्यवाही के बाद यह विवाद राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का विषय बन गया। भाजपा नेताओं ने विजयवर्गीय का बचाव करते हुए कहा कि विपक्ष मुद्दाविहीन होकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहा है। उनका कहना है कि विधानसभा अध्यक्ष स्वयं रिकॉर्ड देखने के बाद तथ्य स्पष्ट कर चुके हैं।

वहीं कांग्रेस नेताओं ने कहा कि युवाओं से जुड़े मुद्दों पर सरकार गंभीर नहीं है और विपक्ष केवल युवाओं की आवाज उठा रहा है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार छात्रों के सवालों से बचने के लिए मुद्दे को दूसरी दिशा में ले जाने का प्रयास कर रही है।

मानहानि के मुकदमे की तैयारी

कैलाश विजयवर्गीय ने साफ संकेत दिए हैं कि वह इस मामले को कानूनी रूप देंगे। उन्होंने कहा कि झूठे आरोपों के जरिए उनकी व्यक्तिगत और राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई है, इसलिए वह उमंग सिंघार के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करेंगे।

यदि ऐसा होता है तो यह विवाद केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कानूनी लड़ाई का रूप भी ले सकता है।

विवाद के राजनीतिक मायने

विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य प्रदेश में युवाओं, शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दे पहले से ही राजनीतिक बहस के केंद्र में हैं। ऐसे में छात्रों से जुड़ी किसी भी टिप्पणी या आरोप का राजनीतिक असर पड़ सकता है। विधानसभा के भीतर शुरू हुआ यह विवाद अब सियासी बयानबाजी और कानूनी कार्रवाई तक पहुंचता दिखाई दे रहा है।

फिलहाल दोनों नेता अपने-अपने दावों पर कायम हैं। एक ओर उमंग सिंघार सार्वजनिक माफी की मांग कर रहे हैं, तो दूसरी ओर कैलाश विजयवर्गीय आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए अदालत जाने की तैयारी में हैं। आने वाले दिनों में यह मामला मध्य प्रदेश की राजनीति में और अधिक चर्चा का विषय बना रह सकता है।