मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के लेटर बम के बाद,भड़के विजयवर्गीय, बोले कहां से आई ये चिट्ठी? मुझे जानकारी नहीं,भाजपा की ओर से नहीं आई आधिकारिक प्रतिक्रिया
पत्र में मध्य प्रदेश के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को लेटर लिखकर इंदौर की उपेक्षा का आरोप लगाया है. उन्होंने मास्टर प्लान, मेट्रोपॉलिटन रीजन, आरजीपीवी, पीथमपुर, एयरपोर्ट विस्तार और सिंहस्थ से जुड़े मुद्दे उठाते हुए कहा कि समाधान नहीं होने पर वे जनता की आवाज सार्वजनिक मंच पर उठाएंगे.
कैलाश विजयवर्गीय ने सवाल उठाया कि जिन्होंने यह खबर प्रकाशित की है, उनसे पूछा जाना चाहिए कि यह जानकारी किस आधार पर प्रकाशित की गई?
इंदौर। मध्य प्रदेश की राजनीति में उस समय हलचल मच गई जब इंदौर के एक स्थानीय अखबार में यह दावा प्रकाशित हुआ कि प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को एक पत्र लिखकर इंदौर की लगातार हो रही उपेक्षा पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अखबार में प्रकाशित कथित पत्र में इंदौर के विकास, मास्टर प्लान, मेट्रोपॉलिटन रीजन, औद्योगिक परियोजनाओं, एयरपोर्ट विस्तार और सिंहस्थ से जुड़े कई मुद्दों का उल्लेख किया गया। हालांकि मामला सामने आने के कुछ ही घंटों बाद कैलाश विजयवर्गीय ने इस पूरे दावे को सिरे से खारिज कर दिया और कहा कि उन्हें ऐसी किसी चिट्ठी की जानकारी नहीं है।
मीडिया से बातचीत के दौरान जब विजयवर्गीय से कथित पत्र के बारे में पूछा गया तो उन्होंने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, "कहां से लाते हो ये जानकारी? कौन-सा पत्र? जिस अखबार ने खबर छापी है, उसी से पूछिए।" जब पत्रकारों ने दोबारा सवाल किया तो उन्होंने कहा, "मैंने भी खबर पढ़ी है। पता नहीं कहां से ऐसी बातें लिख देते हैं। मुझे इस तरह की किसी चिट्ठी की जानकारी नहीं है।"
हालांकि विजयवर्गीय के इनकार के बावजूद इस कथित पत्र ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि क्या वास्तव में भाजपा के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं है और क्या इंदौर को लेकर सरकार के भीतर असंतोष बढ़ रहा है।
कथित पत्र में क्या-क्या दावे?
अखबार में प्रकाशित कथित पत्र के अनुसार, विजयवर्गीय ने मुख्यमंत्री को पांच प्रमुख मुद्दों पर अपनी नाराजगी से अवगत कराया है। पत्र में आरोप लगाया गया कि प्रदेश के विकास और वित्तीय संसाधनों का बड़ा हिस्सा उज्जैन पर खर्च किया जा रहा है, जबकि इंदौर जैसे आर्थिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण शहर की लगातार अनदेखी की जा रही है।
सबसे पहला मुद्दा इंदौर के मास्टर प्लान का बताया गया। दावा किया गया कि नगरीय प्रशासन विभाग ने करीब दो वर्ष पहले मास्टर प्लान का प्रस्ताव भेज दिया था, लेकिन आज तक उसे मंजूरी नहीं मिली। कई बार चर्चा और पत्राचार के बावजूद कोई निर्णय नहीं लिया गया।
दूसरा मुद्दा उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन का है। कथित पत्र में कहा गया कि प्रदेश की सबसे बड़ी आर्थिक गतिविधियों का केंद्र इंदौर है, लेकिन मेट्रोपॉलिटन रीजन के नामकरण और विकास में उसे पीछे रखा गया। इससे इंदौर के महत्व को कम करने का प्रयास हुआ।
तीसरा मुद्दा एसजीएसआईटीएस (SGSITS) से जुड़ा बताया गया। पत्र में दावा किया गया कि राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के पुनर्गठन में भोपाल, उज्जैन और जबलपुर को प्राथमिकता दी गई, जबकि 1952 से स्थापित प्रतिष्ठित एसजीएसआईटीएस और इंदौर के 50 से अधिक इंजीनियरिंग कॉलेजों की अनदेखी की गई।
चौथा मुद्दा औद्योगिक विकास से जुड़ा है। कथित पत्र के अनुसार, पीथमपुर देश के सबसे बड़े औद्योगिक क्षेत्रों में शामिल है, जहां 650 से अधिक एमएसएमई और 176 से ज्यादा बड़े उद्योग संचालित हैं। इसके बावजूद राष्ट्रीय स्तर की टेस्टिंग लैब और प्रोडक्ट सर्टिफिकेशन सेंटर की स्थापना लंबित है, जबकि उज्जैन के विक्रमपुरी क्षेत्र में नई औद्योगिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
पांचवां मुद्दा इंदौर एयरपोर्ट के विस्तार का बताया गया है। पत्र में आरोप लगाया गया कि एयरपोर्ट विस्तार के लिए आवश्यक जमीन उपलब्ध नहीं कराई जा रही। साथ ही सिंहस्थ की तैयारियों में इंदौर की उपेक्षा, जल संकट के समय राहत नहीं मिलने और विकास परियोजनाओं में भेदभाव का भी उल्लेख किया गया।
विजयवर्गीय पहले भी जता चुके हैं नाराजगी
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यदि कथित पत्र वास्तविक नहीं भी है, तब भी इंदौर के विकास को लेकर विजयवर्गीय पहले कई बार अपनी नाराजगी सार्वजनिक रूप से जाहिर कर चुके हैं। कुछ समय पहले उन्होंने कैबिनेट बैठकों से दूरी भी बनाई थी, जिसे लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई थीं। बाद में वे बैठकों में शामिल हुए, लेकिन इंदौर को लेकर उनकी सक्रियता लगातार बनी रही।
कांग्रेस ने साधा निशाना
कथित पत्र सामने आने के बाद कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर हमला बोल दिया। कांग्रेस नेता केके मिश्रा ने कहा कि यदि मंत्री ने वास्तव में ऐसा पत्र लिखा है तो यह इंदौर की जनता की आवाज है। उन्होंने कहा कि शहर बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है और यदि एक मंत्री मुख्यमंत्री को इस संबंध में पत्र लिखने को मजबूर हो जाए तो यह सरकार की कार्यशैली पर बड़ा सवाल है। उन्होंने विजयवर्गीय के इस कथित कदम को साहसिक बताते हुए कहा कि इंदौर के हित में उठाई गई हर आवाज का स्वागत होना चाहिए।
दिग्विजय सिंह का तंज
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी इस मामले पर सोशल मीडिया के जरिए प्रतिक्रिया दी। उन्होंने अखबार की खबर साझा करते हुए लिखा कि वह विजयवर्गीय की पीड़ा को समझ सकते हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि "जो मोहन यादव कभी आपके चरण छूते थे, वही आज आपके साथ ऐसा व्यवहार कर रहे हैं। समय का फेर है। मेरी सहानुभूति आपके साथ है। जय सिया राम।" दिग्विजय सिंह के इस बयान के बाद मामला और अधिक राजनीतिक रंग लेता नजर आया।
भाजपा की ओर से नहीं आई आधिकारिक प्रतिक्रिया
अब तक भाजपा संगठन या मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से इस कथित पत्र को लेकर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं विजयवर्गीय स्वयं साफ कर चुके हैं कि उन्होंने ऐसा कोई पत्र लिखने की जानकारी नहीं दी है। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि वायरल पत्र असली है या महज राजनीतिक चर्चा का हिस्सा।
फिलहाल क्या है स्थिति?
फिलहाल पूरे विवाद का केंद्र वही कथित पत्र है, जिसकी सत्यता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। एक ओर अखबार के दावे हैं तो दूसरी ओर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का स्पष्ट इनकार। ऐसे में जब तक इस पत्र की आधिकारिक पुष्टि नहीं होती, तब तक इसे प्रमाणित दस्तावेज नहीं माना जा सकता। लेकिन इतना तय है कि इस पूरे घटनाक्रम ने मध्य प्रदेश भाजपा की अंदरूनी राजनीति और इंदौर के विकास को लेकर नई बहस जरूर छेड़ दी है। आने वाले दिनों में सरकार और भाजपा संगठन की प्रतिक्रिया के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि यह मामला केवल अफवाह था या इसके पीछे कोई वास्तविक राजनीतिक असंतोष मौजूद है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस