कूनो में चीते KNG22 की गोली लगने से मौत: STF जांच के बाद अब केंद्र की हाईलेवल कमेटी भी करेगी पड़ताल, CBI जांच के लिए कोर्ट पहुंचा मामला; चीतों की सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल
मध्य प्रदेश के मुरैना क्षेत्र में घायल मिले 19 महीने के चीते KNG22 की इलाज के दौरान मौत हो गई। उसके शरीर से पांच छर्रे मिलने के बाद गोली लगने की पुष्टि हुई है। मामले की जांच STF कर रही है और यह प्रोजेक्ट चीता शुरू होने के बाद गोली से चीते की मौत का पहला मामला माना जा रहा है।
कूनो नेशनल पार्क में 19 महीने के नर चीते KNG22 की गोली लगने से हुई मौत पर केंद्र सरकार ने गंभीर रुख अपनाया है. केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने मामले की जांच के लिए मध्य प्रदेश में एक उच्च-स्तरीय टीम भेजी है. यह घटना प्रोजेक्ट चीता की सफलता पर सवाल खड़े कर रही है.
श्योपुर/भोपाल। मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से एक चिंताजनक मामला सामने आया है। 19 माह के नर चीते KNG22 की गोली लगने से मौत के बाद अब इस पूरे मामले की जांच का दायरा बढ़ गया है। मध्य प्रदेश सरकार की ओर से गठित विशेष कार्यबल (STF) पहले ही मामले की जांच कर रहा है, वहीं केंद्र सरकार की एक उच्चस्तरीय कमेटी भी जल्द मध्य प्रदेश पहुंचकर घटना की जांच करेगी। इस बीच मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग को लेकर न्यायालय में याचिका भी दायर की गई है।
कूनो में चीते की मौत के बाद सबसे बड़ा सवाल उसकी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठ रहा है। आखिर संरक्षित क्षेत्र से निकलकर मुरैना के जंगल तक पहुंचे चीते को गोली कैसे लगी? गोली किसने चलाई और किस परिस्थिति में चलाई गई? क्या घटना से पहले चीते की निगरानी व्यवस्था में कोई चूक हुई थी? इन सभी सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आएंगे।
केंद्र की हाईलेवल कमेटी करेगी जांच
केंद्र सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्चस्तरीय कमेटी गठित की है। इस कमेटी में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के महानिरीक्षक स्तर के अधिकारी, वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) के अतिरिक्त निदेशक और क्षेत्रीय उपनिदेशक शामिल हैं।
केंद्रीय टीम मध्य प्रदेश सरकार के साथ समन्वय बनाकर घटना से जुड़े तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल करेगी। जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि चीते को गोली किन परिस्थितियों में लगी और घटना के पीछे क्या वजह रही।
राज्य सरकार ने भी मामले की जांच के लिए पहले ही वन विभाग और पुलिस अधिकारियों को शामिल करते हुए STF का गठन किया है। अब राज्य और केंद्र दोनों स्तरों पर जांच होने से मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।
CBI जांच के लिए कोर्ट में याचिका
चीते की मौत के मामले में वन विभाग की कथित लापरवाही और सुरक्षा व्यवस्था में चूक का आरोप लगाते हुए वाइल्डलाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे ने न्यायालय का रुख किया है। उन्होंने मामले की CBI जांच कराने की मांग को लेकर याचिका दायर की है।
याचिका में केंद्र सरकार, मध्य प्रदेश के प्रमुख सचिव वन विभाग, NTCA तथा केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को प्रतिवादी बनाया गया है। याचिका रजिस्टर्ड होने के बाद सीनियर एडवोकेट आदित्य सांघी ने न्यायालय से मामले में जल्द सुनवाई का अनुरोध किया है।
अजय दुबे ने चीता प्रोजेक्ट के तहत चीतों की संदिग्ध मौत और शिकार जैसी घटनाओं को लेकर केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने केंद्रीय वन मंत्री भूपेंद्र यादव से इस्तीफे की मांग भी की है।
25 अक्टूबर को घायल अवस्था में मिला था चीता
मादा चीता निर्वा के शावक KNG22 को 25 अक्टूबर 2026 को मुरैना जिले के जंगलों में घायल अवस्था में पाया गया था। सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम ने उसे रेस्क्यू किया और श्योपुर वन मंडल के माध्यम से जबलपुर के पशु चिकित्सा केंद्र पहुंचाया गया।
वहां विशेषज्ञ चिकित्सकों ने चीते का उपचार शुरू किया। उसकी हालत गंभीर होने के कारण आपातकालीन सर्जरी की गई। ऑपरेशन के दौरान उसके शरीर से बंदूक के पांच छर्रे निकाले गए।
चिकित्सकीय जांच में छर्रों के कारण शरीर के अंदर कई चोटों की पुष्टि हुई। गंभीर रूप से घायल चीते को बचाने के लिए उपचार जारी रखा गया, लेकिन उसकी हालत में सुधार नहीं हो सका। आखिरकार 27 अक्टूबर को KNG22 की मौत हो गई।
चीते की मौत के बाद यह सवाल और गंभीर हो गया है कि इतने कम उम्र के चीते तक गोली कैसे पहुंची और उसे किसने निशाना बनाया।
चीतों की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर होगी समीक्षा
केंद्रीय कमेटी केवल गोली लगने की घटना की जांच तक सीमित नहीं रहेगी। टीम कूनो और उसके आसपास के इलाकों में चीतों की सुरक्षा, निगरानी और संरक्षण से जुड़े मौजूदा प्रोटोकॉल की भी समीक्षा करेगी।
इस दौरान यह देखा जाएगा कि चीतों की आवाजाही पर किस तरह निगरानी रखी जा रही है। संरक्षित क्षेत्र से बाहर निकलने की स्थिति में वन विभाग की प्रतिक्रिया व्यवस्था कितनी प्रभावी है और ऐसे इलाकों में चीतों की सुरक्षा के लिए क्या प्रबंध किए गए हैं।
जांच के दौरान घटना से जुड़े उपलब्ध साक्ष्यों, चीते के शरीर से निकाले गए छर्रों और घटनास्थल से संबंधित परिस्थितियों की भी पड़ताल की जाएगी। इन सभी पहलुओं के आधार पर आगे की सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव की जरूरत का आकलन किया जाएगा।
जांच रिपोर्ट पर्यावरण मंत्रालय को सौंपी जाएगी
केंद्रीय कमेटी अपनी जांच पूरी करने के बाद रिपोर्ट और सुझाव पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को सौंपेगी। रिपोर्ट में घटना की परिस्थितियों के साथ-साथ चीतों की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सुझाव भी दिए जा सकते हैं।
फिलहाल जांच का सबसे अहम पहलू यह पता लगाना है कि KNG22 को गोली किसने मारी। इसके साथ ही यह भी जांच का विषय है कि घटना आकस्मिक थी या जानबूझकर चीते को निशाना बनाया गया था।
घटना के बाद बढ़ा दबाव
KNG22 की मौत के बाद वन विभाग और चीता प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों पर भी सवाल उठ रहे हैं। वन्यजीव संरक्षण से जुड़े लोगों का कहना है कि चीतों को भारत में बसाने के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के बीच उनकी सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।
मुरैना के जंगल में चीते का घायल मिलना और उसके शरीर से पांच बंदूक के छर्रे बरामद होना इस बात को लेकर गंभीर चिंता पैदा करता है कि संरक्षित क्षेत्र के बाहर चीतों की सुरक्षा किस तरह सुनिश्चित की जा रही है।
वहीं, जांच एजेंसियों के सामने अब कई सवाल हैं—चीता कूनो से कितनी दूर पहुंचा था, उसकी गतिविधियों पर निगरानी कैसे हो रही थी, गोली चलाने वाला कौन था और क्या संबंधित विभागों को घटना की जानकारी समय पर मिली थी।
जिम्मेदारी तय होने का इंतजार
फिलहाल STF और केंद्रीय कमेटी की जांच के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर साफ होगी। यदि जांच में सुरक्षा व्यवस्था में किसी तरह की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई का रास्ता भी खुल सकता है।
दूसरी ओर, CBI जांच की मांग को लेकर दायर याचिका पर न्यायालय का रुख भी इस मामले में महत्वपूर्ण होगा। यदि मामले की जांच CBI को सौंपने का आदेश होता है तो जांच का दायरा और बढ़ सकता है।
KNG22 की मौत ने एक बार फिर कूनो में चीतों की सुरक्षा को लेकर बहस तेज कर दी है। अब सबकी नजर STF और केंद्रीय कमेटी की जांच पर है। जांच रिपोर्ट से ही स्पष्ट हो सकेगा कि 19 माह के इस चीते को गोली किन परिस्थितियों में लगी, सुरक्षा व्यवस्था में कहां चूक हुई और इस घटना के लिए आखिर कौन जिम्मेदार है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस