महिलाओं और बच्चों को कानून की जानकारी देकर बनाया जाएगा सशक्त, नुक्कड़ नाटक और जागरूकता कार्यक्रमों से फैलाया जाएगा विधिक संदेश
उरई में विधिक साक्षरता एवं जागरूकता अभियान के तहत गांधी इंटर कॉलेज में छात्र-छात्राओं को पॉक्सो एक्ट, महिला एवं बाल अधिकार, श्रमिक अधिकार, बंधुआ मजदूरी उन्मूलन और निःशुल्क कानूनी सहायता की जानकारी दी गई। सचिव मनाली चंद्रा ने बच्चों को लैंगिक अपराधों के प्रति जागरूक रहने और अपने अधिकारों को समझने की अपील की। 25 सितंबर से 2 अक्टूबर तक चलने वाले अभियान में प्रभातफेरी, नुक्कड़ नाटक और पेंटिंग के माध्यम से भी लोगों को कानून के प्रति जागरूक किया जाएगा।
उरई में महिलाओं और बच्चों को कानून की जानकारी, मनाली चंद्रा बोलीं- जागरूकता से ही सशक्त बनेगा समाज
कानून की जानकारी से सशक्त होंगी महिलाएं और बच्चे, उरई में शुरू हुआ विधिक जागरूकता अभियान
उरई में विधिक जागरूकता अभियान का आगाज, महिलाओं-बच्चों के अधिकारों और कानून की दी जानकारी
उरई। महिलाओं और बच्चों को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करने तथा उन्हें अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने में सक्षम बनाने के उद्देश्य से उरई में विधिक साक्षरता एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार जनपद न्यायाधीश वीरजेन्द्र कुमार सिंह के मार्गदर्शन में तहसील उरई के गांधी इंटर कॉलेज में आयोजित शिविर में छात्र-छात्राओं को विभिन्न कानूनों, अधिकारों और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई।
यह विधिक साक्षरता एवं जागरूकता अभियान 25 सितंबर से 2 अक्टूबर 2026 तक चलाया जा रहा है। अभियान के दौरान तहसील, विकासखंड, विद्यालयों और विधि महाविद्यालयों में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसका उद्देश्य आम लोगों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों को उनके अधिकारों तथा कानून में उपलब्ध संरक्षण और सहायता के बारे में जानकारी देना है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव मनाली चंद्रा ने छात्र-छात्राओं को पॉक्सो अधिनियम-2012 के प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को लैंगिक अपराधों से सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से पॉक्सो कानून बनाया गया है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि बच्चों के साथ होने वाले किसी भी प्रकार के गलत व्यवहार, लैंगिक उत्पीड़न, शोषण अथवा छेड़छाड़ को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि बच्चों के विरुद्ध होने वाले अपराधों की जानकारी होना स्वयं उनकी सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। विद्यार्थियों को यह समझना चाहिए कि किसी भी प्रकार की परेशानी या अपराध की स्थिति में वे भरोसेमंद अभिभावक, शिक्षक अथवा संबंधित कानूनी सहायता व्यवस्था से मदद ले सकते हैं। कानून की जानकारी व्यक्ति को अपने अधिकारों को समझने और उनका उपयोग करने में सक्षम बनाती है।
शिविर में महिला एवं बाल अधिकार, बंधुआ मजदूरी उन्मूलन, श्रमिक अधिकार, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम सहित विभिन्न कानूनी प्रावधानों पर जानकारी दी गई। इसके साथ ही आम नागरिकों के लिए संचालित विभिन्न सरकारी योजनाओं और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से उपलब्ध कराई जाने वाली निःशुल्क विधिक सहायता के बारे में भी बताया गया।
सचिव मनाली चंद्रा ने कहा कि महिलाओं और बच्चों को कानून की जानकारी देकर उन्हें सशक्त बनाया जा सकता है। जब किसी व्यक्ति को अपने अधिकारों और कानून में उपलब्ध संरक्षण की जानकारी होती है, तो वह अन्याय अथवा अपराध की स्थिति में उचित कदम उठाने में अधिक सक्षम होता है। इसी उद्देश्य से विधिक जागरूकता कार्यक्रमों को विद्यालयों और ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि 25 सितंबर से 2 अक्टूबर तक जिले के विभिन्न तहसीलों, विकासखंडों, विद्यालयों और विधि महाविद्यालयों में प्रतिदिन विधिक जागरूकता एवं साक्षरता शिविर आयोजित किए जाएंगे। अभियान के दौरान कानून से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां सरल भाषा में लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
2 अक्टूबर को होंगे नुक्कड़ नाटक और प्रभातफेरी
अभियान के समापन अवसर पर 2 अक्टूबर को अहिंसा दिवस के अवसर पर विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस दौरान प्रभातफेरी, नुक्कड़ नाटक, पेंटिंग और अन्य जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से लोगों को कानून और अधिकारों की जानकारी दी जाएगी। नुक्कड़ नाटक के माध्यम से कानूनी विषयों को सरल और प्रभावी तरीके से आम लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा, ताकि महिलाएं और बच्चे अपने अधिकारों को आसानी से समझ सकें।
कार्यक्रम के अंत में सचिव मनाली चंद्रा ने छात्र-छात्राओं को अपने विरुद्ध होने वाले लैंगिक अपराधों के प्रति जागरूक रहने और आवश्यकता पड़ने पर उचित सहायता लेने की शपथ दिलाई।
शिविर का संचालन कर रहे पीएलवी महेश सिंह परिहार ने लोक अदालतों और सुलह-समझौता केंद्र के लाभों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विवादों के समाधान के लिए विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से विभिन्न कानूनी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। उन्होंने लोगों से इन सुविधाओं का लाभ उठाने की अपील की।
उन्होंने विद्यार्थियों को यह भी बताया कि कई मामलों में लोगों को कानूनी प्रक्रिया की जानकारी नहीं होने के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में विधिक सेवा प्राधिकरण की सहायता महत्वपूर्ण हो सकती है। निःशुल्क विधिक सहायता की जानकारी समाज के उन वर्गों तक पहुंचाना जरूरी है, जिन्हें कानूनी मदद की आवश्यकता है लेकिन संसाधनों की कमी के कारण वे उचित सहायता नहीं ले पाते।
कार्यक्रम के अंत में गांधी इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य रमेश चंद्र राठौर ने सभी अतिथियों और आयोजन से जुड़े लोगों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ अपने कानूनी अधिकारों और सामाजिक जिम्मेदारियों की जानकारी होना भी आवश्यक है।
इस अवसर पर सुधीर कुमार गुप्ता, उदय सिंह यादव, हेमंत कुमार सिंह, विकास उदैनिया, बलवंत सिंह, सत्येंद्र कुमार त्रिपाठी, सुरेंद्र विक्रम सिंह, मनोज कुमार राजपूत, जितेंद्र कुमार वर्मा, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जालौन के डीईओ दीपक नारायण, पीएलवी महेंद्र कुमार मिश्रा, योगेंद्र सिंह तखेले सहित अन्य लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भाग लिया और कानूनी जागरूकता से जुड़ी जानकारी प्राप्त की।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस