दिवाली से पहले मोहन कैबिनेट के बड़े फैसले: भोपाल-इंदौर-जबलपुर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर को मिली मंजूरी, 3 लाख रोजगार का लक्ष्य
दिवाली से पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में भोपाल-इंदौर-जबलपुर कॉरिडोर को इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के रूप में विकसित करने को मंजूरी दी गई। परियोजना के लिए ₹100 करोड़ की सरकारी राशि से नई कंपनी बनाई जाएगी। पहले चरण में 3 हजार से 10 हजार एकड़ भूमि विकसित करने की योजना है। मार्च 2028 तक एक लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश और करीब तीन लाख रोजगार की संभावना जताई गई है। इसके अलावा साल में दो बार MPPSC परीक्षा, नए एयरपोर्ट और हवाई पट्टियों तथा निवेश-अनुकूल श्रम कानूनों पर भी जोर दिया गया है।
कैबिनेट बैठक में कई अहम प्रस्तावों पर लगी मुहर, ₹100 करोड़ से बनेगी नई कंपनी; मार्च 2028 तक एक लाख करोड़ निवेश का अनुमान
भोपाल। दिवाली से पहले मध्यप्रदेश की मोहन सरकार ने औद्योगिक विकास, निवेश और रोजगार को लेकर कई अहम फैसले किए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में गुरुवार सुबह मंत्रालय में हुई कैबिनेट बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक की शुरुआत वंदेमातरम के गायन से हुई। खास बात यह रही कि कैबिनेट बैठक के बाद मीडिया को फोन कर फैसलों की जानकारी देने के लिए आमंत्रित किया गया।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्वयं मीडिया से चर्चा कर कैबिनेट के फैसलों की जानकारी दी। बैठक में भोपाल-इंदौर-जबलपुर कॉरिडोर को इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के रूप में विकसित करने को अहम मंजूरी दी गई है। सरकार का दावा है कि इससे महाकौशल सहित प्रदेश के कई हिस्सों में औद्योगिक गतिविधियों, निवेश और रोजगार को नई गति मिलेगी।
भोपाल-इंदौर-जबलपुर कॉरिडोर बनेगा इंडस्ट्रियल कॉरिडोर
मुख्यमंत्री ने बताया कि जबलपुर से शुरू होकर भोपाल होते हुए प्रदेश की व्यापारिक राजधानी इंदौर तक जाने वाले कॉरिडोर को औद्योगिक विकास के नए केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। यह केवल सड़क निर्माण की परियोजना नहीं होगी, बल्कि इसके जरिए पूरे क्षेत्र में उद्योग, व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की व्यापक योजना तैयार की गई है।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना के क्रियान्वयन के लिए उद्योग विभाग के माध्यम से एक नई कंपनी का गठन किया गया है। यह कंपनी इकोनॉमिक कॉरिडोर के रूप में काम करेगी और पूरी तरह राज्य सरकार के स्वामित्व में होगी।
सरकार की ओर से कंपनी के लिए ₹100 करोड़ की राशि उपलब्ध कराई गई है। इसकी गवर्निंग काउंसिल की अध्यक्षता मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वयं करेंगे। मुख्यमंत्री के मुताबिक इससे निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज होगी और अलग-अलग विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकेगा।
पहले चरण में 3 हजार से 10 हजार एकड़ जमीन होगी विकसित
मुख्यमंत्री ने कहा कि जबलपुर, नरसिंहपुर से लेकर रायसेन तक का क्षेत्र औद्योगिक विकास की दृष्टि से काफी संभावनाशील है। इस इलाके में पर्यटन, खनन, कृषि और भारी उद्योगों के विस्तार की पर्याप्त संभावनाएं हैं।
इसके साथ ही सड़क, बिजली, पानी और विमानन जैसी बुनियादी सुविधाएं भी मौजूद हैं। सरकार का मानना है कि इन सुविधाओं के कारण यहां नए उद्योग स्थापित करने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया जा सकता है।
कॉरिडोर के प्रथम चरण में 3,000 से 10,000 एकड़ तक भूमि विकसित करने की योजना है। इसके जरिए उद्योगों के लिए आवश्यक आधारभूत ढांचा तैयार किया जाएगा और निवेशकों को सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा।
मार्च 2028 तक एक लाख करोड़ से ज्यादा निवेश का अनुमान
सरकार ने इस कॉरिडोर को निवेश और रोजगार के लिहाज से भी महत्वपूर्ण बताया है। मुख्यमंत्री के अनुसार मार्च 2028 तक एक लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश का अनुमान है।
इस निवेश से करीब एक लाख लोगों को प्रत्यक्ष और दो लाख लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना जताई गई है। यानी शुरुआती स्तर पर करीब तीन लाख लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।
इसके अलावा आगामी तीन वर्षों में तीन लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश और छह लाख से अधिक लोगों के लिए रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना सरकार ने जताई है।
महाकौशल को मिल सकती है औद्योगिक विकास की नई ताकत
भोपाल-इंदौर-जबलपुर कॉरिडोर का सबसे बड़ा असर महाकौशल क्षेत्र पर पड़ने की उम्मीद जताई जा रही है। जबलपुर और आसपास के जिलों को औद्योगिक गतिविधियों से जोड़ने के साथ कृषि, खनन और पर्यटन आधारित उद्योगों को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।
सरकार का उद्देश्य कॉरिडोर के आसपास निवेश का ऐसा वातावरण तैयार करना है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ें और युवाओं को अपने ही क्षेत्र में काम मिल सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि परियोजना के लिए राज्य की अन्य कंपनियों के संचालन से मिले अनुभव और विशेषज्ञता का भी उपयोग किया जाएगा। इससे विकास कार्यों को तेज गति से आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
युवाओं के लिए साल में दो बार MPPSC परीक्षा
कैबिनेट से जुड़े संकल्प में युवाओं के हित में भी महत्वपूर्ण बात सामने आई है। मध्यप्रदेश में अब वर्ष में दो बार राज्य लोक सेवा आयोग की परीक्षाएं आयोजित करने की बात कही गई है।
इसका उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया को अधिक समयबद्ध और पारदर्शी बनाना है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए साल में दो अवसर मिलने से भर्ती प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है।
सरकार की ओर से युवाओं के भविष्य और रोजगार के अवसरों को लेकर इसे महत्वपूर्ण कदम बताया गया है।
नए एयरपोर्ट और हवाई पट्टियों से कनेक्टिविटी को बढ़ावा
कैबिनेट से जुड़े संकल्प में मध्यप्रदेश में हवाई कनेक्टिविटी मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है। राज्य में नए हवाई अड्डों और नई हवाई पट्टियों के निर्माण का उल्लेख किया गया है।
सरकार का कहना है कि बेहतर हवाई संपर्क से पर्यटन, व्यापार और क्षेत्रीय आवागमन को नई गति मिलेगी। औद्योगिक कॉरिडोर के साथ बेहतर एयर कनेक्टिविटी निवेशकों के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
नए श्रम कानूनों से निवेश-अनुकूल माहौल का दावा
सरकार ने राज्य में लागू किए गए नए श्रम कानूनों को भी निवेश के लिहाज से अहम बताया है। इनके माध्यम से उद्योगों को कई सुविधाएं मिलने का दावा किया गया है।
सरकार के मुताबिक इससे प्रदेश में निवेश-अनुकूल वातावरण तैयार करने और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन को भी गति मिलने की उम्मीद है।
दिवाली से पहले सरकार का विकास और रोजगार पर फोकस
गुरुवार को हुई कैबिनेट बैठक में लिए गए फैसलों से सरकार ने औद्योगिक विकास, निवेश, रोजगार, युवाओं की भर्ती और हवाई कनेक्टिविटी को प्राथमिकता देने का संकेत दिया है। सबसे बड़ा फैसला भोपाल-इंदौर-जबलपुर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर को लेकर रहा, जिसके जरिए महाकौशल से लेकर प्रदेश के अन्य हिस्सों में उद्योगों के विस्तार की योजना है।
₹100 करोड़ की शुरुआती सरकारी राशि से नई कंपनी के गठन और मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में गवर्निंग काउंसिल के जरिए परियोजना को आगे बढ़ाने की तैयारी है। सरकार की नजर बड़े निवेश के साथ रोजगार के नए अवसर पैदा करने पर है। आने वाले वर्षों में इस कॉरिडोर के जरिए कितना निवेश जमीन पर उतरता है और कितने रोजगार पैदा होते हैं, यह इसकी वास्तविक सफलता का महत्वपूर्ण पैमाना होगा।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस