पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने अपने हाथों से पहनाए जूते: भाजपा की जीत के बाद पूरा हुआ सुरेंद्र रावत का संकल्प, 2023 में हार के बाद लिया था नंगे पैर रहने का प्रण
सुरेंद्र रावत ने संकल्प लिया था कि जब तक डॉ. नरोत्तम मिश्रा को कोई बड़ा पद नहीं मिलता, तब तक वे चप्पल-जूते नहीं पहनेंगे। इसी संकल्प के चलते नरोत्तम मिश्रा ने रावत को अपने हाथों से जूते पहनाए और उसकी लेस बांधी। हालांकि ये अलग बात है कि उन्हें अभी तक पार्टी की ओर से कोई बड़ा पद नहीं मिला है।
मध्य प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। जहां वे अपने गृह जिले दतिया के गोराघाट में आयोजित एक पादुका ग्रहण समारोह में अपने कार्यकर्ता सुरेंद्र रावत को अपने हाथों से जूते पहनाते दिखाई दिए हैं। उनका ये वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है।
भाजपा की जीत के बाद 3 साल से नंगे पैर घूम रहे सुरेंद्र रावत ने पहनी पादुकाएं: 2023 में पोलिंग पर हार के बाद लिया था प्रण, नरोत्तम मिश्रा ने अपने हाथों से पहनाए जूते
दतिया। मध्यप्रदेश के दतिया जिले में भाजपा कार्यकर्ता सुरेंद्र रावत के संकल्प की इन दिनों चर्चा हो रही है। गोराघाट निवासी सुरेंद्र रावत ने 2023 के विधानसभा चुनाव में अपनी पोलिंग पर भाजपा की हार के बाद पादुकाएं न पहनने का प्रण लिया था। उन्होंने संकल्प लिया था कि जब तक भाजपा की जीत नहीं होगी, तब तक वह नंगे पैर रहेंगे। करीब तीन साल तक अपने संकल्प पर कायम रहने के बाद अब भाजपा की जीत के साथ उनका प्रण पूरा हुआ।
2026 के विधानसभा उपचुनाव में सुरेंद्र रावत की पोलिंग पर भाजपा को जीत मिली। इसके बाद गोराघाट में आयोजित एक कार्यक्रम में पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने सुरेंद्र रावत को समझाया और उनके संकल्प को पूरा कराने के लिए अपने हाथों से उन्हें पादुकाएं पहनाईं। इस दौरान उन्होंने सुरेंद्र रावत को गले लगाया और सम्मानित भी किया।
2023 में भाजपा की हार के बाद लिया था संकल्प
जानकारी के मुताबिक, 2023 के विधानसभा चुनाव में सुरेंद्र रावत की पोलिंग पर भाजपा प्रत्याशी की हार हुई थी। चुनाव परिणाम के बाद उन्होंने पादुकाएं त्यागने का संकल्प लिया। उन्होंने तय किया था कि भाजपा की जीत होने तक वह चप्पल-जूते नहीं पहनेंगे और नंगे पैर ही रहेंगे।
बताया जाता है कि उनके इस संकल्प को कुछ विवरणों में डॉ. नरोत्तम मिश्रा को बड़ा पद मिलने अथवा दतिया विधानसभा चुनाव जीतने की इच्छा से भी जोड़ा गया था। हालांकि, उनके संकल्प का मुख्य उद्देश्य भाजपा की जीत से जुड़ा बताया गया।
सुरेंद्र रावत ने चुनाव के बाद अपना संकल्प निभाते हुए लंबे समय तक बिना पादुकाओं के रहकर अपने राजनीतिक विश्वास और पार्टी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई।
भाजपा की जीत के बाद पूरा हुआ प्रण
2026 के विधानसभा उपचुनाव में उनकी पोलिंग पर भाजपा की जीत हुई। इसके बाद कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों में सुरेंद्र रावत के संकल्प को लेकर चर्चा शुरू हो गई। इसी क्रम में गोराघाट में पादुका ग्रहण समारोह आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने सुरेंद्र रावत को पादुकाएं पहनाईं। उन्होंने अपने हाथों से उन्हें जूते पहनाए और गले लगाकर उनका सम्मान किया। इस दौरान मौजूद भाजपा कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने भी इस क्षण को खास बताया।
सुरेंद्र रावत के लिए यह केवल पादुकाएं पहनने का अवसर नहीं था, बल्कि करीब तीन साल पहले लिए गए संकल्प के पूरा होने का क्षण था।
नरोत्तम मिश्रा बोले- कार्यकर्ता ही पार्टी की ताकत
कार्यक्रम के दौरान डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने भाजपा कार्यकर्ताओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि पार्टी की असली ताकत उसके मेहनती और ऊर्जावान कार्यकर्ता हैं। कार्यकर्ता संगठन और नेतृत्व की ओर से दी गई जिम्मेदारियों को पूरी मेहनत और लगन के साथ निभाते हैं।
उन्होंने कहा कि भाजपा को मजबूत बनाने में कार्यकर्ताओं के संघर्ष, समर्पण और निरंतर मेहनत की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। कार्यकर्ताओं की इसी मेहनत और संगठन के प्रति प्रतिबद्धता ने भाजपा को दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बनाने में अहम योगदान दिया है।
कार्यक्रम में मौजूद रहे कई भाजपा पदाधिकारी
गोराघाट में आयोजित इस कार्यक्रम में भाजपा के कई पदाधिकारी, कार्यकर्ता और स्थानीय लोग मौजूद रहे। पूर्व जिलाध्यक्ष रघुवीर सिंह कुशवाहा, जिला पंचायत अध्यक्ष धीरू दांगी सहित अन्य भाजपा पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने भी सुरेंद्र रावत के संकल्प पूरा होने के अवसर पर उन्हें बधाई दी।
कार्यक्रम के दौरान सुरेंद्र रावत का सम्मान किया गया। लंबे समय तक नंगे पैर रहने के बाद भाजपा की जीत पर पादुकाएं पहनने की उनकी कहानी स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी हुई है।
सुरेंद्र रावत का कहना है कि उन्होंने जो संकल्प लिया था, उसे पूरी निष्ठा के साथ निभाया। भाजपा की जीत के बाद जब उन्हें पादुकाएं पहनाई गईं तो उनके लिए यह भावुक और यादगार क्षण बन गया। डॉ. नरोत्तम मिश्रा द्वारा अपने हाथों से पादुकाएं पहनाए जाने के बाद कार्यक्रम में मौजूद कार्यकर्ताओं ने भी इसे पार्टी के प्रति कार्यकर्ता की प्रतिबद्धता का उदाहरण बताया।
भाजपा कार्यकर्ता के इस संकल्प और उसके पूरा होने की घटना ने दतिया की स्थानीय राजनीति में एक अलग तरह की चर्चा पैदा कर दी है। चुनावी हार के बाद लिया गया प्रण, वर्षों तक उसका पालन और फिर भाजपा की जीत के बाद पादुकाएं ग्रहण करना लोगों के बीच आकर्षण का विषय बना हुआ है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस