जहरीली शराब कांड में बड़ा एक्शन: सहायक आबकारी आयुक्त समेत 3 अधिकारी निलंबित, संभागीय फ्लाइंग स्क्वाड प्रभारी मुख्यालय अटैच

सागर में जहरीली अवैध शराब से 10 लोगों की मौत हो गई। करीब 35 लोग अस्पताल में भर्ती हैं। मामले में सहायक आबकारी आयुक्त समेत तीन अधिकारी निलंबित किए गए हैं, वहीं उपायुक्त को ग्वालियर में अटैच किया गया है।

जहरीली शराब कांड में बड़ा एक्शन: सहायक आबकारी आयुक्त समेत 3 अधिकारी निलंबित, संभागीय फ्लाइंग स्क्वाड प्रभारी मुख्यालय अटैच

मध्य प्रदेश के सागर में जहरीली शराब पीने से अब तक 11 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें 3 की मौत शनिवार देर रात हो गई थी। वहीं, करीब 35 लोगों की हालत गंभीर है। इनमें से कुछ लोगों के शरीर नीले पड़ गए हैं।

सागर। मध्य प्रदेश के सागर जिले में कथित जहरीली और अवैध शराब के सेवन से हुई मौतों के बाद प्रशासन और आबकारी विभाग में हड़कंप मच गया है। मामले में अब तक 10 लोगों की मौत की पुष्टि सामने आई है, जबकि करीब 35 लोगों को अस्पताल पहुंचाया गया। कई मरीजों की हालत गंभीर बताई जा रही है। गंभीर स्थिति वाले मरीजों को बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल सागर में उपचार के लिए रेफर किया गया है। हालात को देखते हुए मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।

घटना के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने आबकारी विभाग के अधिकारियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। विभाग ने जिम्मेदारी तय करते हुए सागर की सहायक आबकारी आयुक्त कीर्ति दुबे, जिला आबकारी अधिकारी दिलीप खंडाते और बंडा में पदस्थ आबकारी उप निरीक्षक रोशनी उरेते को निलंबित कर दिया है। इसके अलावा उपायुक्त एवं संभागीय फ्लाइंग स्क्वाड प्रभारी नीरजा श्रीवास्तव को मुख्यालय ग्वालियर अटैच किया गया है।

10 मौतों के बाद सरकार का सख्त रुख

सागर जिले में जहरीली शराब से लोगों की मौत की खबर सामने आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर तेजी से कार्रवाई शुरू की गई। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद सागर संभाग के वरिष्ठ अधिकारी प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचे और पूरे मामले की जानकारी ली।

कलेक्टर ने अब तक 10 लोगों की मौत की पुष्टि की है। बताया जा रहा है कि बड़ी संख्या में लोगों ने संदिग्ध अवैध शराब का सेवन किया था। इसके बाद कई लोगों की तबीयत बिगड़ने लगी। उल्टी, बेचैनी और अन्य गंभीर लक्षणों के बाद मरीजों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया।

करीब 35 लोगों को उपचार के लिए अस्पताल लाए जाने की जानकारी सामने आई है। इनमें से गंभीर मरीजों को बेहतर उपचार के लिए बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल सागर रेफर किया गया। चिकित्सकों की निगरानी में मरीजों का इलाज जारी है।

आबकारी विभाग के तीन अधिकारियों पर गिरी गाज

जहरीली शराब कांड के बाद सबसे बड़ी कार्रवाई आबकारी विभाग के अधिकारियों पर हुई है। आबकारी आयुक्त ग्वालियर दीपक सक्सेना ने कार्रवाई की जानकारी देते हुए बताया कि विभाग ने सागर की सहायक आबकारी आयुक्त कीर्ति दुबे, जिला आबकारी अधिकारी दिलीप खंडाते और बंडा में पदस्थ आबकारी उप निरीक्षक रोशनी उरेते को निलंबित कर दिया है।

इन अधिकारियों पर कार्रवाई को मामले में प्रशासनिक जिम्मेदारी तय किए जाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। अवैध शराब की बिक्री और उसके खिलाफ निगरानी व्यवस्था को लेकर अब विभागीय स्तर पर भी सवाल उठने लगे हैं।

इसके साथ ही उपायुक्त एवं संभागीय फ्लाइंग स्क्वाड प्रभारी नीरजा श्रीवास्तव को मुख्यालय ग्वालियर अटैच कर दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद आबकारी विभाग के मैदानी अमले की भूमिका और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

प्रभावित इलाकों में पहुंचा प्रशासनिक अमला

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद सागर संभाग के आयुक्त, पुलिस महानिरीक्षक, कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लिया और मृतकों के परिवारों से मुलाकात की।

अधिकारियों ने परिजनों से घटना की जानकारी ली और उन्हें प्रशासन की ओर से हर संभव सहायता का भरोसा दिलाया। प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल अस्पताल में भर्ती मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना और मामले की वास्तविक वजह का पता लगाना है।

अस्पतालों में भी अधिकारियों ने पहुंचकर मरीजों की स्थिति और इलाज की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। चिकित्सकों से मरीजों की हालत और उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं के संबंध में जानकारी ली गई।

अस्पतालों में बढ़ाई गई निगरानी

घटना के बाद अस्पताल प्रशासन भी अलर्ट मोड पर है। गंभीर मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा देने के लिए उन्हें उच्च स्तरीय स्वास्थ्य केंद्रों में रेफर किया गया है। डॉक्टरों की टीम मरीजों की लगातार निगरानी कर रही है।

प्रशासन की ओर से यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है कि किसी भी मरीज के इलाज में देरी न हो। गंभीर मरीजों के लिए आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

वहीं, जिन परिवारों ने अपने परिजनों को खोया है, उनके बीच शोक और आक्रोश का माहौल है। घटना ने एक बार फिर अवैध शराब के कारोबार और उसकी निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अवैध शराब के नेटवर्क की जांच जरूरी

जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर संदिग्ध शराब कहां से आई और इसे किस स्तर पर लोगों तक पहुंचाया गया। प्रशासन और पुलिस के सामने अवैध शराब के पूरे नेटवर्क का पता लगाने की चुनौती है।

जांच में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि शराब बनाने या बेचने वाले लोगों तक सामग्री कैसे पहुंची, लंबे समय से अवैध कारोबार चल रहा था या नहीं और स्थानीय स्तर पर इसकी जानकारी संबंधित विभागों को थी या नहीं।

तीन आबकारी अधिकारियों के निलंबन और संभागीय फ्लाइंग स्क्वाड प्रभारी को मुख्यालय अटैच किए जाने से साफ है कि सरकार ने मामले को गंभीरता से लिया है। हालांकि, कार्रवाई के साथ-साथ यह भी जरूरी है कि अवैध शराब के स्रोत और इसके पीछे सक्रिय लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।

मौतों का आंकड़ा बढ़ने की आशंका

फिलहाल प्रशासन की सबसे बड़ी चिंता अस्पतालों में भर्ती गंभीर मरीजों को लेकर है। करीब 35 लोगों के अस्पताल पहुंचने और कुछ मरीजों की हालत गंभीर होने के कारण मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका बनी हुई है।

प्रशासन द्वारा स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। वरिष्ठ अधिकारी अस्पतालों और प्रभावित क्षेत्रों में व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहे हैं। आने वाले समय में जांच के आधार पर यह स्पष्ट होगा कि जहरीली शराब की सप्लाई कहां से हुई और इस पूरे मामले में कौन-कौन लोग जिम्मेदार हैं।

सागर की घटना ने प्रदेश में अवैध शराब के खिलाफ चल रही निगरानी और कार्रवाई की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सरकार की कार्रवाई केवल अधिकारियों के निलंबन तक सीमित रहती है या अवैध शराब के पूरे नेटवर्क तक पहुंचती है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।