नरोत्तम मिश्रा पहुंचे सीएम हाउस; बीजेपी बोली- उनके मार्गदर्शन में जीतेंगे चुनाव-दतिया सीट पर सियासी संग्राम तेज, संगठन और सरकार ने शुरू की नाराजगी दूर करने की कवायद

बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि नरोत्तम मिश्रा के मार्ग दर्शन में हम दतिया चुनाव जीतेंगे. बीजेपी ने आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है

नरोत्तम मिश्रा पहुंचे सीएम हाउस; बीजेपी बोली- उनके मार्गदर्शन में जीतेंगे चुनाव-दतिया सीट पर सियासी संग्राम तेज, संगठन और सरकार ने शुरू की नाराजगी दूर करने की कवायद

हेमंत खंडेलवाल बोले- नरोत्तम मिश्रा के मार्गदर्शन में जीतेंगे दतिया चुनाव, इस्तीफे की बात को किया खारिज

बीजेपी ने आशुतोष तिवारी को बनाया उम्मीदवार, नरोत्तम समर्थकों की नाराजगी बनी चुनौती

भोपाल/दतिया। मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी के अंदर शुरू हुआ विवाद अब प्रदेश की राजनीति में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। बीजेपी के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों द्वारा टिकट कटने के बाद किए गए विरोध प्रदर्शन और हिंसक घटनाओं के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। इसी बीच नरोत्तम मिश्रा शनिवार को मुख्यमंत्री आवास पहुंचे, जहां उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और संगठन महामंत्री अजय जामवाल से मुलाकात की।

बैठक के बाद बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने पूरे मामले पर सफाई देते हुए कहा कि दतिया उपचुनाव के लिए पार्टी ने आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने इस्तीफा देने की बात कही है, लेकिन पार्टी को अभी तक कोई आधिकारिक इस्तीफा प्राप्त नहीं हुआ है। बीजेपी किसी भी कार्यकर्ता का इस्तीफा स्वीकार नहीं करेगी और सभी कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चुनाव मैदान में उतरेगी।

उन्होंने कहा कि दतिया में बीजेपी नरोत्तम मिश्रा के मार्गदर्शन में चुनाव लड़ेगी और जीत हासिल करेगी। प्रदेश अध्यक्ष के इस बयान को पार्टी की ओर से डैमेज कंट्रोल की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

टिकट कटने के बाद समर्थकों में नाराजगी

दतिया विधानसभा सीट लंबे समय से नरोत्तम मिश्रा का राजनीतिक गढ़ मानी जाती रही है। इस सीट से उनका मजबूत जनाधार रहा है और क्षेत्र में उनके समर्थकों की बड़ी संख्या है। उपचुनाव के लिए जब बीजेपी ने आशुतोष तिवारी को प्रत्याशी घोषित किया तो नरोत्तम समर्थकों में नाराजगी सामने आई।

टिकट की घोषणा के बाद कई स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं ने विरोध जताया। कुछ जगहों पर प्रदर्शन हुए और समर्थकों ने पार्टी नेतृत्व के फैसले पर सवाल उठाए। विरोध प्रदर्शन के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई और कुछ स्थानों पर हिंसक घटनाएं भी सामने आईं।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद बीजेपी संगठन सक्रिय हुआ और नाराज नेताओं व कार्यकर्ताओं को समझाने की कवायद शुरू की गई। पार्टी नेतृत्व की कोशिश है कि चुनाव से पहले संगठन में किसी तरह की दरार न दिखाई दे।

मुख्यमंत्री से मुलाकात के मायने

नरोत्तम मिश्रा की मुख्यमंत्री मोहन यादव और बीजेपी संगठन के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात को काफी अहम माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, यह बैठक दतिया में उपजे विवाद को शांत करने और चुनावी रणनीति तय करने के लिहाज से महत्वपूर्ण थी।

नरोत्तम मिश्रा बीजेपी के पुराने और अनुभवी नेताओं में शामिल हैं। उन्होंने लंबे समय तक प्रदेश सरकार में मंत्री के रूप में जिम्मेदारी निभाई है। दतिया क्षेत्र में उनकी पकड़ को देखते हुए पार्टी उन्हें चुनाव प्रचार और संगठन को मजबूत करने में अहम भूमिका दे सकती है।

बीजेपी नेतृत्व यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि टिकट किसी एक व्यक्ति का नहीं बल्कि पार्टी की चुनावी रणनीति का हिस्सा होता है। साथ ही पार्टी यह भी चाहती है कि नरोत्तम मिश्रा और उनके समर्थकों के बीच बेहतर तालमेल बना रहे।

बीजेपी का दावा- एकजुट होकर लड़ेगी पार्टी

हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि बीजेपी एक परिवार की तरह काम करती है और कार्यकर्ताओं की नाराजगी को संवाद के जरिए दूर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पार्टी सभी वरिष्ठ नेताओं के अनुभव का उपयोग करेगी और दतिया उपचुनाव में पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरेगी।

उन्होंने नरोत्तम मिश्रा की भूमिका को अहम बताते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन में बीजेपी चुनाव जीतेगी। इस बयान से पार्टी ने यह संकेत देने की कोशिश की है कि टिकट को लेकर पैदा हुई नाराजगी अब संगठन के लिए चुनौती नहीं बनेगी।

कांग्रेस ने बीजेपी पर साधा निशाना

दतिया मामले को लेकर विपक्षी दल कांग्रेस ने बीजेपी पर हमला बोला है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि बीजेपी के अंदर टिकट वितरण को लेकर असंतोष खुलकर सामने आ गया है। कांग्रेस ने प्रदेश सरकार की कानून व्यवस्था और बीजेपी की अंदरूनी खींचतान पर भी सवाल उठाए हैं।

कांग्रेस का दावा है कि बीजेपी कार्यकर्ताओं की नाराजगी जनता के सामने आ चुकी है और इसका असर चुनाव परिणामों पर पड़ेगा। हालांकि बीजेपी नेताओं का कहना है कि चुनाव के समय कार्यकर्ताओं की नाराजगी सामान्य प्रक्रिया है और इसे जल्द ही सुलझा लिया जाएगा।

दतिया सीट पर प्रतिष्ठा की लड़ाई

दतिया उपचुनाव अब सिर्फ एक विधानसभा सीट का चुनाव नहीं रह गया है, बल्कि यह बीजेपी के लिए संगठनात्मक ताकत और एकजुटता की परीक्षा बन गया है। नरोत्तम मिश्रा की राजनीतिक प्रतिष्ठा और बीजेपी के नए प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के सामने पार्टी की रणनीति दोनों पर नजर रहेगी।

दतिया क्षेत्र में नरोत्तम मिश्रा का प्रभाव लंबे समय से रहा है। ऐसे में बीजेपी के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपने परंपरागत समर्थक वर्ग को पूरी तरह चुनाव अभियान से जोड़ना होगी।

वहीं विपक्ष इस विवाद को चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश करेगा। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि बीजेपी किस तरह नाराज कार्यकर्ताओं को साथ लाती है और चुनावी मैदान में अपनी स्थिति मजबूत करती है।

फिलहाल मुख्यमंत्री आवास पर हुई बैठक के बाद बीजेपी ने स्पष्ट संकेत दिया है कि पार्टी नरोत्तम मिश्रा के अनुभव और प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए दतिया उपचुनाव में पूरी ताकत लगाएगी। अब नजर इस बात पर है कि जमीन पर कार्यकर्ताओं के बीच बनी नाराजगी कितनी जल्दी खत्म होती है और चुनावी समीकरण किस दिशा में जाते हैं।