प्रियंका गांधी के 'गौमूत्र विशेषज्ञ' वाले बयान पर संसद में बवाल, अनुराग ठाकुर ने कहा- वैज्ञानिकों का अपमान कर रही कांग्रेस

प्रि‍यंका के इस बयान के बाद बीजेपी और कांग्रेस के बीच एक नया विवाद शुरू हो गया है. बीजेपी सांसदों ने प्र‍ियंका के इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है.

प्रियंका गांधी के 'गौमूत्र विशेषज्ञ' वाले बयान पर संसद में बवाल, अनुराग ठाकुर ने कहा- वैज्ञानिकों का अपमान कर रही कांग्रेस

अनुराग ठाकुर बोले प्रियंका गांधी ने एक वैज्ञानिक का उपहास उड़ाया है जो कांग्रेस करती आई है

चर्चा के दौरान प्रियंका गांधी ने किसी का नाम नहीं लिया

नई दिल्ली। लोकसभा में कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा की एक टिप्पणी को लेकर संसद में सियासी घमासान छिड़ गया। सार्वजनिक परीक्षाओं में सुधार के लिए केंद्र सरकार द्वारा गठित नई उच्चस्तरीय समिति पर सवाल उठाते हुए प्रियंका गांधी ने समिति के एक सदस्य को बिना नाम लिए "गौमूत्र विशेषज्ञ" बताया। उनके इस बयान को आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामाकोटी की ओर इशारा माना गया। इसके बाद भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पर वैज्ञानिकों का अपमान करने का आरोप लगाया, जबकि कांग्रेस सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने की बात कह रही है।

लोकसभा में यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब प्रियंका गांधी ने परीक्षा सुधारों को लेकर केंद्र सरकार की नई समिति पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि सरकार बार-बार नई समितियां बना रही है, लेकिन पुरानी समितियों की सिफारिशों को लागू नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि राधाकृष्णन समिति की रिपोर्ट आज तक पूरी तरह लागू नहीं हुई और अब नई समिति बना दी गई है, जिसमें आईबी के पूर्व प्रमुख, एक आईटी कंपनी के मालिक और "गौमूत्र के एक्सपर्ट" को शामिल किया गया है।

हालांकि प्रियंका गांधी ने किसी सदस्य का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके बयान को प्रोफेसर वी. कामाकोटी से जोड़कर देखा गया। प्रोफेसर कामाकोटी उन छह विशेषज्ञों में शामिल हैं जिन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित हाई-पावर्ड टास्क फोर्स में नियुक्त किया गया है। इस समिति का उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं को पेपर लीक जैसी घटनाओं से सुरक्षित बनाने और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधारों की सिफारिश करना है।

क्या है हाई-पावर्ड टास्क फोर्स?

हाल ही में संसद से पारित लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) कानून के बाद केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली को और मजबूत बनाने के लिए विशेषज्ञ समिति गठित की है। इस समिति में शिक्षा, प्रशासन, तकनीक और सुरक्षा से जुड़े विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। समिति का मुख्य उद्देश्य ऐसी व्यवस्था तैयार करना है जिससे भविष्य में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और अन्य गड़बड़ियों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

कौन हैं प्रोफेसर वी. कामाकोटी?

प्रोफेसर वी. कामाकोटी देश के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों में गिने जाते हैं और वर्तमान में आईआईटी मद्रास के निदेशक हैं। वह कंप्यूटर विज्ञान और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में लंबे समय से कार्य कर रहे हैं। हालांकि जनवरी 2025 में चेन्नई में दिए गए उनके एक भाषण के बाद वह विवादों में आ गए थे।

अपने संबोधन में उन्होंने कहा था कि गाय के मूत्र में एंटी-फंगल, एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं। उन्होंने दावा किया था कि इस विषय पर कई वैज्ञानिक शोध प्रकाशित हो चुके हैं और कुछ अध्ययनों में इन गुणों का उल्लेख किया गया है। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था, जिसके बाद कई वैज्ञानिकों और विपक्षी दलों ने इसकी आलोचना की और इन दावों को लेकर सवाल उठाए।

कामाकोटी ने दिया था वैज्ञानिक शोध का हवाला

विवाद बढ़ने के बाद प्रोफेसर कामाकोटी ने अपने बयान का बचाव करते हुए कहा था कि उन्होंने व्यक्तिगत राय नहीं रखी बल्कि प्रकाशित शोधपत्रों का उल्लेख किया था। उन्होंने दावा किया कि पीयर-रिव्यू जर्नलों में प्रकाशित कई वैज्ञानिक अध्ययनों में गाय के मूत्र के कुछ एंटी-इन्फेक्टिव गुणों पर शोध किया गया है।

उन्होंने हरियाणा स्थित आईसीएआर-नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा किए गए एक अध्ययन का भी हवाला दिया। साथ ही उन्होंने एशियन जर्नल ऑफ फार्मास्युटिकल रिसर्च समेत अन्य शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित अध्ययनों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस विषय पर वैज्ञानिक शोध उपलब्ध हैं। हालांकि चिकित्सा समुदाय में इन दावों को लेकर अलग-अलग राय रही है और व्यापक चिकित्सीय उपयोग के संबंध में अभी भी अधिक प्रमाणों की आवश्यकता बताई जाती है।

अनुराग ठाकुर का पलटवार

प्रियंका गांधी के बयान पर भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने लोकसभा में तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं का मजाक उड़ाती रही है। अनुराग ठाकुर ने आरोप लगाया कि प्रियंका गांधी ने एक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक का अपमान किया है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि संसद जैसे सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंच पर किसी वैज्ञानिक का उपहास उड़ाना उचित नहीं है। उनके मुताबिक कांग्रेस जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रही है और तथ्यों के बजाय राजनीतिक टिप्पणी कर रही है।

कांग्रेस का निशाना सरकार पर

कांग्रेस का कहना है कि उसका सवाल किसी व्यक्ति विशेष पर नहीं बल्कि सरकार की कार्यशैली पर है। पार्टी का आरोप है कि केंद्र सरकार नई-नई समितियां बनाकर मूल समस्याओं से ध्यान भटकाने का प्रयास करती है, जबकि पहले से मौजूद समितियों की सिफारिशों को लागू करने में गंभीरता नहीं दिखाई गई।

प्रियंका गांधी ने अपने भाषण में विशेष रूप से राधाकृष्णन समिति की रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि उसकी सिफारिशों पर समय रहते अमल किया गया होता तो परीक्षा प्रणाली में कई सुधार पहले ही किए जा सकते थे।

राजनीतिक बहस तेज

इस मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। भाजपा इसे वैज्ञानिकों और शिक्षा जगत का अपमान बता रही है, जबकि कांग्रेस इसे सरकार की नीतियों और समिति गठन पर उठाया गया सवाल बता रही है। संसद के भीतर शुरू हुआ यह विवाद अब राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन गया है।

फिलहाल यह स्पष्ट है कि परीक्षा सुधारों पर शुरू हुई बहस अब राजनीतिक बयानबाजी में बदल गई है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद के साथ-साथ देश की राजनीति में भी चर्चा का प्रमुख विषय बना रह सकता है।