ज्ञानेश कुमार को सरकारी गवाह बन जाना चाहिए: राहुल गांधी का चुनाव आयोग पर बड़ा हमला, बीजेपी ने आरोपों पर किया पलटवार
चुनाव आयोग पर एक खोजी रिपोर्ट के बाद नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी CEC ज्ञानेश कुमार पर हमलावर हैं. उन्होंने उन पर धांधली का आरोप लगाया और तत्काल उनके इस्तीफे की मांग की. राहुल ने ज्ञानेश कुमार को 'देशद्रोही' तक कहा है
राहुल ने दो चुनाव आयुक्तों की 10 महीने में 14 आपत्तियों वाली रिपोर्ट का हवाला दिया; ECI ने कहा कि आंतरिक सवाल सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा, अंतिम फैसले सर्वसम्मति से हुए.
नई दिल्ली। चुनाव आयोग, विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और मतदाता सूची से जुड़े विवाद को लेकर कांग्रेस नेता एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को करीब 55 मिनट की प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, केंद्र सरकार और चुनावी प्रक्रिया को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए। राहुल गांधी ने दावा किया कि 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों में चुनावी प्रक्रिया में धांधली हुई और इसके कारण सत्ता विरोधी लहर का असर दिखाई नहीं दिया। उन्होंने ज्ञानेश कुमार से इस्तीफा देने और कथित घटनाक्रम की जांच में सरकारी गवाह बनने की अपील भी की।
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में चुनाव आयोग को मतदाताओं के वोट का संस्थागत संरक्षक बताया। उनका कहना था कि वोट लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियाद है और अगर वोट की सुरक्षा प्रभावित होती है तो इसका असर संविधान, कानून और संस्थाओं तक पहुंचता है। उन्होंने अपने आरोपों को केवल चुनावी विवाद तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली से जोड़ते हुए सरकार और चुनाव आयोग पर सवाल उठाए।
‘ज्ञानेश कुमार सरकारी गवाह बन जाएं’
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कहा कि उन्हें सरकारी गवाह बन जाना चाहिए और ऐसा करना देशहित में होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों के लिए जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की भूमिका की भी जांच की बात कही। ये सभी बातें राहुल गांधी के राजनीतिक आरोप और दावे हैं, जिन पर संबंधित पक्षों की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने पहले भी ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति को लेकर आपत्ति जताई थी, लेकिन उनकी बात नहीं मानी गई। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि चुनावी व्यवस्था में कथित अनियमितताओं की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
‘वोट चोरी’ को ‘कानून चोरी’ से जोड़ा
राहुल गांधी ने अपने भाषण में ‘वोट चोरी’ और ‘कानून चोरी’ के बीच संबंध बताते हुए कहा कि यदि किसी चुनाव में वोटों के साथ कथित गड़बड़ी होती है और उसी आधार पर प्रतिनिधि चुने जाते हैं, तो उनके द्वारा बनाए गए कानूनों और किए गए संस्थागत बदलावों पर भी सवाल खड़े होते हैं।
उन्होंने कहा कि वोट से संविधान को ताकत मिलती है, संविधान से कानून बनते हैं और कानूनों के आधार पर संस्थाएं काम करती हैं। राहुल गांधी के मुताबिक, यदि वोट की प्रक्रिया ही कमजोर हो जाए तो लोकतांत्रिक व्यवस्था की पूरी श्रृंखला प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा कि मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है।
2024 के चुनावों को लेकर भी लगाए आरोप
राहुल गांधी ने दावा किया कि 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों में हेरफेर हुई थी। उन्होंने कहा कि उनके पास इस संबंध में जानकारी है और वे अपने आरोपों को लेकर आश्वस्त हैं। उन्होंने चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को सत्ता विरोधी लहर के सवाल से भी जोड़ा।
राहुल गांधी ने कहा कि भारत में सरकारों के खिलाफ एंटी-इनकंबेंसी एक सामान्य राजनीतिक प्रक्रिया रही है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का उदाहरण देते हुए कहा कि बांग्लादेश युद्ध में जीत के बाद भी बाद के चुनावी दौर में उन्हें सत्ता विरोधी माहौल का सामना करना पड़ा था। इसके आधार पर उन्होंने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी के खिलाफ वैसी एंटी-इनकंबेंसी क्यों दिखाई नहीं देती। यह राहुल गांधी की राजनीतिक व्याख्या है।
चुनाव आयोग में मतभेद की रिपोर्ट का जिक्र
राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस ऐसे समय हुई जब चुनाव आयोग के भीतर SIR प्रक्रिया को लेकर कथित मतभेदों पर एक खोजी रिपोर्ट सामने आई। रिपोर्ट में दावा किया गया कि पिछले करीब 10 महीनों के दौरान दो चुनाव आयुक्तों ने विभिन्न मुद्दों पर मुख्य चुनाव आयुक्त की राय से असहमति जताई और कई मौकों पर आपत्तियां दर्ज कीं।
राहुल गांधी ने इसी रिपोर्ट का हवाला देते हुए चुनाव आयोग के भीतर उठे सवालों को गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि वोट देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था की नींव है और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करना चुनाव आयोग का मूल दायित्व है।
हालांकि, रिपोर्ट में सामने आए कथित मतभेदों और उनके अर्थ को लेकर अलग-अलग राजनीतिक व्याख्याएं सामने आई हैं। बीजेपी ने राहुल गांधी के निष्कर्षों और उनके द्वारा रिपोर्ट के इस्तेमाल पर सवाल उठाए हैं।
बीजेपी ने राहुल गांधी के आरोपों पर दिया जवाब
राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद बीजेपी ने उनके आरोपों को खारिज करते हुए पलटवार किया। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि राहुल गांधी जिन मीडिया रिपोर्ट्स और दावों का आधार बना रहे हैं, उनमें किसी चुनाव आयुक्त का प्रत्यक्ष बयान या रिकॉर्ड पर स्पष्ट प्रतिक्रिया मौजूद नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब संबंधित चुनाव आयुक्तों की ओर से ऐसा कोई प्रत्यक्ष बयान सामने नहीं आया है तो राहुल गांधी के आरोपों का आधार क्या है।
बीजेपी ने राहुल गांधी के दावों को संदिग्ध और अपुष्ट स्रोतों पर आधारित बताया। सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस के विभिन्न राज्यों में चुनावी प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए राहुल गांधी की चुनावी प्रक्रिया संबंधी दलीलों पर सवाल खड़े किए। बीजेपी की ओर से यह भी कहा गया कि कांग्रेस कई राज्यों में लंबे समय से सत्ता से बाहर रही है और केवल चुनावी परिणामों के आधार पर चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाना उचित नहीं है।
SIR विवाद पर पहले भी आमने-सामने रहे हैं कांग्रेस और चुनाव आयोग
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर राहुल गांधी और चुनाव आयोग के बीच पिछले समय से लगातार बयानबाजी होती रही है। राहुल गांधी पहले भी मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाते रहे हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने पूर्व में उनके ‘वोट चोरी’ संबंधी आरोपों को खारिज करते हुए उनसे अपने दावों को हलफनामे के जरिए साबित करने या सार्वजनिक रूप से माफी मांगने को कहा था।
इस विवाद में मुख्य सवाल मतदाता सूची की शुद्धता, SIR की प्रक्रिया, मतदाताओं के नामों से संबंधित शिकायतों और चुनाव आयोग की संवैधानिक भूमिका को लेकर है। कांग्रेस इन मुद्दों को लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़ रही है, जबकि बीजेपी राहुल गांधी के आरोपों के आधार और प्रमाणों पर सवाल उठा रही है।
आरोपों और जवाबों के बीच बढ़ा राजनीतिक विवाद
गुरुवार की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद चुनाव आयोग और केंद्र सरकार को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। राहुल गांधी ने जहां चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों की जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग की, वहीं बीजेपी ने उनके आरोपों को आधारहीन बताते हुए मीडिया रिपोर्टों की व्याख्या पर सवाल उठाए।
फिलहाल इस पूरे विवाद में दो अलग-अलग पक्ष सामने हैं। राहुल गांधी और कांग्रेस का कहना है कि मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की गहराई से जांच जरूरी है। दूसरी ओर, बीजेपी का तर्क है कि राहुल गांधी के आरोपों के समर्थन में ठोस और प्रत्यक्ष प्रमाण सामने नहीं रखे गए हैं तथा जिन रिपोर्टों का हवाला दिया जा रहा है, उनकी व्याख्या को राजनीतिक आरोपों का आधार बनाया जा रहा है।
राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि यह विवाद केवल किसी एक चुनाव या किसी एक राजनीतिक दल का मुद्दा नहीं है, बल्कि मतदाता के अधिकार और लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़ा विषय है। वहीं बीजेपी की प्रतिक्रिया ने इस मुद्दे को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के एक और दौर में बदल दिया है। अब आगे की बहस इस बात पर केंद्रित रहने की संभावना है कि SIR और मतदाता सूची से जुड़े आरोपों के समर्थन में क्या प्रमाण सामने आते हैं और चुनाव आयोग इन आरोपों पर क्या आधिकारिक जवाब देता है।
English Headline: Rahul Gandhi Demands Action Against CEC Gyanesh Kumar, BJP Hits Back Over Vote Theft Allegations
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