अब राशन भी गांव में, रोजगार भी गांव में: MP सरकार की बड़ी पहल से 7.13 लाख जनजातीय परिवारों को राहत, स्थानीय युवाओं को मिला स्वरोजगार

मध्यप्रदेश सरकार की ‘मुख्यमंत्री राशन आपके ग्राम’ योजना से 20 जिलों के 89 अनुसूचित जनजाति विकासखण्डों के 6575 आश्रित गांवों में रहने वाले करीब 7.13 लाख परिवारों को गांव में ही राशन उपलब्ध कराया जाएगा। योजना के तहत 472 सेक्टर बनाए गए हैं। साथ ही जनजातीय युवाओं को वाहन खरीदने के लिए 2 से 3 लाख रुपये की मार्जिन मनी देकर राशन परिवहन से स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है। वाहन संचालकों को 24 हजार से 31 हजार रुपये मासिक किराया भी मिलेगा।

अब राशन भी गांव में, रोजगार भी गांव में: MP सरकार की बड़ी पहल से 7.13 लाख जनजातीय परिवारों को राहत, स्थानीय युवाओं को मिला स्वरोजगार

7.13 लाख जनजातीय परिवारों को गांव में ही मिलेगा राशन, 6575 आश्रित गांव योजना के दायरे में

राशन के लिए दूर जाने की परेशानी खत्म, जनजातीय युवाओं को वाहन देकर रोजगार से जोड़ा

472 सेक्टर में होगी राशन परिवहन व्यवस्था, युवाओं को मिलेगा नियमित आय का अवसर

भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने जनजातीय और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों तक राशन पहुंचाने के साथ-साथ स्थानीय युवाओं को रोजगार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। प्रदेश के 20 जिलों के 89 अनुसूचित जनजाति विकासखण्डों में संचालित ‘मुख्यमंत्री राशन आपके ग्राम’ योजना के माध्यम से अब हितग्राहियों को राशन लेने के लिए दूर स्थित उचित मूल्य की दुकानों तक जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। राशन सामग्री को परिवहन वाहनों के जरिए सीधे आश्रित ग्रामों तक पहुंचाया जा रहा है।

खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के अनुसार, इस योजना से प्रदेश के 6575 आश्रित ग्रामों के लगभग 7 लाख 13 हजार परिवारों को लाभ मिलेगा। योजना का उद्देश्य केवल राशन वितरण को आसान बनाना नहीं है, बल्कि जनजातीय परिवारों के समय, श्रम और मजदूरी की बचत के साथ-साथ स्थानीय युवाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर तैयार करना भी है।

दूर की राशन दुकानों तक जाने की परेशानी होगी खत्म

जनजातीय क्षेत्रों में भौगोलिक परिस्थितियों के कारण कई गांवों से उचित मूल्य की दुकानें काफी दूरी पर स्थित हैं। ऐसे में ग्रामीण परिवारों को राशन लेने के लिए कई किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता था। गरीब और मजदूर परिवारों के लिए यह परेशानी और बढ़ जाती थी, क्योंकि राशन लेने के लिए उन्हें कई बार अपनी मजदूरी तक छोड़नी पड़ती थी।

आवागमन में लगने वाला समय और किराया भी परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालता था। खासकर दुर्गम और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए राशन दुकान तक पहुंचना एक बड़ी चुनौती बनी रहती थी।

इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने राशन वितरण की व्यवस्था को गांव के स्तर तक पहुंचाने का निर्णय लिया है। अब परिवहन वाहन निर्धारित गांवों में पहुंचेंगे और वहां पात्र हितग्राहियों को राशन उपलब्ध कराया जाएगा। इससे ग्रामीणों को लंबी दूरी तय करने की जरूरत नहीं होगी।

6575 गांवों के 7.13 लाख परिवारों तक पहुंचेगा लाभ

‘मुख्यमंत्री राशन आपके ग्राम’ योजना का दायरा काफी व्यापक है। प्रदेश के 20 जिलों के 89 अनुसूचित जनजाति विकासखण्डों को योजना के अंतर्गत शामिल किया गया है। इन क्षेत्रों के 6575 आश्रित ग्रामों में रहने वाले लगभग 7 लाख 13 हजार परिवारों को योजना का सीधा लाभ मिलने की बात कही गई है।

सरकार का लक्ष्य है कि पात्र परिवारों को उनके गांव में ही खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाए, ताकि सार्वजनिक वितरण प्रणाली का लाभ अंतिम व्यक्ति तक आसानी से पहुंच सके।

योजना के जरिए राशन वितरण में दूरी की समस्या को कम करने के साथ ही ग्रामीण परिवारों के लिए सरकारी व्यवस्था को अधिक सुविधाजनक बनाने का प्रयास किया गया है।

472 सेक्टर में तैयार की गई परिवहन व्यवस्था

योजना के तहत राशन परिवहन के लिए प्रदेश में 472 सेक्टर बनाए गए हैं। इन सेक्टरों के अंतर्गत आने वाले आश्रित ग्रामों तक राशन पहुंचाने के लिए परिवहन व्यवस्था विकसित की गई है।

इस व्यवस्था की खास बात यह है कि राशन परिवहन का काम केवल बाहरी एजेंसियों या बड़े ठेकेदारों के माध्यम से कराने के बजाय अनुसूचित जनजाति वर्ग के स्थानीय हितग्राहियों को अवसर दिया जा रहा है।

चयनित हितग्राहियों को बैंक के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराकर वाहन प्रदान किए गए हैं। इससे राशन वितरण व्यवस्था को स्थानीय स्तर पर मजबूत करने के साथ ही जनजातीय युवाओं को अपने क्षेत्र में ही काम करने का अवसर मिल रहा है।

2 से 3 लाख रुपये तक की मार्जिन मनी से मिली मदद

जनजातीय युवाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती वाहन खरीदने के लिए शुरुआती पूंजी की होती है। सरकार ने इस समस्या को देखते हुए चयनित हितग्राहियों को वाहन खरीदने के लिए 2 से 3 लाख रुपये तक की मार्जिन मनी उपलब्ध कराई है।

इस सरकारी सहायता से युवाओं के लिए वाहन खरीदना आसान हुआ है। वाहन मिलने के बाद वे अपने क्षेत्र के गांवों तक राशन पहुंचाने का काम कर रहे हैं और इसके बदले उन्हें निर्धारित मासिक किराया भी मिल रहा है।

इस तरह योजना ने राशन वितरण और रोजगार को एक ही व्यवस्था से जोड़ दिया है। एक तरफ ग्रामीणों को उनके घर के करीब राशन मिल रहा है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय युवाओं को आय का साधन उपलब्ध हो रहा है।

वाहन संचालकों को मिलेगा नियमित मासिक किराया

योजना के तहत राशन परिवहन करने वाले वाहन संचालकों के लिए मासिक किराये की व्यवस्था भी की गई है। एक टन क्षमता वाले वाहन के लिए 24 हजार रुपये तथा दो टन क्षमता वाले वाहन के लिए 31 हजार रुपये मासिक किराया निर्धारित किया गया है।

इससे वाहन संचालकों को नियमित आय का अवसर मिल रहा है। जनजातीय क्षेत्रों में जहां रोजगार के अवसर सीमित होते हैं, वहां यह व्यवस्था स्थानीय युवाओं के लिए स्वरोजगार का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है।

सरकार की ओर से वाहन खरीदने में सहायता और मासिक किराये की व्यवस्था होने से योजना को रोजगार से जोड़ने की कोशिश की गई है।

राशन के साथ बचेगा समय, श्रम और मजदूरी

योजना का सीधा असर ग्रामीण परिवारों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ने की उम्मीद है। पहले राशन लेने के लिए गांव से दूर दुकान तक जाना पड़ता था। इसमें आने-जाने का खर्च, पूरा दिन लगने और मजदूरी छूटने जैसी समस्याएं सामने आती थीं।

अब राशन गांव में पहुंचने से इन परेशानियों में कमी आएगी। ग्रामीणों को अपने गांव में ही निर्धारित स्थान पर राशन उपलब्ध हो सकेगा। इससे उनका समय और श्रम बचेगा और मजदूर परिवारों को काम छोड़कर दूर राशन लेने जाने की जरूरत कम होगी।

विशेष रूप से महिलाओं, बुजुर्गों और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों के लिए यह व्यवस्था अधिक सुविधाजनक साबित हो सकती है।

सरकार का दोहरा लक्ष्य—सुविधा भी, रोजगार भी

‘मुख्यमंत्री राशन आपके ग्राम’ योजना की सबसे बड़ी विशेषता इसका दोहरा उद्देश्य है। सरकार जहां एक ओर सार्वजनिक वितरण प्रणाली को गांव के करीब ले जा रही है, वहीं दूसरी ओर जनजातीय युवाओं को परिवहन व्यवस्था से जोड़कर रोजगार के अवसर पैदा कर रही है।

इससे योजना केवल राशन वितरण की व्यवस्था तक सीमित नहीं रहती, बल्कि स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देती है। वाहन संचालन, परिवहन और राशन वितरण की पूरी प्रक्रिया में स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिलने की संभावना है।

अंतिम व्यक्ति तक सरकारी सुविधा पहुंचाने की कोशिश

खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा है कि योजना के माध्यम से जनजातीय क्षेत्रों के पात्र परिवारों को उनके गांव में ही राशन उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे उनकी मजदूरी, समय और श्रम की बचत होगी। साथ ही स्थानीय जनजातीय युवाओं को परिवहन व्यवस्था से जोड़कर उन्हें रोजगार का अवसर भी मिलेगा।

सरकार के अनुसार, ‘मुख्यमंत्री राशन आपके ग्राम’ योजना जनजातीय क्षेत्रों में सरकारी सुविधाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसमें राशन की सुविधा, समय की बचत और स्थानीय रोजगार—तीनों पहलुओं को एक साथ जोड़ा गया है।

कुल मिलाकर, मध्यप्रदेश सरकार की यह पहल दूरदराज के जनजातीय गांवों में रहने वाले परिवारों के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली को अधिक सुलभ बनाने के साथ-साथ युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण प्रयोग के रूप में सामने आई है। योजना के व्यापक क्रियान्वयन से आने वाले समय में हजारों परिवारों को राशन के लिए दूरी तय करने की परेशानी से राहत और स्थानीय युवाओं को नियमित आय का अवसर मिलने की उम्मीद है।