सिंधिया राजघराने के 40 हजार करोड़ की संपत्ति विवाद में नया मोड़: 78 साल पुराने 'द कोवेनेंट' से तय होगा हक? प्रतिमा और कनिका देवी ने उठाए सवाल
सिंधिया राजघराने की 40 हजार करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति बंटवारे को लेकर ग्वालियर की जिला कोर्ट में मामला चल रहा है। इसकी अगली सुनवाई 28 जुलाई को होना है। संपत्तियों को लेकर वर्षों से चल रहे विवाद के पटाक्षेप में नई उलझन आ गई है।
सिंधिया राजघराने के 40,000 करोड़ रुपये के संपत्ति विवाद में 78 साल पुराना 'द कोवेनेंट' दस्तावेज अहम कड़ी बन गया है।
देश के सबसे प्रतिष्ठित राजघरानों में शामिल सिंधिया परिवार की हजारों करोड़ रुपये की संपत्ति का विवाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। करीब चार दशक से चले आ रहे इस संपत्ति विवाद के समाधान की उम्मीद जगी थी, लेकिन अब एक नई आपत्ति ने पूरे मामले को फिर पेचीदा बना दिया है।
सिंधिया राज परिवार की संपत्ति के बंटवारे को लेकर तैयार हो चुके समझौते पर अब ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी बुआ पदमा राजे की बेटी प्रतिमा देवी ने सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रतिमा देवी ने अदालत में आवेदन देकर कहा है कि संपत्ति के बंटवारे में उन्हें उनका उचित अधिकार नहीं मिला है। उन्होंने मांग की है कि जब तक उनकी आपत्ति पर सुनवाई नहीं हो जाती, तब तक समझौते को अंतिम मंजूरी न दी जाए।
इस मामले में जिला अदालत ने सुनवाई के लिए 28 जुलाई की तारीख तय की है। अब सबकी नजर इस सुनवाई पर टिकी हुई है कि क्या वर्षों पुराने विवाद का समाधान निकल पाएगा या फिर संपत्ति बंटवारे की प्रक्रिया एक बार फिर लंबी कानूनी लड़ाई में बदल जाएगी।
40 हजार करोड़ की संपत्ति पर विवाद
सिंधिया राज परिवार की संपत्ति देश के कई हिस्सों में फैली हुई है। अनुमान के मुताबिक इस संपत्ति की कीमत करीब 40 हजार करोड़ रुपये बताई जाती है। इसमें ऐतिहासिक महल, हवेलियां, जमीनें, निवेश, ट्रस्ट और अन्य बहुमूल्य संपत्तियां शामिल हैं।
ग्वालियर का प्रसिद्ध जयविलास पैलेस, ऊषा किरण पैलेस, रानी महल, छोटी विश्रांति, हिरण्यवन कोठी, शिवपुरी का माधव विलास पैलेस, इंदौर का हैप्पी विलास, उज्जैन का कालियादेह पैलेस, पुणे का प्रभात विलास पैलेस, दिल्ली का सिंधिया विला, ग्वालियर हाउस, मुंबई का समुद्र महल और वाराणसी का सिंधिया घाट जैसी संपत्तियां इस विरासत का हिस्सा हैं।
इन संपत्तियों का ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्व भी बहुत ज्यादा है, क्योंकि ये केवल जमीन और इमारतें नहीं बल्कि सिंधिया राजवंश की वर्षों पुरानी पहचान और विरासत का प्रतीक मानी जाती हैं।
पन्ना रत्न का शिवलिंग सबसे खास विरासत
संपत्ति विवाद में सबसे ज्यादा चर्चा जिस विरासत की होती है, उनमें पन्ना रत्न से निर्मित दुर्लभ शिवलिंग भी शामिल है। इसे सिंधिया परिवार की धार्मिक आस्था और शाही परंपरा का महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है।
इसके अलावा परिवार से जुड़े कई ट्रस्ट, कंपनियों में निवेश, शेयर और अन्य मूल्यवान संपत्तियां भी विवाद के दायरे में हैं। यही वजह है कि इस मामले में केवल आर्थिक नहीं बल्कि ऐतिहासिक और पारिवारिक भावनाएं भी जुड़ी हुई हैं।
1988 में शुरू हुआ था विवाद
सिंधिया परिवार में संपत्ति को लेकर विवाद की शुरुआत साल 1988 में हुई थी। उस समय माधवराव सिंधिया और उनकी बहनों वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे और उषा राजे के बीच संपत्ति को लेकर मतभेद सामने आए थे।
बाद में यह मामला अदालत तक पहुंच गया। शुरुआत में माधवराव सिंधिया ने इस कानूनी लड़ाई को संभाला। लेकिन साल 2001 में उनके निधन के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी बहन चित्रांगदा राजे इस मामले में पक्षकार बन गए।
धीरे-धीरे यह विवाद कई अलग-अलग मामलों में बदल गया और अदालतों में दर्जनों याचिकाएं लंबित हो गईं।
'द कोवेनेंट' दस्तावेज पर टिकी नजर
इस पूरे विवाद में सबसे अहम भूमिका 78 साल पुराने दस्तावेज 'द कोवेनेंट' की मानी जा रही है। आजादी के बाद रियासतों के भारत में विलय के समय तैयार किए गए इस दस्तावेज में राज परिवारों की संपत्ति और अधिकारों से जुड़े कई प्रावधान शामिल थे।
सिंधिया संपत्ति विवाद में भी इस दस्तावेज को महत्वपूर्ण आधार माना जाता है। अब सवाल यह है कि क्या 'द कोवेनेंट' के आधार पर परिवार के सभी सदस्यों के अधिकार तय हो पाएंगे या फिर नए कानूनी विवाद सामने आएंगे।
2017 में मामला पहुंचा हाईकोर्ट
साल 2017 में संपत्ति से जुड़े सभी प्रमुख मामले हाईकोर्ट पहुंचे। इसके बाद कई वर्षों तक कानूनी प्रक्रिया चलती रही। लंबी सुनवाई के बाद दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता का रास्ता अपनाया गया।
परिवार के दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों और मध्यस्थों के बीच कई दौर की बैठकें हुईं। इन बैठकों के बाद संपत्ति के बंटवारे का एक संभावित फार्मूला तैयार किया गया।
दोनों पक्षों ने जिला अदालत में जल्द सुनवाई के लिए आवेदन भी दिए थे। 20 जुलाई को इस मामले में सुनवाई हुई और ऐसा लग रहा था कि दशकों पुराना विवाद अब खत्म होने की ओर बढ़ रहा है।
प्रतिमा देवी की आपत्ति से फिर बढ़ी मुश्किल
लेकिन इसी बीच प्रतिमा देवी की आपत्ति ने पूरे मामले को फिर बदल दिया। उनका कहना है कि प्रस्तावित बंटवारे में उनके अधिकारों का ध्यान नहीं रखा गया है।
अब अदालत को यह तय करना होगा कि उनकी आपत्ति कितनी उचित है और क्या समझौते में बदलाव की जरूरत है। इसके अलावा कनिका देवी की ओर से भी अपने अधिकारों को लेकर सवाल उठाए जाने की बात सामने आई है।
क्या खत्म होगा 40 साल पुराना विवाद?
सिंधिया परिवार का संपत्ति विवाद केवल एक परिवार का मामला नहीं है, बल्कि यह देश के इतिहास, राजशाही विरासत और कानूनी अधिकारों से जुड़ा हुआ विषय है।
अगर सभी पक्ष अदालत के फैसले को स्वीकार करते हैं तो वर्षों पुराना विवाद खत्म हो सकता है। लेकिन अगर नई आपत्तियां और दावे सामने आते रहे तो मामला और लंबा खिंच सकता है।
अब 28 जुलाई की सुनवाई बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसी से यह साफ होगा कि समझौते का रास्ता आगे बढ़ेगा या फिर 40 हजार करोड़ की इस विरासत को लेकर कानूनी लड़ाई एक नए दौर में प्रवेश करेगी।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस