पूर्व मंत्री पारस जैन का निधन: 77 साल की उम्र में ली अंतिम सांस, प्रदेशभर में शोक
भाजपा के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मंत्री पारस जैन का 77 वर्ष की आयु में सोमवार सुबह इंदौर के ज्यूपिटर अस्पताल में निधन हो गया। वे लंबे समय से बीमार थे। उनके निधन से उज्जैन सहित पूरे प्रदेश में शोक की लहर है।
भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री पारस जैन का निधन: 77 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस, उज्जैन में आज दोपहर 3 बजे अंतिम यात्रा
मध्य प्रदेश की राजनीति के वरिष्ठ और सम्मानित नेताओं में शामिल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व कैबिनेट मंत्री पारसचंद्र जैन का सोमवार सुबह 77 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने इंदौर के ज्यूपिटर अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन से भाजपा संगठन, उज्जैन सहित पूरे मध्य प्रदेश में शोक की लहर दौड़ गई है। पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, वे पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे और इंदौर के ज्यूपिटर अस्पताल में उनका उपचार जारी था। सोमवार सुबह इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली।
पारस जैन का निधन प्रदेश की राजनीति के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है। वे भाजपा के उन नेताओं में शामिल थे जिन्होंने लंबे समय तक संगठन और सरकार दोनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके निधन की खबर मिलते ही विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक संगठनों और उनके समर्थकों ने गहरा शोक व्यक्त किया। सोशल मीडिया पर भी उन्हें श्रद्धांजलि देने का सिलसिला शुरू हो गया।
विधायक से लेकर कैबिनेट मंत्री तक का लंबा राजनीतिक सफर
पारसचंद्र जैन का राजनीतिक जीवन चार दशक से अधिक समय तक सक्रिय रहा। वे उज्जैन उत्तर विधानसभा क्षेत्र का प्रमुख चेहरा रहे और कई बार इस सीट से विधायक चुने गए। उन्होंने वर्ष 1990 से 1998 तक लगातार उज्जैन उत्तर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। इसके बाद वर्ष 2003 से लगातार वे इसी सीट से विधायक बने और क्षेत्र के विकास के लिए कार्य करते रहे।
मध्य प्रदेश सरकार में उन्होंने कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली। वर्ष 2005 से 2013 तक वे राज्य मंत्री के रूप में वन, स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण जैसे विभागों का दायित्व निभाते रहे। इसके बाद दिसंबर 2013 में उन्हें स्कूल शिक्षा विभाग का कैबिनेट मंत्री बनाया गया।
वर्ष 2016 में मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान उन्हें ऊर्जा तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने शिक्षा, ऊर्जा और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णयों में योगदान दिया।
उज्जैन की राजनीति का मजबूत चेहरा
पारस जैन को उज्जैन की राजनीति का सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिना जाता था। वे संगठन और जनता के बीच समान रूप से लोकप्रिय थे। भाजपा के विस्तार और संगठन को मजबूत करने में उनकी भूमिका को हमेशा याद किया जाएगा। वे अपने सहज स्वभाव, सादगी और कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद के लिए जाने जाते थे।
राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर वे सभी दलों के नेताओं के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखते थे। यही कारण था कि उनके निधन की खबर के बाद विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं के नेताओं ने भी उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
पारसचंद्र जैन का जन्म 20 जून 1950 को धार्मिक नगरी उज्जैन में हुआ था। उनके पिता स्वर्गीय समरथमल जैन अनाज के व्यापारी थे, जबकि माता श्रीमती कैलाशबाई जैन थीं। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा उज्जैन में प्राप्त की और बाद में विक्रम विश्वविद्यालय से बी.कॉम की डिग्री हासिल की।
शिक्षा पूरी करने के बाद वे पारिवारिक अनाज व्यवसाय से जुड़ गए। हालांकि सामाजिक कार्यों और जनसेवा में उनकी रुचि बचपन से ही थी, जिसने आगे चलकर उन्हें राजनीति की ओर प्रेरित किया।
"पारस पहलवान" के नाम से भी थे प्रसिद्ध
अपने मित्रों और परिचितों के बीच पारसचंद्र जैन "पारस पहलवान" के नाम से भी लोकप्रिय थे। उन्हें व्यायाम, योग और खेल गतिविधियों का विशेष शौक था। वे नियमित रूप से स्वास्थ्य और फिटनेस पर ध्यान देते थे तथा युवाओं को भी स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करते थे।
उनका विवाह वर्ष 1978 में अंगूरबाला जैन से हुआ। धार्मिक नगरी उज्जैन में जन्म लेने के कारण उनकी धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में भी गहरी आस्था थी। वे समय-समय पर सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से भाग लेते रहे।
सिंहस्थ महापर्व में निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
वर्ष 2016 के सिंहस्थ महापर्व की तैयारियों में पारस जैन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही। वे सिंहस्थ केंद्रीय समिति के सदस्य रहे और आयोजन की विभिन्न व्यवस्थाओं में सक्रिय योगदान दिया। प्रशासनिक अनुभव और स्थानीय समझ के कारण उन्होंने सिंहस्थ की तैयारियों को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाई थी।
छात्र राजनीति से शुरू हुआ राजनीतिक सफर
पारसचंद्र जैन की राजनीति की शुरुआत छात्र जीवन से हुई। वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के सक्रिय कार्यकर्ता रहे। इसके बाद वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े और संगठनात्मक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाने लगे।
राजनीति में सक्रिय होने से पहले उन्होंने कई सामाजिक अभियानों में भाग लिया और जनसेवा के माध्यम से अपनी अलग पहचान बनाई। वर्ष 1990 में उन्होंने पहली बार उज्जैन उत्तर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। वर्ष 1993 में जब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी, तब भी उन्होंने अपनी सीट बरकरार रखी। इसके बाद 2003 से लगातार वे उज्जैन उत्तर से विधायक चुने जाते रहे।
प्रदेशभर में शोक की लहर
पूर्व मंत्री पारस जैन के निधन की खबर के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं और उनके समर्थकों में गहरा शोक है। उज्जैन सहित प्रदेशभर से लोग उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने उनके निधन को सार्वजनिक जीवन की बड़ी क्षति बताया है।
उनके सहयोगियों का कहना है कि पारस जैन हमेशा जनता के बीच रहने वाले जनप्रतिनिधि थे। वे क्षेत्र की समस्याओं को गंभीरता से सुनते और उनके समाधान के लिए लगातार प्रयास करते थे। उनका सादगीपूर्ण जीवन और सहज व्यवहार उन्हें आम लोगों के बीच लोकप्रिय बनाता था।
आज दोपहर 3 बजे निकलेगी अंतिम यात्रा
पूर्व कैबिनेट मंत्री पारसचंद्र जैन की अंतिम यात्रा सोमवार दोपहर 3 बजे उज्जैन स्थित हिरामिल मार्ग, अरिहंत नगर स्थित उनके निवास से निकाली जाएगी। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में भाजपा नेताओं, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों के शामिल होने की संभावना है।
पारस जैन का निधन केवल भाजपा ही नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश की राजनीति के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। सार्वजनिक जीवन में उनके योगदान, संगठन के प्रति समर्पण और जनसेवा की भावना को लंबे समय तक याद किया जाएगा।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस