उरई में बैंक कर्मचारियों की एकदिवसीय हड़ताल से 400 करोड़ का लेनदेन प्रभावित, 150 कर्मियों ने किया प्रदर्शन
उरई में UFBU के आह्वान पर बैंक कर्मचारियों ने एकदिवसीय हड़ताल कर पांच दिवसीय कार्य सप्ताह, पेंशन अपडेशन और IDBI के निजीकरण पर रोक समेत लंबित मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। हड़ताल से करीब 400 करोड़ रुपये का लेनदेन प्रभावित होने का अनुमान है। इंडियन बैंक झांसी रोड पर 150 कर्मचारियों ने नारेबाजी की और मांगें नहीं माने जाने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी दी।
11 सितंबर की हड़ताल में उरई के बैंक कर्मचारी भी रहे शामिल
इंडियन बैंक झांसी रोड पर 150 कर्मचारियों ने किया प्रदर्शन
पांच दिवसीय कार्य सप्ताह और पेंशन अपडेशन की उठी मांग
IDBI के निजीकरण पर रोक लगाने की मांग
उरई। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के आह्वान पर 11 सितंबर को आयोजित एकदिवसीय राष्ट्रव्यापी बैंक हड़ताल का असर उरई में भी साफ दिखाई दिया। हड़ताल के चलते शहर की बैंकिंग सेवाएं प्रभावित रहीं और बड़ी संख्या में बैंक शाखाओं में कामकाज ठप रहा। बैंक कर्मचारी अपनी लंबित मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे और सरकार तथा बैंक प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी कर विरोध दर्ज कराया।
हड़ताल के कारण उरई क्षेत्र में करीब 400 करोड़ रुपये के बैंकिंग लेनदेन के प्रभावित होने का अनुमान लगाया गया है। हालांकि एटीएम, डिजिटल बैंकिंग और ऑनलाइन लेनदेन जैसी कुछ सेवाएं जारी रहीं, लेकिन बैंक शाखाओं में कर्मचारियों की अनुपस्थिति के कारण नकद जमा-निकासी, चेक से जुड़े कार्य, ऋण संबंधी प्रक्रिया और अन्य काउंटर सेवाओं पर व्यापक असर पड़ा।
आठ लाख बैंक कर्मियों की हड़ताल में उरई के कर्मचारी भी शामिल
UFBU के बैनर तले आयोजित इस हड़ताल में देशभर के करीब आठ लाख बैंक कर्मचारी और अधिकारी शामिल हुए। यूनियनों का कहना है कि बैंकिंग क्षेत्र से जुड़ी कई महत्वपूर्ण मांगें लंबे समय से लंबित हैं। इन्हीं मांगों को लेकर कर्मचारियों ने सरकार और बैंक प्रबंधन पर दबाव बनाने के लिए एकदिवसीय हड़ताल का रास्ता अपनाया।
बैंक कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करना, पेंशन का अपडेशन, बैंक कर्मचारियों से जुड़ी लंबित समस्याओं का समाधान तथा IDBI बैंक के निजीकरण पर रोक जैसी मांगें शामिल हैं। यूनियन नेताओं का कहना है कि कर्मचारियों की मांगों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है, जिसके चलते उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।
इंडियन बैंक झांसी रोड पर 150 कर्मचारियों ने की नारेबाजी
उरई में हड़ताल के दौरान इंडियन बैंक, झांसी रोड शाखा के बाहर बड़ी संख्या में बैंक कर्मचारी एकत्र हुए। करीब 150 कर्मचारियों ने प्रदर्शन करते हुए सरकार और बैंकिंग क्षेत्र की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी की।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि बैंक कर्मचारियों पर लगातार काम का दबाव बढ़ाया जा रहा है, जबकि उनकी मूलभूत मांगों पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा। कर्मचारियों ने पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह लागू करने और पेंशन से संबंधित समस्याओं के समाधान की मांग जोरदार तरीके से उठाई।
प्रदर्शन के दौरान बैंक कर्मचारियों ने एकजुटता दिखाते हुए कहा कि उनकी लड़ाई केवल किसी एक बैंक या संगठन तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे बैंकिंग क्षेत्र के कर्मचारियों के अधिकारों से जुड़ी हुई है।
बैंक नीतियों और निजीकरण के खिलाफ जताया विरोध
प्रदर्शन में शामिल बैंक कर्मचारी नेताओं ने बैंकिंग क्षेत्र में लागू की जा रही कुछ नीतियों पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि बैंक कर्मचारियों को अलग-अलग स्तर पर बांटने और उनकी एकजुटता कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।
कर्मचारी नेताओं ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की भूमिका देश की अर्थव्यवस्था में बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में बैंकों को मजबूत करने की दिशा में काम होना चाहिए, न कि निजीकरण को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
IDBI बैंक के निजीकरण का मुद्दा भी प्रदर्शन के दौरान प्रमुखता से उठाया गया। कर्मचारियों ने मांग की कि सार्वजनिक क्षेत्र से जुड़े बैंकों के भविष्य को लेकर सरकार स्पष्ट नीति बनाए और कर्मचारियों के हितों की अनदेखी न की जाए।
प्रदर्शन में कई बैंक कर्मचारी नेता रहे मौजूद
इंडियन बैंक झांसी रोड शाखा में आयोजित प्रदर्शन में विभिन्न बैंकों के कर्मचारी नेताओं ने भाग लिया। इनमें सुरेश चंद्र (इंडियन बैंक), अमित राजपूत (स्टेट बैंक), कुलदीप वर्मा (इंडियन बैंक), पुष्पेंद्र सिंह (स्टेट बैंक), विक्रांत रायकवार (स्टेट बैंक), उपायन शर्मा (स्टेट बैंक), रजनी कुशवाहा (स्टेट बैंक), सरस्वती (स्टेट बैंक) और विनय कुमार (यूनियन बैंक) सहित अन्य कर्मचारी शामिल रहे।
नेताओं ने कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि यदि उनकी मांगों पर सरकार और बैंक प्रबंधन की ओर से गंभीरता नहीं दिखाई गई तो आंदोलन को आगे और व्यापक किया जाएगा।
प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने नारेबाजी कर अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की। बैंक कर्मियों का कहना था कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को बातचीत के माध्यम से हल कराने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने के कारण हड़ताल का निर्णय लेना पड़ा।
ग्राहकों को भी उठानी पड़ी परेशानी
बैंक कर्मचारियों की हड़ताल का सीधा असर बैंक ग्राहकों पर भी पड़ा। कई ग्राहक बैंक शाखाओं पर पहुंचे, लेकिन शाखाओं में नियमित कामकाज नहीं होने के कारण उन्हें वापस लौटना पड़ा। खासकर नकद लेनदेन, चेक संबंधी कार्य और बैंक अधिकारियों से संबंधित काम के लिए पहुंचे लोगों को परेशानी हुई।
हालांकि डिजिटल बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और एटीएम जैसी सेवाओं के माध्यम से कुछ जरूरी काम किए जा सके, लेकिन जिन ग्राहकों के काम शाखा स्तर पर ही संभव थे, उन्हें हड़ताल समाप्त होने का इंतजार करना पड़ा।
व्यापारिक गतिविधियों पर भी इसका असर देखने को मिला। बैंकिंग लेनदेन प्रभावित होने के कारण कारोबारी भुगतान और अन्य वित्तीय गतिविधियों में देरी की स्थिति बनी रही। स्थानीय स्तर पर करीब 400 करोड़ रुपये के लेनदेन के प्रभावित होने का अनुमान इसी व्यापक असर को दर्शाता है।
मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन होगा तेज
यूनियन नेताओं ने प्रदर्शन के दौरान आगे की रणनीति भी स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि 11 सितंबर की एकदिवसीय हड़ताल के बाद यदि सरकार और बैंक प्रबंधन की ओर से कर्मचारियों की मांगों पर कोई सकारात्मक पहल नहीं होती है, तो आंदोलन को अगले चरण में ले जाया जाएगा।
नेताओं के मुताबिक 28 से 30 सितंबर तक तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल का कार्यक्रम प्रस्तावित है। इसके बाद भी मांगों का समाधान नहीं होने पर 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी गई है।
यूनियन नेताओं ने कहा कि बैंक कर्मचारी अपनी मांगों से पीछे हटने वाले नहीं हैं। सरकार के स्तर पर यदि बातचीत और समाधान की प्रक्रिया शुरू होती है तो कर्मचारी संगठन सकारात्मक रवैया अपनाने के लिए तैयार हैं, लेकिन यदि मांगों की अनदेखी जारी रही तो आंदोलन को और मजबूती के साथ आगे बढ़ाया जाएगा।
उरई में भी आंदोलन जारी रखने का ऐलान
उरई के बैंक कर्मचारी नेताओं ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय स्तर पर तय किए जाने वाले आंदोलन के सभी चरणों में स्थानीय बैंक कर्मचारी भी भागीदारी करेंगे। उनका कहना है कि कर्मचारियों की एकता ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है और सभी बैंक संगठनों के कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर एकजुट हैं।
एकदिवसीय हड़ताल ने यह भी संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में बैंक कर्मचारियों और सरकार के बीच टकराव बढ़ सकता है। यदि बातचीत के जरिए समाधान नहीं निकला तो सितंबर के अंतिम सप्ताह में प्रस्तावित तीन दिवसीय हड़ताल का बैंकिंग सेवाओं पर और व्यापक असर पड़ने की संभावना है।
फिलहाल उरई में बैंक कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन के अगले चरण की तैयारी में जुट गए हैं। 11 सितंबर की हड़ताल के दौरान कर्मचारियों ने जिस तरह एकजुट होकर प्रदर्शन किया, उससे साफ है कि पांच दिवसीय कार्य सप्ताह, पेंशन अपडेशन और निजीकरण जैसे मुद्दे आने वाले दिनों में बैंक कर्मचारी आंदोलन के केंद्र में बने रहेंगे।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस