ब्राह्मणों ने राज ही नहीं किया तो शोषण कैसे?’ नरोत्तम मिश्रा बोले- खामोशी को कमजोरी समझना भूल होगी, सम्मान पर चोट हुई तो मुकाबले के लिए तैयार रहें

मध्य प्रदेश में भाजपा के वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा ने एक कार्यक्रम में हिस्सा लेते हुए ब्राह्मणों से एकजुट होने की अपील की है। इस दौरान उन्होंने ब्राह्मणों के खिलाफ अनर्गल बोलने वालों से भी कहा है कि ब्राह्मण समाज की खामोशी को कमजोरी समझना गलत

ब्राह्मणों ने राज ही नहीं किया तो शोषण कैसे?’ नरोत्तम मिश्रा बोले- खामोशी को कमजोरी समझना भूल होगी, सम्मान पर चोट हुई तो मुकाबले के लिए तैयार रहें

बीजेपी के सीनियर लीडर नरोत्तम मिश्रा ने एक ब्राह्मण सभा को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने कहा कि ब्राह्मणों को सताया जा रहा है. ब्राह्मणों ने कभी राज नहीं किया, फिर कहा जाता है कि वे शोषण करते आए हैं. यह कैसे संभव है? उन्होंने कहा कि ब्राह्मणों को खामोश नहीं रहना चाहिए, लोग खामोशी को कमजोरी समझने लगते हैं. सम्मान के लिए मुकाबला करने को तैयार रहना चाहिए.

शिवपुरी। मध्य प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने शिवपुरी में आयोजित अखिल भारतीय ब्राह्मण सम्मान समारोह में ब्राह्मण समाज के सम्मान, स्वाभिमान और एकता को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समाज के खिलाफ लगातार अनर्गल टिप्पणियां की जा रही हैं, लेकिन समाज अब तक संयम के साथ काम करता आया है। उन्होंने साफ कहा कि ब्राह्मण समाज की खामोशी को कमजोरी समझना बड़ी भूल होगी।

मिश्रा ने कहा कि समाज को अपने सम्मान और स्वाभिमान के मुद्दे पर सजग रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान कलियुग में एक ही शरीर में देव और दानव दोनों का निवास होता है। उनके मुताबिक कुछ लोगों में दानव जाग गया है, इसलिए वे ब्राह्मण समाज के खिलाफ अनर्गल बातें कर रहे हैं। उन्होंने समाज से संयम बनाए रखने की अपील की, लेकिन साथ ही कहा कि सम्मान पर चोट होने पर पीछे हटना उचित नहीं है।

‘लगातार खामोशी कमजोरी में बदल जाती है’

कार्यक्रम में नरोत्तम मिश्रा ने भगवान परशुराम का उल्लेख करते हुए कहा कि ब्राह्मण समाज शास्त्र और शस्त्र दोनों का ज्ञान रखता है। उन्होंने कहा कि समाज ने हमेशा संयम और मर्यादा को महत्व दिया है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि कोई भी समाज के सम्मान पर सवाल उठाता रहे और उसका जवाब न दिया जाए।

उन्होंने कहा कि बहुत ज्यादा खामोशी भी ठीक नहीं होती। लगातार खामोशी धीरे-धीरे कमजोरी समझी जाने लगती है। इसलिए जब समाज के सम्मान और स्वाभिमान पर चोट हो तो मुकाबले के लिए तैयार रहना चाहिए।

अपने संबोधन के दौरान मिश्रा ने कविता की पंक्तियां भी सुनाईं— “युद्ध नहीं जिनके जीवन में, वह भी बड़े अभागे होंगे... या तो रण को टाला होगा, या तो रण से भागे होंगे।” इन पंक्तियों के जरिए उन्होंने समाज को परिस्थितियों का सामना करने और आवश्यकता पड़ने पर मजबूती से अपनी बात रखने का संदेश दिया।

‘कुछ लोग ब्राह्मणों की चमक नहीं देख सकते’

ब्राह्मण समाज के खिलाफ की जा रही टिप्पणियों का जिक्र करते हुए नरोत्तम मिश्रा ने सांप और जुगनू का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि जुगनू ने सांप से पूछा कि जब उससे उसकी कोई दुश्मनी नहीं है और वह सांप की खुराक भी नहीं है, तो फिर सांप उसके पीछे क्यों पड़ा है।

मिश्रा के अनुसार सांप ने जवाब दिया कि उससे जुगनू की चमक देखी नहीं जाती। उन्होंने इसी उदाहरण के जरिए कहा कि कुछ लोगों को ब्राह्मण समाज की चमक और प्रतिष्ठा पसंद नहीं आ रही है। उन्होंने समाज से ऐसी टिप्पणियों पर संयम रखते हुए अपनी एकता और आत्मसम्मान को मजबूत करने की बात कही।

‘ब्राह्मणों ने राज ही नहीं किया तो शोषण कैसे?’

कार्यक्रम में नरोत्तम मिश्रा ने ब्राह्मण समाज पर लगाए जाने वाले शोषण के आरोपों पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि देश के अलग-अलग कालखंडों में अलग-अलग राजवंशों और शासकों ने शासन किया, लेकिन ब्राह्मण कभी शासक नहीं रहे। ऐसे में ब्राह्मण समाज पर हमेशा शोषण करने का आरोप लगाने का आधार क्या है, इस सवाल का जवाब भी दिया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि इतिहास को एकतरफा तरीके से देखने के बजाय अलग-अलग कालखंडों और परिस्थितियों को समझने की जरूरत है। उनके बयान का मुख्य जोर इस बात पर था कि किसी पूरे समाज को एक ही नजरिए से देखने या उस पर सामूहिक आरोप लगाने से सामाजिक समरसता प्रभावित होती है।

‘सनाढ्य, सरयूपारी और कान्यकुब्ज में न बंटें’

नरोत्तम मिश्रा ने ब्राह्मण समाज की एकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि समाज को सनाढ्य, सरयूपारी और कान्यकुब्ज जैसे अलग-अलग वर्गों में बंटकर नहीं रहना चाहिए। छोटे-छोटे मतभेदों को पीछे छोड़कर सभी को एक मंच पर आने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि संगठित समाज ही आगे बढ़ता है और अपनी बात प्रभावी ढंग से रख सकता है। उन्होंने ब्राह्मण समाज से आह्वान किया कि आपसी विभाजन और छोटे मतभेदों से ऊपर उठकर एकजुटता को प्राथमिकता दी जाए।

‘गौरवशाली इतिहास से नई दिशा लें’

पूर्व गृह मंत्री ने कहा कि समाज को अपने गौरवशाली इतिहास, परंपराओं और सांस्कृतिक योगदान को याद रखते हुए भविष्य की दिशा तय करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज का उद्देश्य केवल अपने सम्मान की रक्षा करना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को सही दिशा देना भी होना चाहिए।

उन्होंने ब्राह्मण समाज से सामाजिक एकता बनाए रखने, अपने अधिकारों और सम्मान के प्रति जागरूक रहने तथा आपसी मतभेदों को समाप्त कर सामूहिक रूप से आगे बढ़ने की अपील की।

समारोह में नरोत्तम मिश्रा के बयान के दौरान ब्राह्मण समाज की एकता, सम्मान और स्वाभिमान का मुद्दा प्रमुख रूप से सामने रहा। उनके संबोधन में एक ओर जहां समाज से संयम बनाए रखने की अपील की गई, वहीं दूसरी ओर सम्मान और स्वाभिमान के मुद्दे पर मजबूती से खड़े रहने का संदेश भी दिया गया।