लॉकडाउन में बंद थीं शादियां, फिर कागजों में बांट दिए ₹30 करोड़: सिरोंज विवाह सहायता घोटाले में ईडी का बड़ा खुलासा; पूर्व मंत्री के रिश्तेदार से खुल रहे राज
विदिशा के सिरोंज में 5,923 संदिग्ध विवाह दिखाकर 30.18 करोड़ रुपए की सहायता बांटने के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने तत्कालीन जनपद पंचायत सीईओ शोभित त्रिपाठी को गिरफ्तार किया है। भोपाल की स्पेशल पीएमएलए कोर्ट ने उन्हें 9 सितंबर तक ईडी की कस्टडी में भेज दिया है।
प्रवर्तन निदेशालय की जांच में खुलासा हुआ कि फर्जी पहचान पत्रों के जरिए बैंक अकाउंट खोले गए. खाते में 51 हजार रुपये आते ही इन पैसों की छोटे-छोटे टुकड़ों में नकद निकासी की गई ताकि मनी ट्रेल को छिपाया जा सके.
विदिशा। मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के सिरोंज जनपद पंचायत में सामने आए करीब 30.18 करोड़ रुपए के विवाह सहायता घोटाले की जांच अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) के स्तर पर तेजी से आगे बढ़ रही है। जांच में कोरोना काल के दौरान कथित तौर पर कागजों में शादियां दिखाकर सरकारी सहायता की राशि हड़पने का मामला सामने आया है। खास बात यह है कि जिन वर्षों में कोरोना संक्रमण के कारण लॉकडाउन और सार्वजनिक आयोजनों पर कड़े प्रतिबंध थे, उन्हीं वर्षों में बड़ी संख्या में विवाह दर्शाकर सरकारी योजना की राशि स्वीकृत किए जाने का आरोप है।
ईडी की जांच के अनुसार, वर्ष 2020 और 2021 के दौरान सिरोंज क्षेत्र में ऐसे लोगों के नाम पर विवाह सहायता की राशि मंजूर की गई, जो कथित तौर पर योजना के लिए पात्र नहीं थे। प्रत्येक प्रकरण में करीब 51 हजार रुपए की सरकारी सहायता का प्रावधान था। जांच एजेंसी को विवाह से संबंधित कई दस्तावेज मिले हैं, लेकिन इन आयोजनों के लिए प्रशासन से अनुमति लिए जाने के प्रमाण नहीं मिले। इससे जांच अधिकारियों को संदेह है कि वास्तविक विवाह समारोह के बजाय दस्तावेजों के आधार पर सरकारी रिकॉर्ड में विवाह दर्ज कर सहायता राशि निकाली गई।
कोरोना काल में जब आयोजनों पर थी पाबंदी, तब कैसे दिखीं शादियां?
घोटाले की जांच का सबसे महत्वपूर्ण पहलू कोरोना महामारी का वह दौर है, जब देश में लॉकडाउन लागू था और सामाजिक, धार्मिक तथा पारिवारिक आयोजनों पर प्रतिबंध या कड़े नियम लागू थे। बड़ी संख्या में लोगों के एकत्र होने पर रोक थी और विवाह समारोहों में भी सीमित संख्या में लोगों के शामिल होने की अनुमति जैसी व्यवस्थाएं लागू थीं।
इसके बावजूद सिरोंज जनपद पंचायत के रिकॉर्ड में कथित तौर पर बड़ी संख्या में विवाह कराए जाने और उनके आधार पर सरकारी सहायता जारी किए जाने का मामला सामने आया है। ईडी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन विवाहों में वास्तव में कितने समारोह हुए थे और कितने केवल सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज किए गए।
जांच एजेंसी दस्तावेजों में दर्ज वर-वधू, उनके परिवारों, बैंक खातों और विवाह से जुड़े प्रमाणों का मिलान कर रही है। इसके साथ ही यह भी जांचा जा रहा है कि विवाह सहायता के लिए प्रस्तुत किए गए दस्तावेज वास्तविक थे या उनमें किसी स्तर पर फर्जीवाड़ा किया गया।
दस्तावेज मिले, लेकिन अनुमति के प्रमाण नहीं
ईडी की जांच में एक अहम बिंदु यह सामने आया है कि विवाह से संबंधित दस्तावेज तो उपलब्ध हैं, लेकिन प्रशासनिक अनुमति या वास्तविक आयोजन की पुष्टि करने वाले पर्याप्त प्रमाण नहीं मिले। कोरोना काल में विवाह आयोजन के लिए स्थानीय प्रशासन की अनुमति और निर्धारित नियमों का पालन महत्वपूर्ण था।
ऐसे में जांच एजेंसी अब दस्तावेजों की वास्तविकता की जांच कर रही है। यह भी देखा जा रहा है कि जिन लोगों के नाम पर सहायता राशि जारी की गई, क्या वे वास्तव में विवाह कर चुके थे या उनके नाम का इस्तेमाल केवल सरकारी भुगतान हासिल करने के लिए किया गया।
यदि दस्तावेजों और बैंक खातों के बीच विसंगतियां सामने आती हैं, तो यह घोटाले की कार्यप्रणाली को समझने में महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकती हैं।
51 हजार खाते में आते ही शुरू हो जाता था कैश निकालने का खेल
ईडी की जांच में कथित तौर पर सरकारी सहायता की राशि के बैंक खातों में पहुंचने के बाद उसे तुरंत निकालने का पैटर्न भी सामने आया है। जांच एजेंसी के मुताबिक, कुछ खातों में 51 हजार रुपए की राशि पहुंचने के बाद उसे एकमुश्त निकालने के बजाय छोटे-छोटे हिस्सों में नकद निकाले जाने के संकेत मिले हैं।
जांच एजेंसी को आशंका है कि रकम को छोटे हिस्सों में निकालने का उद्देश्य उसके वास्तविक इस्तेमाल और अंतिम लाभार्थी तक पहुंचने वाली मनी ट्रेल को छिपाना हो सकता है।
अब ईडी बैंक खातों की लेनदेन हिस्ट्री, नकद निकासी, खाताधारकों और उनके संपर्कों की जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि सरकारी खाते से निकलकर राशि किन लोगों तक पहुंची और इसके पीछे कौन-कौन से लोग सक्रिय थे।
फर्जी पहचान पत्रों से खाते खुलने या दुरुपयोग की आशंका
जांच में कथित तौर पर ऐसे बैंक खातों की जानकारी भी सामने आई है, जिनमें फर्जी या संदिग्ध पहचान दस्तावेजों के इस्तेमाल की आशंका है। ईडी यह जांच कर रही है कि क्या कुछ लोगों की पहचान का इस्तेमाल उनके नाम पर खाते खोलने के लिए किया गया या वास्तविक खाताधारकों के खातों का ही सरकारी राशि निकालने के लिए दुरुपयोग हुआ।
बैंक खातों की केवाईसी, मोबाइल नंबर, आधार और अन्य पहचान दस्तावेजों का मिलान किया जा रहा है। इसके जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि खाते वास्तव में किसके नियंत्रण में थे।
डिजिटल डिवाइस से खुल सकता है पूरा नेटवर्क
इस मामले में ईडी ने 3 अक्टूबर 2025 को कई ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया था। तलाशी के दौरान जांच एजेंसी ने कथित तौर पर कई संदिग्ध दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस जब्त किए थे।
इन डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच की गई। बताया जा रहा है कि जांच एजेंसी ने डिलीट किए गए डेटा को भी खंगाला है। ईमेल, डिजिटल फाइल, रिकॉर्ड, लेनदेन से जुड़े दस्तावेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य मामले की पूरी कड़ी जोड़ने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
ईडी का फोकस इस बात पर है कि योजना के आवेदन से लेकर राशि स्वीकृत होने और बैंक खाते से नकदी निकाले जाने तक पूरी प्रक्रिया में कौन-कौन लोग शामिल थे।
तत्कालीन जनपद CEO शोभित त्रिपाठी गिरफ्तार
मामले में जांच का दायरा बढ़ने के बाद ईडी ने तत्कालीन सिरोंज जनपद पंचायत CEO शोभित त्रिपाठी को पीएमएलए के तहत गिरफ्तार किया है। उन्हें 2 सितंबर को गिरफ्तार किए जाने के बाद विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां अदालत ने उन्हें 9 सितंबर तक ईडी की कस्टडी में भेजा है।
शोभित त्रिपाठी का नाम इस मामले में प्रमुख आरोपी के तौर पर सामने आया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वह पूर्व मंत्री और भाजपा विधायक गोपाल भार्गव के रिश्तेदार बताए जाते हैं। हालांकि किसी व्यक्ति का रिश्तेदार होना अपने आप में अपराध में संलिप्तता का प्रमाण नहीं है। मामले में उनकी भूमिका और आरोपों की अंतिम स्थिति जांच और न्यायिक प्रक्रिया से ही स्पष्ट होगी।
30.18 करोड़ की रकम का अंतिम ठिकाना तलाश रही ईडी
ईडी की जांच का सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि कथित तौर पर सरकारी योजना से निकाले गए 30.18 करोड़ रुपए आखिर कहां गए?
जांच एजेंसी बैंक खातों से लेकर नकद निकासी तक की कड़ियां जोड़ रही है। इसके साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि कहीं इस रकम का इस्तेमाल जमीन, मकान, वाहन, कारोबार या अन्य संपत्तियां खरीदने में तो नहीं किया गया।
यदि सरकारी धन से अर्जित रकम को संपत्तियों में लगाया गया है, तो उन संपत्तियों की पहचान और उनके वास्तविक स्वामित्व की जांच भी महत्वपूर्ण होगी।
अब लाभार्थियों से लेकर अधिकारियों तक की जांच
मामले में ईडी अब केवल सरकारी अधिकारियों तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि कथित लाभार्थियों, बैंक खाताधारकों, दस्तावेज तैयार करने वालों और भुगतान की प्रक्रिया से जुड़े लोगों की भूमिका भी जांच रही है।
जांच में यह स्पष्ट करना जरूरी होगा कि कितने विवाह वास्तविक थे, कितने आवेदन फर्जी थे, कितने लोगों को पात्रता के बिना भुगतान किया गया और सरकारी राशि की अंतिम प्राप्ति किसने की।
सिरोंज का यह मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि इसमें सरकारी सहायता योजना के नाम पर बड़ी रकम के कथित दुरुपयोग के आरोप हैं। कोरोना जैसे असाधारण दौर में, जब आम लोगों के लिए सामाजिक समारोह आयोजित करना भी मुश्किल था, उसी समय रिकॉर्ड में विवाह दिखाकर करोड़ों रुपए की सहायता राशि निकालने के आरोपों ने पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
फिलहाल ईडी डिजिटल साक्ष्यों, बैंक लेनदेन और दस्तावेजों की जांच के जरिए कथित घोटाले की पूरी परत खोलने में जुटी है। शोभित त्रिपाठी की ईडी कस्टडी 9 सितंबर तक है, ऐसे में पूछताछ के दौरान सामने आने वाली जानकारी इस मामले में आगे की कार्रवाई और कथित नेटवर्क की तस्वीर साफ करने में अहम हो सकती है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस