पूर्व राज्यसभा सांसद गंगाचरण राजपूत से अधिवक्ता रविकांत गौतम ने चैम्बर निर्माण के लिए लगाई आर्थिक सहायता की गुहार

उरई जनपद न्यायालय के अधिवक्ता रविकांत गौतम (चमारी) ने पूर्व राज्यसभा सांसद गंगाचरण राजपूत को प्रार्थना पत्र देकर न्यायालय परिसर में चैम्बर निर्माण के लिए आर्थिक सहायता की मांग की है। उन्होंने बताया कि स्वयं का चैम्बर न होने से मुवक्किलों से मिलने, दस्तावेज सुरक्षित रखने और न्यायिक कार्यों के संचालन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने जनहित और अधिवक्ताओं के हित को ध्यान में रखते हुए आर्थिक सहयोग प्रदान करने का अनुरोध किया है।

पूर्व राज्यसभा सांसद गंगाचरण राजपूत से अधिवक्ता रविकांत गौतम ने चैम्बर निर्माण के लिए लगाई आर्थिक सहायता की गुहार

पूर्व राज्यसभा सांसद को सौंपा प्रार्थना पत्र

स्वयं का चैम्बर न होने से बढ़ रही परेशानियां

मुवक्किलों से मुलाकात और दस्तावेज रखने में दिक्कत

चैम्बर निर्माण के लिए आर्थिक सहायता की मांग

सकारात्मक निर्णय की जताई उम्मीद

उरई (जालौन)। जनपद न्यायालय उरई में वर्षों से अधिवक्ता के रूप में कार्यरत रविकांत गौतम (चमारी) ने पूर्व राज्यसभा सांसद गंगाचरण राजपूत को एक प्रार्थना पत्र सौंपकर न्यायालय परिसर में अधिवक्ताओं के लिए चैम्बर निर्माण हेतु आर्थिक सहायता प्रदान किए जाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि स्वयं का चैम्बर न होने के कारण उन्हें प्रतिदिन अपने पेशेवर कार्यों के संचालन में अनेक प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। यदि उन्हें चैम्बर निर्माण के लिए आर्थिक सहयोग प्राप्त हो जाए तो न केवल उनकी कार्यक्षमता बढ़ेगी, बल्कि न्यायिक कार्यों का संचालन भी अधिक व्यवस्थित और प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा।

प्रार्थना पत्र में अधिवक्ता रविकांत गौतम ने बताया कि वह जनपद न्यायालय उरई में नियमित रूप से अधिवक्ता के रूप में कार्य करते हैं और इसी पेशे से अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। उन्होंने कहा कि न्यायालय परिसर में उनका स्वयं का कोई स्थायी चैम्बर नहीं है। इस कारण उन्हें प्रतिदिन कभी वरिष्ठ अधिवक्ताओं के चैम्बर में तो कभी अन्य उपलब्ध स्थानों पर बैठकर अपने मुवक्किलों के मुकदमों की तैयारी करनी पड़ती है। यह स्थिति उनके लिए न केवल असुविधाजनक है, बल्कि पेशेवर कार्यों को प्रभावित भी करती है।

उन्होंने कहा कि किसी भी अधिवक्ता के लिए चैम्बर केवल बैठने का स्थान नहीं होता, बल्कि वह उसके न्यायिक कार्यों का केंद्र होता है। यहीं पर मुवक्किलों से मुलाकात होती है, मुकदमों से संबंधित दस्तावेज तैयार किए जाते हैं, कानूनी सलाह दी जाती है तथा न्यायालय में प्रस्तुत किए जाने वाले अभिलेखों को सुरक्षित रखा जाता है। ऐसे में यदि किसी अधिवक्ता के पास अपना चैम्बर न हो तो उसे प्रत्येक दिन अनेक प्रकार की व्यावहारिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

रविकांत गौतम ने बताया कि कई बार मुवक्किलों को भी उन्हें खोजने में कठिनाई होती है। स्थायी स्थान न होने के कारण मुवक्किलों का विश्वास प्रभावित होता है और उन्हें आवश्यक कानूनी परामर्श देने में भी परेशानी आती है। इसके अतिरिक्त महत्वपूर्ण केस फाइलों और दस्तावेजों को सुरक्षित रखने के लिए भी उपयुक्त स्थान उपलब्ध नहीं हो पाता, जिससे अभिलेखों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है।

उन्होंने कहा कि न्यायालय परिसर में अपना चैम्बर होने से अधिवक्ता अधिक व्यवस्थित ढंग से अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकता है। इससे न केवल मुकदमों की तैयारी बेहतर तरीके से होती है, बल्कि मुवक्किलों को भी समय पर उचित कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय में न्यायिक कार्यों का दायरा लगातार बढ़ रहा है, ऐसे में प्रत्येक अधिवक्ता के लिए मूलभूत सुविधाओं का होना अत्यंत आवश्यक है।

प्रार्थना पत्र के माध्यम से अधिवक्ता रविकांत गौतम ने पूर्व राज्यसभा सांसद गंगाचरण राजपूत से आग्रह किया कि वे अधिवक्ताओं की समस्याओं को समझते हुए उनके चैम्बर निर्माण के लिए यथासंभव आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की कृपा करें। उन्होंने कहा कि समाज और न्याय व्यवस्था में अधिवक्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है तथा उनके लिए आधारभूत सुविधाओं का उपलब्ध होना न्यायिक व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने में सहायक सिद्ध होगा।

उन्होंने अपने आवेदन में यह भी उल्लेख किया कि यदि आर्थिक सहयोग प्राप्त हो जाता है तो वह न्यायालय परिसर में अपना चैम्बर बनाकर अधिक व्यवस्थित तरीके से वकालत कर सकेंगे। इससे उनके मुवक्किलों को भी बेहतर सुविधा मिलेगी और न्यायिक कार्यों के संचालन में आने वाली वर्तमान कठिनाइयों से काफी हद तक राहत मिलेगी।

अधिवक्ता ने विश्वास व्यक्त किया कि पूर्व राज्यसभा सांसद गंगाचरण राजपूत समाज के विभिन्न वर्गों की समस्याओं के समाधान के लिए हमेशा सकारात्मक दृष्टिकोण रखते रहे हैं। इसी उम्मीद के साथ उन्होंने अपनी समस्या उनके समक्ष रखी है और आशा जताई है कि उनकी मांग पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए आवश्यक आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि न्यायालय परिसर में कार्यरत अनेक युवा एवं आर्थिक रूप से कमजोर अधिवक्ताओं के सामने स्वयं का चैम्बर न होने की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। ऐसे अधिवक्ताओं को प्रतिदिन बैठने के लिए स्थान तलाशना पड़ता है, जिससे उनके पेशेवर कार्य प्रभावित होते हैं। अधिवक्ता रविकांत गौतम का कहना है कि यदि ऐसे मामलों में जनप्रतिनिधियों एवं समाजसेवियों का सहयोग प्राप्त हो तो अनेक अधिवक्ताओं को राहत मिल सकती है और वे बेहतर ढंग से अपनी सेवाएं दे सकेंगे।

रविकांत गौतम ने अंत में कहा कि उनका उद्देश्य केवल व्यक्तिगत सुविधा प्राप्त करना नहीं, बल्कि न्यायालय परिसर में अधिवक्ताओं के लिए बेहतर कार्य वातावरण सुनिश्चित करना भी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि उनकी इस मांग को जनहित एवं अधिवक्ता हित के दृष्टिकोण से देखा जाएगा और शीघ्र सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा।