प्रधानमंत्री आवास योजना की सूची में फर्जी नाम शामिल करने का आरोप, ग्रामीणों ने डीएम से लगाई जांच की गुहार
कालपी तहसील क्षेत्र के ग्राम चमारी के ग्रामीणों ने प्रधानमंत्री आवास योजना की लाभार्थी सूची में फर्जी और अपात्र नाम शामिल किए जाने का आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी से जांच की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि पात्र गरीब परिवारों को छोड़कर ऐसे लोगों को आवास आवंटित किए गए हैं, जिनके पास पहले से पक्के मकान, वाहन, जमीन या सरकारी नौकरी जैसी सुविधाएं हैं। उन्होंने सूची, आवेदन पत्रों और पात्रता की निष्पक्ष जांच कर अपात्र नाम हटाने तथा जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
कदौरा विकासखंड में गलत तरीके से आवास आवंटन का आरोप, पात्र परिवारों को लाभ दिलाने की मांग
उरई। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) की लाभार्थी सूची में कथित रूप से अपात्र एवं फर्जी नाम शामिल किए जाने का मामला सामने आया है। कालपी तहसील क्षेत्र के ग्राम चमारी के ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का आरोप है कि कदौरा विकासखंड में आवास आवंटन प्रक्रिया के दौरान पात्र गरीब परिवारों की अनदेखी की गई, जबकि ऐसे लोगों के नाम सूची में शामिल कर दिए गए हैं, जो योजना की पात्रता की शर्तों को पूरा नहीं करते हैं।
ग्राम चमारी निवासी नेहा, सरमबाई, गोमती, सुनीता, शिववती, नीतू, पूनम, विनीता, भूरी सहित कई ग्रामीण बुधवार को कलेक्ट्रेट पहुंचे और जिलाधिकारी को शिकायती पत्र सौंपा। ग्रामीणों ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य गरीब, असहाय और आवास विहीन परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराना है, लेकिन ग्राम स्तर पर तैयार की गई लाभार्थी सूची में कथित अनियमितताओं के कारण वास्तविक पात्र परिवार योजना के लाभ से वंचित रह गए हैं।
ग्रामीणों ने शिकायती पत्र में आरोप लगाया कि आवास योजना की सूची तैयार करते समय कई ऐसे परिवारों के नाम शामिल कर दिए गए हैं, जिनके पास पहले से पक्के मकान मौजूद हैं। इसके अलावा कुछ लाभार्थियों के पास चार पहिया वाहन, दोपहिया वाहन, पर्याप्त जमीन और अन्य सुविधाएं होने के बावजूद उन्हें योजना का लाभ दिए जाने का आरोप लगाया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि कुछ ऐसे लोगों के नाम भी सूची में दर्ज हैं, जिनके परिवार में सरकारी नौकरी करने वाले सदस्य हैं, जबकि योजना का लाभ आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद परिवारों के लिए है।
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि प्रधानमंत्री आवास योजना की पूरी लाभार्थी सूची, आवेदन पत्रों और पात्रता संबंधी दस्तावेजों की जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान यदि कोई व्यक्ति अपात्र पाया जाता है तो उसका नाम सूची से हटाया जाए और पात्र गरीब परिवारों को योजना का लाभ दिलाया जाए।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि ग्राम पंचायत स्तर पर पूर्व में तैयार की गई सूची में भी कई गड़बड़ियां सामने आई थीं। आरोप है कि कुछ नामों को गलत तरीके से आगे बढ़ाकर आवास आवंटन सूची में शामिल कराया गया। ग्रामीणों ने इस पूरे मामले की जांच किसी निष्पक्ष अधिकारी से कराने की मांग की है, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से यह भी अनुरोध किया है कि पात्रता की जांच के लिए गांव में टीम भेजकर भौतिक सत्यापन कराया जाए। उनका कहना है कि केवल कागजी प्रक्रिया के आधार पर पात्र और अपात्र लोगों की पहचान करना संभव नहीं है। यदि अधिकारियों द्वारा मौके पर जाकर जांच की जाएगी तो वास्तविक लाभार्थियों की स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पात्र परिवार लंबे समय से पक्के मकान की उम्मीद लगाए बैठे हैं, लेकिन सूची में गड़बड़ी के कारण उन्हें योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। कई गरीब परिवार आज भी कच्चे मकानों या जर्जर घरों में रहने को मजबूर हैं। ऐसे परिवारों को सरकार की महत्वाकांक्षी योजना का लाभ मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना गरीबों के जीवन स्तर को सुधारने वाली महत्वपूर्ण योजना है। इस योजना के तहत मिलने वाली सहायता से जरूरतमंद परिवार अपना पक्का घर बना सकते हैं और बेहतर जीवन जी सकते हैं। लेकिन यदि योजना में अपात्र लोगों को लाभ मिलेगा तो सरकार की मंशा प्रभावित होगी।
ग्रामीणों ने मांग की कि दोषी पाए जाने वाले जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाए, जिन्होंने कथित रूप से गलत नामों को सूची में शामिल कराया है। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए ऐसी शिकायतों की गंभीरता से जांच जरूरी है।
वहीं ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से उम्मीद जताई है कि प्रशासन मामले का संज्ञान लेकर जल्द जांच कराएगा और जांच के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी। ग्रामीणों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी पात्र व्यक्ति का हक छीनना नहीं, बल्कि वास्तविक जरूरतमंद परिवारों तक सरकारी योजना का लाभ पहुंचाना है।
अब सभी की निगाहें प्रशासन की जांच पर टिकी हैं। यदि जांच में शिकायतें सही पाई जाती हैं तो अपात्र लाभार्थियों के नाम हटाकर पात्र परिवारों को योजना का लाभ दिए जाने की संभावना है। वहीं फर्जी तरीके से नाम शामिल कराने वालों पर भी कार्रवाई की जा सकती है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस