पीएम मोदी ने NDA के 45 नए सांसदों से की मुलाकात: बोले- "गुस्से में चिल्लाने की जरूरत नहीं", लुटियंस दिल्ली के जाल से बचने की दी सलाह

प्रधानमंत्री मोदी ने 45 NDA सांसदों के साथ नाश्ते पर बातचीत की और उन्हें सदन की चिंता बाहर न ले जाने व लुटियंस दिल्ली के जाल से बचने की सलाह दी।

पीएम मोदी ने NDA के 45 नए सांसदों से की मुलाकात: बोले- "गुस्से में चिल्लाने की जरूरत नहीं", लुटियंस दिल्ली के जाल से बचने की दी सलाह

पीएम मोदी ने एनडीए के 45 नए लोकसभा सांसदों के साथ शुक्रवार को पीएम आवास पर ब्रेकफास्ट मीटिंग की। इनमें TMC और उद्धव गुट के बागी सांसद भी थे।

नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के दौरान शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में हाल ही में शामिल हुए 45 सांसदों के साथ नाश्ते पर विशेष बैठक की। यह बैठक संसद परिसर में आयोजित हुई, जिसमें प्रधानमंत्री ने सांसदों से संगठन, संसदीय आचरण, जनसंपर्क और सोशल मीडिया के प्रभावी उपयोग को लेकर विस्तार से चर्चा की। बैठक का उद्देश्य नए सांसदों को संसदीय परंपराओं, गठबंधन की कार्यशैली और जनता के साथ संवाद के तरीकों से अवगत कराना था।

बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने सांसदों को स्पष्ट संदेश दिया कि वे सदन के भीतर होने वाली राजनीतिक बहसों और तनाव को बाहर की राजनीति या सार्वजनिक व्यवहार में न आने दें। उन्होंने कहा कि संसद में मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन सांसदों का व्यवहार हमेशा गरिमापूर्ण और संयमित होना चाहिए।

सदन की चिंता बाहर न ले जाएं

सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि संसद के भीतर कई बार ऐसा माहौल बनता है जिससे तनाव या चिंता उत्पन्न हो सकती है, लेकिन जनप्रतिनिधियों को उसे अपने निजी व्यवहार या सार्वजनिक जीवन पर हावी नहीं होने देना चाहिए। उन्होंने सांसदों से कहा कि वे सदन के अंदर की बातों को वहीं तक सीमित रखें और सकारात्मक सोच के साथ जनता के बीच जाएं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सांसदों की पहचान केवल राजनीतिक कार्यकर्ता के रूप में नहीं, बल्कि जनता के प्रतिनिधि के रूप में होती है। इसलिए उनके शब्द, व्यवहार और सार्वजनिक छवि हमेशा संतुलित और जिम्मेदार होनी चाहिए।

"गुस्से में चिल्लाने की जरूरत नहीं"

बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने सांसदों को संसदीय मर्यादा बनाए रखने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी मुद्दे पर अपनी बात मजबूती से रखी जा सकती है, लेकिन गुस्से या आक्रामकता की आवश्यकता नहीं है।

उन्होंने कहा कि सभी सांसद पार्टी की विचारधारा और आधिकारिक रुख से भली-भांति परिचित हैं। इसलिए किसी भी बहस में धैर्य और तथ्यों के साथ अपनी बात रखना अधिक प्रभावी होता है। उन्होंने यह भी कहा कि संसद में शोर-शराबे के बजाय तर्क और संयम लोकतंत्र को मजबूत बनाते हैं।

लुटियंस दिल्ली के जाल से बचने की सलाह

प्रधानमंत्री मोदी ने सांसदों को सलाह दी कि वे "लुटियंस दिल्ली" के प्रभाव और राजनीतिक वातावरण से सावधान रहें। उन्होंने कहा कि सांसदों को जनता से जुड़े रहना चाहिए और दिल्ली की राजनीतिक चर्चाओं या अफवाहों में उलझने के बजाय अपने क्षेत्र के विकास और लोगों की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए।

उन्होंने यह संदेश भी दिया कि जनप्रतिनिधियों की सबसे बड़ी ताकत जनता का विश्वास होता है, इसलिए उनका समय और ऊर्जा लोगों के बीच अधिक लगनी चाहिए।

टीवी पर फालतू बयान देने से बचें

प्रधानमंत्री ने सांसदों को मीडिया में बयान देते समय भी संयम बरतने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि किसी भी सांसद को टीवी चैनलों या सार्वजनिक मंचों पर अनावश्यक या विवादित बयान नहीं देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि गठबंधन के सभी सांसदों को हर परिस्थिति में गरिमा बनाए रखनी चाहिए और ऐसा कोई बयान नहीं देना चाहिए जिससे पार्टी या गठबंधन की छवि प्रभावित हो। उन्होंने जिम्मेदार संवाद और तथ्य आधारित राजनीति पर बल दिया।

सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने का संदेश

प्रधानमंत्री मोदी ने सांसदों से युवाओं के साथ लगातार संवाद बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि आज के दौर में Facebook, Instagram और X जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जनसंपर्क का प्रभावी माध्यम बन चुके हैं।

उन्होंने सांसदों से कहा कि वे इन माध्यमों के जरिए सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं, विकास कार्यों और उपलब्धियों की जानकारी लोगों तक पहुंचाएं। साथ ही युवाओं को खेल, नवाचार, कौशल विकास और राष्ट्र निर्माण की गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास करें।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सोशल मीडिया केवल प्रचार का माध्यम नहीं, बल्कि जनता की समस्याओं को समझने और उनसे सीधे संवाद करने का भी सशक्त मंच है।

गठबंधन की एकजुटता पर दिया जोर

बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने एनडीए को एक परिवार बताते हुए गठबंधन की सामूहिक पहचान और एकजुटता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि गठबंधन में शामिल सभी दलों का उद्देश्य देश का विकास और जनता की सेवा है, इसलिए सभी सांसदों को मिलकर काम करना चाहिए।

उन्होंने सांसदों से कहा कि गठबंधन की मजबूती आपसी विश्वास, समन्वय और सकारात्मक संवाद से ही बनी रहती है।

बागी गुटों के सांसद भी रहे मौजूद

इस बैठक में उद्धव ठाकरे की शिवसेना से अलग हुए गुट और पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर बनी नेशनलिस्ट सिटिजन पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।

एनसीपीआई के नेता जगदीश बसुनिया ने बैठक के बाद कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के साथ हुई चर्चा बेहद सकारात्मक रही। उनके अनुसार प्रधानमंत्री ने एनडीए को एक परिवार बताते हुए सभी दलों को समान महत्व देने की बात कही और सामूहिक नेतृत्व पर जोर दिया।

संसदीय सत्र के बीच अहम बैठक

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार संसद के मानसून सत्र के दौरान आयोजित यह बैठक कई मायनों में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हाल के दिनों में संसद में विभिन्न मुद्दों पर लगातार हंगामा देखने को मिला है। ऐसे समय में प्रधानमंत्री का नए सांसदों को संसदीय शिष्टाचार, अनुशासन और संयम का संदेश देना गठबंधन की कार्यशैली को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

बैठक के माध्यम से प्रधानमंत्री ने यह भी स्पष्ट संकेत दिया कि सांसदों को जनता से जुड़े रहना, विकास कार्यों को प्राथमिकता देना और जिम्मेदार सार्वजनिक व्यवहार अपनाना चाहिए। साथ ही सोशल मीडिया, संवाद और संसदीय मर्यादा के बीच संतुलन बनाए रखना आज के जनप्रतिनिधियों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।