सतना में 8 साल के बच्चे से हैवानियत का आरोप, मोबाइल चोरी के शक में निर्वस्त्र कर बांधा; करंट लगाने और नाखून उखाड़ने का दावा

सतना जिले के चित्रकूट स्थित गुप्त गोदावरी में मोबाइल चोरी के शक में 8 साल के नाबालिग को निर्वस्त्र कर बंधक बनाने और मारपीट करने का मामला सामने आया है

सतना में 8 साल के बच्चे से हैवानियत का आरोप, मोबाइल चोरी के शक में निर्वस्त्र कर बांधा; करंट लगाने और नाखून उखाड़ने का दावा

मोबाइल चोरी के शक में 8 साल के बच्चे से बर्बरता का आरोप, निर्वस्त्र कर बांधा और बेरहमी से पीटा

गुप्त गोदावरी में नाबालिग से हैवानियत का आरोप, पिता ने करंट लगाने और नाखून उखाड़ने का लगाया आरोप

चोरी के शक ने पार की दरिंदगी की हद, 8 साल के बच्चे को बनाया बंधक; वीडियो सामने आने से मचा हड़कंप

सतना/चित्रकूट। मध्य प्रदेश के सतना जिले के चित्रकूट स्थित गुप्त गोदावरी से एक बेहद गंभीर और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। मोबाइल चोरी के शक में एक 8 साल के नाबालिग बच्चे को कथित तौर पर निर्वस्त्र कर हाथ-पैर बांधकर पीटने और प्रताड़ित करने का आरोप लगाया गया है। घटना से जुड़ा वीडियो सामने आने के बाद मामला चर्चा में आया है। बच्चे के पिता की शिकायत पर पुलिस ने 3 सितंबर को तीन लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया था। पुलिस अब मामले में सामने आए वीडियो, शिकायत और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है।

मोबाइल चोरी के शक में दुकान के अंदर ले जाने का आरोप

जानकारी के मुताबिक, गुप्त गोदावरी क्षेत्र में राजेश पटेल की मोबाइल की दुकान है। आरोप है कि मोबाइल चोरी के संदेह में राजेश पटेल और दो अन्य लोगों ने नाबालिग बच्चे को दुकान के अंदर ले गए। बच्चे के पिता का आरोप है कि दुकान के भीतर उसके साथ अमानवीय तरीके से मारपीट की गई।

शिकायत के अनुसार, बच्चे के कपड़े उतार दिए गए और उसके हाथ-पैर बांध दिए गए। इसके बाद उसे कथित तौर पर काफी देर तक पीटा और डराया गया। घटना की जानकारी मिलने के बाद बच्चे के पिता दुकान पर पहुंचे।

पिता का आरोप है कि जब उन्होंने दुकान का शटर उठाकर अंदर जाने की कोशिश की तो आरोपियों ने उनका मोबाइल फोन भी छीन लिया। इसी दौरान घटना का वीडियो बनाए जाने की बात सामने आई है।

पिता ने लगाए गंभीर आरोप, करंट देने और नाखून उखाड़ने का दावा

पीड़ित बच्चे के पिता ने पुलिस को दिए बयान में आरोप लगाया है कि बच्चे को प्रताड़ित करने के लिए करंट तक लगाया गया। इतना ही नहीं, उन्होंने बच्चे के पैरों के नाखून उखाड़ने का भी गंभीर आरोप लगाया है।

इन आरोपों ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है। पुलिस का कहना है कि मामले में सामने आए वीडियो और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की जा रही है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि बच्चे के साथ किस स्तर तक मारपीट और प्रताड़ना की गई।

वीडियो सामने आने के बाद मामला फिर चर्चा में

घटना करीब 12 दिन पुरानी बताई जा रही है, लेकिन मंगलवार को घटना से जुड़ा वीडियो सामने आने के बाद मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया। वीडियो में नाबालिग के साथ कथित तौर पर मारपीट किए जाने की बात कही जा रही है।

वीडियो सामने आने के बाद लोगों में भी घटना को लेकर नाराजगी है। सबसे गंभीर सवाल यह है कि मोबाइल चोरी के महज शक के आधार पर एक छोटे बच्चे को कानून हाथ में लेकर कथित तौर पर इस तरह प्रताड़ित क्यों किया गया।

पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है और वीडियो को भी साक्ष्य के तौर पर देखा जा रहा है।

3 सितंबर को दर्ज हुआ था केस

चित्रकूट पुलिस के अनुसार, पीड़ित के पिता की शिकायत पर 3 सितंबर को मामला दर्ज किया गया था। एसडीओपी राजेश सिंह बंजारे के मुताबिक, पुलिस ने शिकायत के आधार पर राजेश पटेल पिता भैरमदीन पटेल, रिंकू पटेल पिता हीरालाल पटेल और शिवाकांत पटेल पिता स्वर्गीय कमलेश पटेल, सभी निवासी ग्राम टेढ़ी, थाना नयागांव के खिलाफ अपराध क्रमांक 325/26 दर्ज किया है।

पुलिस के अनुसार आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। इनमें धारा 271(1), 133, 120(1), 296(A), 115(2), 351(2) और 3(5) शामिल हैं।

आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास

मामला दर्ज होने के बाद पुलिस अब आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास कर रही है। पुलिस का कहना है कि घटना से संबंधित सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। वीडियो के अलावा पीड़ित बच्चे और उसके परिवार के बयान, घटनास्थल से जुड़े तथ्य तथा अन्य उपलब्ध साक्ष्यों को भी जांच में शामिल किया जा रहा है।

पुलिस के सामने अब यह भी महत्वपूर्ण होगा कि बच्चे के पिता द्वारा लगाए गए करंट लगाने और नाखून उखाड़ने जैसे गंभीर आरोपों की मेडिकल और अन्य साक्ष्यों के आधार पर कितनी पुष्टि होती है।

चोरी का शक हो तो कानून हाथ में लेने का अधिकार नहीं

इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि किसी व्यक्ति पर चोरी का शक होने की स्थिति में भीड़ या निजी व्यक्ति को कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं है। खासकर जब मामला एक 8 साल के बच्चे का हो, तब कथित पूछताछ और मारपीट की जगह कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।

यदि बच्चे के साथ लगाए गए आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो मामला केवल मारपीट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि नाबालिग के साथ गंभीर अमानवीय व्यवहार का भी प्रश्न उठेगा।

फिलहाल पुलिस जांच जारी है। घटना के वीडियो और अन्य साक्ष्यों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि बच्चे के साथ वास्तव में क्या-क्या हुआ और आरोपियों की भूमिका किस स्तर तक रही। पुलिस की कार्रवाई और जांच के निष्कर्ष के बाद मामले की तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।