हर जगह दिखता है अमेरिका का ‘भूत’-सिंधिया का राहुल गांधी पर पलटवार, बोले- UPI पर ग्राहकों से नहीं लगेगा कोई शुल्क

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने UPI के नए MDR नियमों को लेकर राहुल गांधी के आरोपों पर पलटवार किया है. उन्होंने कहा कि ग्राहकों पर कोई शुल्क नहीं लगाया जाएगा और नया MDR केवल चुनिंदा व्यापारी लेनदेन पर लागू होगा. वित्त मंत्रालय के मुताबिक P2P UPI भुगतान पूरी तरह मुफ्त रहेंगे.

हर जगह दिखता है अमेरिका का ‘भूत’-सिंधिया का राहुल गांधी पर पलटवार, बोले- UPI पर ग्राहकों से नहीं लगेगा कोई शुल्क

सिंधिया ने तुलना करते हुए बताया कि क्रेडिट कार्ड पर 1.5 से 2.5 प्रतिशत और डेबिट कार्ड पर 0.9 प्रतिशत खर्च आता है, जबकि यूपीआई पर इसे सिर्फ 0.4 प्रतिशत रखा गया है। उन्होंने कहा कि जिस तरह एक बच्चा पढ़-लिखकर परिवार को सहारा देता है, उसी तरह इस व्यवस्था को भी आत्मनिर्भर बनाने के लिए यह मॉडल लाया गया है। 

नई दिल्ली। UPI यानी यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस को लेकर केंद्र सरकार और कांग्रेस के बीच सियासी बहस तेज हो गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने UPI लेन-देन पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए इसे ‘UPI टैक्स’ बताया और आरोप लगाया कि सरकार अमेरिकी दबाव में यह फैसला ले रही है। इसके जवाब में केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने राहुल गांधी पर पलटवार किया है। सिंधिया ने कहा कि राहुल गांधी को हर जगह ‘अमेरिका का भूत’ दिखाई देता है।

सिंधिया ने कहा कि सरकार का उद्देश्य डिजिटल भुगतान व्यवस्था को कमजोर करना नहीं, बल्कि उसे लंबे समय तक मजबूत और आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित MDR का सीधा बोझ आम ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा। व्यक्ति से व्यक्ति के बीच होने वाला UPI लेन-देन पहले की तरह मुफ्त रहेगा। साथ ही छोटे मूल्य के भुगतान को भी शुल्क से बाहर रखा गया है।

राहुल गांधी के आरोपों पर सिंधिया का जवाब

UPI के नए शुल्क ढांचे को लेकर राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि सरकार अमेरिका के दबाव में UPI लेन-देन पर शुल्क लगाने की तैयारी कर रही है। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने झुकने के बजाय मजबूती से खड़े होने और इस फैसले को वापस लेने की मांग की थी।

सिंधिया ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि राहुल गांधी को हर जगह अमेरिका का ‘भूत’ दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि देश में नकारात्मक सोच के बजाय राष्ट्र निर्माण और सकारात्मक सोच पर ध्यान देने की जरूरत है। सिंधिया के मुताबिक UPI से जुड़ा नया शुल्क ढांचा देश के डिजिटल भुगतान नेटवर्क को मजबूत करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

आम ग्राहक के लिए UPI भुगतान रहेगा मुफ्त

सिंधिया ने सबसे महत्वपूर्ण बात यह स्पष्ट की कि आम ग्राहकों से UPI भुगतान के लिए कोई शुल्क लेने का प्रस्ताव नहीं है। खासकर Person-to-Person यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को पैसा भेजने वाले लेन-देन पूरी तरह मुफ्त रहेंगे।

इसका मतलब है कि परिवार के किसी सदस्य, दोस्त या किसी अन्य व्यक्ति को UPI के माध्यम से पैसा भेजने पर ग्राहक को MDR नहीं देना होगा। यह व्यवस्था लेन-देन की राशि से अलग रहेगी।

व्यापारी को किए जाने वाले छोटे भुगतान को भी राहत दी गई है। 2,000 रुपये तक के पात्र Person-to-Merchant यानी P2M लेन-देन पर MDR शून्य रहेगा। इस तरह रोजमर्रा की छोटी खरीदारी करने वाले अधिकांश ग्राहकों के लिए UPI के इस्तेमाल में सीधे तौर पर कोई नया शुल्क नहीं जुड़ने वाला है।

15 अक्टूबर 2026 से लागू होगी नई व्यवस्था

UPI के नए MDR ढांचे को 15 अक्टूबर 2026 से लागू किया जाना है। नई व्यवस्था के तहत 2,000 रुपये से अधिक के कुछ पात्र व्यापारी लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत MDR निर्धारित किया गया है।

हालांकि इस शुल्क की अधिकतम सीमा भी तय की गई है। 75,000 रुपये या उससे अधिक के पात्र लेन-देन पर MDR अधिकतम 300 रुपये तक रहेगा। यानी लेन-देन की रकम इससे ऊपर जाने के बावजूद निर्धारित MDR 300 रुपये से अधिक नहीं होगा।

उदाहरण के तौर पर 10,000 रुपये के पात्र व्यापारी भुगतान पर 0.4 प्रतिशत की दर से MDR 40 रुपये होगा। 50,000 रुपये के भुगतान पर यह राशि 200 रुपये होगी। वहीं 75,000 रुपये के भुगतान पर 300 रुपये MDR बनेगा।

छोटे व्यापारियों को भी राहत

नई व्यवस्था में छोटे कारोबारियों को लेकर भी अलग प्रावधान किया गया है। जिन व्यापारियों की मासिक UPI QR प्राप्तियां 1 लाख रुपये तक हैं, उन्हें MDR से राहत दी जाएगी।

इसका उद्देश्य छोटे दुकानदारों और सीमित कारोबार करने वाले व्यापारियों पर अतिरिक्त लागत का बोझ नहीं डालना बताया जा रहा है। ऐसे दुकानदारों के लिए UPI भुगतान स्वीकार करना पहले की तरह सुविधाजनक रहेगा।

इस व्यवस्था का असर मुख्य रूप से उन व्यापारियों पर पड़ेगा जिनके यहां बड़े मूल्य के डिजिटल भुगतान लगातार होते हैं। सरकार का तर्क है कि बड़े डिजिटल लेन-देन की लागत और भुगतान नेटवर्क को बनाए रखने की जरूरत को ध्यान में रखते हुए यह व्यवस्था तैयार की गई है।

2 हजार रुपये तक के भुगतान पर शून्य MDR

UPI के नए ढांचे में 2,000 रुपये तक के पात्र व्यापारी भुगतान को MDR से बाहर रखा गया है। इसका सीधा असर रोजमर्रा की खरीदारी पर पड़ता है।

किराना दुकान, सब्जी, कपड़े, सामान्य घरेलू सामान या अन्य छोटी खरीदारी में 2,000 रुपये तक के पात्र UPI भुगतान पर MDR नहीं लगेगा। इसी वजह से आम ग्राहकों के छोटे डिजिटल भुगतान को इस बदलाव से अलग रखा गया है।

सरकार का कहना है कि UPI को आम लोगों की सुविधा का माध्यम बनाए रखना प्राथमिकता है। शुल्क व्यवस्था मुख्य रूप से बड़े मूल्य के पात्र व्यापारी लेन-देन पर केंद्रित है।

कुछ सेवाओं के लिए अधिकतम 5 रुपये का शुल्क

नई व्यवस्था में कुछ विशेष सेवाओं के लिए अलग शुल्क संरचना भी रखी गई है। बिजली-पानी जैसी उपयोगिता सेवाओं, रेल टिकट, बीमा तथा पेट्रोल-डीजल जैसी कुछ श्रेणियों में पात्र भुगतान पर अधिकतम शुल्क 5 रुपये तक रखा गया है।

इसका उद्देश्य इन सेवाओं में बड़े मूल्य के भुगतान पर प्रतिशत आधारित शुल्क के कारण लागत ज्यादा बढ़ने से रोकना है। यानी ऐसी श्रेणियों में निर्धारित सीमा के भीतर ही MDR लिया जा सकेगा।

MDR को सरकार का टैक्स नहीं बताया गया

UPI शुल्क को लेकर सबसे बड़ा राजनीतिक विवाद इसे ‘टैक्स’ कहे जाने पर है। सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि MDR कोई सरकारी टैक्स नहीं है।

MDR भुगतान व्यवस्था में शामिल विभिन्न संस्थाओं के बीच लेन-देन के संचालन से जुड़ी लागत की व्यवस्था है। इसमें बैंक, पेमेंट सेवा प्रदाता और अन्य संबंधित संस्थाएं शामिल होती हैं। सरकार या NPCI इसे सामान्य सरकारी कर के रूप में अपने पास नहीं रखती।

सिंधिया ने इसी आधार पर राहुल गांधी के ‘UPI टैक्स’ वाले आरोप पर सवाल उठाया। उनका कहना है कि इस व्यवस्था को सीधे ग्राहकों पर लगाया गया सरकारी टैक्स बताना सही नहीं है।

UPI के तकनीकी ढांचे को मजबूत करने का दावा

सरकार का तर्क है कि UPI का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। करोड़ों लोग रोजाना डिजिटल भुगतान के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में सर्वर, तकनीकी नेटवर्क, साइबर सुरक्षा और भुगतान ढांचे को मजबूत रखने के लिए लगातार निवेश की आवश्यकता है।

सिंधिया ने इस व्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह एक बच्चा बड़ा होकर परिवार का सहारा बनता है, उसी तरह UPI को भी अपने संचालन के लिए टिकाऊ आर्थिक मॉडल की जरूरत है।

उनके अनुसार MDR से मिलने वाली राशि का उपयोग भुगतान नेटवर्क और तकनीकी व्यवस्था को मजबूत करने तथा डिजिटल भुगतान के विस्तार से जुड़े खर्चों को संभालने में किया जा सकता है।

क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड से तुलना

सिंधिया ने UPI की MDR दर की तुलना क्रेडिट और डेबिट कार्ड से जुड़े शुल्क से भी की। उनका कहना है कि क्रेडिट कार्ड से भुगतान स्वीकार करने पर व्यापारियों को आमतौर पर अधिक लागत का सामना करना पड़ता है, जबकि नए UPI ढांचे में पात्र बड़े व्यापारी भुगतान पर 0.4 प्रतिशत की दर तय की गई है।

सरकार इसे डिजिटल भुगतान के मौजूदा विकल्पों की तुलना में कम दर के रूप में पेश कर रही है। हालांकि कारोबारियों के लिए वास्तविक प्रभाव उनके भुगतान की मात्रा, कारोबार के आकार और भुगतान की श्रेणी पर निर्भर करेगा।

राजनीतिक बहस के बीच लागू होगी व्यवस्था

UPI MDR को लेकर अब राजनीतिक बयानबाजी तेज हो चुकी है। राहुल गांधी इसे सरकार की आर्थिक और विदेश नीति से जोड़कर सवाल उठा रहे हैं, जबकि सिंधिया और केंद्र सरकार इसे डिजिटल भुगतान व्यवस्था की जरूरतों से जुड़ा फैसला बता रहे हैं।

सरकार का कहना है कि ग्राहक से सीधे UPI शुल्क वसूलने का कोई प्रावधान नहीं है। दूसरी ओर विपक्ष इस फैसले के संभावित आर्थिक प्रभावों पर सवाल उठा रहा है।

15 अक्टूबर 2026 से नई व्यवस्था लागू होने के बाद यह स्पष्ट होगा कि बड़े व्यापारी लेन-देन, डिजिटल भुगतान की लागत और कारोबारियों के व्यवहार पर इसका कितना असर पड़ता है।

फिलहाल उपलब्ध व्यवस्था के अनुसार आम व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को UPI से पैसा भेजना मुफ्त रहेगा। 2,000 रुपये तक के पात्र व्यापारी भुगतान पर भी MDR नहीं लगेगा। 1 लाख रुपये तक की मासिक UPI QR प्राप्तियों वाले छोटे व्यापारियों को भी राहत दी गई है। वहीं 2,000 रुपये से अधिक के पात्र बड़े व्यापारी भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR और अधिकतम 300 रुपये की सीमा निर्धारित की गई है।

इस पूरे मामले में सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन ग्राहकों के लिए मुख्य बात यही है कि प्रस्तावित व्यवस्था में रोजमर्रा के छोटे UPI भुगतान और व्यक्ति-से-व्यक्ति लेन-देन पर सीधे शुल्क लगाने का प्रावधान नहीं है।