रीवा में डॉक्टरों पर भड़के भाजपा सांसद जनार्दन मिश्रा, बोले- सभी के मेडिकल लाइसेंस निरस्त कर देने चाहिए; कहा- ये चिकित्सक नहीं, नोट छापने की मशीन बन गए

रीवा में खराब स्वास्थ्य सेवाओं पर भाजपा सांसद जनार्दन मिश्रा ने डॉक्टरों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने डॉक्टरों को 'नोट छापने की मशीन' बताते हुए कहा कि उनका वश चले तो वे लाइसेंस रद करवा दें।

रीवा में डॉक्टरों पर भड़के भाजपा सांसद जनार्दन मिश्रा, बोले- सभी के मेडिकल लाइसेंस निरस्त कर देने चाहिए; कहा- ये चिकित्सक नहीं, नोट छापने की मशीन बन गए

रीवा में डॉक्टरों की लापरवाही और इलाज में गड़बड़ी की शिकायतों को लेकर सांसद जनार्दन मिश्रा ने नाराजगी जताई है। उन्होंने डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस और सरकारी अस्पतालों में मरीजों को मिल रही सुविधाओं पर सवाल उठाए।

रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं और डॉक्टरों की कार्यप्रणाली को लेकर भाजपा सांसद जनार्दन मिश्रा ने कड़ी नाराजगी जाहिर की है। सरकारी अस्पतालों में मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं, इलाज में कथित लापरवाही और डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस को लेकर सांसद ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने डॉक्टरों की कार्यशैली पर टिप्पणी करते हुए यहां तक कह दिया कि यदि उनके हाथ में होता तो वे सभी डॉक्टरों के मेडिकल लाइसेंस निरस्त करवा देते और उन्हें इलाज करने का अधिकार ही नहीं देते। सांसद के इस बयान के बाद स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

डॉक्टरों पर लगाए गंभीर आरोप, बोले- नोट छापने की मशीन बन गए

सांसद जनार्दन मिश्रा ने डॉक्टरों के रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा कि डॉक्टरों को समाज में भगवान का दर्जा दिया जाता था, क्योंकि वे मरीजों की जान बचाने का काम करते हैं। लेकिन अब कुछ डॉक्टरों की कार्यप्रणाली ऐसी हो गई है कि आम जनता का भरोसा चिकित्सा व्यवस्था से उठता जा रहा है।

उन्होंने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि डॉक्टर अब मरीजों की सेवा करने के बजाय रुपये कमाने की मशीन बन गए हैं। उनका उद्देश्य केवल पैसा कमाना और बड़ी-बड़ी कोठियां बनाना रह गया है। सांसद ने कहा कि जनता अब ऐसे डॉक्टरों को भगवान नहीं, बल्कि दानव के रूप में देखने लगी है।

'मेरा वश चले तो सभी डॉक्टरों के लाइसेंस निरस्त करवा दूं'

डॉक्टरों के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए भाजपा सांसद ने कहा, "मेरा वश चले तो मैं सभी डॉक्टरों का मेडिकल लाइसेंस निरस्त करवा दूं। इनका चिकित्सा करने का अधिकार ही समाप्त कर देना चाहिए। ये चिकित्सक नहीं हैं। ये नोट छापने की मशीन बन चुके हैं। जनता अब इन्हें भगवान नहीं, दानव के रूप में देखती है।"

सांसद के इस बयान में डॉक्टरों की कार्यप्रणाली को लेकर उनकी नाराजगी साफ नजर आई। उन्होंने कहा कि चिकित्सा जैसे जिम्मेदारी वाले पेशे में मरीजों की सेवा और उनके जीवन की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण होनी चाहिए, लेकिन कुछ मामलों में मरीजों की परेशानियों को नजरअंदाज किया जा रहा है।

 निजी प्रैक्टिस पर भी उठाए सवाल

सांसद जनार्दन मिश्रा ने डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि डॉक्टर निजी प्रैक्टिस करना चाहते हैं तो उन्हें इससे कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन सरकारी अस्पतालों में अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटना चाहिए।

उनका कहना है कि सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की नियुक्ति मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए की जाती है। ऐसे में डॉक्टरों को सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों का उचित इलाज करना चाहिए। यदि डॉक्टर सरकारी नौकरी के साथ निजी प्रैक्टिस को अधिक महत्व देते हैं और सरकारी अस्पतालों में मरीजों को पर्याप्त समय या सुविधाएं नहीं देते, तो यह व्यवस्था के प्रति जिम्मेदारी का उल्लंघन है।

 नौकरी से हटाने और प्रैक्टिस पर रोक लगाने की मांग

सांसद ने ऐसे डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की, जिन पर इलाज में लापरवाही बरतने या अपनी सरकारी जिम्मेदारियों का सही तरीके से निर्वहन नहीं करने के आरोप हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे डॉक्टरों को नौकरी से हटाने के साथ उनकी मेडिकल प्रैक्टिस पर भी रोक लगाई जानी चाहिए।

उन्होंने राज्य सरकार से इस दिशा में ठोस कदम उठाने की अपेक्षा जताई। सांसद का मानना है कि जब तक लापरवाही करने वाले डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार करना मुश्किल होगा।

हालांकि, सांसद ने अपने इस बयान को व्यक्तिगत राय बताते हुए स्पष्ट किया कि राज्य सरकार को डॉक्टरों की कार्यप्रणाली और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी शिकायतों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

 चार मामलों के बीच आया सांसद का बयान

रीवा सांसद की यह नाराजगी ऐसे समय सामने आई है, जब जिले में इलाज में लापरवाही और स्वास्थ्य सेवाओं में अनियमितताओं से जुड़े चार हालिया मामले चर्चा में हैं। इन मामलों में मरीजों की मौत और उपचार के दौरान गड़बड़ी के आरोप लगाए गए हैं।

इन घटनाओं ने सरकारी और निजी स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं तथा डॉक्टरों की जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े किए हैं। मरीज और उनके परिजन बेहतर इलाज की उम्मीद में अस्पताल पहुंचते हैं, लेकिन जब इलाज में कथित लापरवाही की शिकायत सामने आती है तो उनका भरोसा प्रभावित होता है।

इन्हीं शिकायतों के मद्देनजर सांसद ने डॉक्टरों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जाहिर की है। हालांकि, इन चारों मामलों में लगाए गए आरोपों और उनकी जांच की स्थिति के बारे में विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।

 स्वास्थ्य व्यवस्था में जवाबदेही तय करने की उठी मांग

सासद के बयान के बाद रीवा की स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार, डॉक्टरों की जिम्मेदारी और मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने का मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है। सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की उपलब्धता, समय पर उपचार, दवाइयों की व्यवस्था और मरीजों के प्रति व्यवहार जैसे विषय स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता के लिए महत्वपूर्ण हैं।

वहीं, चिकित्सा पेशे से जुड़े किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई शिकायतों की निष्पक्ष जांच और नियमानुसार प्रक्रिया के आधार पर होना जरूरी है। इलाज में लापरवाही साबित होने पर संबंधित डॉक्टर के खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

फिलहाल सांसद जनार्दन मिश्रा के बयान ने रीवा की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। अब देखना होगा कि राज्य सरकार इन शिकायतों पर क्या कदम उठाती है और मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए क्या व्यवस्था की जाती है।