CM मोहन यादव का मंच से बड़ा एक्शन, 10 महीने से महिला कर्मचारी का मानदेय अटकाने पर जिला संयोजक सस्पेंड; लंबित शिकायतों पर भी जताई नाराजगी

मध्य प्रदेश के हरदा में महिला कर्मचारी का 10 महीने से अधिक समय तक मानदेय लंबित रखने के मामले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आदिम जाति कल्याण विभाग के जिला संयोजक प्रमोद माथुर को निलंबित करने के निर्देश दिए।

CM मोहन यादव का मंच से बड़ा एक्शन, 10 महीने से महिला कर्मचारी का मानदेय अटकाने पर जिला संयोजक सस्पेंड; लंबित शिकायतों पर भी जताई नाराजगी

हरदा में समाधान ऑनलाइन के दौरान महिला कर्मचारी का 10 महीने से ज्यादा समय तक मानदेय अटका होने का मामला सामने आया तो मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सख्त रुख अपनाया। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर आदिम जाति कल्याण विभाग के जिला संयोजक प्रमोद माथुर को तत्काल निलंबित करने के निर्देश दिए। सीएम ने लंबित शिकायतों पर नाराजगी जताते हुए लापरवाह अधिकारियों पर अर्थदंड लगाने को भी कहा..

हरदा में समाधान ऑनलाइन कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश, सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों का समय पर निराकरण करने और लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई के आदेश

हरदा, मध्यप्रदेश। सरकारी कर्मचारियों का मानदेय महीनों तक लंबित रखना और आम नागरिकों की शिकायतों का समय पर निराकरण नहीं करना अब अधिकारियों को भारी पड़ सकता है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को हरदा में आयोजित समाधान ऑनलाइन कार्यक्रम के दौरान लापरवाही के मामले में बड़ा एक्शन लिया। महिला कर्मचारी का 10 महीने से अधिक समय तक मानदेय लंबित रखने के मामले में आदिम जाति कल्याण विभाग के जिला संयोजक प्रमोद माथुर को निलंबित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री की इस कार्रवाई से अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया गया कि सरकारी कामकाज में लापरवाही, कर्मचारियों के भुगतान में देरी और जनता की समस्याओं की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

समाधान ऑनलाइन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने पांच आवेदकों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं। इस दौरान उन्होंने संबंधित विभागों के अधिकारियों से शिकायतों की स्थिति, उनके निराकरण में हो रही देरी और जिम्मेदार अधिकारियों के संबंध में जानकारी ली। महिला कर्मचारी के मानदेय भुगतान का मामला सामने आने पर मुख्यमंत्री ने संबंधित जिला संयोजक से देरी का कारण पूछा। जब अधिकारी संतोषजनक जवाब नहीं दे सके, तो मुख्यमंत्री ने तत्काल निलंबन की कार्रवाई के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि नियमित कर्मचारियों के साथ-साथ संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों को भी समय पर भुगतान मिलना चाहिए। किसी कर्मचारी का मानदेय या वेतन बिना उचित कारण के लंबे समय तक लंबित रखना गंभीर लापरवाही है। अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे कर्मचारियों से काम लेने के साथ उनके भुगतान की प्रक्रिया भी समयसीमा में पूरी कराएं।

सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों पर मुख्यमंत्री सख्त

समाधान ऑनलाइन कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सीएम हेल्पलाइन पर लंबे समय से लंबित शिकायतों को लेकर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि आम नागरिक अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद में शिकायत दर्ज कराते हैं। ऐसे में यदि शिकायतें महीनों तक लंबित रहती हैं, तो इससे प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शिकायतों का निराकरण केवल औपचारिकता के रूप में न किया जाए, बल्कि आवेदक की वास्तविक समस्या का समाधान सुनिश्चित किया जाए। शिकायत किस स्तर पर लंबित है, संबंधित अधिकारी ने क्या कार्रवाई की है और देरी की वजह क्या है, इसकी नियमित समीक्षा की जाए।

उन्होंने कलेक्टरों को सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करने के निर्देश भी दिए। मुख्यमंत्री ने साफ किया कि शिकायतों के निपटारे में लापरवाही करने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी और आवश्यकतानुसार उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।

बिजली बिल की शिकायतों पर भी जताई नाराजगी

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने संदीप गौर से कृषि यंत्रों पर मिलने वाली सब्सिडी से संबंधित शिकायत पर चर्चा की। उन्होंने संबंधित विभाग को मामले की जांच कर उचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इसके अलावा सतीश उइके की बिजली बिल संबंधी समस्या भी मुख्यमंत्री के सामने रखी गई।

बिजली बिल की शिकायतों के निराकरण में हो रही देरी पर मुख्यमंत्री ने नाराजगी जताई। उन्होंने विद्युत विभाग के महाप्रबंधक को आवश्यक कार्रवाई करने और बिजली मीटरों की सैंपल जांच कर वास्तविक स्थिति की जानकारी लेने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं को बिजली बिल से संबंधित समस्याओं के लिए अनावश्यक रूप से परेशान नहीं होना चाहिए।

इस दौरान शबाना, रेखा यादव और अरविंद इवने की समस्याएं भी सुनी गईं। मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों को शिकायतों के तथ्यों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई करने और आवेदकों को राहत उपलब्ध कराने पर जोर दिया।

पुलिस विभाग की 27 शिकायतें 100 दिन से अधिक समय से लंबित

समाधान ऑनलाइन कार्यक्रम में पुलिस विभाग से जुड़ी शिकायतों का मामला भी सामने आया। जानकारी के अनुसार, पुलिस विभाग की 27 शिकायतें 100 दिन से अधिक समय से लंबित थीं। इस स्थिति पर मुख्यमंत्री ने गंभीर नाराजगी जताई और पुलिस अधीक्षक को इन शिकायतों की स्वयं समीक्षा करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पता लगाया जाना चाहिए कि शिकायतें किस स्तर पर अटकी हुई हैं और उनके निराकरण में देरी क्यों हो रही है। संबंधित अधिकारियों से जवाबदेही तय की जाए तथा शिकायतों को अनावश्यक रूप से लंबित रखने की प्रवृत्ति पर रोक लगाई जाए।

उन्होंने कृषि, ऊर्जा, महिला एवं बाल विकास, पंचायत और राजस्व विभाग सहित अन्य विभागों की लंबित शिकायतों की भी समीक्षा की। मुख्यमंत्री का जोर इस बात पर रहा कि विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की कमी या अधिकारियों की उदासीनता के कारण नागरिकों को बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।

समयसीमा में सेवा नहीं देने पर लगेगा अर्थदंड

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत नागरिकों को निर्धारित समयसीमा में सेवाएं उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि तय समयसीमा में सेवाएं नहीं देने वाले अधिकारियों पर नियमानुसार अर्थदंड लगाया जाए।

उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं और सेवाओं का उद्देश्य नागरिकों को सुविधा देना है। यदि किसी प्रमाणपत्र, सरकारी सेवा या अन्य कार्य के लिए समयसीमा निर्धारित की गई है, तो उसका पालन सुनिश्चित करना अधिकारियों की जिम्मेदारी है। अनावश्यक देरी से लोगों का समय और पैसा दोनों खर्च होते हैं।

मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों को निर्देशित किया कि वे अपने जिलों में लंबित मामलों की नियमित समीक्षा करें। जिन मामलों में कार्रवाई संभव है, उन्हें प्राथमिकता से निपटाया जाए। गंभीर शिकायतों को उच्च स्तर पर भेजने के साथ-साथ उनकी प्रगति की निगरानी भी की जाए। उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था को जवाबदेह और संवेदनशील बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

नल-जल योजनाओं और बिजली ट्रिपिंग पर भी निर्देश

कार्यक्रम में मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल ने जिले में हस्तांतरित नल-जल योजनाओं की लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन योजनाओं का काम पूरा हो चुका है, उनका हस्तांतरण जल्द कराया जाए, ताकि नागरिकों को पेयजल की सुविधा नियमित रूप से उपलब्ध हो सके।

इसके साथ ही बिजली ट्रिपिंग की समस्या पर भी त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया। बिजली आपूर्ति में बार-बार बाधा आने से आम लोगों के साथ किसानों और कारोबारियों को भी परेशानी होती है। इसलिए संबंधित विभाग को समस्या के कारणों की पहचान कर सुधारात्मक कदम उठाने की जरूरत है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि विकास योजनाओं की समीक्षा केवल बैठकों तक सीमित न रहे, बल्कि उनका वास्तविक लाभ लोगों तक पहुंचना चाहिए। योजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं को समय पर दूर किया जाए और जनता से मिलने वाली शिकायतों को प्रशासनिक सुधार का महत्वपूर्ण आधार बनाया जाए।

हरदा में नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने पर जोर

समाधान ऑनलाइन कार्यक्रम के बाद जिले की विभागीय समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने हरदा के विकास और रोजगार के अवसर बढ़ाने से जुड़े विषयों पर भी चर्चा की। उन्होंने जिले में नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने तथा नर्मदा परिक्रमा पथ के विकास कार्यों में तेजी लाने पर जोर दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हरदा को आदर्श जिले के रूप में विकसित करने के लिए सभी विभागों को मिलकर काम करना चाहिए। विकास योजनाओं की प्राथमिकताएं तय करते समय स्थानीय जरूरतों, उपलब्ध संसाधनों और रोजगार की संभावनाओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

इस दौरान वरिष्ठ नागरिकों सरगम जैन और विक्रांत अग्रवाल से भी संवाद किया गया। बातचीत के दौरान नाभि कुंड के विकास और ओपन स्टेडियम बनाने जैसे सुझाव सामने आए। इन प्रस्तावों के माध्यम से जिले में पर्यटन, सार्वजनिक सुविधाओं और खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।

छोटे उद्योगों से युवाओं को मिल रहा रोजगार

जिला पंचायत सभागार में आयोजित संवाद कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने उद्यमियों, युवाओं और किसानों से बातचीत की। इस दौरान जिले में स्वरोजगार, लघु उद्योग और स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा करने वाले प्रयासों की जानकारी दी गई।

रजाई निर्माण इकाई संचालित करने वाले पलाश करोड़े ने अपने कारोबार के बारे में जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि बैंक से 25 लाख रुपये का ऋण और सवा छह लाख रुपये का अनुदान मिलने के बाद उन्होंने अपना व्यवसाय शुरू किया। उनके अनुसार, इस इकाई के माध्यम से करीब 72 लोगों को रोजगार मिला है। उनके उत्पाद ऑनलाइन माध्यम से भी बेचे जा रहे हैं।

यह उदाहरण स्थानीय स्तर पर छोटे उद्योगों की संभावनाओं को दर्शाता है। उचित वित्तीय सहायता, सरकारी योजनाओं और बाजार तक पहुंच मिलने पर छोटे कारोबारी न केवल अपना व्यवसाय आगे बढ़ा सकते हैं, बल्कि दूसरे लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने उद्यमियों के अनुभव सुने और स्थानीय उत्पादों के निर्माण तथा बिक्री को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने ऐसे प्रयासों को प्रोत्साहित करने की बात कही, जिनसे युवाओं को अपने जिले में ही रोजगार मिल सके और उन्हें काम की तलाश में दूसरे शहरों की ओर पलायन न करना पड़े।

मूंगदाल प्रसंस्करण से डेयरी तक के कारोबार की जानकारी

संवाद कार्यक्रम में अन्य हितग्राहियों ने भी अपने व्यवसाय और स्वरोजगार से जुड़े अनुभव साझा किए। इनमें मूंगदाल प्रसंस्करण, मसाला निर्माण, कृषि उपकरण, बायो सीएनजी, साइलेज और डेयरी कारोबार जैसे क्षेत्र शामिल रहे।

मुख्यमंत्री ने प्राकृतिक खेती, पशुपालन और खाद्य प्रसंस्करण को किसानों की आय बढ़ाने के महत्वपूर्ण माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देकर किसानों को अपनी उपज का बेहतर उपयोग करने और अतिरिक्त आय अर्जित करने के अवसर मिल सकते हैं।

मूंगदाल प्रसंस्करण और मसाला निर्माण जैसे व्यवसाय स्थानीय कृषि उत्पादों को मूल्यवर्धित उत्पादों में बदलने में मदद करते हैं। इसी प्रकार डेयरी और पशुपालन से जुड़े प्रयास ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सकते हैं। बायो सीएनजी और साइलेज जैसे क्षेत्रों में भी कृषि अवशेषों तथा पशुपालन संबंधी संसाधनों का उपयोग करने की संभावनाएं हैं।

मुख्यमंत्री ने किसानों और उद्यमियों से नए अवसरों का लाभ उठाने तथा उपलब्ध सरकारी योजनाओं की जानकारी लेकर अपने कारोबार को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

‘मिशन कोड शक्ति’ के तहत 2,500 विद्यार्थियों को प्रशिक्षण

कार्यक्रम में जिले में विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के प्रयासों की जानकारी भी दी गई। बताया गया कि ‘मिशन कोड शक्ति’ के अंतर्गत करीब 2,500 विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

तकनीकी शिक्षा और डिजिटल कौशल वर्तमान समय में रोजगार के नए अवसर पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। विद्यार्थियों को शुरुआती स्तर पर ही आधुनिक तकनीक का ज्ञान मिलने से उनकी भविष्य की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों, उद्यमियों और किसानों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने जिले में शिक्षा, रोजगार, उद्योग और कृषि के क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने पर जोर दिया।

प्रशासनिक जवाबदेही के साथ विकास पर भी फोकस

हरदा में आयोजित समाधान ऑनलाइन और विभागीय समीक्षा कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रशासनिक जवाबदेही के साथ विकास और रोजगार को भी प्राथमिकता दी। एक ओर उन्होंने महिला कर्मचारी का मानदेय लंबित रखने के मामले में जिला संयोजक को निलंबित करने के निर्देश दिए, वहीं दूसरी ओर सीएम हेल्पलाइन की लंबित शिकायतों, बिजली बिल संबंधी समस्याओं और पुलिस विभाग के मामलों में त्वरित कार्रवाई पर जोर दिया।

मुख्यमंत्री के निर्देशों का मुख्य संदेश स्पष्ट रहा कि सरकारी व्यवस्था में नागरिकों और कर्मचारियों की समस्याओं का समय पर समाधान होना चाहिए। अधिकारियों को निर्धारित समयसीमा का पालन करना होगा और लापरवाही सामने आने पर जवाबदेही तय की जाएगी।

इसके साथ ही औद्योगिक विकास, स्वरोजगार, कृषि आधारित उद्योगों और विद्यार्थियों के तकनीकी प्रशिक्षण के माध्यम से जिले में विकास की संभावनाओं को आगे बढ़ाने पर भी ध्यान दिया गया। अब इन निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन और लंबित शिकायतों के समयबद्ध निराकरण पर संबंधित विभागों की जिम्मेदारी होगी।