विधायक गोलू शुक्ला के समर्थक से कथित मारपीट पर बड़ा एक्शन, एरोड्रम TI-SI समेत 7 पुलिसकर्मी लाइन अटैच

एरोड्रम थाना में शुक्रवार को पुलिस और विधायक समर्थकों में विवाद हो गया। मामले ने तूल पकड़ लिया और सैकड़ों कार्यकर्ता इकट्ठे हो गए। देर रात अफसरों ने एक्शन लेते हुए थाना प्रभारी देवेन्द्र सिंह कुशवाह सहित पांच पुलिसकर्मियों को हटा दिया।

विधायक गोलू शुक्ला के समर्थक से कथित मारपीट पर बड़ा एक्शन, एरोड्रम TI-SI समेत 7 पुलिसकर्मी लाइन अटैच

इंदौर के एरोड्रम थाना क्षेत्र में कार पार्किंग विवाद के बाद मारपीट और थाने में अभद्रता के आरोप सामने आए हैं। भाजपा विधायक गोलू शुक्ला के समर्थकों ने थाने का घेराव कर कार्रवाई की मांग की। मामले में वरिष्ठ अधिकारियों ने थाना प्रभारी समेत सात पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच कर दिया

कार पार्किंग से शुरू हुआ विवाद थाने तक पहुंचा, शिकायत दर्ज करने में आनाकानी और भाजपा नेता से कथित मारपीट के आरोपों ने पकड़ा तूल; वरिष्ठ अधिकारियों ने शुरू की जांच

इंदौर। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है। एरोड्रम थाना क्षेत्र में कार पार्किंग को लेकर शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते थाने तक पहुंच गया। यहां मारपीट की शिकायत लेकर पहुंचे एक व्यक्ति ने पुलिसकर्मियों पर शिकायत दर्ज करने में आनाकानी करने का आरोप लगाया। वहीं, उसके साथ थाने पहुंचे भाजपा नेता के साथ कथित अभद्रता और मारपीट की बात सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया। घटनाक्रम की जानकारी मिलते ही भाजपा विधायक गोलू शुक्ला के समर्थक बड़ी संख्या में थाने पहुंच गए और पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने लगे। थाने में हुए हंगामे और पूरे घटनाक्रम की जानकारी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों तक पहुंचने के बाद जांच की प्रक्रिया शुरू की गई। प्रारंभिक कार्रवाई के तहत थाना प्रभारी, एक सब-इंस्पेक्टर सहित सात पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच कर दिया गया।

इस घटनाक्रम ने पुलिस की जवाबदेही, शिकायतों पर कार्रवाई और थाने में आम लोगों के साथ व्यवहार को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

कार पार्किंग को लेकर शुरू हुआ विवाद

प्राप्त जानकारी के अनुसार, एरोड्रम थाना क्षेत्र में रहने वाले जयदीप दुबे अपनी कार घर के सामने पार्क कर रहे थे। इसी दौरान तेज रफ्तार से आए बाइक सवार दो युवकों की कार से टक्कर होने की बात सामने आई। टक्कर के बाद जयदीप और बाइक सवार युवकों के बीच कहासुनी शुरू हो गई।

बताया जा रहा है कि शुरुआत में यह विवाद वाहन की पार्किंग और टक्कर को लेकर था, लेकिन कुछ ही देर में मामला बढ़ गया। जयदीप का आरोप है कि विवाद के दौरान दोनों युवकों ने उनके साथ मारपीट की। घटना के बाद उन्होंने मामले की शिकायत पुलिस से करने का निर्णय लिया और एरोड्रम थाने पहुंच गए।

आमतौर पर सड़क पर वाहन की टक्कर और उसके बाद मारपीट जैसी घटनाओं में पुलिस की भूमिका अहम होती है। ऐसे मामलों में शिकायत सुनना, संबंधित पक्षों के बयान लेना, घटनास्थल और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच करना तथा कानून के अनुसार कार्रवाई करना पुलिस की जिम्मेदारी होती है। लेकिन इस मामले में थाने पहुंचने के बाद जो घटनाक्रम सामने आया, उसने विवाद को एक नया मोड़ दे दिया।

शिकायत दर्ज करने में आनाकानी का आरोप

जयदीप दुबे का आरोप है कि जब वह शिकायत लेकर एरोड्रम थाने पहुंचे, तो वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने उनकी शिकायत दर्ज करने में आनाकानी की। इसी बात को लेकर उनकी नाराजगी बढ़ गई। उनका कहना था कि जब उनके साथ मारपीट हुई है, तो पुलिस को उनकी शिकायत सुनकर नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए।

मामले में शिकायत दर्ज करने को लेकर कथित लापरवाही का आरोप सामने आने के बाद सवाल उठने लगे कि आखिर थाने में शिकायत लेकर पहुंचे व्यक्ति की बात को किस तरह सुना गया और उस समय पुलिसकर्मियों ने क्या कार्रवाई की।

हालांकि, शिकायत दर्ज करने से इनकार किए जाने या उसमें देरी होने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही की जा सकेगी। यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि उस समय थाने में मौजूद पुलिसकर्मियों और शिकायतकर्ता के बीच क्या बातचीत हुई थी।

भाजपा नेता के थाने पहुंचने पर बढ़ा विवाद

बताया जाता है कि जयदीप दुबे ने थाने में शिकायत से जुड़ी परेशानी के बारे में अपने साले को जानकारी दी। उनके साले भाजपा में पदाधिकारी बताए जा रहे हैं। जानकारी मिलने के बाद वह थाने पहुंचे, ताकि मामले को लेकर पुलिस से बातचीत की जा सके।

आरोप है कि थाने में उनके पहुंचने के बाद पुलिसकर्मियों ने उनके साथ अभद्रता की और मारपीट भी की। इस आरोप के सामने आने के बाद विवाद ने राजनीतिक रूप ले लिया। भाजपा नेता ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी भाजपा विधायक गोलू शुक्ला को दी।

इसके बाद मामला तेजी से फैलने लगा और विधायक के समर्थकों में नाराजगी बढ़ गई। विवाद का केंद्र अब केवल कार पार्किंग और बाइक की टक्कर नहीं रह गया था, बल्कि पुलिस के व्यवहार और शिकायत पर कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठने लगे थे।

विधायक गोलू शुक्ला के समर्थकों ने थाने का किया घेराव

भाजपा नेता के साथ कथित मारपीट की जानकारी मिलने के बाद बड़ी संख्या में विधायक गोलू शुक्ला के समर्थक एरोड्रम थाने पहुंच गए। समर्थकों ने थाने में घेराव करते हुए संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

इस दौरान माहौल तनावपूर्ण हो गया। थाने में मौजूद पुलिसकर्मियों और वहां पहुंचे समर्थकों के बीच कहासुनी और झूमाझटकी होने की जानकारी सामने आई। मामले ने स्थानीय स्तर पर काफी तूल पकड़ लिया और वरिष्ठ अधिकारियों का ध्यान इस ओर गया।

समर्थकों की मांग थी कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि पुलिसकर्मियों की ओर से गलत व्यवहार या मारपीट की पुष्टि होती है, तो उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए।

ऐसी परिस्थितियों में पुलिस प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ शिकायतों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की चुनौती होती है। थाने में हुए हंगामे के बाद अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लिया और जांच के लिए वरिष्ठ अधिकारी को भेजा।

एडिशनल डीसीपी को सौंपी गई जांच

मामले की जानकारी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों तक पहुंचने के बाद एडिशनल डीसीपी सुमित केरकेट्टा को जांच के लिए एरोड्रम थाने भेजा गया। अधिकारियों ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी जुटाने और आरोपों की परिस्थितियों को समझने की प्रक्रिया शुरू की।

प्रारंभिक कार्रवाई के तहत थाना प्रभारी विजेंद्र सिंह कुशवाह, सब-इंस्पेक्टर संजय विश्नोई तथा सिपाही संजय डांगी और राजू रावत सहित कुल सात पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच कर दिया गया।

इस कार्रवाई के बाद पुलिस विभाग में भी मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई। थाना प्रभारी और अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ की गई प्रारंभिक कार्रवाई को इस प्रकरण की गंभीरता से जोड़कर देखा जा रहा है।

हालांकि, लाइन अटैच किया जाना अपने आप में आरोपों का अंतिम प्रमाण नहीं है। यह प्रशासनिक कदम है, जबकि संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका और लगाए गए आरोपों की वास्तविकता जांच के आधार पर तय होगी। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के अनुसार आगे की विभागीय या अन्य कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

एरोड्रम थाने से जुड़े इस मामले ने पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि मारपीट की शिकायत लेकर थाने पहुंचने वाले व्यक्ति की शिकायत पर क्या कार्रवाई की गई और शिकायत दर्ज करने में आनाकानी क्यों किए जाने का आरोप लगा।

दूसरा सवाल थाने में पुलिसकर्मियों के व्यवहार से जुड़ा है। यदि किसी शिकायतकर्ता या उसके साथ आए व्यक्ति के साथ अभद्रता अथवा मारपीट हुई है, तो उसकी भी निष्पक्ष जांच जरूरी है। वहीं, थाने में पहुंचे समर्थकों और पुलिसकर्मियों के बीच हुई कथित झूमाझटकी के दौरान किसकी क्या भूमिका रही, इसका पता लगाना भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।

पुलिस थाने आम नागरिकों के लिए शिकायत दर्ज कराने और न्याय पाने की दिशा में पहला महत्वपूर्ण स्थान होते हैं। ऐसे में वहां आने वाले लोगों के साथ उचित व्यवहार और शिकायतों पर नियमानुसार कार्रवाई करना पुलिस व्यवस्था में जनता के भरोसे के लिए जरूरी है।

दूसरी ओर, किसी भी घटना को लेकर सामने आए आरोपों के आधार पर अंतिम निष्कर्ष निकालने के बजाय सभी पक्षों के बयान, उपलब्ध साक्ष्य और घटनाक्रम की परिस्थितियों की जांच करना आवश्यक है।

जांच के निष्कर्ष पर टिकी निगाहें

फिलहाल एरोड्रम थाना क्षेत्र का यह मामला कार पार्किंग से शुरू हुए विवाद से आगे बढ़कर पुलिस के कथित व्यवहार और राजनीतिक समर्थकों के विरोध तक पहुंच चुका है। थाना प्रभारी, सब-इंस्पेक्टर समेत सात पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच किए जाने के बाद अब जांच के निष्कर्षों पर निगाहें टिकी हैं।

जांच में यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण होगा कि कार की टक्कर के बाद वास्तव में क्या हुआ, जयदीप दुबे की शिकायत पर पुलिस ने क्या कदम उठाए, भाजपा नेता के साथ कथित अभद्रता और मारपीट के आरोपों में कितनी सच्चाई है तथा थाने में हुए हंगामे के दौरान किन लोगों की क्या भूमिका रही।

वरिष्ठ अधिकारियों की जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी। फिलहाल, इस घटनाक्रम ने इंदौर पुलिस की कार्यप्रणाली और थानों में शिकायतकर्ताओं के साथ होने वाले व्यवहार को लेकर बहस छेड़ दी है।