कैबिनेट में करप्शन पर CM का फूटा गुस्सा: ‘ऐसा नहीं चलेगा’...निकायों की खरीदी में गड़बड़ी पर तुरंत एक्शन के आदेश
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतों और अनियमितताओं पर पूरी सतर्कता के साथ कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ की योजनाओं को 2031 तक निरंतर रखने के लिए 345 करोड़ की स्वीकृति के प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि भ्रष्टाचार स्वीकार नहीं होगा। दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी।
भोपाल। मध्यप्रदेश में नगरीय निकायों की खरीदी प्रक्रिया में सामने आई अनियमितताओं को लेकर राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में भ्रष्टाचार और खरीदी प्रक्रिया में गड़बड़ियों का मुद्दा प्रमुखता से उठा। मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतों और अनियमितताओं को किसी भी स्तर पर नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जहां भी गड़बड़ी सामने आए, वहां तत्काल नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
कैबिनेट बैठक में नगरीय निकायों में सामग्री खरीदी की प्रक्रिया की समीक्षा की गई। बैठक में यह भी बताया गया कि खरीदी में संभावित अनियमितताओं की पहचान के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। सरकार के अनुसार, इसी प्रक्रिया के आधार पर पिछले छह महीनों में 201 प्रकरणों में 392 अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
CM ने दो टूक कहा- भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि सरकारी व्यवस्था में भ्रष्टाचार या लापरवाही को किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि शिकायतों की जांच गंभीरता और सतर्कता से की जाए तथा गड़बड़ी सामने आने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई हो।
मुख्यमंत्री के निर्देशों का फोकस केवल कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि खरीदी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने पर भी रहा। सरकार का प्रयास है कि सरकारी धन से होने वाली खरीदी में अनियमितताओं की समय रहते पहचान हो और जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों पर कार्रवाई की जा सके।
AI से पकड़ी जा रही खरीदी में गड़बड़ियां
कैबिनेट बैठक के बाद सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) मंत्री चैतन्य काश्यप ने खरीदी प्रक्रिया से जुड़ी कार्रवाई की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नगरीय विकास विभाग में खरीदी प्रक्रिया से जुड़ी गड़बड़ियों की पहचान के लिए AI तकनीक का इस्तेमाल किया गया।
AI की मदद से खरीदी से जुड़े मामलों और उनमें मौजूद संभावित अनियमितताओं को चिह्नित करने का प्रयास किया गया। सरकार के मुताबिक, तकनीक के जरिए सामने आए मामलों की जांच के बाद पिछले छह महीनों में 201 प्रकरणों में कुल 392 अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
201 मामलों में 392 अफसर-कर्मियों पर कार्रवाई
सरकार की ओर से सामने आए आंकड़ों ने खरीदी प्रक्रिया में निगरानी और जांच की गंभीरता को सामने रखा है। पिछले छह महीने में 201 प्रकरणों में 392 अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई है।
इन मामलों में नगरीय निकायों की खरीदी प्रक्रिया से जुड़ी अनियमितताओं की पहचान की गई थी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अनियमितता सामने आने पर जिम्मेदारी तय करने और नियमानुसार कार्रवाई करने की प्रक्रिया जारी रहेगी।
यह कार्रवाई ऐसे समय में सामने आई है जब सरकार सरकारी योजनाओं और निकायों में होने वाले खर्च में पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर दे रही है। खरीदी प्रक्रिया में तकनीक के इस्तेमाल को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
सिर्फ शिकायत नहीं, सिस्टम पर भी नजर
सरकार का फोकस अब केवल शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई करने पर नहीं, बल्कि खरीदी प्रक्रिया में संभावित गड़बड़ी की पहले ही पहचान करने पर है। AI तकनीक के उपयोग से बड़ी संख्या में खरीदी संबंधी मामलों का विश्लेषण किया जा सकता है और संदिग्ध पैटर्न को चिह्नित किया जा सकता है।
इससे अधिकारियों के सामने उन मामलों को जांच के लिए प्राथमिकता देने में मदद मिल सकती है, जहां अनियमितता की आशंका अधिक हो। इसके बाद संबंधित रिकॉर्ड और प्रक्रिया की जांच कर जिम्मेदारी तय की जा सकती है।
दिसंबर में सरकार करेगी चिंतन
कैबिनेट बैठक में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर आगे भी मंथन की जरूरत पर जोर दिया गया। सरकार दिसंबर में चिंतन करेगी। इसमें व्यवस्था को और प्रभावी बनाने, अनियमितताओं पर तेजी से कार्रवाई करने और सरकारी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ाने जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।
सरकार की ओर से दिया गया संदेश साफ है कि सरकारी खरीदी में गड़बड़ी करने या नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही अधिकारियों को भी यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि शिकायतों और अनियमितताओं को दबाया या नजरअंदाज न किया जाए।
निकायों की खरीदी पर बढ़ेगी निगरानी
नगरीय निकायों में सड़क, सफाई, निर्माण, उपकरण, सामग्री और दूसरी जरूरतों के लिए अलग-अलग स्तर पर खरीदी की जाती है। ऐसे में खरीदी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना सरकार और निकाय प्रशासन दोनों के लिए अहम है।
AI आधारित निगरानी के इस्तेमाल से सरकार अब इस व्यवस्था में तकनीकी निगरानी बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इससे खरीदी के आंकड़ों का विश्लेषण कर संभावित अनियमितताओं की पहचान करने में मदद मिल सकती है।
CM का संदेश- लापरवाही भी नहीं चलेगी
कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री का सबसे अहम संदेश यही रहा कि भ्रष्टाचार के मामलों में लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों से शिकायतों पर गंभीरता से काम करने और गड़बड़ी सामने आने पर तत्काल नियमानुसार कार्रवाई करने को कहा।
सरकार द्वारा छह महीने में 201 मामलों में 392 अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई का आंकड़ा भी इसी सख्ती को दर्शाता है। अब दिसंबर में होने वाले चिंतन में सरकार इस व्यवस्था की समीक्षा करेगी और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण के लिए आगे की रणनीति पर मंथन करेगी।
कुल मिलाकर, मध्यप्रदेश सरकार ने नगरीय निकायों की खरीदी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने और भ्रष्टाचार पर शिकंजा कसने के लिए तकनीक और प्रशासनिक कार्रवाई दोनों को साथ लेकर चलने का संकेत दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशों के बाद अब निगाह इस बात पर रहेगी कि आने वाले समय में इन जांचों और कार्रवाई का दायरा कितना बढ़ता है और दिसंबर के चिंतन में सरकार भ्रष्टाचार रोकने के लिए कौन से नए कदम तय करती है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस