नवरात्रि से दीपावली तक देश में ₹7 लाख करोड़ से अधिक का त्योहारी कारोबार संभावित: CAIT उपाध्यक्ष चम्पालाल बोथरा बोले—टेक्सटाइल-गारमेंट कारोबार ₹77,000 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान

नवरात्रि से दीपावली तक देशभर में त्योहारी कारोबार ₹7 लाख करोड़ से अधिक रहने का अनुमान है। CAIT के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चम्पालाल बोथरा के अनुसार, टेक्सटाइल एवं गारमेंट क्षेत्र का कारोबार करीब ₹77,000 करोड़ रह सकता है। सूरत, अहमदाबाद, दिल्ली, मुंबई, वाराणसी, तिरुपुर, लुधियाना, पानीपत और इंदौर-जबलपुर जैसे प्रमुख बाजारों से देशभर में कपड़ों की आपूर्ति होगी। उन्होंने स्थानीय बाजारों, छोटे व्यापारियों और एमएसएमई को प्राथमिकता देने तथा भारतीय उत्पादों को बढ़ावा देने की अपील की।

नवरात्रि से दीपावली तक देश में ₹7 लाख करोड़ से अधिक का त्योहारी कारोबार संभावित: CAIT उपाध्यक्ष चम्पालाल बोथरा बोले—टेक्सटाइल-गारमेंट कारोबार ₹77,000 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान

नवरात्रि से दीपावली तक देश में ₹7 लाख करोड़ से अधिक के कारोबार की संभावना: कैट

टेक्सटाइल एवं गारमेंट क्षेत्र का योगदान ₹77,000 करोड़ होने की संभावना*— चम्पालाल बोथरा
कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं CAIT टेक्सटाइल एंड गारमेंट कमेटी के राष्ट्रीय चेयरमेन  चम्पालाल बोथरा ने बताया कि इस वर्ष नवरात्रि से दीपावली तक देशभर में ₹7 लाख करोड़ से अधिक के त्योहारी कारोबार की संभावना है। यह पिछले वर्ष के लगभग ₹6.05 लाख करोड़ के कारोबार से 15 से 18 प्रतिशत अधिक रहने का अनुमान है। 
 बोथरा ने कहा कि त्योहारी कारोबार में टेक्सटाइल एवं गारमेंट क्षेत्र का महत्वपूर्ण योगदान रहने की संभावना है। टेक्सटाइल एवं फैब्रिक्स तथा रेडीमेड गारमेंट्स का संयुक्त कारोबार लगभग ₹77,000 करोड़ होने का अनुमान है, जो कुल त्योहारी कारोबार का लगभग 11 प्रतिशत है। इसमें टेक्सटाइल एवं फैब्रिक्स का योगदान लगभग ₹28,000 करोड़ (4 प्रतिशत) तथा रेडीमेड गारमेंट्स का योगदान लगभग ₹49,000 करोड़ (7 प्रतिशत) रहने की संभावना है।
उन्होंने कहा कि त्योहारी कारोबार देश के कपड़ा व्यापारियों, कारीगरों, निर्माताओं और सेवा प्रदाताओं की आजीविका से जुड़ा है। भारतीय उत्पादों की मांग बढ़ने से स्थानीय बाजारों को मजबूती मिलती है तथा घरेलू अर्थव्यवस्था और रोजगार का विस्तार होता है। नवरात्रि, दुर्गा पूजा, दशहरा, करवा चौथ, धनतेरस और दीपावली के दौरान साड़ियों, लहंगों, कुर्तियों, ड्रेस मटेरियल, रेडीमेड कपड़ों और बच्चों के परिधानों की मांग बढ़ती है। इसके साथ शुरू होने वाला विवाह सीजन तथा सर्दियों की मांग भी कपड़ा एवं गारमेंट व्यापार के लिए महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती है।
*देश की प्रमुख टेक्सटाइल मंडियों का योगदान*
देश की प्रमुख टेक्सटाइल एवं गारमेंट मंडियां इस त्योहारी सीजन में देशव्यापी आपूर्ति व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। सूरत, अहमदाबाद, दिल्ली, मुंबई, उल्हासनगर, वाराणसी, कांचीपुरम, तिरुपुर, लुधियाना और इंदौर सहित विभिन्न केंद्रों से देशभर के थोक व्यापारियों एवं खुदरा बाजारों तक उत्पादों की आपूर्ति होती है।
सूरत देश का प्रमुख सिंथेटिक एवं फैंसी फैब्रिक्स केंद्र है। यहां पॉलिएस्टर, जॉर्जेट, क्रेप, शिफॉन, प्रिंटेड फैब्रिक्स, एम्ब्रॉयडरी, साड़ी, ड्रेस मटेरियल, लहंगा और कुर्ती के कपड़ों का बड़े पैमाने पर उत्पादन एवं व्यापार होता है।
अहमदाबाद कॉटन, डेनिम, सूटिंग-शर्टिंग और विभिन्न प्रकार के सूती वस्त्रों के लिए महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां कपड़ा निर्माण, प्रोसेसिंग और गारमेंट उद्योग का देश के टेक्सटाइल व्यापार में अहम योगदान है।
दिल्ली का गांधीनगर बाजार: यह रेडीमेड गारमेंट्स की प्रमुख थोक मंडियों में शामिल है। यहां पुरुषों, महिलाओं और बच्चों के कपड़े, टी-शर्ट, शर्ट, ट्राउजर, नाइटवियर तथा बजट श्रेणी के परिधानों का व्यापक व्यापार होता है।
मुंबई एवं उल्हासनगर: इन बाजारों में महिलाओं के परिधान, कुर्ती, टॉप, ट्राउजर, बच्चों के कपड़े और विभिन्न श्रेणियों के रेडीमेड गारमेंट्स का थोक व्यापार होता है। ये पश्चिमी भारत की आपूर्ति व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
वाराणसी एवं कांचीपुरम: वाराणसी बनारसी साड़ियों, ब्रोकेड और पारंपरिक सिल्क वस्त्रों के लिए प्रसिद्ध है, जबकि कांचीपुरम रेशमी साड़ियों का प्रमुख केंद्र है। त्योहारों और विवाह समारोहों में इनकी विशेष मांग रहती है।
तिरुपुर कॉटन टी-शर्ट, होजरी, निटवियर और स्पोर्ट्सवियर के उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है। इरोड कॉटन टेक्सटाइल और फैब्रिक प्रोसेसिंग का महत्वपूर्ण केंद्र है।
लुधियाना स्वेटर, जैकेट, थर्मल वियर, ऊनी कपड़ों, मोजों और अन्य निटवियर उत्पादों के लिए प्रमुख केंद्र है। सर्दियों में इन उत्पादों की मांग बढ़ने से व्यापारिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलता है।
पानीपत होम टेक्सटाइल का प्रमुख केंद्र है। यहां बेडशीट, कंबल, पर्दे, तौलिये, कुशन कवर और अन्य घरेलू टेक्सटाइल उत्पादों का उत्पादन एवं व्यापार होता है।
इंदौर - जबलपुर भारत का महत्वपूर्ण गारमेंट व्यापार एवं वितरण केंद्र है। यहां रेडीमेड गारमेंट्स, महिलाओं के परिधान, बच्चों के कपड़ों और विभिन्न श्रेणियों के थोक वस्त्रों का कारोबार होता है।
जयपुर ब्लॉक प्रिंट, सांगानेरी एवं बगरू प्रिंट, सूती ड्रेस मटेरियल और कुर्ती के लिए प्रसिद्ध है। इसके अतिरिक्त भिवंडी पावरलूम फैब्रिक्स तथा भीलवाड़ा एवं पाली , जोधपुर, बालोत्त रा सूटिंग, रंगाई, छपाई और टेक्सटाइल प्रोसेसिंग के प्रमुख केंद्र हैं।
बोथरा ने कहा कि भारतीय बाजार में घरेलू उत्पादों के साथ चीन, बांग्लादेश, वियतनाम और थाईलैंड से आने वाले टेक्सटाइल एवं रेडीमेड गारमेंट्स की भी मौजूदगी है। चीन से सिंथेटिक फैब्रिक्स, निटेड कपड़े और तैयार परिधान, बांग्लादेश से रेडीमेड गारमेंट्स, टी-शर्ट और निटवियर तथा वियतनाम से स्पोर्ट्सवियर, जैकेट और अन्य परिधान आयात किए जाते हैं। थाईलैंड से भी कुछ विशेष श्रेणियों के फैशन परिधान एवं टेक्सटाइल उत्पाद आते हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय निर्माताओं और व्यापारियों को समान प्रतिस्पर्धा का अवसर देने, उत्पादन लागत कम करने, गुणवत्ता बढ़ाने और आयात संबंधी नियमों का प्रभावी पालन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए।
*पारंपरिक बाजारों को प्राथमिकता, छोटे व्यापारियों और एमएसएमई को समर्थन*
बोथरा ने कहा कि ऑनलाइन खरीदारी के विस्तार के बावजूद पारंपरिक कपड़ा बाजारों और खुदरा दुकानों का महत्व बना हुआ है। कपड़ों की गुणवत्ता, रंग, डिजाइन, फिटिंग और उन्हें प्रत्यक्ष देखकर खरीदने की सुविधा ग्राहकों को स्थानीय दुकानों की ओर आकर्षित करती है।
उन्होंने कहा कि गांवों और शहरों के स्थानीय बाजारों, पारंपरिक मंडियों तथा नजदीकी दुकानों से खरीदारी करने पर छोटे व्यापारियों, खुदरा दुकानदारों, कारीगरों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को सीधा लाभ मिलता है। यही व्यापारी और उद्यम देश के टेक्सटाइल एवं गारमेंट कारोबार की रीढ़ हैं। वे रोजगार सृजन, उत्पादों के वितरण और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। इसलिए त्योहारी सीजन में पारंपरिक बाजारों को प्राथमिकता देना छोटे व्यापारियों को वास्तविक समर्थन देने के समान है।
उन्होंने कहा कि टेक्सटाइल एवं गारमेंट उद्योग में उत्पादन, प्रोसेसिंग, बुनाई, रंगाई, छपाई, डिजाइनिंग, परिवहन और खुदरा व्यापार के माध्यम से बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित होता है। इस क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए आधुनिक तकनीक, बेहतर गुणवत्ता, उचित मूल्य और व्यापारिक प्रक्रियाओं के सरलीकरण पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है।
बोथरा ने केंद्र एवं राज्य सरकारों से कपड़ा उद्योग और व्यापार की समस्याओं के समाधान, घरेलू निर्माताओं को प्रोत्साहन तथा गांवों और शहरों के छोटे व्यापारियों एवं एमएसएमई को मजबूत बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आगामी विवाह सीजन और सर्दियों की मांग से कपड़ा एवं गारमेंट कारोबार को आगे भी प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही उन्होंने व्यापारियों एवं उपभोक्ताओं से भारतीय उत्पादों को प्राथमिकता देने और पारंपरिक स्थानीय बाजारों को मजबूत बनाने की अपील की