सीएम मोहन यादव का मास्टरस्ट्रोक: 30 साल की लीज पर फिर शुरू होगी कैलारस शुगर मिल, सरकार ने निजी कंपनियों से मांगी EOI

मुरैना की बंद पड़ी कैलारस शुगर मिल को फिर शुरू करने की प्रक्रिया सरकार ने तेज कर दी है। 1,250 टीसीडी क्षमता वाली मिल को 30 साल की लीज पर देने के लिए निजी कंपनियों से 15 सितंबर तक ईओआई मांगी गई है, वहीं इसे लेकर सियासत भी हो रही हैं।

सीएम मोहन यादव का मास्टरस्ट्रोक: 30 साल की लीज पर फिर शुरू होगी कैलारस शुगर मिल, सरकार ने निजी कंपनियों से मांगी EOI

मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में लंबे समय से बंद पड़ी कैलारस शुगर मिल को फिर से चालू करने की तैयारी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर एमएसएमई विभाग ने इस मिल को लीज पर देने के लिए रुचि की अभिव्यक्ति आमंत्रित की है। इसके शुरू होने से क्षेत्र में औद्योगिक विकास और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

मुरैना। लंबे समय से बंद पड़ी कैलारस शुगर मिल को दोबारा शुरू करने की दिशा में मध्य प्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार ने मिल के पुनरुद्धार, आधुनिकीकरण और संचालन के लिए निजी कंपनियों तथा सक्षम संस्थाओं से एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) मांगा है। सरकार मिल को 30 साल की लीज पर देने की तैयारी में है। बेहतर प्रदर्शन करने वाली कंपनी को भविष्य में लीज बढ़ाने का अवसर भी दिया जा सकता है।

सरकार के इस फैसले को मुरैना और आसपास के गन्ना किसानों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मिल के दोबारा शुरू होने से जहां किसानों को गन्ने के लिए स्थानीय स्तर पर बाजार मिलने की उम्मीद है, वहीं क्षेत्र में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।

1,250 टन गन्ना प्रतिदिन की क्षमता

कैलारस शुगर मिल की स्थापित क्षमता 1,250 टन गन्ना प्रतिदिन (TCD) है। फिलहाल मिल बंद अवस्था में है। सरकार की योजना के तहत मिल की मौजूदा परिसंपत्तियों को लीज पर देकर निजी क्षेत्र की भागीदारी से इसे फिर से संचालन में लाया जाएगा।

EOI के तहत मिल का फैक्ट्री भवन, प्लांट और मशीनरी, गोदाम, वर्कशॉप सहित करीब 12.86 हेक्टेयर जमीन लीज पर दी जाएगी। हालांकि, जमीन और अन्य संपत्तियों की वास्तविक स्थिति का अंतिम आकलन सर्वे और सीमांकन के बाद किया जाएगा।

कैलारस शुगर मिल की लोकेशन भी इसकी बड़ी खासियत है। यह NH-552 पर स्थित है और कैलारस रेलवे स्टेशन से इसकी दूरी तीन किलोमीटर से भी कम है। इससे कच्चे माल की आवाजाही और तैयार उत्पाद को दूसरे बाजारों तक पहुंचाने में परिवहन की सुविधा मिल सकती है।

‘जैसा है, जहां है’ आधार पर मिलेगी मिल

सरकार मिल को ‘जैसा है, जहां है’ आधार पर लीज पर देने जा रही है। यानी जिस स्थिति में मिल वर्तमान में है, उसी स्थिति में चयनित कंपनी को इसे सौंपा जाएगा।

इसके बाद मिल का वास्तविक कायाकल्प निजी कंपनी को अपने स्तर पर करना होगा। चयनित संस्था को प्लांट और मशीनरी की मरम्मत, आवश्यक आधुनिकीकरण, वित्तीय व्यवस्था और उत्पादन शुरू करने की जिम्मेदारी उठानी होगी।

सरकार ने चीनी और इससे जुड़े उत्पादों के निर्माण के क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों के साथ अन्य पात्र संस्थाओं को भी EOI में भाग लेने का अवसर दिया है। इससे सरकार को ऐसी कंपनी चुनने में मदद मिल सकती है, जिसके पास चीनी मिल संचालन और निवेश का पर्याप्त अनुभव हो।

सरकार का फोकस—किसान और रोजगार

कैलारस शुगर मिल के बंद होने का असर सिर्फ औद्योगिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहा। गन्ने की खेती करने वाले किसानों और मिल से जुड़े श्रमिकों तथा स्थानीय कारोबारियों पर भी इसका प्रभाव पड़ा है।

मिल शुरू होने पर गन्ना किसानों को अपनी उपज के लिए स्थानीय खरीद व्यवस्था मिलने की संभावना बढ़ेगी। इसके अलावा परिवहन, मजदूरी, मरम्मत, कृषि सेवाओं और छोटे कारोबारों में भी गतिविधियां बढ़ सकती हैं।

सरकार का उद्देश्य मिल की पुरानी परिसंपत्तियों का इस्तेमाल करते हुए उसे फिर से आर्थिक गतिविधियों का केंद्र बनाना है। यदि मिल सफलतापूर्वक शुरू होती है तो इससे कैलारस के साथ आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को भी गति मिलने की उम्मीद है।

31 अगस्त और 1 सितंबर को साइट विजिट

EOI में रुचि रखने वाली कंपनियों के लिए सरकार ने मिल के निरीक्षण की तारीख भी तय कर दी है। इच्छुक कंपनियां 31 अगस्त और 1 सितंबर 2026 को कैलारस शुगर मिल का साइट विजिट कर सकेंगी।

इसके लिए कंपनियों को कम से कम दो कार्यदिवस पहले लिखित अनुरोध देना होगा। इसके बाद 3 सितंबर को भोपाल के विंध्याचल भवन में प्री-EOI बैठक आयोजित की जाएगी।

इस बैठक में इच्छुक कंपनियां योजना, मिल की स्थिति, लीज और अन्य शर्तों से जुड़े सवाल पूछ सकेंगी। सवाल भेजने की अंतिम तारीख 7 सितंबर 2026 शाम 5 बजे निर्धारित की गई है। सरकार की ओर से इन सवालों के जवाब 8 सितंबर को दिए जाएंगे।

15 सितंबर तक जमा होंगे प्रस्ताव

EOI प्रक्रिया की महत्वपूर्ण तारीखों में सबसे अहम 15 सितंबर 2026 है। इच्छुक कंपनियों और संस्थाओं को अपना प्रस्ताव 15 सितंबर की शाम 5 बजे तक ऑनलाइन जमा करना होगा।

प्राप्त प्रस्तावों को 16 सितंबर 2026 शाम 4 बजे ऑनलाइन खोला जाएगा। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन रखी गई है। इसके जरिए सरकार निजी क्षेत्र से ऐसे प्रस्ताव हासिल करना चाहती है, जिनमें मिल को दोबारा चालू करने की क्षमता और निवेश की ठोस योजना हो।

मिल को लेकर सियासत भी तेज

कैलारस शुगर मिल को दोबारा शुरू कराने का मुद्दा अब राजनीतिक बहस का केंद्र भी बन गया है। मिल शुरू कराने की मांग को लेकर क्षेत्रीय विधायक पंकज उपाध्याय आमरण अनशन पर हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि मिल शुरू होने से क्षेत्र के किसानों और स्थानीय युवाओं को फायदा मिलेगा तथा रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

वहीं भाजपा ने विधायक के आंदोलन को राजनीतिक बताते हुए इसे श्रेय लेने की राजनीति करार दिया है। भाजपा नेताओं का दावा है कि सरकार मिल को दोबारा शुरू करने का फैसला पहले ही ले चुकी थी और निविदा प्रक्रिया भी आने वाली थी। ऐसे में विधायक का आंदोलन सरकार के फैसले का श्रेय लेने की कोशिश है।

फैसले के बाद किसानों की उम्मीदें बढ़ीं

कैलारस शुगर मिल को फिर से शुरू करने की सरकारी कवायद ने क्षेत्र में उम्मीद जगाई है। लंबे समय से बंद औद्योगिक इकाई को निजी निवेश के जरिए दोबारा चालू करने की योजना सरकार के लिए भी एक बड़ी परीक्षा होगी।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि कितनी कंपनियां EOI में रुचि दिखाती हैं और उनमें से किस संस्था को मिल के पुनरुद्धार की जिम्मेदारी मिलती है। कंपनी का चयन होने के बाद वास्तविक चुनौती मिल की मशीनरी को दुरुस्त करने, पर्याप्त निवेश जुटाने, गन्ने की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करने और उत्पादन को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाने की होगी।

अगर यह प्रक्रिया सफल रहती है और कैलारस शुगर मिल दोबारा उत्पादन शुरू करती है, तो यह केवल एक बंद मिल के पुनरुद्धार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मुरैना के गन्ना किसानों, श्रमिकों और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।