RGPV से राजीव गांधी का नाम हटाने पर भड़की कांग्रेस: कमलनाथ बोले- नाम बदलने से इतिहास नहीं बदलेगा, उमंग सिंघार ने बताया साजिश

मध्य प्रदेश में मोहन यादव सरकार द्वारा भोपाल स्थित राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) को तीन हिस्सों में बांटने और इससे पूर्व प्रधानमंत्री का नाम हटाने के फैसले पर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया

RGPV से राजीव गांधी का नाम हटाने पर भड़की कांग्रेस: कमलनाथ बोले- नाम बदलने से इतिहास नहीं बदलेगा, उमंग सिंघार ने बताया साजिश

राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) को तीन हिस्सों में बांटने और उसका नाम बदलने के फैसले को लेकर मध्य प्रदेश में राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। कांग्रेस ने भाजपा सरकार के फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए इसे पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के योगदान को मिटाने की कोशिश बताया है।

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) के पुनर्गठन और इसके नाम से पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का नाम हटाए जाने के फैसले को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है। मोहन यादव सरकार के इस फैसले पर कांग्रेस ने कड़ा विरोध जताया है। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इसे भाजपा सरकार की “ओछी मानसिकता” करार देते हुए कहा कि किसी संस्थान का नाम बदलने से इतिहास नहीं बदला जा सकता। वहीं, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए इसे देश के महान नेताओं के खिलाफ साजिश बताया है।

दरअसल, मध्य प्रदेश सरकार ने हाल ही में हुई मोहन कैबिनेट की बैठक में प्रदेश के प्रतिष्ठित राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के पुनर्गठन को मंजूरी दी है। सरकार के निर्णय के अनुसार वर्तमान विश्वविद्यालय को तीन हिस्सों में विभाजित कर भोपाल, उज्जैन और जबलपुर में तीन अलग-अलग प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय स्थापित किए जाएंगे। इन विश्वविद्यालयों का क्षेत्रीय आधार पर नामकरण भी किया जाएगा।

सरकार का कहना है कि इस पुनर्गठन का उद्देश्य प्रदेश में तकनीकी शिक्षा का क्षेत्रीय विस्तार करना, विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराना और उच्च एवं तकनीकी शिक्षा में क्षेत्रीय संतुलन स्थापित करना है। सरकार इसे तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कदम बता रही है। हालांकि, विश्वविद्यालय के नाम से राजीव गांधी का नाम हटाए जाने को लेकर कांग्रेस ने राजनीतिक मोर्चा खोल दिया है।

कमलनाथ ने भाजपा सरकार पर साधा निशाना

पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सरकार के फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे भाजपा सरकार की ओछी मानसिकता बताया। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश के प्रतिष्ठित राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय को तीन हिस्सों में बांटकर उसके नाम से स्वर्गीय पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का नाम हटाना दुर्भाग्यपूर्ण है।

कमलनाथ ने कहा कि राजीव गांधी का देश के तकनीकी विकास में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनके अनुसार, राजीव गांधी के कार्यकाल में भारत आधुनिक तकनीक और सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ा। उन्होंने सूचना क्रांति और कंप्यूटर युग की शुरुआत का श्रेय भी राजीव गांधी को दिया।

पूर्व मुख्यमंत्री ने भाजपा पर राजनीतिक कटाक्ष करते हुए कहा कि भाजपा सरकार खुद कोई नया काम करने के बजाय कांग्रेस सरकारों के समय किए गए कार्यों और संस्थानों की नाम पट्टिकाएं बदलने में लगी रहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव करने के बजाय नाम बदलने की राजनीति कर रही है।

कमलनाथ ने मांग की कि विश्वविद्यालय से राजीव गांधी का नाम नहीं हटाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी संस्थान का नाम बदलने से उस व्यक्ति का योगदान और इतिहास समाप्त नहीं हो जाता।

“नाम बदलकर इतिहास नहीं बदल सकते”

कमलनाथ ने सरकार को चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि अच्छे और बुरे हर काम का हिसाब होता है। उन्होंने कहा कि समय हमेशा एक जैसा नहीं रहता और राजनीतिक फैसलों का जवाब भी भविष्य में दिया जाता है।

उन्होंने अपने बयान में कहा कि नाम बदलकर इतिहास नहीं बदला जा सकता। उनका कहना है कि राजीव गांधी का देश के विकास में योगदान इतिहास का हिस्सा है और किसी संस्थान के नाम से उनका नाम हटाने से यह योगदान लोगों की स्मृति से खत्म नहीं होगा।

कांग्रेस के इस रुख से साफ है कि विश्वविद्यालय के पुनर्गठन के साथ-साथ नाम परिवर्तन का मुद्दा आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति में बड़ा विषय बन सकता है। कांग्रेस इसे भाजपा सरकार की वैचारिक राजनीति से जोड़ रही है, जबकि सरकार इसे प्रशासनिक और शैक्षणिक सुधार के तौर पर पेश कर रही है।

उमंग सिंघार ने भी जताया विरोध

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी सरकार के फैसले की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि देश में सूचना प्रौद्योगिकी की क्रांति और कंप्यूटर युग की शुरुआत में राजीव गांधी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ऐसे में उनके नाम से जुड़े प्रतिष्ठित तकनीकी विश्वविद्यालय का नाम बदलना उचित नहीं है।

सिंघार ने सवाल उठाया कि जिन नेताओं ने देश के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित किया, देश के विकास में योगदान दिया और कई नेताओं ने देश के लिए शहादत तक दी, उनके नाम संस्थानों से हटाना क्या सही है?

उन्होंने कहा कि राजीव गांधी का योगदान केवल कांग्रेस तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के तकनीकी विकास और आधुनिक भारत के निर्माण से जुड़ा हुआ है। उनके अनुसार, सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत की मौजूदा पहचान के पीछे उस दौर में लिए गए कई महत्वपूर्ण फैसलों की भूमिका रही है।

“नाम दिलों से नहीं हटाया जा सकता”

उमंग सिंघार ने कहा कि संस्थानों के नाम बदलने से नेताओं की स्मृतियां लोगों के दिलों से नहीं हटाई जा सकतीं। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव से अपील की कि सरकार को नाम हटाने की मानसिकता पर पुनर्विचार करना चाहिए।

सिंघार ने भाजपा पर निशाना साधते हुए यह भी सवाल उठाया कि जिन लोगों का स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान नहीं था, क्या सरकार उनके नाम पर संस्थानों का नामकरण करना चाहती है? उन्होंने सरकार की इस नीति को देश के महान नेताओं के खिलाफ साजिश करार दिया।

उन्होंने कहा कि राजीव गांधी ने भारत में सूचना क्रांति की जो नींव रखी थी, उसका प्रभाव आज भी दिखाई देता है। भारत आज दुनिया के प्रमुख आईटी देशों में शामिल है और तकनीकी क्षेत्र में देश की पहचान लगातार मजबूत हुई है।

सरकार का तर्क-क्षेत्रीय संतुलन से बेहतर होगी तकनीकी शिक्षा

कांग्रेस के विरोध के बीच सरकार का कहना है कि RGPV का पुनर्गठन किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं बल्कि तकनीकी शिक्षा के विस्तार और बेहतर प्रशासन के लिए किया जा रहा है। एक बड़े विश्वविद्यालय के स्थान पर तीन क्षेत्रीय तकनीकी विश्वविद्यालय बनने से विद्यार्थियों को अपने क्षेत्र में ही बेहतर शैक्षणिक अवसर मिलने की उम्मीद है।

भोपाल, उज्जैन और जबलपुर में अलग-अलग तकनीकी विश्वविद्यालय स्थापित होने से संबंधित क्षेत्रों के कॉलेजों का प्रशासनिक प्रबंधन भी आसान हो सकता है। सरकार का मानना है कि इससे विश्वविद्यालयों पर प्रशासनिक दबाव कम होगा और स्थानीय जरूरतों के अनुसार पाठ्यक्रम, शोध और तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा दिया जा सकेगा।

हालांकि, कांग्रेस का आरोप है कि यदि सरकार का उद्देश्य केवल प्रशासनिक सुधार और तकनीकी शिक्षा का विस्तार है तो विश्वविद्यालय का पुनर्गठन करने के साथ राजीव गांधी का नाम हटाने की जरूरत क्यों पड़ी। इसी सवाल को लेकर कांग्रेस सरकार पर लगातार हमला कर रही है।

नाम परिवर्तन बना राजनीतिक मुद्दा

RGPV के पुनर्गठन के फैसले ने जहां तकनीकी शिक्षा के विस्तार को लेकर चर्चा शुरू की है, वहीं नाम परिवर्तन ने इसे राजनीतिक बहस में बदल दिया है। कांग्रेस इसे राजीव गांधी की विरासत से जोड़कर देख रही है और सरकार से फैसले पर पुनर्विचार की मांग कर रही है।

दूसरी ओर, सरकार की ओर से विश्वविद्यालयों के पुनर्गठन को शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में कदम बताया जा रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा विधानसभा और राजनीतिक मंचों पर और जोर पकड़ सकता है।

कांग्रेस नेताओं के बयानों से यह स्पष्ट है कि पार्टी इस फैसले को केवल विश्वविद्यालय के प्रशासनिक पुनर्गठन तक सीमित नहीं मान रही, बल्कि इसे वैचारिक और राजनीतिक मुद्दे के तौर पर उठा रही है। कमलनाथ का “नाम बदलकर इतिहास नहीं बदल सकते” वाला बयान और उमंग सिंघार का “नाम दिलों से नहीं हटाया जा सकता” वाला तर्क कांग्रेस की आगे की रणनीति का संकेत दे रहा है।

अब निगाह इस बात पर है कि क्या सरकार नाम परिवर्तन के फैसले पर कोई स्पष्टीकरण देती है या कांग्रेस के विरोध के बावजूद तीनों नए तकनीकी विश्वविद्यालयों की प्रक्रिया को आगे बढ़ाती है। फिलहाल, RGPV के पुनर्गठन के साथ राजीव गांधी के नाम को लेकर मध्य प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है।