पीएचसी कुठौंद में 249 मरीजों का पंजीकरण, दवाओं की उपलब्धता संतोषजनक; आईजीआरएस में नहीं मिला कोई डिफॉल्टर प्रकरण

पीएचसी कुठौंद में 249 मरीजों का पंजीकरण मिला। दवाओं और जरूरी जीवनरक्षक औषधियों की उपलब्धता संतोषजनक रही। पशु चिकित्सालय में छह पशुओं का उपचार हुआ, जबकि ब्लॉक कार्यालय में आईजीआरएस का कोई प्रकरण डिफॉल्टर नहीं मिला। छह माह से लंबित कंप्यूटर ऑपरेटर के मानदेय का भुगतान कराने के निर्देश भी दिए गए।

पीएचसी कुठौंद में 249 मरीजों का पंजीकरण, दवाओं की उपलब्धता संतोषजनक; आईजीआरएस में नहीं मिला कोई डिफॉल्टर प्रकरण

डीएम-एसपी के निरीक्षण में स्वास्थ्य केंद्र से लेकर ब्लॉक कार्यालय तक व्यवस्थाओं की हुई पड़ताल

उरई। जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय और पुलिस अधीक्षक विनय कुमार सिंह ने शनिवार को विकासखंड कुठौंद क्षेत्र के विभिन्न सरकारी संस्थानों का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, राजकीय पशु चिकित्सालय एवं कृत्रिम गर्भाधान केंद्र तथा विकासखंड कार्यालय की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को आमजन को बेहतर, पारदर्शी और समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कुठौंद के निरीक्षण के दौरान पंजीकरण काउंटर पर उस समय तक 249 मरीजों का पंजीकरण पाया गया। जिलाधिकारी ने पंजीकरण व्यवस्था की जानकारी लेते हुए मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं का जायजा लिया। व्यवस्था संतोषजनक मिलने पर उन्होंने स्वास्थ्य कर्मियों को मरीजों के साथ संवेदनशील व्यवहार करने और उपचार में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरतने के निर्देश दिए।

औषधि वितरण काउंटर के निरीक्षण में चिकित्सकों के पर्चे के अनुसार मरीजों को दवाएं उपलब्ध कराई जा रही थीं। जिलाधिकारी ने विशेष रूप से स्नेक बाइट और रेबीज से संबंधित आवश्यक दवाओं की उपलब्धता की जानकारी ली। दोनों प्रकार की आवश्यक औषधियां पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध मिलीं। उन्होंने निर्देश दिए कि जीवनरक्षक दवाओं को निर्धारित तापमान पर सुरक्षित रखा जाए और उनके स्टॉक, उपलब्धता तथा वैधता की नियमित निगरानी की जाए, ताकि आवश्यकता पड़ने पर मरीजों को तत्काल उपचार मिल सके।

प्रयोगशाला के निरीक्षण के दौरान मरीजों के सैंपल लिए जाने और संबंधित रजिस्टर के व्यवस्थित रख-रखाव की स्थिति देखी गई। जिलाधिकारी ने जांच से जुड़े सभी अभिलेख नियमित रूप से अपडेट रखने तथा मरीजों को जांच रिपोर्ट समय से उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। प्रसव कक्ष का निरीक्षण करते हुए उन्होंने आवश्यक उपकरणों और दवाओं की उपलब्धता की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि प्रसव सेवाओं के लिए कक्ष हर समय तैयार रहना चाहिए और विशेषकर रात्रिकालीन सेवाओं में किसी भी प्रकार की कमी नहीं होनी चाहिए।

इसके बाद जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने राजकीय पशु चिकित्सालय एवं कृत्रिम गर्भाधान केंद्र कुठौंद का निरीक्षण किया। पशु चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि निरीक्षण के दिन छह पशुओं का उपचार किया गया। औषधियों के स्टॉक का रजिस्टर से मिलान करने पर व्यवस्था संतोषजनक पाई गई। जिलाधिकारी ने पशुपालकों से संबंधित अभिलेखों की भी जानकारी ली और निर्देश दिए कि पशुपालकों के नाम व पते के साथ उनका मोबाइल नंबर अनिवार्य रूप से दर्ज किया जाए। इससे जरूरत पड़ने पर पशुपालकों से संपर्क करने के साथ-साथ उन्हें विभागीय योजनाओं की जानकारी भी समय पर दी जा सकेगी।

जिलाधिकारी ने कृत्रिम गर्भाधान और सेक्स-सॉर्टेड सीमन के उपयोग की भी समीक्षा की। उन्होंने संबंधित आंकड़ों को नियमित रूप से अपडेट रखने और पशुपालकों को इस सुविधा के लाभों के बारे में जागरूक करने के निर्देश दिए, ताकि अधिक से अधिक पशुपालक इसका लाभ उठा सकें। वर्षा ऋतु को देखते हुए उन्होंने पशुओं में होने वाली संक्रामक और मौसमी बीमारियों की रोकथाम के लिए विशेष टीकाकरण अभियान चलाने तथा संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने को कहा।

निरीक्षण के अगले चरण में विकासखंड कुठौंद कार्यालय की व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया। यहां आईजीआरएस पटल की स्थिति की समीक्षा की गई। कंप्यूटर पर दर्ज प्रकरणों की स्थिति देखने पर कोई भी मामला डिफॉल्टर श्रेणी में नहीं पाया गया। जिलाधिकारी ने इसे संतोषजनक स्थिति बताते हुए शिकायतों के निस्तारण में इसी तरह की तत्परता बनाए रखने के निर्देश दिए।

निरीक्षण के दौरान कंप्यूटर ऑपरेटर ने लगभग छह माह से मानदेय लंबित होने की जानकारी जिलाधिकारी को दी। मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारी को प्रकरण की जांच कर नियमानुसार लंबित मानदेय का शीघ्र भुगतान सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए।

स्थापना पटल के निरीक्षण के दौरान कर्मचारियों की जीपीएफ पासबुक और संबंधित अभिलेखों का अवलोकन किया गया। अभिलेख अद्यतन, सुव्यवस्थित और अच्छी स्थिति में पाए गए। जिलाधिकारी ने अभिलेखों के बेहतर रख-रखाव के लिए संबंधित कर्मचारियों की सराहना की। उन्होंने खंड विकास अधिकारी को उत्कृष्ट कार्य करने वाले कर्मचारियों को प्रशंसा पत्र प्रदान किए जाने की कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए।

जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने कहा कि सरकारी संस्थानों में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को बेहतर सुविधाएं और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शासन की योजनाओं और जनकल्याणकारी सेवाओं का लाभ पात्र लोगों तक समय से पहुंचाया जाए। किसी भी स्तर पर लापरवाही मिलने पर जिम्मेदारी तय की जाएगी।

पुलिस अधीक्षक विनय कुमार सिंह ने भी अधिकारियों और कर्मचारियों को जनसामान्य की समस्याओं के प्रति संवेदनशीलता और तत्परता के साथ कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पुलिस और प्रशासन का उद्देश्य आमजन को सुरक्षित, सुगम और बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराना है।

निरीक्षण के दौरान खंड विकास अधिकारी कुठौंद अरुण कुमार सिंह, एडीओ पंचायत बृजेन्द्र कुमार त्रिपाठी, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण कुमार तिवारी, पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. रवि कुमार तिवारी सहित संबंधित अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।