क्या जाएगी कांग्रेस दतिया विधायक घनश्याम सिंह की सदस्यता? 1991 की FIR छिपाने का आरोप, भाजपा नेता पहुंचे हाईकोर्ट

अप्रैल में कांग्रेस के ही विधायक रहे राजेंद्र भारती की विधानसभा सदस्यता चले जाने के बाद दतिया में जुलाई माह में उपचुनाव हुए थे। जिसमें कांग्रेस के घनश्याम सिंह विजयी रहे और वर्तमान विधायक हैं

क्या जाएगी कांग्रेस दतिया विधायक घनश्याम सिंह की सदस्यता? 1991 की FIR छिपाने का आरोप, भाजपा नेता पहुंचे हाईकोर्ट

दतिया विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक घनश्याम सिंह के निर्वाचन को जबलपुर हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। भाजपा नेता ने चुनावी शपथपत्र में 1991 के आपराधिक मामले की जानकारी छिपाने का आरोप लगाया है।

समरी: मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट एक बार फिर कानूनी विवाद के चलते चर्चा में है। कांग्रेस विधायक घनश्याम सिंह के निर्वाचन को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। भाजपा नेता एवं अधिवक्ता दीपक बेलपत्री ने अधिवक्ता शिवम गौतम के माध्यम से 17 सितंबर 2026 को याचिका दायर की। याचिका में आरोप लगाया गया है कि उपचुनाव के दौरान दाखिल चुनावी शपथ पत्र में घनश्याम सिंह ने 1991 में दर्ज कथित FIR की जानकारी नहीं दी। हालांकि, याचिका दाखिल होने मात्र से विधायक की सदस्यता समाप्त नहीं होती। मामले में अदालत की सुनवाई और आगे की न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही कोई कानूनी निष्कर्ष सामने आएगा।

मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी हलचल तेज हो गई है। अगस्त में उपचुनाव जीतकर विधायक बने कांग्रेस के घनश्याम सिंह के निर्वाचन को अब हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। भाजपा नेता एवं अधिवक्ता दीपक बेलपत्री ने अधिवक्ता शिवम गौतम के माध्यम से 17 सितंबर 2026 को याचिका दायर की है। याचिका में चुनावी शपथ पत्र में कथित तौर पर एक पुराने आपराधिक मामले की जानकारी नहीं देने का आरोप लगाया गया है।

इस याचिका के सामने आने के बाद दतिया की राजनीति में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि अदालत में लगाए गए आरोप साबित होते हैं तो क्या घनश्याम सिंह का निर्वाचन प्रभावित हो सकता है और क्या दतिया विधानसभा सीट पर दोबारा उपचुनाव की स्थिति बन सकती है। फिलहाल इन सवालों का कोई अंतिम उत्तर नहीं है, क्योंकि मामला न्यायिक प्रक्रिया के स्तर पर है।

1991 की FIR को लेकर क्या है आरोप?

याचिका में दावा किया गया है कि घनश्याम सिंह ने दतिया विधानसभा उपचुनाव के दौरान अपने चुनावी शपथ पत्र में दो आपराधिक मामलों की जानकारी दी थी, लेकिन वर्ष 1991 में दर्ज एक अन्य FIR का उल्लेख नहीं किया।

बताया गया है कि यह मामला पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के बाद दतिया में हुए चक्काजाम और आंदोलन से जुड़ा था। याचिका के अनुसार उस समय करीब 22 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी और उनमें घनश्याम सिंह का नाम भी शामिल था।

याचिकाकर्ता की ओर से इसी मामले को आधार बनाकर उनके निर्वाचन को चुनौती दी गई है। अब अदालत के समक्ष यह मुद्दा रहेगा कि संबंधित मामले की कानूनी प्रकृति क्या थी, उस समय उसकी स्थिति क्या थी और चुनावी शपथ पत्र में उसकी जानकारी देना कानूनी रूप से आवश्यक था या नहीं।

याचिका से सदस्यता अभी खत्म नहीं हुई

हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर किए जाने का अर्थ यह नहीं है कि घनश्याम सिंह की विधानसभा सदस्यता तत्काल समाप्त हो गई है। वे फिलहाल दतिया से निर्वाचित विधायक हैं।

किसी निर्वाचित प्रतिनिधि के निर्वाचन को चुनौती मिलने के बाद अदालत आरोपों, दस्तावेजों और संबंधित कानूनी प्रावधानों की जांच करती है। इसलिए अभी यह कहना कि घनश्याम सिंह की सदस्यता चली जाएगी या दतिया में फिर से चुनाव होगा, जल्दबाजी होगी।

मामले में अदालत की सुनवाई और उसके बाद आने वाले आदेश ही आगे की स्थिति स्पष्ट करेंगे।

उपचुनाव में 6,016 वोटों से जीते थे घनश्याम सिंह

दतिया विधानसभा सीट पर इसी साल उपचुनाव हुआ था। चुनाव परिणाम 3 अगस्त को घोषित किए गए थे। कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने भाजपा के आशुतोष तिवारी को 6,016 मतों से हराया था।

घनश्याम सिंह को कुल 66,757 वोट मिले थे, जबकि भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को 60,741 वोट प्राप्त हुए। इस तरह कांग्रेस प्रत्याशी ने 6,016 मतों के अंतर से जीत दर्ज की।

यह उपचुनाव पूर्व कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की विधानसभा सदस्यता समाप्त होने के बाद कराया गया था। परिणाम आने के बाद घनश्याम सिंह दतिया के विधायक निर्वाचित हुए और अब उनके निर्वाचन को ही हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।

घनश्याम सिंह बोले- मुझे मामले की जानकारी नहीं थी

मामले को लेकर दतिया विधायक घनश्याम सिंह ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि वर्ष 1991 में राजीव गांधी की हत्या के बाद दतिया में आंदोलन और प्रदर्शन हुए थे, लेकिन उनके संज्ञान में उस समय उनके खिलाफ कोई मामला दर्ज होने की जानकारी नहीं थी।

उन्होंने कहा कि वे लंबे समय से सक्रिय राजनीति में हैं और इस दौरान कई आंदोलन और राजनीतिक गतिविधियां हुई हैं। उनका कहना है कि यदि किसी आंदोलन के दौरान पुलिस ने मामला दर्ज किया हो और उसकी जानकारी उन्हें नहीं मिली हो, तो उन्हें उसके बारे में पता नहीं रहा होगा।

घनश्याम सिंह ने यह भी कहा कि उन्हें हाईकोर्ट में दायर की गई याचिका की पूरी जानकारी अभी प्राप्त नहीं हुई है। उनका कहना है कि याचिका और उसमें लगाए गए आरोपों की पूरी जानकारी मिलने के बाद वे विस्तृत जवाब देंगे।

एफिडेविट में जानकारी देने को लेकर विधायक का तर्क

घनश्याम सिंह ने चुनावी एफिडेविट में 1991 के मामले का उल्लेख नहीं करने को लेकर कहा कि उनके अनुसार उस मामले में जानकारी देना आवश्यक नहीं था।

उनका तर्क है कि संबंधित मामला उस श्रेणी में नहीं आता था जिसमें अदालत में चालान पेश होकर मामला नियमित रूप से प्रचलन में आ चुका हो और जिसे चुनावी शपथ पत्र में अनिवार्य रूप से दर्ज किया जाना हो।

हालांकि, इस मामले में याचिकाकर्ता की ओर से अलग कानूनी स्थिति रखी गई है। अब यह अदालत के समक्ष तय होने वाला विषय है कि संबंधित FIR और उसकी कानूनी स्थिति चुनावी शपथ पत्र में जानकारी देने के दायित्व को किस तरह प्रभावित करती है।

दतिया में फिर उपचुनाव की चर्चा क्यों?

याचिका सामने आने के बाद दतिया में एक बार फिर उपचुनाव की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। इसकी वजह यह है कि इससे पहले भी इसी विधानसभा सीट पर विधायक की सदस्यता से जुड़े मामले के बाद उपचुनाव हुआ था।

हालांकि, मौजूदा स्थिति में दोबारा उपचुनाव की बात केवल संभावित चर्चा है। अदालत ने अभी ऐसा कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है जिससे घनश्याम सिंह का निर्वाचन रद्द माना जाए।

इसलिए फिलहाल दतिया विधानसभा सीट पर किसी नए चुनाव की घोषणा या संभावना को निश्चित रूप से कहना उचित नहीं होगा।

अब अदालत की प्रक्रिया पर टिकी नजर

घनश्याम सिंह के निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका के बाद अब पूरे मामले की दिशा अदालत की कार्यवाही से तय होगी। याचिकाकर्ता की ओर से 1991 की कथित FIR और चुनावी शपथ पत्र में उसके उल्लेख को लेकर सवाल उठाया गया है, जबकि विधायक की ओर से मामले की जानकारी नहीं होने और उसे एफिडेविट में दर्ज करना जरूरी नहीं होने का तर्क दिया गया है।

ऐसे में आगे की सुनवाई में याचिका में लगाए गए आरोप, उपलब्ध दस्तावेज और संबंधित कानूनी प्रावधान महत्वपूर्ण होंगे।

दतिया की जनता ने अगस्त में हुए उपचुनाव में घनश्याम सिंह को 6,016 मतों के अंतर से विधानसभा भेजा था। अब उनके निर्वाचन को अदालत में चुनौती मिलने के बाद इस सीट की राजनीतिक हलचल एक बार फिर बढ़ गई है। लेकिन फिलहाल घनश्याम सिंह विधायक पद पर बने हुए हैं और उनकी सदस्यता के भविष्य को लेकर कोई अंतिम न्यायिक निर्णय सामने नहीं आया है।