पति को पीठ पर लादकर कलेक्टर कार्यालय पहुंची बुजुर्ग महिला, 9 साल से ट्राई साइकिल और पेंशन के लिए लगा रही चक्कर

बुरहानपुर में बुजुर्ग महिला की मजबूरी, संघर्ष और जीवटता आंखें नम कर देगी और सरकारी सिस्टम के प्रति रोष.

पति को पीठ पर लादकर कलेक्टर कार्यालय पहुंची बुजुर्ग महिला, 9 साल से ट्राई साइकिल और पेंशन के लिए लगा रही चक्कर

मध्यप्रदेश के बुरहानपुर से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया है। दरअसल, एक महिला अपने दिव्यांग पति को पीठ पर उठाकर कलेक्टर कार्यालय पहुंची। महिला की बेबसी और पति के प्रति उसका समर्पण देखकर हर कोई हैरान रह गया। 

बुरहानपुर। मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले से सरकारी व्यवस्थाओं और जरूरतमंदों की परेशानियों को उजागर करने वाला एक भावुक कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक बुजुर्ग महिला अपने दिव्यांग पति को पीठ पर उठाकर कलेक्टर कार्यालय पहुंच गई। महिला की इस बेबसी को देखकर कलेक्ट्रेट में मौजूद लोग भी हैरान रह गए। किसी ने सोचा भी नहीं था कि एक बुजुर्ग पत्नी अपने पति को इस तरह पीठ पर लादकर न्याय की गुहार लगाने पहुंचेगी। महिला की मांग बेहद साधारण थी। वह चाहती थी कि उसके दिव्यांग पति को आने-जाने के लिए ट्राई साइकिल और जीवनयापन के लिए पेंशन मिल जाए, ताकि उन्हें दूसरों पर निर्भर होकर न रहना पड़े।

पति को पीठ पर लेकर कलेक्टर के पास पहुंची बिंदूबाई

जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला बुरहानपुर की महाजन कॉलोनी का है। यहां रहने वाली बिंदूबाई अपने दिव्यांग पति दयाशंकर को पीठ पर उठाकर कलेक्ट्रेट पहुंचीं। कलेक्टर विवेक कुमार के सामने पहुंचकर उन्होंने अपनी परेशानी बताई और पति के लिए ट्राई साइकिल तथा पेंशन दिलाने की मांग की।

बिंदूबाई की हालत और उनके पति को पीठ पर लादकर कार्यालय पहुंचने का दृश्य देखकर वहां मौजूद लोग भावुक हो गए। एक बुजुर्ग महिला, जो खुद उम्र के इस पड़ाव पर शारीरिक परेशानियों से जूझ रही है, अपने पति को सहारा देने के लिए लगातार संघर्ष कर रही है। लेकिन उनकी परेशानी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें अपनी मांग अधिकारियों तक पहुंचाने के लिए पति को पीठ पर उठाकर कलेक्ट्रेट आना पड़ा।

9 साल पहले पैरालिसिस ने बदल दी जिंदगी

बिंदूबाई ने कलेक्टर को अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि करीब 9 साल पहले उनके पति दयाशंकर को पैरालिसिस हो गया था। बीमारी के कारण उनकी हालत लगातार बिगड़ती गई। इलाज के दौरान डॉक्टरों को उनका एक पैर काटना पड़ा। इसके बाद से दयाशंकर दिव्यांग हो गए और खुद से चलने-फिरने में असमर्थ हैं।

पति की बीमारी के बाद से बिंदूबाई की जिंदगी भी पूरी तरह बदल गई। घर की जिम्मेदारियों के साथ पति की देखभाल और उन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने की जिम्मेदारी भी उन्हीं के कंधों पर आ गई। पति को कहीं लेकर जाना होता है तो उन्हें अपनी पीठ का सहारा देना पड़ता है।

बीते करीब 9 वर्षों से वह इसी तरह पति को संभाल रही हैं। उम्र बढ़ने के साथ उनके लिए यह काम और भी मुश्किल होता जा रहा है। इसके बावजूद उन्होंने पति का साथ नहीं छोड़ा और लगातार उनकी जरूरतों को पूरा करने की कोशिश करती रहीं।

ट्राई साइकिल और पेंशन से बदल सकती है जिंदगी

दयाशंकर के लिए ट्राई साइकिल सिर्फ आने-जाने का साधन नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा सहारा साबित हो सकती है। इससे उन्हें हर छोटे-बड़े काम के लिए पत्नी पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। वहीं पेंशन मिलने से परिवार को आर्थिक मदद भी मिल सकेगी।

इस पूरे मामले ने दिव्यांगजनों को मिलने वाली सरकारी सुविधाओं और जरूरतमंदों तक योजनाओं का लाभ पहुंचने की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि किसी दिव्यांग व्यक्ति को जरूरी सहायता पाने के लिए वर्षों तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ें, तो यह व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।

फिलहाल बिंदूबाई की उम्मीद कलेक्टर से लगी हुई है। वह चाहती हैं कि उनकी परेशानी को गंभीरता से समझा जाए और उनके पति को ट्राई साइकिल तथा पेंशन का लाभ दिलाया जाए। अब देखना होगा कि प्रशासन इस बुजुर्ग दंपती की गुहार पर कितनी जल्दी कार्रवाई करता है और उन्हें राहत मिल पाती है या नहीं।

एक बुजुर्ग पत्नी का अपने दिव्यांग पति को पीठ पर उठाकर कलेक्ट्रेट पहुंचना सिर्फ एक तस्वीर नहीं, बल्कि उन मुश्किलों की कहानी है, जिनसे गुजरकर जरूरतमंद सरकारी योजनाओं का लाभ पाने की कोशिश करते हैं।