फर्जी PMO अधिकारी बनकर Jio World Plaza पहुंचा रोहन पारेख, वकील का दावा- ‘खुद भी ठगी का शिकार’, ऑफर लेटर से लेकर PM के हस्ताक्षर वाला कथित पत्र मिला था

मुंबई के Jio World Plaza में फर्जी PMO ID के जरिए एंट्री के मामले में गिरफ्तार रोहन पारेख के वकील ने कोर्ट में चौंकाने वाला दावा किया है. उन्होंने कहा कि रोहन पारेख खुद ठगी का शिकार हो सकता है. उसे PMO से जुड़ा हुआ ऑफर लेटर, ID कार्ड और PM के हस्ताक्षर वाला पत्र भी मिला था.

फर्जी PMO अधिकारी बनकर Jio World Plaza पहुंचा रोहन पारेख, वकील का दावा- ‘खुद भी ठगी का शिकार’, ऑफर लेटर से लेकर PM के हस्ताक्षर वाला कथित पत्र मिला था

मुंबई के BKC में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम से पहले पुलिस ने रोहन पारेख और उसके बॉडीगार्ड दिलीप कुंडे को गिरफ्तार किया है. रोहन के पास कथित तौर पर PMO का फर्जी ID कार्ड मिला था.

मुंबई। मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) स्थित Jio World Plaza में कथित फर्जी प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) पहचान पत्र के जरिए प्रवेश करने के मामले में गिरफ्तार रोहन पारेख को लेकर जांच में कई नए दावे सामने आए हैं। पारेख के बचाव पक्ष के वकील ने अदालत में दावा किया है कि उनका मुवक्किल खुद भी किसी बड़े फर्जीवाड़े का शिकार हो सकता है। वकील के मुताबिक, पारेख को PMO में नौकरी या जिम्मेदारी से संबंधित एक कथित ऑफर लेटर, पहचान पत्र और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हस्ताक्षर वाला कथित पत्र मिला था। इसके अलावा उसे प्रधानमंत्री कार्यालय के एक Additional Secretary के नाम से ईमेल भी प्राप्त हुआ था।

बचाव पक्ष का कहना है कि इन दस्तावेजों और संदेशों को देखकर पारेख को विश्वास हो गया था कि वह वास्तव में PMO से जुड़ा हुआ है। हालांकि, पुलिस अब इन सभी दस्तावेजों की सत्यता और उन्हें तैयार करने वाले लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।

Jio World Plaza में सुरक्षा जांच के दौरान खुला मामला

यह पूरा मामला सोमवार को उस समय सामने आया, जब रोहन पारेख का बॉडीगार्ड दिलीप कुंडे मुंबई के BKC स्थित Jio World Plaza के गेट पर पहुंचा। सुरक्षा जांच के दौरान उसके पास बंदूक मिलने के बाद सुरक्षाकर्मियों को शक हुआ। इसके बाद पारेख को भी मौके पर बुलाया गया।

पुलिस के मुताबिक, पारेख ने सुरक्षा कर्मचारियों को अपना एक पहचान पत्र दिखाया। इस ID कार्ड में उसे प्रधानमंत्री कार्यालय का Grade C अधिकारी बताया गया था। कार्ड देखने के बाद सुरक्षा एजेंसियों को संदेह हुआ और पुलिस को मामले की जानकारी दी गई।

जांच में पुलिस ने कार्ड की कुछ ऐसी कमियां भी बताई हैं, जिनसे उसकी प्रामाणिकता पर सवाल खड़े हुए। पुलिस के अनुसार कार्ड पर जारी किए जाने की तारीख तो दर्ज थी, लेकिन उसकी वैधता समाप्त होने की तारीख नहीं थी। इसके अलावा कार्ड जारी करने वाले अधिकारी का पद भी स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं था।

पुलिस ने शुरू की फर्जी ID की जांच

मामला सामने आने के बाद मुंबई पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित PMO ID कार्ड किसने तैयार किया, इसे पारेख तक कैसे पहुंचाया गया और इसके पीछे किसी संगठित नेटवर्क की भूमिका है या नहीं।

पुलिस अब पारेख के मोबाइल फोन, ईमेल, सोशल मीडिया संपर्क और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड की भी जांच कर सकती है। साथ ही उन लोगों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है, जिनसे पारेख की बातचीत हुई थी या जिन्होंने कथित तौर पर उसे PMO से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराए थे।

बचाव पक्ष का दावा- असली ID नहीं, मिला था सिर्फ स्क्रीनशॉट

अदालत में बचाव पक्ष ने एक महत्वपूर्ण दावा किया। वकील ने कहा कि पारेख के पास PMO ID कार्ड की वास्तविक कॉपी नहीं थी। उसे कथित पहचान पत्र का केवल स्क्रीनशॉट भेजा गया था।

वकील के अनुसार, पारेख को जो दस्तावेज, ईमेल और संदेश प्राप्त हुए, वे देखने में इतने वास्तविक प्रतीत होते थे कि उसे इस बात का संदेह नहीं हुआ कि वह किसी फर्जीवाड़े का हिस्सा बन रहा है।

बचाव पक्ष इसी आधार पर यह दलील दे रहा है कि पारेख ने जानबूझकर खुद को PMO अधिकारी बताने की कोशिश नहीं की, बल्कि संभव है कि किसी अन्य व्यक्ति या समूह ने उसे भी गुमराह किया हो।

हालांकि, पुलिस जांच पूरी होने से पहले यह स्पष्ट नहीं है कि पारेख को वास्तव में धोखा दिया गया था या उसने जानबूझकर फर्जी पहचान का इस्तेमाल किया।

PMO में नौकरी का कथित ऑफर लेटर भी मिला

वकील ने अदालत को बताया कि पारेख को PMO में काम करने से संबंधित एक कथित ऑफर लेटर भी मिला था। इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हस्ताक्षर वाला एक कथित पत्र भी उसे भेजा गया था।

इतना ही नहीं, पारेख को प्रधानमंत्री कार्यालय के एक Additional Secretary के नाम से ईमेल मिलने का भी दावा किया गया है। बचाव पक्ष का कहना है कि इन सभी चीजों ने पारेख के मन में यह विश्वास पैदा किया कि उसे वास्तव में PMO से जुड़ी कोई जिम्मेदारी या पद दिया गया है।

अब पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि ये कथित दस्तावेज और ईमेल किसने तैयार किए और क्या इनका इस्तेमाल किसी बड़े फर्जीवाड़े के लिए किया जा रहा था।

2024 से बॉडीगार्ड रखने का भी दावा

बचाव पक्ष ने अदालत में यह भी कहा कि रोहन पारेख वर्ष 2024 से बॉडीगार्ड रख रहा था। वकील के अनुसार, पारेख को बॉडीगार्ड रखने के निर्देश दिए गए थे।

घटना के समय उसके बॉडीगार्ड दिलीप कुंडे के पास बंदूक मिली थी। हालांकि पुलिस के अनुसार, बॉडीगार्ड के पास मिली बंदूक लाइसेंसी थी। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि बॉडीगार्ड को पारेख के साथ किस उद्देश्य से रखा गया था और उसे कथित PMO पहचान से संबंधित क्या जानकारी थी।

मंगेतर के लिए परफ्यूम खरीदने गया था पारेख

Jio World Plaza पहुंचने के कारण को लेकर भी बचाव पक्ष ने अदालत में अपनी बात रखी। वकील के अनुसार, पारेख वहां किसी सरकारी या आधिकारिक काम से नहीं गया था।

बचाव पक्ष का कहना है कि वह अपनी मंगेतर के लिए परफ्यूम खरीदने Jio World Plaza गया था। इसी दौरान उसके साथ बॉडीगार्ड भी मौजूद था।

पुलिस अब CCTV फुटेज के जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि पारेख किस समय परिसर में पहुंचा, उसके साथ कौन-कौन लोग थे और उसने वहां किससे मुलाकात की।

CCTV फुटेज और डिजिटल सबूतों की जांच

मुंबई क्राइम ब्रांच मामले की जांच में CCTV फुटेज को महत्वपूर्ण सबूत मान रही है। जांच एजेंसियां Jio World Plaza के प्रवेश और निकास द्वार के अलावा परिसर के भीतर लगे कैमरों की फुटेज भी खंगाल रही हैं।

इसके साथ ही कथित PMO ID कार्ड, मोबाइल फोन, ईमेल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेजों की जांच की जा रही है। पुलिस यह जानना चाहती है कि पारेख को कथित PMO पहचान से जुड़े दस्तावेज कब और किस माध्यम से मिले।

यदि जांच में यह सामने आता है कि किसी व्यक्ति या समूह ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर पारेख को भेजे थे, तो मामले में अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है।

दो लोग गिरफ्तार, एक अन्य की तलाश

इस मामले में पुलिस ने अब तक दो लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक अन्य संदिग्ध की तलाश जारी है। जांच एजेंसियां गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर कथित फर्जी PMO पहचान पत्र से जुड़े पूरे नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश कर रही हैं।

पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इसी तरह के दस्तावेज किसी अन्य व्यक्ति को भी उपलब्ध कराए गए थे या फिर पूरा मामला केवल पारेख तक सीमित है।

11 सितंबर तक पुलिस हिरासत में रोहन पारेख

मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने रोहन पारेख को 11 सितंबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है। पुलिस अब हिरासत के दौरान उससे कथित ID कार्ड, ऑफर लेटर, ईमेल और प्रधानमंत्री के हस्ताक्षर वाले कथित पत्र के बारे में पूछताछ करेगी।

जांच में यह भी पता लगाने की कोशिश होगी कि पारेख को PMO से जुड़ा होने का विश्वास कैसे हुआ और क्या उसने इस कथित पहचान का इस्तेमाल किसी अन्य व्यक्ति या संस्था पर प्रभाव डालने के लिए किया था।

फिलहाल बचाव पक्ष की ओर से यह दावा किया जा रहा है कि पारेख खुद भी ठगी का शिकार हो सकता है, जबकि पुलिस पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कर रही है। इसलिए जब तक जांच पूरी नहीं होती, यह स्पष्ट रूप से कहना जल्दबाजी होगी कि पारेख जानबूझकर फर्जी PMO अधिकारी बनकर काम कर रहा था या किसी फर्जी नेटवर्क ने उसे भी अपने जाल में फंसाया था।

प्रधानमंत्री के मुंबई दौरे से घटना का संबंध नहीं

पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि सोमवार को सामने आई यह घटना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंगलवार के मुंबई दौरे से संबंधित नहीं है। यानी कथित फर्जी PMO पहचान पत्र के जरिए Jio World Plaza में प्रवेश की कोशिश और प्रधानमंत्री के मुंबई कार्यक्रम के बीच फिलहाल कोई सीधा संबंध सामने नहीं आया है।

अब पुलिस की जांच का केंद्र कथित फर्जी दस्तावेजों की असलियत, उन्हें तैयार करने वाले लोगों और पारेख की वास्तविक भूमिका पर है। आने वाले दिनों में पूछताछ और डिजिटल सबूतों की जांच से यह साफ हो सकता है कि रोहन पारेख ने जानबूझकर PMO अधिकारी की पहचान अपनाई थी या वास्तव में वह किसी बड़े फर्जीवाड़े का शिकार बना।