चिंकी परियोजना को लेकर चौरास में किसानों की हुंकार, बोले—विकास के साथ प्रभावित परिवारों का भविष्य भी सुरक्षित हो, प्रभावित किसानों ने उचित मुआवजा, चार गुना भुगतान और परिवार के एक सदस्य को रोजगार देने की उठाई मांग
चिंकी परियोजना को लेकर चौरास में किसानों की हुंकार, बोले—विकास के साथ प्रभावित परिवारों का भविष्य भी सुरक्षित हो
प्रभावित किसानों ने उचित मुआवजा, चार गुना भुगतान और परिवार के एक सदस्य को रोजगार देने की उठाई मांग
चौरास में राष्ट्रीय किसान संगठन के बैनर तले किसानों की महत्वपूर्ण बैठक
चिंकी परियोजना से सिंचाई, बिजली और पानी के लाभ की उम्मीद
जमीन अधिग्रहण से किसानों की आजीविका और परिवार के भविष्य पर चिंता
चौरास, तहसील उदयपुरा, जिला रायसेन। चिंकी परियोजना को लेकर ग्राम चौरास में किसानों एवं ग्रामीणों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। राष्ट्रीय किसान संगठन के बैनर तले हुई बैठक में परियोजना से मिलने वाले संभावित लाभों के साथ-साथ प्रभावित होने वाले किसान परिवारों की समस्याओं और भविष्य को लेकर गंभीर चिंता जताई गई।
बैठक में किसानों ने कहा कि चिंकी परियोजना से क्षेत्र में सिंचाई सुविधा विकसित होने तथा किसानों को बिजली-पानी का लाभ मिलने की उम्मीद है। हालांकि, परियोजना के कारण जिन किसानों की जमीन, मकान अथवा खेती प्रभावित होने की संभावना है, उनके सामने आजीविका, कृषि से होने वाली आय और परिवार के भविष्य का बड़ा सवाल खड़ा है।
किसानों ने दो टूक कहा कि यदि परियोजना के लिए उनकी जमीन ली जाती है तो उन्हें केवल जमीन का मूल्य ही नहीं, बल्कि उनके परिवार के भविष्य को ध्यान में रखते हुए उचित आर्थिक सुरक्षा भी मिलनी चाहिए। प्रभावित किसानों ने जमीन के उचित मूल्य के साथ चार गुना मुआवजा देने की मांग प्रमुखता से उठाई।
इसके साथ ही किसानों ने प्रभावित प्रत्येक किसान परिवार के एक सदस्य को नौकरी अथवा रोजगार देने की मांग रखी। किसानों का कहना है कि कृषि ही उनके परिवारों की आय का प्रमुख आधार है। जमीन चले जाने के बाद परिवार की रोजी-रोटी का स्थायी साधन समाप्त हो सकता है, इसलिए मुआवजे के साथ रोजगार की व्यवस्था भी जरूरी है।
बैठक में पुनर्वास, प्रभावित परिवारों की आजीविका, कृषि भूमि के बदले मिलने वाली राशि तथा भविष्य की व्यवस्थाओं को लेकर भी चर्चा हुई। किसानों ने कहा कि परियोजना से क्षेत्र का विकास होना स्वागत योग्य है, लेकिन विकास की प्रक्रिया में प्रभावित परिवारों की समस्याओं और अधिकारों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
किसानों ने शासन-प्रशासन से मांग की कि परियोजना से प्रभावित होने वाले प्रत्येक परिवार की स्थिति का उचित आकलन कर पारदर्शी तरीके से मुआवजा, पुनर्वास और रोजगार संबंधी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
बैठक में मौजूद किसानों एवं ग्रामीणों ने अपनी समस्याएं और सुझाव राष्ट्रीय किसान संगठन के पदाधिकारियों के समक्ष रखे। किसानों ने संगठन से उनकी मांगों को शासन-प्रशासन तक मजबूती से पहुंचाने की अपेक्षा जताई।
किसानों का कहना है कि चिंकी परियोजना से क्षेत्र को सिंचाई और विकास का लाभ मिले, लेकिन इसकी कीमत प्रभावित किसान परिवारों की आजीविका और भविष्य की अनिश्चितता के रूप में नहीं चुकानी पड़े।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस