CM हाउस घेरने निकले इंटर्न डॉक्टर, 200 मीटर पहले रोका: पुलिस ने वाटर कैनन चलाया; झड़प में छात्र घायल, लाठीचार्ज का आरोप

सोमवार को स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर हमीदिया के इंटर्न डॉक्टर मुख्यमंत्री आवास की ओर निकले, पुलिस ने वाटर कैनन चलाया; एक छात्र घायल हो गया।

CM हाउस घेरने निकले इंटर्न डॉक्टर, 200 मीटर पहले रोका: पुलिस ने वाटर कैनन चलाया; झड़प में छात्र घायल, लाठीचार्ज का आरोप

भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज के एमबीबीएस इंटर्न्स स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए. 14,337 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये स्टाइपेंड करने की मांग को लेकर छात्रों ने प्रदर्शन किया और सीएम हाउस मार्च की कोशिश की. पुलिस और इंटर्न्स के बीच धक्कामुक्की हुई, जबकि वाटर कैनन का भी इस्तेमाल किया.

भोपाल। हमीदिया अस्पताल के इंटर्न डॉक्टर्स ने स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर सोमवार को राजधानी भोपाल में जोरदार प्रदर्शन किया। अपनी मांग मुख्यमंत्री तक पहुंचाने के लिए बड़ी संख्या में इंटर्न डॉक्टर मुख्यमंत्री निवास का घेराव करने के लिए निकले। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को मुख्यमंत्री निवास से करीब 200 मीटर पहले ही रोक दिया। डॉक्टरों को आगे बढ़ने से रोकने के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारी इंटर्न डॉक्टरों के बीच तीखी झड़प हो गई।

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। वाटर कैनन की चपेट में आने से एक छात्र के घायल होने की बात सामने आई है। प्रदर्शनकारी डॉक्टरों ने पुलिस पर उनके साथ मारपीट करने और लाठीचार्ज करने का आरोप लगाया है। वहीं, प्रदर्शन के कारण इलाके में यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हुई और सड़क पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।

स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदर्शन

हमीदिया अस्पताल में इंटर्नशिप कर रहे डॉक्टर लंबे समय से स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी डॉक्टरों के मुताबिक, उन्हें वर्तमान में करीब ₹14,337 प्रतिमाह स्टाइपेंड दिया जा रहा है। उनका कहना है कि मेडिकल शिक्षा और इंटर्नशिप के दौरान काम का दबाव लगातार बढ़ रहा है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें मिलने वाला स्टाइपेंड बेहद कम है।

इंटर्न डॉक्टरों की मांग है कि उनका स्टाइपेंड बढ़ाकर कम से कम ₹30 हजार प्रतिमाह किया जाए। डॉक्टरों का कहना है कि इस संबंध में सरकार की ओर से उन्हें मौखिक आश्वासन भी दिया गया था, लेकिन अभी तक स्टाइपेंड बढ़ाने को लेकर कोई ठोस निर्णय लागू नहीं किया गया है।

इसी मांग को लेकर डॉक्टरों ने मुख्यमंत्री निवास तक मार्च निकालने का फैसला किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे अपनी बात सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंचाना चाहते हैं और सरकार से जल्द निर्णय की मांग कर रहे हैं।

CM हाउस से 200 मीटर पहले पुलिस ने रोका

प्रदर्शनकारी इंटर्न डॉक्टर जब मुख्यमंत्री निवास की ओर आगे बढ़े तो पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए पहले से सुरक्षा व्यवस्था कर रखी थी। पुलिस ने बैरिकेडिंग कर डॉक्टरों को आगे बढ़ने से रोक दिया।

प्रदर्शनकारी डॉक्टर मुख्यमंत्री निवास तक जाने की मांग पर अड़े रहे। इस दौरान पुलिस और डॉक्टरों के बीच बहस शुरू हो गई। धीरे-धीरे स्थिति तनावपूर्ण हो गई और दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की और झड़प की स्थिति बन गई।

पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को पीछे हटाने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। अचानक चलाए गए पानी के तेज दबाव की चपेट में कुछ प्रदर्शनकारी आए। इसी दौरान एक छात्र के घायल होने की जानकारी सामने आई।

डॉक्टरों ने लगाया लाठीचार्ज का आरोप

प्रदर्शनकारी इंटर्न डॉक्टरों ने पुलिस कार्रवाई पर नाराजगी जताई। उनका आरोप है कि पुलिस ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों के साथ मारपीट की और लाठीचार्ज किया।

डॉक्टरों का कहना है कि वे अपनी जायज मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। उनका उद्देश्य किसी तरह की अव्यवस्था पैदा करना नहीं था, बल्कि सरकार तक अपनी बात पहुंचाना था। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जब वे मुख्यमंत्री निवास की ओर बढ़ रहे थे, तभी पुलिस ने उन्हें रोक दिया और विवाद की स्थिति पैदा हो गई।

कुछ डॉक्टरों ने दावा किया कि पुलिस कार्रवाई में उनके साथियों को चोटें आई हैं। घायल छात्र को इलाज की जरूरत बताई गई है।

मोती मस्जिद चौराहे पर भी तनाव

मुख्यमंत्री निवास की ओर बढ़ रहे डॉक्टरों को मोती मस्जिद चौराहे के पास भी पुलिस ने रोक दिया। यहां बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। पुलिस की कोशिश थी कि प्रदर्शनकारी आगे न बढ़ सकें और मुख्यमंत्री निवास की ओर जाने वाले रास्ते को सुरक्षित रखा जा सके।

डॉक्टर लगातार आगे बढ़ने की कोशिश करते रहे, जबकि पुलिस उन्हें रोकती रही। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच बहस और धक्का-मुक्की की स्थिति बनी।

प्रदर्शन के चलते सड़क पर यातायात भी रोकना पड़ा। सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। प्रदर्शन के कारण आम लोगों और राहगीरों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।

रास्ते में लगा लंबा जाम

इंटर्न डॉक्टरों के प्रदर्शन और पुलिस की बैरिकेडिंग के कारण राजधानी के इस प्रमुख इलाके में यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई। सड़क पर वाहनों की आवाजाही रोकने के कारण दोनों तरफ वाहनों की कतारें दिखाई दीं।

कई लोग काफी देर तक जाम में फंसे रहे। प्रदर्शन स्थल के आसपास पुलिसकर्मियों की तैनाती बढ़ाई गई। पुलिस की ओर से लगातार स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया गया।

प्रदर्शनकारी डॉक्टरों का कहना है कि जब तक उनकी मांग पर सरकार की ओर से स्पष्ट फैसला नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रह सकता है।

डॉक्टरों का सवाल- आश्वासन के बाद भी फैसला क्यों नहीं?

इंटर्न डॉक्टरों का कहना है कि सरकार की ओर से स्टाइपेंड बढ़ाने को लेकर पहले आश्वासन दिया गया था। डॉक्टरों का दावा है कि उन्हें उम्मीद थी कि जल्द ही स्टाइपेंड बढ़ाने का निर्णय लागू होगा, लेकिन समय बीतने के बाद भी कोई ठोस आदेश सामने नहीं आया।

प्रदर्शनकारी डॉक्टरों का कहना है कि वे मेडिकल कॉलेज और अस्पतालों में इंटर्नशिप के दौरान मरीजों की सेवा और अस्पताल की व्यवस्थाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनका तर्क है कि काम के घंटों और जिम्मेदारियों को देखते हुए मौजूदा स्टाइपेंड पर्याप्त नहीं है।

डॉक्टरों ने सरकार से मांग की है कि उनकी समस्या को गंभीरता से लिया जाए और स्टाइपेंड बढ़ाने का फैसला जल्द किया जाए।

मुख्यमंत्री तक मांग पहुंचाने की कोशिश

इंटर्न डॉक्टरों का मुख्यमंत्री निवास की ओर मार्च करने का मुख्य उद्देश्य अपनी मांग सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंचाना था। प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि सरकार उनके स्टाइपेंड को बढ़ाकर ₹30 हजार प्रतिमाह करे।

डॉक्टरों का कहना है कि वे लंबे समय से इस मांग को उठा रहे हैं। अलग-अलग स्तर पर अपनी बात रखने के बावजूद जब अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई तो उन्होंने मुख्यमंत्री निवास का घेराव करने का निर्णय लिया।

हालांकि, पुलिस ने उन्हें मुख्यमंत्री निवास से करीब 200 मीटर पहले ही रोक दिया। इसके बाद मौके पर तनाव की स्थिति बन गई और पुलिस को वाटर कैनन का इस्तेमाल करना पड़ा।

आगे बढ़ सकता है आंदोलन

प्रदर्शन के दौरान पुलिस और इंटर्न डॉक्टरों के बीच हुई झड़प के बाद मामला और गरमा गया है। डॉक्टरों द्वारा पुलिस पर लाठीचार्ज और मारपीट के आरोप लगाए गए हैं। दूसरी ओर, प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेडिंग और वाटर कैनन का सहारा लिया।

फिलहाल इंटर्न डॉक्टर अपनी मांग पर कायम हैं। उनका कहना है कि ₹14,337 से बढ़ाकर ₹30 हजार प्रतिमाह स्टाइपेंड किए जाने तक वे सरकार पर दबाव बनाए रखेंगे।

इस पूरे घटनाक्रम में अब सभी की नजर सरकार के अगले कदम पर है। यदि सरकार जल्द कोई निर्णय नहीं लेती है तो इंटर्न डॉक्टरों का आंदोलन आगे और व्यापक होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।