दलालों पर शिकंजा कसने उरई एआरटीओ कार्यालय में आरटीओ कानपुर का औचक निरीक्षण, 5 नए CCTV कैमरे लगाने के निर्देश

15 दिन की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने को कहा, आवेदकों से सीधे की बातचीत; जांच में नहीं मिला कोई अनधिकृत व्यक्ति

दलालों पर शिकंजा कसने उरई एआरटीओ कार्यालय में आरटीओ कानपुर का औचक निरीक्षण, 5 नए CCTV कैमरे लगाने के निर्देश

दलालों के खिलाफ अभियान के तहत एआरटीओ कार्यालय में आरटीओ कानपुर का औचक निरीक्षण

सीसीटीवी कैमरों की जांच, पांच नए कैमरे लगाने के निर्देश; आवेदकों से सीधे की बातचीत

उरई। परिवहन विभाग के कार्यालयों को दलालों से मुक्त रखने और सरकारी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सोमवार, 7 सितंबर 2026 को उरई स्थित उप संभागीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ) कार्यालय का औचक निरीक्षण किया गया। परिवहन आयुक्त, उत्तर प्रदेश के निर्देशों के अनुपालन में कानपुर के संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन) राकेन्द्र सिंह ने कार्यालय पहुंचकर विभिन्न पटलों, सीसीटीवी व्यवस्था, कर्मचारियों की पहचान और आवेदकों की स्थिति का जायजा लिया।

यह निरीक्षण मुख्यालय द्वारा जारी क्रॉस-इंस्पेक्शन रोस्टर के तहत किया गया। विभाग की ओर से ऐसे निरीक्षणों का उद्देश्य कार्यालयों में विभागीय कार्यों की निष्पक्षता, शुचिता और पारदर्शिता को बनाए रखना तथा आम लोगों को अपने काम के लिए किसी बिचौलिए या दलाल पर निर्भर न होना पड़े, ऐसी व्यवस्था को बढ़ावा देना है।

अचानक कार्यालय पहुंचे आरटीओ कानपुर

सोमवार को संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन) कानपुर राकेन्द्र सिंह बिना पूर्व सूचना के उरई स्थित एआरटीओ कार्यालय पहुंचे। उनके औचक निरीक्षण से कार्यालय में मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों में सक्रियता दिखाई दी। निरीक्षण के दौरान सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन) सौम्या पाण्डेय, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) राजेश कुमार, यात्रीकर/मालकर अधिकारी आनन्द राय कुरील सहित कार्यालय का समस्त स्टाफ मौजूद रहा।

निरीक्षण अधिकारी ने कार्यालय में संचालित विभिन्न कार्यों और आवेदकों से जुड़ी व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने यह भी देखा कि आम वाहन स्वामी और आवेदक अपने काम के लिए स्वयं कार्यालय पहुंच रहे हैं अथवा उनके स्थान पर कोई अन्य व्यक्ति अनधिकृत रूप से कार्य कराने के लिए मौजूद है।

आवेदकों से सीधे की बातचीत

निरीक्षण के दौरान कार्यालय में अपने विभिन्न कार्यों के लिए आए वाहन स्वामियों और आवेदकों से राकेन्द्र सिंह ने सीधे बातचीत की। उन्होंने उनसे उनके आवेदन और कार्यालय आने के उद्देश्य के संबंध में जानकारी ली। साथ ही कुछ आवेदनों का निरीक्षण भी किया गया।

विभागीय अधिकारियों के अनुसार जांच के दौरान प्रथम दृष्टया ऐसा कोई व्यक्ति नहीं पाया गया जो किसी दूसरे व्यक्ति का काम कराने के लिए अनधिकृत रूप से कार्यालय में मौजूद हो। इससे निरीक्षण के दौरान कार्यालय परिसर में दलालों की सक्रियता के संबंध में तत्काल कोई आपत्तिजनक स्थिति सामने नहीं आई।

अधिकारियों ने बताया कि विभाग का उद्देश्य यही है कि वाहन स्वामियों और आम नागरिकों को अपने वैध कार्यों के लिए अनावश्यक रूप से किसी बिचौलिए का सहारा न लेना पड़े और विभागीय सेवाओं का लाभ निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सीधे प्राप्त हो।

सीसीटीवी व्यवस्था की भी हुई जांच

औचक निरीक्षण के दौरान कार्यालय की निगरानी व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया गया। संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन) राकेन्द्र सिंह ने कार्यालय परिसर में लगाए गए सीसीटीवी कैमरों की क्रियाशीलता की जांच की। उन्होंने यह देखा कि कार्यालय के महत्वपूर्ण स्थान कैमरों की निगरानी में हैं या नहीं और कैमरे सही तरीके से काम कर रहे हैं या नहीं।

निरीक्षण के बाद कार्यालय में पांच और सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही मौजूदा और नए कैमरों की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने के लिए स्टोरेज क्षमता को भी पर्याप्त रखने को कहा गया।

उन्होंने निर्देश दिया कि सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग की संग्रह क्षमता कम से कम 15 दिन की होनी चाहिए, ताकि आवश्यकता पड़ने पर कार्यालय में हुई गतिविधियों की रिकॉर्डिंग को देखा और जांचा जा सके। विभागीय पारदर्शिता और निगरानी के लिहाज से इस व्यवस्था को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सभी पटलों का किया निरीक्षण

सीसीटीवी व्यवस्था की जांच के बाद आरटीओ कानपुर ने कार्यालय के विभिन्न पटलों का निरीक्षण किया। उन्होंने संबंधित कर्मचारियों से उनके कार्यों और लंबित प्रकरणों के संबंध में जानकारी ली तथा जहां आवश्यकता महसूस हुई, वहां आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

निरीक्षण के दौरान यह भी देखा गया कि सरकारी कार्यों के निस्तारण में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जा रहा है या नहीं। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि आवेदकों के कार्यों को नियमानुसार और पारदर्शी तरीके से पूरा किया जाए तथा अनावश्यक रूप से किसी भी व्यक्ति को परेशान न किया जाए।

कर्मचारियों के पहचान-पत्र की भी हुई जांच

औचक निरीक्षण के दौरान कार्यालय में कार्यरत सरकारी कर्मचारियों के साथ-साथ आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की पहचान की भी जांच की गई। निरीक्षण में पाया गया कि कार्यरत सरकारी एवं आउटसोर्सिंग कर्मचारी विभाग अथवा संबंधित सेवा प्रदाता संस्था द्वारा जारी वैध पहचान-पत्र धारण किए हुए थे।

राकेन्द्र सिंह ने निर्देश दिया कि भविष्य में भी कार्यालय में कार्यरत सभी पटल सहायक और आउटसोर्स कर्मचारी वैध पहचान-पत्र पहनकर ही अपने पटल पर उपस्थित हों। इससे आम लोगों को कार्यालय में मौजूद अधिकृत कर्मचारियों की पहचान करने में आसानी होगी और अनधिकृत व्यक्तियों की गतिविधियों पर भी प्रभावी नियंत्रण रखा जा सकेगा।

दलालों पर शिकंजा कसने की कोशिश

परिवहन विभाग के कार्यालयों में दलालों की सक्रियता को लेकर समय-समय पर शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में मुख्यालय स्तर से क्रॉस-इंस्पेक्शन और औचक निरीक्षण की व्यवस्था को विभागीय कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

उरई कार्यालय में हुए निरीक्षण के दौरान प्रथम दृष्टया कोई अनधिकृत व्यक्ति दूसरे के काम के लिए मौजूद नहीं मिला, लेकिन विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि कार्यालय में दलालों या अनधिकृत बिचौलियों की मौजूदगी को किसी भी स्थिति में बढ़ावा नहीं दिया जाएगा।

औचक निरीक्षण के जरिए विभाग यह संदेश देने का प्रयास कर रहा है कि वाहन संबंधी सेवाओं और अन्य परिवहन विभागीय कार्यों के लिए आम नागरिक निर्धारित प्रक्रिया का पालन करें और सीधे विभागीय कार्यालय अथवा अधिकृत माध्यमों से अपना कार्य कराएं।

आगे भी जारी रहेंगे निरीक्षण

निरीक्षण के दौरान दिए गए निर्देशों से स्पष्ट है कि विभाग कार्यालयों की निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने की तैयारी में है। अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे लगाने, कम से कम 15 दिनों की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने और सभी कर्मचारियों के पहचान-पत्र अनिवार्य करने जैसे निर्देश इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं।

अधिकारियों का कहना है कि कार्यालय में आने वाले प्रत्येक आवेदक को सुविधाजनक और पारदर्शी तरीके से सेवाएं उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिकता है। क्रॉस-इंस्पेक्शन रोस्टर के तहत इस तरह के निरीक्षण आगे भी किए जा सकते हैं, ताकि सरकारी कार्यालयों में दलाल रहित और पारदर्शी कार्यप्रणाली को प्रभावी रूप से लागू किया जा सके।