बरसात में सड़क पर नहीं दिखना चाहिए एक भी निराश्रित गोवंश, गौ संरक्षण में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी: डीएम राजेश कुमार पाण्डेय
उरई में जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने गौ संरक्षण की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि बरसात के दौरान जनपद की किसी भी सड़क पर एक भी निराश्रित गोवंश दिखाई नहीं देना चाहिए। उन्होंने गौशालाओं में साफ-सफाई, स्वच्छ पेयजल, हरे चारे और पशु आहार की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
गौ संरक्षण को लेकर डीएम राजेश कुमार पाण्डेय ने अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश
गौशालाओं में चारा, पानी और साफ-सफाई की व्यवस्था हर हाल में सुनिश्चित करने के आदेश
मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के तहत अधिक से अधिक किसानों को गोवंश सौंपने पर जोर
अब तक सुपुर्द किए गए सभी गोवंशों का 100% सत्यापन कराने के निर्देश
उरई। जनपद जालौन में निराश्रित गोवंशों के संरक्षण और गौशालाओं की व्यवस्थाओं को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार से वर्चुअल समीक्षा बैठक कर अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि गौ संरक्षण जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और इस कार्य में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। बरसात के मौसम को देखते हुए उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि जनपद की किसी भी सड़क पर एक भी निराश्रित गोवंश दिखाई नहीं देना चाहिए। यदि कहीं भी गोवंश सड़क पर घूमता हुआ मिला तो संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी तय करते हुए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में जिलाधिकारी ने मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी, जिला पंचायत राज अधिकारी, समस्त उप जिलाधिकारी, खण्ड विकास अधिकारियों तथा नोडल अधिकारी (जिला विकास अधिकारी) को निर्देशित करते हुए कहा कि बरसात के दौरान सड़क पर घूम रहे निराश्रित गोवंश न केवल दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं, बल्कि स्वयं भी दुर्घटनाओं और बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं। ऐसे में सभी अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाकर निराश्रित गोवंशों को सुरक्षित गौशालाओं तक पहुंचाना सुनिश्चित करें।
उन्होंने कहा कि जिन गौशालाओं का विलय (मर्जर) किया गया है, वहां सभी गोवंशों की समुचित देखभाल की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी गोवंश गौशाला से बाहर न निकल सके। यदि किसी गौशाला की व्यवस्थाओं में कमी पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध जवाबदेही तय की जाएगी।
जिलाधिकारी ने गौशालाओं में साफ-सफाई और पशुओं के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक गौशाला में नियमित रूप से स्वच्छता अभियान चलाया जाए, ताकि बरसात के मौसम में जलभराव, गंदगी और संक्रमण जैसी समस्याएं उत्पन्न न हों। इसके साथ ही सभी गौशालाओं में स्वच्छ पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था हर समय उपलब्ध रहे।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि गोवंशों के लिए हरा चारा, भूसा, चना, चोकर तथा अन्य आवश्यक पशु आहार पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराया जाए। किसी भी स्थिति में पशुओं के भोजन या पानी की कमी नहीं होनी चाहिए। यदि किसी गौशाला में चारे या अन्य संसाधनों की कमी की शिकायत मिलती है तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने मुख्यमंत्री सहभागिता योजना की भी समीक्षा की। उन्होंने बताया कि 20 जुलाई से 3 अगस्त तक संचालित इस विशेष अभियान के अंतर्गत अधिक से अधिक पात्र कृषकों को गोवंश सुपुर्द किए जाएं। इससे एक ओर निराश्रित गोवंशों को सुरक्षित आश्रय मिलेगा, वहीं दूसरी ओर किसानों को पशुपालन के माध्यम से आर्थिक लाभ प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय बनाकर योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार करें ताकि अधिकाधिक किसान इसका लाभ उठा सकें।
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी को निर्देश देते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के अंतर्गत अब तक जिन किसानों को गोवंश सुपुर्द किए जा चुके हैं, उनका शत-प्रतिशत सत्यापन कराया जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि सुपुर्द किए गए सभी गोवंश सुरक्षित हैं और उनकी समुचित देखभाल की जा रही है। सत्यापन कार्य में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने सभी उप जिलाधिकारियों और खण्ड विकास अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे नियमित रूप से गौशालाओं का निरीक्षण करें और व्यवस्थाओं की समीक्षा करें। निरीक्षण के दौरान यदि किसी प्रकार की कमी या अनियमितता सामने आती है तो उसे तत्काल दूर कराया जाए। उन्होंने कहा कि अधिकारी केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रहें, बल्कि स्वयं मौके पर जाकर व्यवस्थाओं का निरीक्षण करें।
जिलाधिकारी ने कहा कि गौ संरक्षण केवल प्रशासनिक दायित्व नहीं बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है। इसमें जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संगठनों और आम नागरिकों का भी सहयोग आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि स्थानीय स्तर पर जनजागरूकता अभियान चलाकर लोगों को निराश्रित गोवंशों के संरक्षण के लिए प्रेरित किया जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि बरसात के दौरान पशुओं में विभिन्न प्रकार की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में पशु चिकित्सा विभाग समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण, टीकाकरण तथा आवश्यक उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करे, ताकि किसी भी प्रकार की बीमारी फैलने की आशंका न रहे।
बैठक में यह भी निर्देश दिए गए कि गौशालाओं में रहने वाले गोवंशों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण किया जाए तथा आवश्यकतानुसार दवाइयों और चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। साथ ही पशुओं की संख्या, भोजन, पानी और अन्य व्यवस्थाओं का नियमित रिकॉर्ड भी संधारित किया जाए।
जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने अंत में सभी अधिकारियों को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि गौ संरक्षण के कार्य में किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रत्येक अधिकारी अपने क्षेत्र में व्यक्तिगत रुचि लेकर कार्य करें और यह सुनिश्चित करें कि जनपद की कोई भी सड़क निराश्रित गोवंशों से मुक्त रहे तथा सभी गौशालाओं में पशुओं को सुरक्षित और बेहतर वातावरण उपलब्ध कराया जाए।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी के.के. सिंह, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी मनोज अवस्थी, समस्त उप जिलाधिकारी, खण्ड विकास अधिकारी, जिला पंचायत राज अधिकारी सहित संबंधित विभागों के अधिकारी वर्चुअल एवं प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित रहे।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस