घर में जबरन घुसी पुलिस, तोड़फोड़ कर दबाव में कराया समझौता! पीड़ित ने डीजीपी, डीएम और एसपी से लगाई निष्पक्ष जांच की गुहार
जालौन के जगम्मनपुर में संपत्ति विवाद को लेकर दो ग्रामीणों ने पुलिस पर घर में जबरन घुसने, तोड़फोड़ करने और थाने ले जाकर दबाव में समझौता कराने के गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ितों ने डीजीपी, आईजी, डीएम और एसपी को शिकायत भेजकर निष्पक्ष जांच, सीसीटीवी व अन्य रिकॉर्ड सुरक्षित रखने तथा दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की है। पुलिस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
संपत्ति विवाद में पुलिस पर गंभीर आरोप
'घर में घुसकर की तोड़फोड़', पीड़ित का दावा
'दबाव में कराया गया समझौता', शिकायत में आरोप
डीजीपी, आईजी, डीएम और एसपी को भेजा शिकायती पत्र
उरई। जालौन जिले के रामपुरा थाना क्षेत्र के ग्राम जगम्मनपुर में संपत्ति विवाद को लेकर पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। गांव निवासी राजकुमार पुत्र स्वर्गीय बैजनाथ और शिवशंकर पुत्र स्वर्गीय बैजनाथ ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी), आईजी, पुलिस अधीक्षक (एसपी), जिलाधिकारी (डीएम) जालौन सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को पांच पृष्ठों का शिकायती पत्र भेजकर आरोप लगाया है कि स्थानीय पुलिस ने न्यायालय में विचाराधीन संपत्ति विवाद में हस्तक्षेप करते हुए उनके घर में जबरन प्रवेश किया, तोड़फोड़ की और परिवार पर दबाव बनाकर कथित समझौता कराया। पीड़ितों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा सभी इलेक्ट्रॉनिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की मांग की है।
शिकायत के अनुसार, संबंधित संपत्ति का विवाद पहले से ही माधौगढ़ न्यायालय में विचाराधीन है। पीड़ितों का कहना है कि इस मामले में वाद संख्या 23/2025 लंबित है, इसलिए किसी भी प्रकार की कार्रवाई न्यायालय के निर्णय के अधीन होनी चाहिए थी। इसके बावजूद पुलिस ने कथित रूप से एक पक्ष को लाभ पहुंचाने की मंशा से हस्तक्षेप किया और विवादित संपत्ति पर कब्जा दिलाने की कोशिश की।
पीड़ितों का आरोप है कि 6 जून 2026 को विवादित संपत्ति का कथित रूप से विक्रय किया गया। इसके बाद दूसरे पक्ष ने कब्जा लेने का प्रयास शुरू कर दिया। इस संबंध में उन्होंने पहले ही पुलिस और प्रशासन को लिखित शिकायत देकर अवगत करा दिया था कि मामला न्यायालय में लंबित है, इसलिए किसी भी प्रकार का पुलिस हस्तक्षेप कानून व्यवस्था और न्यायिक प्रक्रिया के विपरीत होगा।
शिकायती पत्र में कहा गया है कि 11 जुलाई 2026 को उन्होंने उच्च अधिकारियों को ऑनलाइन शिकायत भेजकर आशंका व्यक्त की थी कि स्थानीय पुलिस की सहायता से जबरन कब्जा कराया जा सकता है। आरोप है कि उसी दिन शाम को जगम्मनपुर पुलिस चौकी के प्रभारी और अन्य पुलिसकर्मी उनके घर पहुंचे और बिना अनुमति जबरन घर में प्रवेश कर गए। इस दौरान घर में तोड़फोड़ की गई और परिवार के सदस्यों के साथ अभद्र व्यवहार किया गया।
पीड़ितों का आरोप है कि इसके बाद उन्हें रामपुरा थाने ले जाया गया, जहां पहले से मौजूद सूर्यकांत मिश्रा की मौजूदगी में एक हस्तलिखित समझौता पत्र तैयार कराया गया। उनका कहना है कि पुलिस ने उन पर उस समझौते पर हस्ताक्षर करने का दबाव बनाया। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि यह समझौता उनकी स्वतंत्र इच्छा से नहीं, बल्कि पुलिस के कथित दबाव और भय के कारण कराया गया।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि पूरे घटनाक्रम का वीडियो उनके पास मौजूद है, जिसमें उन्होंने कैमरे के सामने अपनी पूरी आपबीती दर्ज कराई है। उनके अनुसार, वीडियो में पुलिस की कार्रवाई और कथित दबाव संबंधी बातें भी दर्ज हैं। हालांकि, इस वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
पीड़ितों ने वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि 11 जुलाई 2026 की पुलिस चौकी और थाने की सीसीटीवी फुटेज, जनरल डायरी (GD), आगमन-रवानगी रजिस्टर, ड्यूटी रजिस्टर, पुलिस वाहन की लॉगबुक, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड तत्काल सुरक्षित कराए जाएं, ताकि जांच के दौरान किसी भी प्रकार के साक्ष्य नष्ट न हो सकें।
उन्होंने यह भी मांग की है कि जांच पूरी होने तक संबंधित चौकी प्रभारी और मामले से जुड़े अन्य पुलिसकर्मियों को इस प्रकरण से अलग रखा जाए, जिससे जांच निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से हो सके। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई भी की जाए।
पीड़ितों का कहना है कि उन्हें न्यायिक प्रक्रिया पर पूरा भरोसा है और वे चाहते हैं कि संपत्ति विवाद का समाधान अदालत के माध्यम से ही हो। उनका आरोप है कि पुलिस की कथित कार्रवाई से न केवल न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हुई, बल्कि उनके संवैधानिक और कानूनी अधिकारों का भी हनन हुआ।
फिलहाल इस मामले में संबंधित पुलिस अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, प्रशासन की ओर से भी शिकायत की जांच शुरू होने या किसी कार्रवाई की पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे में अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि वरिष्ठ अधिकारी शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच किस प्रकार कराते हैं और मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस