कुलगाम में फिर आतंक का वार: ईंट भट्टे पर काम कर रहे मजदूरों के नाम पूछे, दो हिंदुओं को अलग कर मारी गोली; एक की मौत, दूसरा गंभीर

जम्मू-कश्मीर से बड़ी खबर सामने आ रही है। आतंकवादियों ने शुक्रवार देर शाम को दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले में हमला किया है। आतंकियों ने दो गैर स्थानीय मजदूरों को निशाना बनाकर हमला किया। इसमें एक शख्स की मौत हो गई जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल हो गया।

कुलगाम में फिर आतंक का वार: ईंट भट्टे पर काम कर रहे मजदूरों के नाम पूछे, दो हिंदुओं को अलग कर मारी गोली; एक की मौत, दूसरा गंभीर

ईंट भट्टे पर काम कर रहे मजदूरों को बनाया निशाना

पहचान पूछने के बाद दो मजदूरों को किया अलग

दीपक रात्रे की मौत, भोपिंदर गंभीर घायल

TRF ने ली हमले की जिम्मेदारी

सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर चलाया सर्च ऑपरेशन

श्रीनगर/कुलगाम। जम्मू-कश्मीर के दक्षिण कश्मीर स्थित कुलगाम जिले में एक बार फिर आतंकियों ने गैर-स्थानीय मजदूरों को निशाना बनाकर दहशत फैलाने की कोशिश की। केल्लाम इलाके में ईंट भट्टे पर काम कर रहे मजदूरों से आतंकियों ने पहले उनका नाम और पहचान पूछी, फिर दो हिंदू मजदूरों को अलग कर उन पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं। इस हमले में छत्तीसगढ़ निवासी 24 वर्षीय दीपक रात्रे की मौत हो गई, जबकि भोपिंदर गंभीर रूप से घायल हैं। घटना के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा बलों ने घेराबंदी कर बड़े स्तर पर सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है।

यह हमला शुक्रवार (31 जुलाई) की शाम करीब 8:30 बजे हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटनास्थल पर 3 से 4 राउंड गोलियों की आवाज सुनाई दी, जिसके बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों और सुरक्षा बलों की मदद से दोनों घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने दीपक रात्रे को मृत घोषित कर दिया। घायल भोपिंदर की हालत गंभीर होने पर उन्हें बेहतर उपचार के लिए गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज (GMC) अनंतनाग रेफर किया गया।

आतंकियों ने पहचान पूछकर बनाया निशाना

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आतंकी सीधे ईंट भट्टे पर पहुंचे और वहां काम कर रहे मजदूरों से उनका नाम और मूल निवास पूछा। इसके बाद उन्होंने दो हिंदू मजदूरों को अलग किया और उन पर करीब से गोलियां चला दीं। हमले के बाद आतंकी मौके से फरार हो गए।

इस तरह पहचान के आधार पर हमला किए जाने से सुरक्षा एजेंसियां इसे सुनियोजित आतंकी साजिश मान रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि आतंकियों का उद्देश्य गैर-स्थानीय मजदूरों में भय का माहौल पैदा करना और घाटी में अस्थिरता फैलाना है।

दोनों मजदूर छत्तीसगढ़ के निवासी

हमले में जान गंवाने वाले दीपक रात्रे (24 वर्ष), पिता उमाशंकर रात्रे, छत्तीसगढ़ के निवासी थे और रोजगार की तलाश में कुलगाम स्थित ईंट भट्टे पर काम कर रहे थे।

वहीं घायल भोपिंदर (28 वर्ष), पिता दशरथ, भी छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं। डॉक्टरों के अनुसार उनकी हालत गंभीर बनी हुई है और उनका इलाज अनंतनाग में जारी है।

TRF ने ली हमले की जिम्मेदारी

इस आतंकी हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के सहयोगी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने ली है। सुरक्षा एजेंसियां इस दावे की जांच कर रही हैं और हमले में शामिल आतंकियों की पहचान के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि TRF पिछले कुछ वर्षों से घाटी में गैर-स्थानीय नागरिकों, मजदूरों और सुरक्षा बलों को निशाना बनाकर भय का माहौल बनाने की कोशिश करता रहा है।

सुरक्षा बलों का बड़ा सर्च ऑपरेशन

हमले की सूचना मिलते ही जम्मू-कश्मीर पुलिस, सेना और केंद्रीय सुरक्षा बलों की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची। पूरे केल्लाम इलाके की घेराबंदी कर दी गई और जंगलों तथा आसपास के क्षेत्रों में व्यापक तलाशी अभियान शुरू किया गया।

सुरक्षा एजेंसियां ड्रोन, आधुनिक निगरानी उपकरण और खुफिया नेटवर्क की मदद से आतंकियों की तलाश कर रही हैं। अधिकारियों ने कहा कि हमलावरों को जल्द पकड़ने या मार गिराने के लिए अभियान लगातार जारी रहेगा।

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने की कड़ी निंदा

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने इस आतंकी हमले की कड़ी निंदा की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए बताया कि घटना के तुरंत बाद उन्होंने डीजीपी नलिन प्रभात और अन्य वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों से बातचीत की।

उन्होंने सुरक्षा बलों को आतंकियों के खिलाफ अभियान और तेज करने तथा दोषियों को जल्द से जल्द ढेर करने के निर्देश दिए। उपराज्यपाल ने कहा कि निर्दोष नागरिकों पर हमला करने वाले आतंकियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना

मनोज सिन्हा ने मृतक दीपक रात्रे के परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि पूरा जम्मू-कश्मीर प्रशासन और देश उनके साथ खड़ा है। उन्होंने घायल भोपिंदर के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना भी की।

प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि पीड़ित परिवारों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

हाल के दिनों में बढ़ी आतंकी गतिविधियां

यह हमला ऐसे समय हुआ है जब कुछ ही दिन पहले अनंतनाग में आतंकियों ने एक पुलिस अधिकारी की गोली मारकर हत्या कर दी थी। सुरक्षा एजेंसियां लगातार आतंकियों के खिलाफ अभियान चला रही हैं, लेकिन बीच-बीच में इस तरह की घटनाएं चुनौती बनी हुई हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि आतंकी संगठन घाटी में शांति और सामान्य स्थिति को प्रभावित करने के लिए गैर-स्थानीय मजदूरों और आम नागरिकों को आसान निशाना बना रहे हैं।

पहले भी गैर-स्थानीय मजदूरों पर हुए हैं हमले

गैर-स्थानीय मजदूरों पर हमला कोई नई घटना नहीं है। वर्ष 2024 में श्रीनगर के शहीद गंज इलाके में आतंकियों ने पंजाब के दो मजदूरों अमृतपाल सिंह और रोहित मसीह की गोली मारकर हत्या कर दी थी।

इसके अलावा पिछले कुछ वर्षों में कश्मीर के विभिन्न इलाकों में बिहार, उत्तर प्रदेश, पंजाब, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के मजदूरों पर कई हमले हो चुके हैं। इन घटनाओं का उद्देश्य घाटी में काम करने आने वाले बाहरी लोगों के बीच डर का माहौल पैदा करना माना जाता है।

सुरक्षा व्यवस्था पर फिर उठे सवाल

कुलगाम की इस घटना ने एक बार फिर घाटी में गैर-स्थानीय मजदूरों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। बड़ी संख्या में विभिन्न राज्यों के मजदूर कश्मीर में निर्माण कार्य, ईंट भट्टों, बागवानी और अन्य क्षेत्रों में काम करते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत किए जाने की जरूरत है ताकि निर्दोष नागरिकों को आतंकियों का निशाना बनने से बचाया जा सके।

आतंक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग

घटना के बाद देशभर में आतंकियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने भरोसा दिलाया है कि हमले में शामिल आतंकियों को जल्द पकड़कर कानून के मुताबिक सख्त कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल पूरे इलाके में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है और सुरक्षा बल लगातार तलाशी अभियान चला रहे हैं। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को देने की अपील की है।